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Group Sex Story • पठन समय: 18 मिनट • पढ़ा गया: 508 बार

बीमारी ने दिलायी प्यासी भाभी की चूत-4

वी. गुप्ता

25 Sep 2014 को प्रकाशित

बीमारी ने दिलायी प्यासी भाभी की चूत-4
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मेरे अज़ीज़ दोस्तो, मेरी इस गर्म सेक्स कथा के पिछले भागबीमारी ने दिलायी प्यासी भाभी की चूत-3में आपने पढ़ा कि मैं काम के सिलसिले में हैदराबाद गया था, वहां एक रात अचानक मेरी तबीयत खराब हो गयी. वहां मैं एक महिला से मिला और रात उसके साथ पहली रात बिताने के बाद उसके कहने पर मैं अगले दिन उसके घर पर रुकने चला गया. जब मैं उसके घर पहुँचा तो घर का दरवाज़ा खुला था, लेकिन फिर भी मैंने घन्टी बजायी.. तो एक 22 साल की लड़की मिली और उसके साथ जब मज़े करके हम बात कर रहे थे, तो वो बोली कि अभी एक और सरप्राइज़ है आपके लिये!और इतना कह कर वो वहां से चली गयी.उसके जाने के बाद मैं फ़्रेश हो कर तैयार हो गया.अब क्या सरप्राइज़ मिला, ये इस कहानी में..

जब मैं तैयार होकर हॉल में पहुँचा तो देखा कि वाणी (मेरी मित्र) और वो कामवाली सोफ़े पर बैठ कर हंस कर बातें कर रही थीं. मुझे कुछ अज़ीब सा लगा, लेकिन मैंने कुछ नहीं बोला और वाणी की तरफ़ बढ़ा, तो वो एकदम से खड़ी हो गयी और मेरे से गले मिली. उसने मेरे होंठों पर पप्पी की.

मैं दुबारा चौंक गया कि ऐसे कैसे वो किसी के सामने मुझे चुम्मी कर सकती है.खैर मैंने भी उसे किस किया और उसके हाल-चाल पूछे.वो बोली- बहुत अच्छे … और तुम्हारे भी अच्छे हैं, ये मुझे नीता (कामवाली) ने बता प्रिया है.वो दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कराने लगीं.

फिर हम तीनों दिन भर की बातें करने लगे.मैं बोला- चलो एक एक काफ़ी हो जाये.नीता बोली- ठीक है, मैं बना कर लाती हूँ.लेकिन मैंने उसे रोक कर कहा- तुम बैठो, मैं बना कर लाता हूँ. तुम्हारे हाथ की तो मैंने पी ली, अब तुम मेरे हाथ की पी कर देखो.तो वाणी बोली- वाह क्या बात है … इस पर इतनी जल्दी इतना प्यार आ रहा है.मैंने तुक्का मारते हुए बोला- इस प्यार के बारे में तो इसने बता ही प्रिया होगा.

मैं मुस्कराते हुए रसोई में चला गया. रसोई हॉल के साथ ही थी, तो जो बातें वो दोनों करतीं, वे मुझे सुनाई दे रही थीं. लेकिन मुझे कन्नड़ नहीं आती थी और वो दोनों कन्नड़ में बातें करने में लगी थीं. लेकिन मैं इतना तो समझ गया कि वो मेरे प्यार वाली बात के बारे में ही बातें कर रही थीं.

कुछ देर में मैं काफ़ी बना कर ले आया और हम तीनों काफ़ी पीने लगे. हम सब चुपचाप काफ़ी पी रहे थे, तो मैं बोला- क्या हुआ … अच्छी नहीं बनी क्या? कोई कुछ बोल नहीं रहा है.वे दोनों एक साथ बोल पड़ीं- नहीं बहुत अच्छी है … मैं कुछ सोच रही थी.मैंने कहा- क्या बात है … दोनों ने पूरी बात एक एक शब्द सेम टू सेम बोला. क्या कोई स्क्रिप्ट पढ़ रही हो.तो दोनों एक दूसरे को देख कर हंसने लगीं और बोलीं- नहीं ऐसी कोई बात नहीं है.

फ़िर मैंने बात बदलते हुए कहा- अच्छा अब सच कौन बताएगा?तो फ़िर से दोनों ने साथ में बोला- कौन सा?मैंने कहा कि आप दोनों का क्या प्लान है?और वाणी से बोला कि नीता कौन है.पहले दोनों मुस्कराई, फिर वाणी बोली- बताया तो था कि मेरी कामवाली है.

मैंने उसे टोकते हुए बोला- यार अब मैं सच की बात कर रहा हूँ और तुम वही पुरानी बात बता रही हो. कुछ नया बताओ. देखो ये तो मैं पक्का हूँ कि ये कामवाली से बढ़ कर है.फ़िर वाणी ने भी बात ना खींचते हुए बताया- तुम सही बोल रहे हो, यह मेरी सहेली है और इसके और मेरे पति दोनों साथ में काम करते हैं इस वक्त दोनों साथ में टूर पर गये हैं. अकसर दोनों में से एक ही जाता है. और फ़िर हम तीनों साथ में रहते हैं और मज़े करते हैं. लेकिन इस बार वो दोनों एक साथ चले गये हैं. लेकिन फ़िर भी हम तीनों साथ में हैं.मैंने कहा- तीनों कौन?वो बोली- हम दोनों और तुम.फ़िर हम तीनों हंस पड़े.

मैंने कहा- ओह … तो यह सरप्राइज़ है शाम का!नीता बोली- नहीं … वो तो अभी बाकी है.मैंने कहा- अब शाम तो हो गयी; कब बताओगी सरप्राइज़?तो फ़िर से दोनों बोली- पहले काफ़ी तो पी लें.

खैर काफ़ी खत्म करके वाणी बोली- चलो मैं तो नहाने जा रही हूँ … तुम दोनों का क्या प्लान है देख लो.मैंने कहा- कहो तो मैं नहला दूं?तो वाणी बोली- नेकी और पूछ पूछ … चलो.नीता बोली- नहाना तो मुझे भी है और तुम तो नहा लिये हो. क्यों तौलिया नहीं याद है.मैंने कहा- रुक साली माँ की लौड़ी … तुझे तो मैं बताता हूँ.

मैं उसे पकड़ने के लिये उसकी तरफ़ बढ़ा तो वाणी बोली- रुको, इसने तुम्हें नहाने के बाद नंगा घुमाया था ना … तुम भी ऐसा ही करना, मत देना इसे तौलिया.मैंने एकदम से कहा- मतलब ये सब तुम दोनों का मिला-जुला प्लान था. चलो अब तुम दोनों नहाने जाओ और मैं तुम्हें तुम्हारे कपड़े देता हूँ.इस पर नीता बोली- अरे वाह … जब वाणी जा रही थी तो उसे नहलाने जा रहे थे. अब मैं भी नहाने जा रही हूँ, तो तुम आना ही नहीं चाहते. मुझमें क्या कांटे लगे हैं?मैंने कहा- तुम चलो तो सही, मैं तुम दोनों के लिये कपड़े निकाल कर आता हूँ.वाणी बोली- जल्दी आना … नहीं तो सरप्राइज़ मिस कर दोगे.

मैं सोचने लगा कि यह सरप्राइज़ की क्या कहानी है, अब तो और भी जल्द पता लग जाएगी. मैं उनके गुसलखाने में घुसते ही अपने कपड़े उतार कर भी अन्दर घुस गया.तो वो दोनों बोलीं- इतनी जल्दी कपड़े निकाल लाये?मैंने भी कहा- हां.

उन दोनों ने भी कपड़े उतारे और कहने लगीं- अगर सरप्राइज़ चाहिये तो एक बार आंखें बन्द करो … और जब हम बोलें तभी खोलना.

अपनी आंखें मैंने बन्द कर लीं, एक मिनट के बाद मुझे शॉवर चलने की आवाज़ आयी और तभी उन दोनों ने बोला- अब खोल लो आखें!मैंने आंखें खोली तो देखा दोनों एक दूसरी के ऊपर 69 की पोजीशन में थीं और एक दूसरी की चुत चूस रही थीं.तब मैंने कहा- वाह … तो मेरी तो यहां जरूरत ही नहीं है.तो नीता बोली- तुम्हें क्या कोई छेद खाली नहीं दिख रहा है?

मैं चौंक गया … मतलब वो खुले शब्दों में मुझे अपनी गांड मारने का बोल रही थी. लेकिन मैंने भी सीधे गांड में लंड ना डाल कर उस पर पहले शैम्पू डाला और उसकी पीठ पर मालिश करने लगा. मालिश करते करते मैं बीच में उसकी गांड में उंगली कर देता, तो वो अपनी चुत वाणी के मुँह पर दबा देती.

इसी समय वाणी ने खेल खेल प्रिया. जैसे ही वो गांड नीचे करके चुत उसके मुँह पर दबाती, वो उसकी चुत पर जोर से काट लेती और जैसे ही नीता वापस गांड ऊपर करती, मेरी उंगली और अन्दर हो जाती.

खैर उस पोजीशन में गांड मारना तो आसान नहीं था, तो मैंने ऐसे ही उंगली से ही उसे मज़ा प्रिया. करीब 5 मिनट बाद दोनों का जब पानी निकल गया, तो वो दोनों उठ गईं और मेरे आगे पीछे चिपक गईं. नीता पीछे आयी और वाणी आगे.

अब हम तीनों एक दूसरे के अंगों को मसलने लगे. इतने में नीता ने शैम्पू की बोतल खोली और हम दोनों के ऊपर बहुत सारा शैम्पू डाल प्रिया. इससे एक फ़ायदा हुआ, अब हमें अंग मसलने में ज्यादा मज़ा आ रहा था. मैं जैसे ही वाणी की चुचियां दबाता, वो फ़िसल कर बाहर निकलने की कोशिश करतीं और जैसे ही हम एक दूसरे को कस कर गले लगाते और दबाते, तो पुच पुच की आवाज़ आती.

फ़िर मैंने वाणी के कान में कहा कि इस नीता को बीच में लेकर कसके मसलते हैं.वो फ़ौरन मान गयी और वो मेरी तरफ़ पीठ करके घुम गयी. उसने नीता को खींच कर अपने सामने से चिपका लिया. और एक दूसरे को लिप किस करने लगीं. मेरे हाथ दोनों के बीच में थे. अब मैंने एक हाथ से वाणी की एक चुची पकड़ ली और दूसरे से नीता की. नीता की चुचियां बहुत मस्त थीं और अब तक के खेल में उसकी निप्पल भी टाइट हो गये थे.

मैं घूम कर नीता के पीछे आ गया और उसकी दोनों चुचियां दबाते हुए उसकी गर्दन पर किस करने लगा. वो कुछ तो पहले ही गरम थी, फिर गर्दन पर किस करने से और गरम हो गयी और मेरा लंड पकड़ कर अपने चूतड़ों में घिसने लगी.वाणी को यह समझ आ गया क्योंकि उन दोनों की चुम्मी टूट गयी थी. तो वो नीचे बैठ गयी और नीता की चुत में उंगली करने लगी. अब तो नीता और ज्यादा बिफ़रने लगी और अपनी गांड आगे पीछे करने लगी.

मैंने भी सही समय देखते हुए अपना लंड उसकी गांड में डाल प्रिया. जैसे ही लंड अन्दर गया, उसने उम्म्ह… अहह… हय… याह… करते हुए एक लम्बी सांस ली और बोली- यस यस चोदो मुझे… आह दोनों मिल कर चोदो.

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उसके इतना कहते ही वाणी उठी और वहीं लगी अलमारी में से एक डिल्डो वाली बेल्ट निकाल कर पहन ली. उस बेल्ट में दोनों तरफ़ से डिल्डो था. एक सिरा उसने अपनी चुत में डाल लिया और दूसरा सामने आकर नीता की चुत में डाल प्रिया.नीता की आंखें अभी तक बन्द थीं और वो गांड मराने के मज़े ले रही थी. अचानक से चिल्लाई और बोली- साली कुतिया बोल कर नहीं डाल सकती थी. मैंने आज तक आगे पीछे एक साथ नहीं लिया. हाय मम्मी मैं मर गयी … इस कुतिया ने मुझे कहीं का नहीं छोड़ा.

लेकिन ना तो वाणी ने धक्के मारने बन्द किये, ना मैंने. दो मिनट में ही नीता को मज़ा आने लगा. वो बोली- चोद कुतिया जोर से चोद … तेरे खसम ने चोदना नहीं सिखाया क्या.. साली चोद नहीं तो मैं तेरी गांड में दोनों तरफ़ का डिल्डो डाल दूँगी.

नीता जोर जोर से खुद आगे पीछे होने लगी और चिल्लाने लगी- आह आह हा हा हा इस्स्स्स माँ बचा ले … मुझे इन चोदुओं से.बस 2-3 मिनट में ‘मैं गयी गयी.. जोर से चोदओ.. ओ.. हाय हाय..’ करते हुए वो थम गयी और वाणी से लिपट गयी.नीता बोली- मेरी जान.. कुतिया तूने मेरा बैन्ड बजा प्रिया… लेकिन मज़ा बहुत आया.. चल अब तेरी बारी है.

डिल्डो अभी भी उसकी चुत में था और मेरा लंड गांड में फंसा था. मैं बोला- देर किस बात की है.. चोद साली को.मुझे तो मज़ा इस बात में आ रहा था कि मुझे केवल खड़े रहना था, बाकी का काम तो वो दोनों ही कर रही थीं.यह बात नीता भी समझ गयी कि मैं उसे चोदने के लिये क्यों बोल रहा हूँ.वो बोली- हां तुम तो बारात में आये हो … भैन्चोद खड़े खड़े मज़े ले लो.

मैंने उसकी गर्दन को पकड़ा. उसे पीछे खींच कर उसके होंठों को चूसने लगा और बोला कि चल अब तेरी बारात निकालता हूँ साली.मैंने उसके चुचे पकड़ कर उसे वाणी से अलग किया. उसे दीवार के साथ झुका प्रिया और उसकी गांड मारने लगा और उसके चुचों का हलवा बनाने लगा.बस दो मिनट में वाणी बोली- मेरे बारे में भी सोचो … इस कुतिया को तो ऐसे ही मज़ा आता है इसलिये ये हमारे मर्दों को उकसाती है और हर बार मैं ही सूखी रह जाती हूँ.मैंने कहा- तुम चिन्ता मत करो, तुम दुखी नहीं रहोगी.. तुम बस इसकी चुत में उंगली करो और इसके दाने को दबाओ.

वाणी ने ऐसा ही किया और 2 मिनट में नीता फ़िर झड़ने को आ गयी और उसकी टांगें हिलने लगीं तो मैंने एकदम से लंड बाहर निकाल लिया और वाणी को बोला- चलो अब तुम्हारी बारी.नीता चिल्लाती रही- नहीं … मैं आने वाली हूँ. प्लीज ऐसा मत करो, चोदो मुझे.वाणी तो जैसे तैयार ही बैठी थी, फ़ौरन से उठी और उसके बराबर में घोड़ी बन गयी. वो यह भूल गयी कि डिल्डो अभी भी उसकी चुत में है.

मैंने जब ये देखा तो मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी और ये नीता ने देख लिया. उसने अपनी अधूरी चुदाई भुल कर मज़ा लेने की सोची और वो वाणी के नीचे बैठ गयी. नीता ने वाणी के कन्धे के ऊपर से उसे पकड़ लिया ताकि वो सीधी ना हो पाये.फिर नीता बोली- चल मेरी जान, तेरे लिये तो मैं अधूरी भी रह लूंगी. तू पहले अपना पानी निकलवा ले.

इसके बाद नीता ने मुझे इशारा किया- क्या गान्डू की तरह खड़े हो … चोदो बेचारी को; कब से तरस रही है. प्लीज इसकी भी गांड मार दो ना प्लीज.वाणी भी बोली- प्लीज जल्दी करो ना … आग लगी है.

मैंने भी थोड़ा सा थूक लगाया अपने लौड़े पर और उसकी गांड पर सुपारा रख कर एक बारी में ही पूरा अन्दर कर प्रिया.अब चीखने की बारी वाणी की थी ‘आह मर गयी … ये इतना टाइट क्यों जा रहा है?’तो नीता ने कुछ बोलने की जगह डिल्डो खींचा और छोड़ प्रिया. अब बेल्ट तो वाणी की कमर पर थी, तो डिल्डो वापस से खिंचता हुआ वाणी के अन्दर घुस गया.वाणी चिल्लाई- कमिनी कुतिया तो तुझे पता था?नीता हंस कर बोली- साली मुझे भी ऐसे ही दर्द हुआ था. अब पता चला?

इसके बाद वो उस डिल्डो को खींच खींच कर अन्दर बाहर करने लगी और अब वाणी आगे पीछे होने लगी और मैं फ़िर से आराम से खड़ा होकर मज़े लेने लगा.

नीता मुझसे बोली- भैन्चोद क्या गान्डू की तरह मज़े ले रहा है. गांड मार साले इसकी और अब इसकी बारात निकाल.मैं भी बहुत देर से भरा खड़ा था, तो मैंने भी सोचा चलो एक बार पानी निकाल ही लेता हूँ. बस मैंने धक्के लगाने चालू कर दिये. अब क्योंकि मैं झड़ने के मूड में आ गया था.कुछ ही देर में मेरे धक्कों की रफ़्तार बढ़ गयी. नीता चिल्लाने लगी- साले अगली बार मेरी भी ऐसी तूफ़ानी चुदाई करना.साथ ही उसने भी अपनी गति बढ़ा दी और मेरी ताल के साथ ताल मिलाते हुए वाणी की सामने से चुदाई करने लगी.

उसी के साथ में वाणी ने नीता का मुँह पकड़ा और अपनी चुची उसके मुँह में घुसा कर बोली- साली, इन्हें चूसने के लिये क्या तेरे बाप को बुलाऊं. चूस काट साली इनको. मेरा होने वाला है.मैंने सोचा थोड़ा और मज़ा लिया जाये; तो मैंने एकदम से पीछे ले लंड डाले हुए ही वाणी को कमर पकड़ कर उठाया और कमरे में ले जाने लगा.

नीता बोली- क्या इरादा है?तो मैंने कहा- इसने तुझे चोदा था ना … अब तू इसे बिस्तर पर पूरे जोर से चोद.नीता भी मान गयी और मैं वाणी को अपने ऊपर लेकर लेट गया और नीता को बोला- चल शुरू हो जा.

जल्दी से नीता ने बेल्ट खोली और पहन कर वाणी के ऊपर चढ़ गयी और इतनी तूफ़ानी रफ्तार से धक्के लगाने लगी कि मेरी तो जान ही बाहर निकलने को हो गयी. क्योंकि वाणी तो अपना पूरा वज़न मेरे ऊपर डाल कर लेट ही गयी थी.ऊपर से नीता भी उसके ऊपर लेट कर मुझे किस करने की कोशिश करते हुए तूफ़ानी धक्के लगा रही थी.

मेरी तो एक मिनट में हवा टाइट हो गयी मैंने एकदम से पल्टी खायी और अब हम तीनों बिस्तर पर आ गये. वाणी को आगे पीछे से उसे चोदने लगे. कमरे में हाय हाय उफ़ उफ़ यस यस और पट पट की आवाज़ गूंज रही थी.

फ़िर एकदम से नीता ने वाणी की एक चुची को मुँह में ले लिया और चूसने लगी. मैंने दूसरी रसभरी चूची को मसलना चालू कर प्रिया. फ़िर जल्द ही पहले तो वाणी के चिल्लाने की आवाज़ आयी- हाय हाय.. उई माँ.. आह.. मैं गयी.वो बहुत जोर से चिल्लाते हुए झड़ने लगी. झड़ते हुए उसने नीता को कस कर सीने से चिपका लिया और एक टांग उसके ऊपर रख कर उसे नीचे से भी दबा लिया. लेकिन वाणी इतनी जोर की झड़ रही थी कि उसका पूरा शरीर कांप रहा था. इस चक्कर में नीता का दाना डिल्डो से रगड़ा जा रहा था, तो वो भी झड़ने को आ गयी और वो दोनों गुत्मगुत्था हो गईं.

फ़िर मैं भी धक्के मारते हुए वाणी की गांड में ही झड़ गया. झड़ते समय पता नहीं क्या हुआ … मैंने वाणी की चुची छोड़ कर नीता की चुची जोर से दबा डाली तो वो भी एकदम से झड़ गयी.इसके बाद हम में से किसी के भी उठने की हिम्मत नहीं थी, तो हम करीब आधा घन्टा ऐसे ही लेटे रहे.

फ़िर सबसे पहले मैं उठा और मूतने गया. मूतकर आने के बाद मैंने नीचे हाथ डाल कर दोनों की चुत में से डिल्डो खींचा और नीता की कमर से बेल्ट खोल कर उसको अलग किया.

वो दोनों तो अभी भी बेसुध सो रही थीं. मैं बाहर हॉल में गया और अपनी सिगरेट लगा कर कश लेने लगा.

इसके आगे का हाल अगली हॉट सेक्स कहानी में लिखूंगा. तब तक आप अपने विचार मुझे भेज़ सकते हैंsupport@mohakkisse.com

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बीमारी ने दिलायी प्यासी भाभी की चूत

कुल भाग: 6
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9 मिनट 887

पाठकों की राय

3 टिप्पणियां
क

काजल हर्ष

4 months ago

देवर भाभी की ये कहानी सच में कमाल की थी। लेखक ने बहुत बारीकी से लिखा है।

म

मोहशिरा खान

5 months ago

भाभी के साथ रोमांस हमेशा से ही बेस्ट होता है। बहुत ही हॉट स्टोरी!

स

सुष्मिता 6

5 months ago

बहुत ही रोमांटिक और कामुक कहानी थी यार।

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