होम पर वापस जाएं
पहली बार चुदाई पठन समय: 4 मिनट पढ़ा गया: 948 बार

समय के साथ मैं चुदक्कड़ बनती गई-3

नीनू

09 Aug 2008 को प्रकाशित

समय के साथ मैं चुदक्कड़ बनती गई-3
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

प्रेषिका : नीनू

“दोनों ऊपर आ जाओ, मेहमान हो मेरे, फिर कहोगे भाभी ने बैठने को नहीं कहा।”

विकास बोला- साली, हम तो तेरे साथ लेटना चाहते हैं !

“यह हुई मर्द वाली बात, तुम दोनों कुत्ते हो और मैं तुम दोनों की कुतिया हूँ !’

मैंने पैंटी भी उतार फेंकी, एकदम चिकनी फ़ुद्दी देख विकास ने कपड़े उतार दिए। उसका लौड़ा बहुत बड़ा निकला।

“तेरा बहुत बड़ा है ! लेकिन अभी है बच्चा !”

“हैं? क्या बच्चा? बच्चा कहो तो आपको बच्चा दे देगा !’

“आकर मेरी फ़ुद्दी को जुबान से चाट !”

विकास मेरी फ़ुद्दी चाटने लगा, अभय मेरे मम्मे सहला रहा था, हम तीनो नंगे होकर कामसूत्र के खेल खेलने को तैयार थे।

मैंने विकास के लौड़े को प्यार से सहलाया और चूसने लगी, कभी उसका चूसती, कभी अभय का !

विकास का लौड़ा सच में बहुत बड़ा था, मोटा भी था, हाँ विनोद जैसा नहीं था, लेकिन हो जाने वाला था।

मैंने सोचा कि आज ब्लू फिल्म की तरह सब करवाऊँ, आज मेरा दिल गांड मरवाने को भी बेताब था। इसी मकसद से मैंने दोनों को अपनी तरफ खींचा था।

“कैसी लगी नंगी भाभी?”

“साली, कुतिया ! तुमने तो रोज़ हमें मस्त किया है कपड़े बदलने के बहाने !”

“विकास, तू बहुत कुत्ता-कमीना है, यह अभय कितना शर्मीला सा है ! तुमसे ज्यादा अभय मुझे पसंद है।”

मैं उनके सामने घोड़ी बन गई, चूतड़ हिलाने लगी, तभी अभय ने मेरे कूल्हों को सहलाया, चूमने लगा।

“हाँ मेरे लाल, चाट मेरी गांड कुत्ते की तरह !”

“दारु पीती हो?” विकास बोला।

“पिला दे !”

“रुक !”

वो उठा, अपने लोयर की जेब से पव्वा निकाला, बोला- मार ले दो घूँट !

मैंने मुँह से लगाई, काफी सारी नीट ही पी ली, मेरे लिए वही बहुत थी, बाकी उसने पी ली।

“दोनों मेरे जिस्म को सूंघो, चूमो, चाटो ! हाय। बहुत मस्त हो तुम दोनों !”

अभय ने खुलकर मेरी गाण्ड चाटी, विकास ने मेरे निप्पल लाल कर दिए, फ़ुद्दी चाटी।

“अभय, गांड मार मेरी !”

मैं घोड़ी बन गई, विकास सामने आया और लौड़ा मेरे मुँह में दे प्रिया। अभय ने थूक लगाया और लौड़ा गाण्ड में पेल प्रिया, दर्द हुआ लेकिन मुझे बहुत मजा आया। उसने दबा कर मेरी गाण्ड मारी, अपना पानी मेरी गाण्ड को पिलाया। मैंने पहली बार गांड मरवाई थी।

विकास ने कहा- चल कुतिया, लेट जा, टांगें उठा !

मैंने टाँगें फैला दी, उसने अपना नौ इंच का लौड़ा मेरे अन्दर घुसा प्रिया।

“हाय मेरे शेर ! विकास, जोर जोर से पेल अपनी इस रंडी भाभी को !”

“कुतिया तू कहे तो तुझे रंडी बना देंगे ! बहुत लौड़े हैं तेरे लिए !”

अभय मेरे मम्मे चाटने लगा।

“लगता है अभय के बच्चे की प्यास बुझी !”

“जी नहीं !”

“ला इसको मुँह में घुसा दे, खड़ा कर दूँगी, फिर एक साथ दोनों मेरी लेना !””लोगे ना?”

“हाँ भाभी, आप कहो तो आपका हर छेद भर जाएगा !”

विकास काफी मास्टर निकला, उधर उकसा उकसा मैंने उसका पानी निकलवा प्रिया दोनों हांफने लगे पर जल्दी दोनों दुबारा तैयार हो गए, दोनों ने एक साथ, मेरी गांड में अभय का, फ़ुद्दी में विकास का, दोनों तरफ से मस्त कर प्रिया मिलकर !

मुझे ससुराल में प्यास बुझाने का साधन मिल गया, पति तो था ही नाकारा ! वो मेरे पास रात के सिवा कम ही आता, वो जानता था उसमें कुछ नहीं है।

सासू माँ मेरे पीछे पड़ गई कि पोता का मुँह दिखा !

पोते का मुँह कहाँ से दिखाती ! पति जानता था उसने कभी वहाँ तक पहुँचाया नहीं था जहाँ से मेरे पेट में उसका बीज रुके !

लेकिन अपने बेटे में दोष नहीं बोलती थी, दोष मेरे में है यह था उनका कहना !

विकास और अभय के साथ करते समय मैं माला-डी का इस्तेमाल करती थी।

कहानी जारी रहेगी।

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

श्रृंखला

कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

समय के साथ मैं चुदक्कड़ बनती गई

कुल भाग: 5
यह एक बहु-भाग कहानी है। अपनी पसंदीदा कड़ी पर जाने के लिए ऊपर क्लिक करें।

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

मेरे प्यार की कीमत-4
पहली बार चुदाई

मेरे प्यार की कीमत-4

वो हमें इसी हालत में छोड़ कर अपने कपड़े पहन कर कमरे से निकल गया। कई घंटों तक शीतल मेरी तीमारदारी करती रही, जब तक मैं चल सकने लायक हो गई। फिर हम किसी तरह घर लौट आए।

12 मिनट 244
पहला प्यार, पहला चुम्बन, पहला सम्भोग
पहली बार चुदाई

पहला प्यार, पहला चुम्बन, पहला सम्भोग

बात तब की है जब मैं इंजिनियरिंग कर रहा था। मैंने दूसरे साल में प्रवेश लिया तो साथ ही मेरा ज़ूनियर बैच भी आ गया।उसमें एक लड़की भी थी जो बहुत खूबसूरत थी पर मेरा इंटरेस्ट भी उसमें नहीं था।

14 मिनट 427
मेरी क्लासमेट की चूत चुदाई
पहली बार चुदाई

मेरी क्लासमेट की चूत चुदाई

एक दिन मेरी किस्मत ने करवट ली और एक सुन्दर सी गेहुँवे रंग की 5 फ़ीट 2 इंच की लड़की का हमारी क्लास में एडमिशन हुआ. जब वो पहले दिन क्लास में आई तो मैं तो उसे देखता ही रह गया और शायद उसने भी इस बात को नोटिस किया कि मैं उसे घूरे जा रहा हूँ.

5 मिनट 1,299

पाठकों की राय

0 टिप्पणियां
इस कहानी पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!
🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।