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भाभी की चुदाई पठन समय: 14 मिनट पढ़ा गया: 621 बार

विधवा पड़ोसन की चूत लंड की भूखी- 2

प्रकाश सिंह

29 Jan 2025 को प्रकाशित

विधवा पड़ोसन की चूत लंड की भूखी- 2
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पंजाबी भाभी चुदाई कहानी में पढ़ें कि मेरी पड़ोस की भाभी ने मुझे मेरी गर्लफ्रेंड की चुदाई करते देखा. फिर मैंने उस पंजाबी भाभी को चूत में उंगली करते देखा तो …

दोस्तो, मैं प्रकाश सिंह आपको अपनी विधवा पड़ोसन हरलीन भाभी की चुत चुदवाने की भूख वाली इस सेक्स कहानी में आगे ले चलता हूँ.पंजाबी भाभी चुदाई कहानी के पहले भागगर्लफ्रेंड की चुदाई विधवा पड़ोसन ने देखीमें अब तक आपने पढ़ा था कि मैं अपनी गर्लफ्रेंड की चुत चुदाई कर रहा था और मेरी पड़ोसन हरलीन भाभी दरवाजे के कीहोल से हम दोनों की चुदाई देख रही थीं.

अब आगे पंजाबी भाभी चुदाई कहानी:

इस बात को मैंने अपनी गर्लफ्रेंड मीतू को बताया.तो मीतू मेरी तरफ हैरानी से देखने लगी. उसकी नजरें कुछ कहना चाहती थीं और मैं वही समझने की कोशिश भी कर रहा था.

फिर मीतू ने कुछ पल सोचने के बाद मुझसे कहा- ओके उनकी इच्छा चुदाई देखने की है. तुम मुझे फिर से चोदो.

मैंने उसे खड़ी करके लंड चुसाया और लंड खड़े हो जाने पर उसे डॉगी स्टाइल में चोदने लगा.

इस बार जानबूझ कर मीतू जोर जोर से चिल्लाने लगी और मैं भी उसे उतने ही जोश के साथ चोदने लगा.

फिर मैंने मीतू की गांड भी मारी.

लम्बी चुदाई के बाद मैं थक गया था. जैसे ही मैं निढाल हुआ, वैसे ही हम दोनों सो गए.

जब सुबह हम दोनों उठे तो मैंने मीतू को बस स्टैंड छोड़ प्रिया.

मीतू के जाने के दो दिन तक मैं नीचे गया ही नहीं.

अगले दिन दिन दोस्त का कॉल आया. उसने मुझे पार्टी के लिए बुलाया था.

क्योंकि कुछ दिन बाद मैं फिर से वापस जाने वाला था, मेरी छुट्टियां ख़त्म होने को वाली थीं तो मैंने उससे आने की हां कह दी.

पार्टी में थोड़ी देर हो गयी.जब मैं वापस आया तो भाभी के रूम के सामने से गुजर रहा था.तभी मुझे कुछ आवाज सुनाई दी जिसे सुन कर मैं रुक गया और खिड़की से झांक कर अन्दर देखा.

तो मैं दंग रह गया.भाभी ने उस दिन मेरी न्यूड पिक ले ली थी जिसे मोबाइल में देखकर वो अपनी चुत में उंगली कर रही थीं.

गर्म भाभी आह आह करती हुई कह रही थीं- आह प्रकाश प्रकाश … ओह डार्लिंग ओह कम ऑन फक मी … ओह जान.

मैंने देखा कि भाभी के कमरे का दरवाजा भी खुला है … मतलब कुंडी नहीं लगी थी बस यूं ही उड़का हुआ था. मेरे मन में ऊहापोह की स्थिति थी कि अन्दर जाऊं या नहीं.

फिर मैं अपने कमरे में चला गया.पार्टी में दारू के कारण मेरा नशा मुझ पर हावी था और ऊपर से भाभी को चुत में उंगली करते देख कर मैं बहुत गर्म हो गया था.मुझे कुछ नहीं सूझा तो मैं नंगे होकर मुठ मारी और झड़ कर सो गया.

इसके बाद दो दिन और हो गए.मीतू को चोदे भी पांच दिन हो गए थे तो अब मेरा भी मन करने लगा.

उस दिन रात को भाभी फिर से अपनी चुत में उंगली कर रही थीं और मेरा नाम ले रही थीं.

दरवाजा उस दिन के जैसे सिर्फ उड़का हुआ था. मैंने एकदम से दरवाजा खोल प्रिया.

भाभी चौंक गईं और मेरी तरफ देखने लगीं.मुझे देख कर उनकी आंखें शर्म से झुक गयी थीं.

मैं धीरे धीरे भाभी के पास आ गया और उन्हें बिस्तर से उठा कर खड़ा करके अपने सीने से लगा लिया और उनके होंठों पर अपने होंठ मिला कर चूमने चूसने लगा.भाभी भी मेरा साथ देने लगीं.

कुछ देर बाद मैं भाभी से अलग हुआ और उनके एक दूध को मुँह में लेकर चूसने लगा.वो भी सीत्कार भरती हुई मेरा साथ देने लगीं.

कुछ पल बाद भाभी मेरा लंड पैंट के ऊपर से ही मसलने लगीं. मैं उनकी चुत के आस पास अपनी उंगली घुमाने लगा.

उन्होंने मुझे अपने से दूर किया और मेरे कपड़े निकालने लगीं.मैंने उनके नंगे बदन को देखा और देखते ही रह गया.अब भी क्या कसावट थी, जिस अंग को जहां जैसा कड़क होना चाहिए … वैसे ही एकदम व्यवस्थित था.

भाभी मुझे सीने पर चाटने लगीं, मेरे दोनों निप्पलों को बारी बारी से चूसने लगीं.

मैं उत्तेजित होने लगा और अपने हाथ उनके सर के पीछे ले जाकर उनके बालों को पकड़ कर उन्हें अपनी तरफ खींच लिया.भाभी के होंठों को मैं चूसने लगा. वो भी एक मर्द का साथ वासना के वशीभूत हुई नारी की तरह देने लगीं.

मैंने उनके होंठों को छोड़ा और एक बार उनकी आंखों में देख कर उन्हें लंड चूसने का इशारा करते हुए उनके सर को नीचे को किया.

भाभी समझ गईं और वो घुटने के बल पर बैठ कर मेरा लंड मुँह में लेने लगीं.उनके लंड चूसने से दो चीजें समझ आने लगी थीं कि एक तो बहुत दिन से भाभी लंड की भूखी हैं … और दूसरी बात ये कि उन्हें लंड चूसने का अनुभव बहुत ज्यादा है.

वो मेरे लंड को जोर जोर से और काफी अन्दर तक लेकर चूसने लगी थीं.

मुझसे रहा नहीं गया, मैंने आह करते हुए कहा- आह भाभी, मेरा आने वाला है.उन्होंने लंड को मुँह से निकाल लिया और अपने मुँह के ऊपर हिलाने लगीं.मैंने धार छोड़ दी और वो वीर्य से पूरी सन गईं.

उन्होंने उसमें से कुछ वीर्य उंगली से उठा कर चाट लिया और कुछ अपने मम्मों पर लगा लिया.फिर वो मेरी तरफ मुस्काराकर देखती हुई खुद को धोने के लिए ऐसे ही नंगी बाथरूम में चली गईं.

कुछ देर बाद भाभी वापस रूम में आईं.

उनके आते ही मैंने उन्हें गोद में उठा लिया और वैसे ही उनके होंठों को चूमने लगा.वो अपने दोनों हाथ मेरे गले में डाल कर लटकी हुई थीं. ऐसे ही मैं उन्हें अपने रूम ले गया और बेड पर पटक प्रिया.

भाभी के बिस्तर पर गिरते ही मैंने उनकी दोनों टांगों को अपने कंधे पर रख लिया और लंड को चुत पर सैट कर प्रिया.

जब तक भाभी कुछ समझ पातीं, मैं धक्का लगा प्रिया.भाभी बहुत दिनों से चुदी नहीं थीं जिस कारण से लंड ने चुत में घुसने से मना कर प्रिया. वो चुत के अन्दर जा नहीं रहा था.

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मैंने पूछा- कभी उंगली भी नहीं करती थीं क्या?इस पर उन्होंने ने हंस कर कह प्रिया- जब उंगली कर रही थी, तभी तो तुम अन्दर आए थे.

मैंने फिर से लंड से जोर लगाया तो धीरे धीरे चुत का छेद खुलने लगा. लंड अन्दर जाने लगा और भाभी की मुट्ठियां दर्द से भिंचने लगीं.

उनकी आवाज आने लगी- आह मर गई धीरे प्रकाश … तुम्हारा बहुत मोटा है.

मगर अंतत: लंड की अजय हुई और चुत की गहराई में जाकर वो मस्त होने लगा.भाभी ने भी लंड झेल लिया था.

उनकी गांड हिली … तो मैं उन्हें चोदने लगा.कुछ ही धक्कों के बाद जोर जोर से चुदाई होने लगी.

अब पंजाबी भाभी भी कामुक सिसकारियां निकाल रही थीं- धीरे कर … आह धीरे … साले अब तो मेरा पति भी नहीं है … मैं तो अब तुझसे ही चुदूँगी … आराम से चोद … अब तो मैं तेरी ही हो गई हूँ.मैं उनकी बात पर ध्यान न देते हुए और जोर जोर से चोदने लगा.

इस बार उन्होंने मुझे गाली देना शुरू कर प्रिया- अबे मादरचोद धीरे चोद … आह आह भोसड़ी के … समझ नहीं आ रहा है … आह भैनचोद मैं तेरी रंडी नहीं हूँ … हरामी भाभी हूँ तेरी … आह आह धीरे चोद थोड़ा … आह मार गयी ओह किस लौड़े से चुद गयी मैं आह.

पंजाबी भाभी चुदाई के नशे में बार बार बोल रही थीं कि रंडी नहीं हूँ भाभी हूँ तेरी … उनकी इस बात से मुझे बड़ा मजा आ रहा था.

मैं भी अब जोश में आ गया और बोला- तेरा तो कब से नहीं है … साली अब तो तू मेरी रखैल है … रंडी है … मादरचोद रंडी ले लंड खा … तेरी बड़ी गांड और चुचों को देखकर तो पहले भी चोदने का मन था … और उस पर साली मादरचोदी झुक झुक कर मुझे तू अपने बूब्स दिखाती थी … ले लौड़ा खा … रंडी साली.

उन्होंने भी गांड उठाते हुए कहा- इसलिए तो दिखाती थी कि तेरे लंड को कभी तो समझ में आए कि तेरी रांड साली पिछले कई साल से भूखी है. तुझे कितने इशारे दिए कमीने … मगर तू बड़ा झांटू बसंत निकला … आह चोद कमीने.

मैं भाभी की बात सुनकर उन्हें और जोर जोर से चोदने लगा. फिर मैंने उनको उठाया और अपने लंड के सहारे हवा में लटका कर चोदने लगा.वो भी अब चुदाई के भरपूर मजे लेने लगीं.

‘आह क्या मोटा लंड पाया है … कहां था भोसड़ी के इतने दिन तक मादरचोद … आह चोद दे … आह आह.’इतना बोलकर भाभी झड़ गईं, लेकिन मैं नहीं झड़ा था … तो मैं उन्हें ताबड़तोड़ चोद रहा था.

जब मैं झड़ने को आया तो मैंने पूछा- कहां निकालूं?भाभी ने कहा- मैं हवा में हूँ और साला पूछ रहा है कि कहां निकालूं … निकाल दे … तुझे जहां निकालना है.

मैंने भी कहा- अबे साली रंडी … तू प्रेग्नेंट हो जाएगी.उन्होंने कहा- उसकी टेंशन तू मत ले … वो मैं देख लूंगी.

अब क्या था … मैं भाभी की चुत में ही झड़ गया और उन्हें ऐसे ही बेड में पटक कर उनके ऊपर सो गया.

थोड़ी देर बाद भाभी फिर से लंड चूसने लगीं.उस पूरी रात में भाभी की चार बार चुत चुदाई हुई और नंगे ही लिपट कर सो गए.

सुबह ग्यारह बजे तक हम दोनों सोते रहे.

अब हम दोनों घर में ऐसे ही नंगे घूमते थे. कभी नहाते हुए चुदाई, तो कभी खाते समय … भाभी बहुत खुश रहने लगी थीं.

मैंने दस दिन की छुट्टियां और बढ़ा दी थीं.अब वो भी खत्म हो चुकी थीं और मेरे जाने का समय आ गया था.

मैंने भाभी को बताया तो वो उदास हो गईं. जिस कारण मैं भी न जा सका और मैंने ऑफिस में फोन करके झूठ बोल प्रिया कि मेरी तबियत खराब हो गयी है … तो मुझे थोड़ी और छुट्टी चाहिए.

चूंकि मेरा जॉब सरकारी था और मेरे साथ एक और अफसर भी थी, जिसे मैं अपना चार्ज देकर आया था … तो मुझे छुट्टी के लिए कोई दिक्कत नहीं थी.

मेरी छुट्टी बढ़ने की बात मालूम होते ही भाभी के चेहरे पर खुशी देखते ही बनती थी.

लेकिन मेरा ये झूठ मुझ पर ही भारी पड़ गया था. मेरी गर्लफ्रेंड मीतू को यही मालूम था कि मैं जा चुका हूँ और ऑफिस में हूँ. उसने मेरे फोन का उत्तर न मिलने के कारण मेरे ऑफिस में मेरे कुलीग को फ़ोन करके पूछा कि मैं कहां हूँ. तो उसने कारण बता प्रिया.

इस पर तुरंत मीतू मेरे रूम आ गयी, वहां उसने हमारी चुदाई देख ली.

वो बोली- मैं तो तब ही समझ गयी थी, जब तुमने उस दिन कहा था कि भाभी देख रही हैं … और तुम इनको चोदोगे. मैं जान भी रही थी कि मेरा चुदक्कड़ भाभी की चुत के चक्कर में ही रुक गया होगा.

मैं मीतू के उलाहने चुपचाप सुन रहा था.

उधर भाभी मीतू को समझने को कोशिश कर रही थीं कि प्रकाश की कोई गलती नहीं है … सारी गलती मेरी है.मीतू मेरे पास आई और जो वो बोली, उसका हम दोनों में से किसी को भी अंदाजा नहीं था.

मीतू- मुझे भी बुला लेता साले … अपन थ्री-सम कर लेते … ऐसे में तेरा क्या घट जाता.

उसकी इस बात पर मेरी जान में जान आयी और मैं उसी पल अपनी बांहों में भरकर उसे किस करने लगा.तभी भाभी भी हम दोनों से चिपक गईं.

अब हम तीनों एक दूसरे से मजा करने लगे. हमारे बीच थ्रीसम शुरू हो गया.

लेकिन लड़कियों की जलन कहां जाती है. जैसे ही भाभी मेरे लंड चूसतीं … तो मैं थोड़ा आह आह कर देता.उसी समय मीतू भी मेरे लंड को जोर जोर से चूसने लगती.

उन दोनों के बीच एक कॉम्पिटिशन चालू हो गया था कि कौन अच्छे से लंड चूसेगा.

कुछ समय बाद चुदाई शुरू हो गई. मेरे लंड पर वो दोनों बारी बारी से सवारी गांठने लगीं.

इस तरह हम तीनों रात भर चुदाई करते रहे और ऐसे ही मेरे छुट्टी ख़त्म होने तक हमने मजा किया.

अब भाभी के बाजू का मेरा कमरा हम तीनों की चुदाई का अड्डा बन गया था. इस तरह से भाभी और मीतू दोनों ही मुझे प्यार करने लगी थीं.

दोस्तो, मैं आशा करता हूं कि आपको मेरी ये पंजाबी भाभी चुदाई कहानी अच्छी लगी होगी. आप कमेंट और मेल जरूर करें, तब तक के लिए अलविदाsupport@mohakkisse.com

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विधवा पड़ोसन की चूत लंड की भूखी

कुल भाग: 2
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