दोस्तो, मेरी कहानी के चौदहवें भाग में आप पढ़ चुके हैं कि
मुझे भी बड़ी जोर से सुसु आया था, मैंने सिर्फ अपनी चड्डी पहनी और दरवाजा खोल कर बाहर बने कॉमन बाथरूम में चला गया। मैंने अपना लंड निकाला और मूत की धार मारनी शुरू कर दी।
मैंने मूतना बंद ही किया था कि बाथरूम का दरवाजा खुला और किरण चाची नंगी अन्दर आई और जल्दी से दरवाजा बंद कर प्रिया, पर जैसे ही मुझे देखा तो वहीं दरवाजे पर ठिठक कर खड़ी हो गयी। मेरे हाथ में मेरा मोटा लंड था।
किरण चाची ने कहा- ओह्ह्ह… सॉरी…मैंने वहीं खड़े हुए कहा- क्या आपको दरवाजा खड़काना नहीं आता?मेरा लंड अभी भी मेरे हाथ में था।
किरण चाची ने शर्माते हुए कहा- सॉरी… मुझे माफ़ कर दो रोहण… अन्दर अँधेरा था तो मैंने सोचा अन्दर कोई नहीं है… और वैसे भी तुम लोग तो बाहर प्रोग्राम देख रहे थे न?वो अपने नंगे जिस्म को छुपाने की कोशिश कर रही थी।
मैंने उनकी आँखों में देखकर कहा- मेरा वहां मन नहीं लगा इसलिए वापिस आ गया… और…किरण चाची ने सकुचाते हुए और मेरी बात काटते हुए कहा- और ये कि… मुझे शू शू आया है।मैं- हाँ तो कर लो न…
चाची का चेहरा शर्म से लाल हो रहा था- तुम बाहर जाओगे तभी करुँगी न!मैं- तुमने मुझे देखा है सू सू करते हुए… तो मेरा भी हक बनता है तुम्हें सू सू करते हुए देखने का…और मैं दीवार के सहारे खड़ा हो गया और अपना लम्बा लंड उनके सामने मसलने लगा।
चाची ने ज्यादा बहस करना उचित नहीं समझा और जल्दी से सीट पर आकर बैठ गयी। पेशाब की धार अन्दर छुटी और मैंने देखा कि उनके निप्पल कठोर होते चले जा रहे हैं।सू सू करने के बाद उन्होंने पेपर से अपनी चूत साफ़ करी और खड़ी हो गयी।किरण ने कहा- ठीक है… अब खुश हो?मैंने मुस्कुराते हुए कहा- हाँ… पर मैं तुम्हें कुछ दिखाना भी चाहता हूँ…मैंने अपनी योजना के आधार पर उन्हें कहा।“अभी…? तुम्हें नहीं लगता कि मुझे कुछ कपड़े पहन लेने चाहियें… और तुम्हें भी!” चाची ने अपनी नशीली आँखें मेरी आँखों में डाल कर कहा।मैंने कहा- इसमें सिर्फ दो मिनट लगेंगे… आपको हमारे रूम में चलना होगा।“चलो फिर जल्दी करो… देखूँ तो सही तुम मुझे क्या दिखाना चाहते हो?” चाची ने कहा और दरवाजा खोलकर मेरे साथ चल दी… नंगी।
मैंने अपने रूम का दरवाजा खोला और अन्दर आ गया। ऋतु का चेहरा देखते ही बनता था… जब उसने चाची को मेरे पीछे अपने रूम में घुसते हुए देखा… वो भी बिल्कुल नंगी।ऋतु उस समय बेड पर लेटी अपनी चूत में उंगलियाँ डाल कर मुठ मार रही थी।
मैंने ऋतु से कहा- चाची मुझे बाथरूम में मिली थी, मैं इन्हें कुछ दिखने के लिए लाया हूँ।चाची भी ऋतु को नंगी बिस्तर पर लेटी देखकर हैरान रह गयी। मैं जल्दी से शीशे वाली जगह पर गया और बोला- आप इधर आओ चाची… ये देखो।चाची झिझकते हुए आगे आई। वो समझ तो गयी थी कि मैं उन्हें क्या दिखाने वाला हूँ। जब उन्होंने अन्दर देखा तो पाया कि मम्मी ने चाचू का लंड मुंह में ले रखा है और चूस रही है और पीछे से पापा उनकी चूत मार रहे हैं।
चाची ने थोड़ा कठोर होते हुए कहा- तो तुम लोग हमारी जासूसी कर रहे थे, हमें ये सब करते हुए देख रहे थे। इसका क्या मतलब है, ऐसा क्यों कर रहे थे तुम?मैंने कहा- मुझे लगा आपको अच्छा लगेगा कि आपकी कोई औडिएंस है और इस से एक्साइटमेंट भी आएगी।उन्होंने कहा- अब से हम तुम्हारे परेंट्स का रूम यूज़ करेंगे.
मैंने उन्हें डराते हुए कहा- फिर तो मैं उन्हें बता दूंगा कि आप बाथरूम में आई और मुझे शीशे वाली जगह दिखाई और हमें अन्दर देखने के लिए भी कहा।चाची का मुंह तो खुला का खुला रह गया मेरी इस धमकी से… उन्होंने हैरानी से ऋतु की तरफ देखा जो अब उठ कर बैठ गयी थी, पर वो भी उतनी ही हैरान थी जितनी की चाची।“तुम क्या चाहते हो रोहण…?” चाची ने थोड़ा नर्म होते हुए कहा।
“मैं भी कुछ खेल खेलना चाहता हूँ.” मैंने कहा और आगे बढ़ कर चाची के मोटे चुचे पर हाथ रख प्रिया और उनके निप्पल को दबा प्रिया।चाची ने गंभीरता से कहा- आआउच…वो बिदकी और बोली- तुम्हें ऐसा क्यों लगता है कि इटनी छोटी सी उम्र में तुम ये खेल खेलने के लिए तैयार हो?मैंने अपना अंडरवियर नीचे गिरा प्रिया और अपना पूरा खड़ा हुआ मोटा लंड उनके हाथों में दे प्रिया और कहा- मुझे ये इसकी वजह से लगता है।“तुम्हारी उम्र के हिसाब से तो ये काफी बड़ा है…” चाची ने मेरे लंड से बिना हाथ और नजरें हटाये हुए कहा।वो जैसे मेरे लंड को देखकर सम्मोहित सी हो गयी थी।
मैंने उनसे कहा- चाची, मेरा लंड चूसो…उन्होंने झिझकते हुए कहा- पर ऋतु… वो भी तो है यहाँ…मैंने कुटिल मुस्कान बिखेरते हुए कहा- आप उसकी चिंता न करो, वो ये सब होते हुए देखेगी… और उसके बाद आप उसकी चूत को भी चाट देना… वो शायद आपको भी पसंद आएगी।
मैंने चाची को घुमा कर बेड की तरफ धकेल प्रिया, बेड के पास पहुँच कर मैंने उन्हें धीरे से किनारे पर बिठा प्रिया मेरा खड़ा हुआ लण्ड उनकी आँखों के सामने था। उन्होंने ऋतु की तरफ देखा, वो भी काफी उत्तेजित हो चुकी थी ये सब देख कर और उछल कर वो भी सामने आ कर बैठ गयी।
फिर चाची ने मेरा लंड पकड़ा और धीरे से अपनी जीभ मेरे लंड के सुपारे पर फिराई और फिर पूरे लंड पर अपनी जीभ को फिराते हुए उन्होंने एक एक इंच करके किसी अजगर की तरह मेरा लंड निगल लिया।मैंने मन ही मन सोचा- एक्सपेरिएंस भी कोई चीज होती है…उनका परिपक्व मुंह मेरे लंड को चूस भी रहा था, काट भी रहा था और अन्दर बाहर भी कर रहा था।
मेरे लंड का किसी अनुभवी मुंह में जाने का ये पहला अवसर था, मुझ से ज्यादा बर्दाश्त नहीं हुआ, चाची के गर्म मुंह ने जल्दी ही मुझे झड़ने के कगार पर पहुंचा प्रिया। मेरे लंड से वीर्य की बारिश होने लगी चाची के मुंह के अन्दर… उन्होंने एक भी बूँद जाया नहीं जाने दी और सब पी गयी।चाची ने मेरे लंड को आखिरी बार चूसा और छोड़ प्रिया- तुम यही चाहते थे न?
मैंने उनके कंधे पर दबाव डाला और उन्हें बेड पर लिटा प्रिया- हाँ बिल्कुल यही… तुम बिल्कुल परफेक्ट हो चाची… अब लेट जाओ।पीछे से ऋतु ने उन्हें कंधे से पकड़ा और चाची के मुंह के दोनों तरफ टाँगें करके उनके मुंह के ऊपर बैठ गयी.“आआअह्ह उम्म्ह… अहह… हय… याह… म्मम्म म्मम्म…” और अपनी गीली चूत उनके मुंह से रगड़ने लगी।मैंने चाची की टाँगें पकड़ी और हवा में उठा ली और उनकी जांघो पर हाथ टिका कर अपना मुंह उनकी दहकती हुई चूत में दे मारा। मैंने जैसे ही अपनी जीभ उनकी चूत में डाली, उन्होंने एक झटका मारा…”आआअह्ह…यीईईईईईई…” और मेरी गर्दन के चारों तरफ अपनी टाँगें लपेट ली और अपने चूतड़ उछाल उछाल कर मेरा मुंह चोदने लगी।
चाची की चूत ऋतु और उसकी सहेलियों की चूत से बिल्कुल अलग थी। वो एक पूरी औरत की चूत थी जिसकी एक जवान लड़की भी थी और मजे की बात ये थी कि मैं उनकी लड़की की चूत भी चाट और मार चुका था।ऋतु भी बड़ी तेजी से अपनी बिना बालों वाली चूत को उनके मुंह में घिस रही थी। मैंने चाची की चूत पर काटना और चुसना शुरू कर प्रिया। जल्दी ही उनकी चूत के अन्दर से एक सैलाब सा उमड़ा और मेरे पूरे मुंह को भिगो प्रिया।
उनका रस भी बड़ा मीठा था, मैंने जल्दी से सारा रस पी लिया।उधर ऋतु ने भी अपनी टोंटी चाची के मुंह में खोल दी और अपना अमृत उन्हें पिला प्रिया।
हम सभी धीरे से अलग हुए और थोड़ी देर तक सांस ली। चाची का चेहरा उत्तेजना के मारे तमतमा रहा था, उन्होंने उठने की कोशिश की पर उनके पैर लड़खड़ा रहे थे।चाची बिस्तर से उठते हुए बोली- मुझे अब वापिस जाना चाहिए उस रूम में।“प्लीज चाची दुबारा आना!” मैंने उन्हें कहा।
ऋतु- और विजय अंकल को भी लेकर आना और मॉम डैड को मत बताना।चाची ने हँसते हुए कहा- ठीक है आऊँगी… और तुम्हारे मम्मी पापा को भी नहीं बताऊँगी.और फिर चली गयी।
चाची के जाते ही मैंने शीशा हटा कर देखा। वो अन्दर गयी और चुदाई समारोह में जाकर वापिस शरीक हो गयी। पापा ने अपना रस मम्मी की चूत में निकाल प्रिया था। चाची ने जाते ही अपनी डिश पर हमला बोल प्रिया और माँ की चूत में से सारी मलाई खा गयी।
चाची को झड़े अभी 5 मिनट ही हुए थे पर जैसे ही चाचू ने उनकी चूत में लौड़ा डाला वो फिर से मस्ता गयी और अपनी मोटी गांड हिला हिला कर चुदवाने लगी। जल्दी ही चाचू का लंड… जो मम्मी के चूसने की वजह से झड़ने के करीब था, चाची की गीली चूत में आग उगलने लगा।सभी हाँफते हुए वहीं बेड पर लुढ़क गए।थोड़ी देर में मम्मी और पापा उठे और अपने रूम में चले गए।
मम्मी पापा के जाते ही मैंने ऋतु को अपनी बाँहों में भर लिया और उसके गीले और लरजते हुए होंठों पर अपने होंठ रख दिए। वो भी दोबारा गर्म हो चुकी थी, उसके होंठ चूसते हुए मैंने उसके चुचे दबाने शुरू किये और जल्दी ही उसके निप्प्ल्स को अपने होंठों के बीच रख कर चबाने लगा।
नितिन की टल्ली-2
ऋतु पागल सी हो गयी मेरे इस हमले से… वो चिल्लाई- आआआ आअयीईईई ईईईइ… म्म्म्म म्म्म्मम… चुसो ऊऊऊ… इन्हें… अयीईईईईइ थोड़ा धीरेईईईए… अह्ह्ह्ह ह्ह्ह्हह्ह…वो बुदबुदाती जा रही थी, जल्दी ही मैं उन्हें चूसता हुस नीचे की तरफ चल प्रिया और उसकी रस टपकाती चूत में अपने होंठ रख दिए। ऋतु से भी बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था, उसने पलट कर 69 की अवस्था ली और मेरा फड़कता हुआ लंड अपने मुंह में भर लिया और तेजी से चूसने लगी।
उधर दूसरे रूम में मम्मी पापा के जाते ही… थोड़ी देर लेटने के बाद चाची उठ कर शीशे के पास आई और शीशा हटा कर झाँकने के बाद देखा… तो मुझे और ऋतु को 69 की अवस्था में देख कर मुस्कुरा दी।
उन्होंने इशारे से विजय चाचू को अपने पास बुलाया। वो उठे और नंगे आकर चाची के पीछे खड़े हो गए। अन्दर झांकते ही वो सारा माजरा समझ गए और मुझे और ऋतु को ऐसी अवस्था में देख कर आश्चर्य चकित रह गए। उन्होंने सोचा भी नहीं था कि हम दोनों भाई बहन ऐसा कर सकते हैं पर फिर उन्होंने सोचा की जब वो अपने भाई और भाभी के साथ खुल कर अपनी पत्नी को शामिल कर के मजा ले सकते हैं तो ये भी मुमकिन है।उनकी नजर जब ऋतु की मोटी गांड पर गयी तो उन का मुरझाया हुआ लंड फिर से अंगड़ाई लेने लगा।
चाची ने विजय को सारी बात बता दी कि कैसे हम दोनों उनके रूम में देखते हैं और शायद वो ही देख देख हम दोनों भाई बहन भी एक दूसरे की चुदाई करने लगे हैं।
मेरी एक उंगली ऋतु की गांड के छेद में थी और मेरा मुंह उसकी चूत में। वो अपनी गांड को गोल गोल घुमा रही थी और मुंह से सिसकारियां ले लेकर मेरा लंड चूस रही थी।
चाचू ने जब ऋतु की गोरी, मोटी घूमती गांड देखी तो वो पागल ही हो गए। उन्होंने पहले ऐसा कभी ऋतु के बारे में सोचा नहीं था। चाची ने बताना चालू रखा कि कैसे वो बाथरूम में गयी और नंगी मुझ से मिली और वापिस उनके रूम में जा कर उन्होंने मेरा लंड चूसा और ऋतु की चूत चाटी।
चाचू चकित हो कर सभी बातों को सुन रहे थे, उनकी नजर ऋतु के नंगे बदन से हट ही नहीं रही थी और जब चाची ने ये बताया कि उन्होंने उन दोनों को अपने रूम में बुलाया है और खास कर ऋतु ने बोला है कि ‘चाचू को भी लेकर आना…’ तो विजय समझ गया कि उसकी भतीजी की चूत तो अब चुदी उस के लंड से।
चाचू ने झट से किरण को कहा- तो चलो न, देर किस बात की है, चलते हैं उनके रूम में…चाची- अभी…? अभी चलना है क्या?चाचू- और नहीं तो क्या… देख नहीं रही कैसे दोनों गर्म हुए पड़े हैं।चाची- हाँ…! ठीक है, चलते हैं, मुझे वैसे भी रोहण के लंड का स्वाद पसंद आया, देखती हूँ कि उसे इस्तेमाल करना भी आता है या नहीं।
दोनों धीरे से अपने कमरे से निकले और हमारे रूम में आ गए। हम दोनों एक दूसरे में इतने खो गए थे कि हमें उनके अन्दर आने का पता ही नहीं चला। चाचू बेड के सिरे की तरफ जा कर खड़े हो गए। वहां ऋतु का चेहरा था जो मेरा लंड चूसने में लगा हुआ था।
ऋतु ने जब महसूस किया कि कोई वहां खड़ा है तो उसने अपना सर उठा कर देखा और चाचू को पा कर वो सकपका गयी। नजरें घुमा कर जब चाची को देखा तो उन्होंने मुस्कुराते हुए अपनी आँखों के इशारे से ऋतु को चाचू की तरफ जाने को कहा।वो समझ गयी और अपना हाथ ऊपर करके अपने सगे चाचा का काला लंड अपने हाथों में पकड़ लिया।
चाचू के मोटे लंड पर नन्हे हाथ पड़ते ही वो सिहर उठे…”आआआ आअह्ह्ह…” और उन्होंने अपनी आँखें बंद कर ली।ऋतु थोड़ा उठी और अपने होंठों को चाचू के लंड के चारों तरफ लपेट प्रिया।
मैंने जब महसूस किया कि ऋतु ने मेरा लंड चूसना बंद कर प्रिया है तो मैंने अपना सर उठा कर देखा और अपने सामने चाची को मुस्कुराते हुए पाया। मैं कुछ समझ पाता इससे पहले ही चाची ने अपनी टाँगें घुमाई और मेरे मुंह की सवारी करने लगी।चाची की चूत काफी गीली थी, शायद दुसरे कमरे में चल रही चुदाई की वजह से और हमें देखने की वजह से भी।“आआआ आआआ आआह्ह्ह” चाची ने लम्बी सिसकारी ली।
चाची ने भी झुक कर मेरा लंड अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी। मैंने अपनी जीभ चाची की चूत में काफी गहरायी तक डाल दी। इतना गहरा आज तक मैं नहीं गया था। उनकी चूत और चूतों के मुकाबले थोड़ी बड़ी थी, शायद इस वजह से।
चाची मेरे ऊपर पड़ी हुई मचल रही थी, उन्होंने मेरा लंड एक दम से छोड़ प्रिया और घूम कर मेरी तरफ मुंह कर लिया और अपनी गीली चूत में मेरा लंड लगाया और नीचे होती चली गयी.“म्मम्म म्मम… आआआ आआआह्ह्ह… मजा आ गया…” वो बुदबुदाई और अपने गीले होंठ मेरे होंठों पर रख दिए।
मेरे हाथों ने अपने आप बढ़ कर उनके हिलते हुए स्तनों को जकड़ लिया। बड़े मोटे चुचे थे चाची के… उनके निप्पल के चारों तरफ लम्बे लम्बे बाल थे। मैं जब उनके दानों को चूस कर छोड़ता तो उनके लम्बे बाल में रह जाते जिनको मैं दांतों से दबा कर काफी देर तक खींचता।
चाची मेरे इस खेल से सिहर उठी, उन्हें काफी दर्द हो रहा था पर मजा भी आ रहा था इसलिए वो बार बार अपने निप्पल फिर से मेरे मुंह में भर देती।
उधर, ऋतु के मुंह को काफी देर तक चोदने के बाद चाचू ने उसे घुमाया जिससेमेरी बहन की गांडहवा में उठ गयी। उन्होंने अपना मोटा लंड ऋतु की चूत पर टिकाया और एक तेज झटका मारा, चाचू का लंड अपनी भतीजी की कसी चूत में उतरता चला गया।
ऋतु चीखी- आआ अयीईईई ईईईईइ… आआह्ह्ह… चाचू धीरे… आआआह…ऋतु अपनी कोहनियों के बल बैठी थी, उसका चेहरा मेरे चेहरे के बिल्कुल ऊपर था। चाचू के लंड डालते ही उसकी आँखें फ़ैल गयी और फिर थोड़ी ही देर में उत्तेजना के मारे बंद होती चली गयी। वो थोड़ा झुकी और मेरे होंठ चूसने लगी। उसकी चूत में उसके चाचू का लंड था और मेरे लंड के चारों तरफ चाची की चूत लिपटी हुई थी। पूरे कमरे में गर्म सांसों की आवाज आ रही थी।
मेरे लंड पर चाची बुरी तरह से उछल रही थी जैसे किसी घोड़े की सवारी कर रही हो। उनकी चूत बड़ी मजेदार थी, वो ऊपर नीचे भी हो रही थी और बीच बीच में अपनी गांड घुमा घुमा कर घिसाई भी कर रही थी।जल्दी ही मेरे लंड की सवारी करते हुए चाची झड़ने लगी- आआअह्ह्ह… मैं…आयीईईई ईईइ…और उनके रस ने मेरे लंड को नहला प्रिया।मेरा लंड भी आखिरी पड़ाव पर था, उसने भी बारिश होते देखी तो अपना मुंह खोल प्रिया और चाची की चूत में पिचकारियाँ मारने लगा।
ऋतु से भी चाचू के झटके ज्यादा बर्दाश्त नहीं हुए, वो तो अपने चाचू का लंड अपनी चूत में लेकर फूली नहीं समा रही थी, उसने भी जल्दी ही झड़ना शुरू कर प्रिया। चाचू ने भी दो चार जोर से झटके दिए और अपना रस अपनीभतीजी की कमसिन चूतमें छोड़ प्रिया।
चाचू ने अपना लंड बाहर निकला और ऋतु के चेहरे के सामने कर प्रिया। ऋतु ने बिना कुछ सोचे उन का रस से भीगा लंड मुंह में लिया और चूस चूस कर साफ़ करने लगी।
चाची भी मेरे लंड से उठी और खड़ी हो गयी,चाची की चूतमें से हम दोनों का मिला जुला रस टपक रहा था। वो थोड़ा आगे हुई और मेरे पेट पर पूरा रस टपका प्रिया। फिर नीचे उतर कर मेरे लंड को मुंह में भरा और साफ़ कर प्रिया। फिर अपनी जीभ निकाल कर ऊपर आती चली गयी और मेरे पेट पर गिरा सारा रस समेट कर चाट गयी।
ऋतु ने भी अपनी चूत में उंगलियाँ डाली और चाचू का रस इकट्ठा कर के चाट गयी।
रिश्तों में चुत चुदाई की कहानी अगले भाग में जारी रहेगी। आप अपने विचार मुझे मेल कर सकते है, साथ ही इंस्टाग्राम पर भी जोड़ सकते हैं।support@mohakkisse.com/ass_sin_cest