होम पर वापस जाएं
Group Sex Story पठन समय: 13 मिनट पढ़ा गया: 562 बार

निदा की अन्तर्वासना-3

इमरान ओवैश

22 Sep 2021 को प्रकाशित

निदा की अन्तर्वासना-3
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

इमरान ओवैशहम तीनों ही मादरजात नग्न थे और मेरे इशारे पर नितिन भी ऐसा सट गया था कि हम तीनों ही एक-दूसरे से रगड़ रहे थे। नितिन ने उसका चेहरा थाम कर उसे चूमने की कोशिश की, लेकिन निदा ने शर्म से चेहरा घुमा लिया और वो पीछे से उसकी गर्दन पीठ पर चुम्बन कपिल करने लगा। जबकि मैंने सामने से उसके कान की लौ चुभलाते हुए उसकी ढीली पड़ गई चूचियों को दबाने, सहलाने लगा।

ऐसा नहीं था कि नितिन के हाथ खामोश थे… वह भी उसे सहलाए, दबाए और रगड़े जा रहा था।

इस बार उसने इशारा किया जिसे समझ कर मैंने निदा को घुमा कर सीधा किया और इस स्थिति में ले आया कि उसकी पीठ अधलेटी अवस्था में मेरे पेट से सट गई और उसके नितम्ब बेड के किनारे ऐसे पहुँच गए कि जब नितिन बिस्तर से नीचे उतर कर उसकी टांगों के बीच बैठा तो उसका चेहरा निदा की सामने से खुली चूत से बस कुछ सेंटीमीटर के फासले पर था।उसने दोनों हाथों से निदा का पेट और पेड़ू सहलाते हुए अंगूठे से उसकी क्लियोटोरिस को छुआ व सहलाया और फिर ज़ुबान लगा दी।

निदा ‘सिस्कार’ कर कुछ अकड़ सी गई और अपनी मुट्ठी में मेरी जाँघ दबोच ली। अब नितिन ने उसके नितम्बों के नीचे से हाथ डाल कर उसकी जाँघें दबा लीं और अपनी थूथुन निदा की चूत में घुसा कर उसे चाटने और कुरेदने लगा।

बहुत ज्यादा देर नहीं लगी जब निदा का शरीर कामज्वर से भुनने लगा। मैं उसे अपने से सटाये उसके वक्षों को मसल रहा था और उसे बीच-बीच में चूम रहा था, लेकिन उसे अपने लंड को मुँह में नहीं लेने दे रहा था। मैं नहीं चाहता था कि मेरी उत्तेजना अपने समय से पहले चरम पर पहुँच जाए।

जब लगा कि अब वो काफी गर्म हो चुकी है तो मैंने उसे खुद से अलग किया और नितिन को ऊपर जाने को बोला।नितिन उठ कर ऊपर हो गया और मैं नीचे उसकी जगह… मैंने हथेली से निदा की कामरस और नितिन की लार से बुरी तरह गीली हो चुकी बुर को पोंछा और फिर खुद अपनी जीभ वहाँ टिका दी। साथ ही अपनी बिचल्ली ऊँगली उसके छेद में अन्दर सरका दी। ऊँगली अन्दर जाते ही निदा ऐसा ऐंठी कि उसी पल उसके पास अपना चेहरा ले गए नितिन को थाम लिया और नितिन और निदा ऐसे प्रगाढ़ चुम्बन में लग गए, जैसे अब वह कोई और ही न हो, कोई सगा हो।

मैं अपने काम में लगा था। न सिर्फ जुबां से उसके दाने और क्लियोटोरिस को रगड़ रहा था बल्कि ऊँगली से उसकी बुर भी चोद रहा था और निदा की उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी।

निदा को चूसते नितिन की निगाह मुझसे मिली तो मैंने उसे आँखों ही आँखों में लंड चुसाने को कहा और उसने अपना चेहरा पीछे कर के खुद घुटनों के बल हो कर अपना लंड निदा के होंठों के एकदम करीब कर प्रिया। निदा की निगाहें उस हाल में भी मेरी तरफ गईं और मेरे प्रोत्साहित करने पर उसने नितिन के लंड को अपने मुँह में जगह दे दी। नितिन की आँखें आनन्द से बंद हो गईं और उसने निदा का सर थाम लिया।

मैं नीचे निदा की चूत चाटने में और ऊँगली से चोदने में मस्त था और वो लार बहा-बहा कर नितिन का लन्ड चूसने में मस्त थी। पर नितिन के लिए भी यूँ लन्ड चुसाना घातक हो सकता था इसलिए उसने भी स्थिति को समझते हुए अपना लन्ड निकाल लिया और निदा मुँह खोले ही रह गई।

निदा अब पूरी तरह गर्म हो चुकी थी और चुदने के लिए लगातार सिस्कार-सिस्कार कर ऐंठ रही थी।मैं उठ गया और अपने लंड को थोड़ा थूक से गीला कर के उसकी चूत पर रखा और हल्के से अन्दर सरकाया, सुपाड़े के अन्दर जाते ही निदा की ‘आह’ छूटी और तीन बार में अन्दर-बाहर कर के मैंने समूचा लंड अन्दर सरका प्रिया और उसके घुटने थाम कर धक्के लगाते हुए उसे चोदने लगा।

अब नितिन उसकी पीठ से टिक गया और उसकी हिलती हुई चूचियों को अपने हाथों से सम्भाल कर उन्हें दबाते और सहलाते पीछे से उसके होंठों को चूसने लगा।थोड़ी देर के धक्के के बाद मैंने नितिन को आने को कहा।

वो नीचे आ गया और मैंने अलग हट गया। अब निदा बिस्तर पर पीठ के बल लेट गई और नितिन उसकी जाँघों के बीच आ गया। मेरे लन्ड के अन्दर-बाहर होने से उसका छेद तो अन्दर तक खुल ही चुका था, लेकिन फिर भी नितिन का लंड न सिर्फ मुझसे लम्बा था बल्कि मोटा भी था इसलिए जब उसने आधा लंड पेला, तभी निदा की ज़ोर की ‘कराह’ निकल गई। कुछ सेकेण्ड रुक कर नितिन ने भी अपने लंड के हिसाब से जगह बना ही ली और हचक कर चोदने लगा।

मेरे मुकाबले उसके चोदने में ज्यादा जोश और ज्यादा आक्रामकता थी। उसका कारण भी था कि वो उसके लिए एकदम नया और फ्रेश माल थी, जबकि मैं तो दो महीने से उसे चोद रहा था और इस नए-पन का मज़ा निदा को भी भरपूर आ रहा था। उसका चेहरा उत्तेजना से सुर्ख हो रहा था, साँसें मादक सीत्कारों में बदल गई थी, आँखें जैसे चुदाई के नशे में खुल ही नहीं पा रही थीं और अपनी उत्तेजना को वो बिस्तर की चादर अपनी मुट्ठियों में दबोच कर उसमें जज़्ब कर देने कि कोशिश कर रही थी।

थोड़ी देर की चुदाई के बाद नितिन हटा तो मैं उसकी चूत पर चढ़ गया। हालांकि नितिन के लंड ने जो जगह बनाईं वो उसके लंड निकालते ही एकदम से कम न हो पाई और मेरे लंड डालने पर ऐसा लगा जैसे कोई कसाव ही न रहा हो और उसकी चूत बिलकुल बच्चा पैदा कर चुकी औरत जैसी हो गई हो। शायद निदा के आनन्द में भी विघ्न आई, लेकिन बहरहाल, मैं चोदने से पीछे न हटा और निदा की सिसकारियाँ कम तो हुईं लेकिन ख़त्म न हुईं।

यह भी पढ़ें (Recommended)

Family mein chudai ke darshan-1

मेरे बाद जब नितिन ने फिर अपना लौड़ा घुसाया तो उसकी सिसकारियाँ फिर उसी अनुपात में बढ़ गईं।फिर नितिन ने ही लण्ड निकाल कर उसे उठाया और उल्टा कर के ऐसा दबाया कि निदा का बायां गाल बिस्तर से सट गया और कंधे, पीठ नीचे हो गई, ऊपर सिर्फ उसके चौपायों की तरह मुड़े घुटनों के ऊपर रखी गाण्ड ही रह गई। उसके आगे-पीछे के दोनों छेद अब हवा में बिलकुल सामने थे।

कहने की ज़रुरत नहीं कि उसके दोनों छेद एकदम मस्त कर देने वाले थे, लेकिन जहाँ गाण्ड का छेद अभी सिमटा हुआ अपनी बारी का इंतज़ार कर रहा था वहीं बुर का छेद इतनी चुदाई के बाद बिल्कुल खुल चुका था और उसने नितिन के लन्ड को निगलने में ज़रा भी अवरोध न दिखाया। जब नितिन उसके दोनों चूतड़ों को उँगलियों से दबोचे गचा-गच अपना लंड उसकी चूत में पेल रहा था, तब मैं निदा की पीठ सहला रहा था।

फिर जब नितिन हटा तो मैं उसकी गाण्ड के स्पर्श के साथ चूत चोदने पर उतर आया। हालांकि नितिन के मोटे लण्ड से चुदने के बाद मुझे वो मज़ा नहीं आ पा रहा था, लेकिन अब छोड़ भी तो नहीं सकता था।बहरहाल कुछ देर की चुदाई के बाद नितिन ने तो झड़ने के टाइम उसे ऐसे दबोचा के निदा उसके लन्ड से निकल ही ना पाई और पूरी बुर नितिन के वीर्य से भर गई।

झड़ने और लण्ड बाहर निकलने के बाद वह तो निदा के बगल में ही गिर कर हांफने लगा। लेकिन उसने मेरा रास्ता दुश्वार कर प्रिया। पूरी बुर उसके वीर्य से भरी हुई थी।तो मैंने एक बार लण्ड अन्दर कर के नितिन के वीर्य से अपने लण्ड को सराबोर किया और निदा की गाण्ड के छेद में उतार प्रिया और गाण्ड के कसाव और गर्माहट ने कुछ ही धक्कों में मेरा पानी भी निकाल प्रिया और मैंने उसकी गाण्ड अपने सफ़ेद पानी से भर दी।

फिर मैं भी बिस्तर पर पसर गया और वह भी हम दोनों के बीच में ही फैल कर हांफने लगी। आँखें उसकी अभी भी बंद थी लेकिन चेहरे पर परम संतुष्टि के भाव थे।हम करीब आधे घंटे तक ऐसे ही बेसुध पड़े रहे।इसके बाद मैं ही पहले उठा और निदा को सहारा देकर उठाया और उसे उसी नंगी हालत में चलाते हुए बाथरूम ले आया। पीछे से नितिन भी आ गया।

अब कपड़े तो वैसे भी तन पर नहीं थे। मेरे कहने पर निदा ने हमारे सामने ही पेशाब किया और हमने भी साथ ही उसकी धार से धार मिलाई। तत्पश्चात, मैंने ही शावर चालू कर प्रिया और हम नहाने लगे। निदा ने तो हमें नहीं नहलाया, लेकिन हम दोनों ने मिल कर उसे बड़ी इत्मीनान से ऐसे नहलाया जैसे बच्चे को नहलाते हैं। उसके दोनों छेदों में ऊँगली डाल-डाल के सारी ‘मणि’ बाहर निकाली और साबुन से दोनों छेद अच्छी तरह धोए और उसके साथ चिपट और रगड़ कर खुद भी नहाते रहे।

इस अति-उत्तेजक स्नान में सिर्फ निदा ही नहीं बल्कि हम दोनों भी गरम हो गए और उसे गोद में उठा कर वापस बिस्तर पर ले आए।अब जब नितिन उसके चूचों पर लदा, उसके होंठ चूस रहा था तो मैंने वह मलाई निकाल ली जो मैं अपने साथ ही लाया था। पहले मैंने अपने लंड पर मलाई थोपी। फिर मेरा अनुसरण करते हुए नितिन ने और हम दोनों घुटनों के बल बैठे निदा के चेहरे के इतने पास आ गए कि दोनों के लण्ड उसके गालों को छूने लगे और उसे मलाई चाटने को कहा।

शरमाई तो वह अब भी… लेकिन पहले की तरह आँखें बंद नहीं की, बल्कि चुपचाप पहले मेरा और बाद में नितिन का लण्ड मुँह में लेकर चूसने लगी।भले हम स्नान से उत्तेजित हो गए हों लेकिन अभी हमारे लण्ड पूर्ण उत्तेजित नहीं थे और हमने इस बहाने उसे ढेर से मलाई खिलाई। तब कहीं जाकर हमारे लौड़े पूर्ण रूप से तन पाए कि उसकी गाण्ड का मज़ा ले सकें।

इसके बाद थोड़ी मलाई छोड़ कर बाकी जो भी थी हमने उसके पेट, कंधे, गर्दन और खास कर चूचियों और जाँघों पर मल दीं और दोनों ऊपर-नीचे हो कर कुत्तों की तरह उसे चाटने में जुट गए। अब आनन्द के अतिरेक से निदा की आँखें मुंद गईं और वह हौले-हौले सिसकारने लगी।जब सारे शरीर से मलाई साफ़ हो गई तो बची मलाई मैंने आधी तो उसकी चूत में मली और भर दी और बाकी आधी उसकी गाण्ड के छेद के अन्दर और बाहर मल दी।

अब मैंने नितिन को सीधा लेटने को कहा और उसके ऊपर निदा को कुतिया की तरह ऐसे व्यवस्थित किया कि उसकी चूत बिलकुल नितिन के मुँह पर आ गई और नितिन का लण्ड निदा के मुँह में।

नितिन अब उसकी चूत के अन्दर बाहर भरी मलाई चाटने लगा जो कि पक्का उसके रस से मिल कर कुछ ज्यादा ही स्वादिष्ट हो गई होगी और मैंने उसके चूतड़ थाम कर उसकी गाण्ड का छेद चाटने लगा। साथ ही जीभ नुकीली करके छेद के अन्दर भी उतार देता था। उत्तेजना में निदा नितिन के लण्ड को मुँह में लिए पागलों की तरह चूसने लगी। लेकिन चूँकि अभी हम दोनों ही एक बार झड़ चुके थे तो जल्दी झड़ने का सवाल ही नहीं था इसलिए नितिन को भी उसकी लंड चुसाई से कोई फर्क नहीं पड़ना था।

लेकिन इस चाटम-चाट में मेरे और नितिन के चेहरे इतने पास थे कि हम एक-दूसरे की साँसें महसूस कर सकते थे।कुछ देर बाद निदा अपना एक हाथ उठा कर अपने चूतड़ सहलाने लगी जो कि मेरे लिए इशारा था कि वह अब बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी।

मैंने सीधे होकर अपना लण्ड थूक से गीला करके उसके गुलाबी दुपदुपाते हुए छेद पर रखा और थोड़ा ज़ोर लगा कर अन्दर उतार प्रिया।आप को मेरी कहानी कैसी लगी?कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

श्रृंखला

कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

निदा की अन्तर्वासना

कुल भाग: 4
यह एक बहु-भाग कहानी है। अपनी पसंदीदा कड़ी पर जाने के लिए ऊपर क्लिक करें।

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

Main Aur Meri Chudakkad Patni – Part 3
Group Sex Story

Main Aur Meri Chudakkad Patni – Part 3

Dosto, meri desi sex story padh kar aap email kar rahe hai, iske liye shukriya, please aisa hi karte rahiye.

8 मिनट 685
Cinema hall me chudi meri maa-32
Group Sex Story

Cinema hall me chudi meri maa-32

Pichle part me aapne padha, ki Ravi, Aslam aur Sachin Bharti aunty, Maa aur Chachi ki thukayi kar rahe the. Fir Bharti aunty bhaagne lagi aur Ravi ne usko pakad liya. Ab aage-

8 मिनट 530
Family mein chudai ke darshan-1
Group Sex Story

Family mein chudai ke darshan-1

Hello doston, main aaj batane jaa raha hu ki kaise maine pehli baar apni mummy ko chudte hua dekha.

8 मिनट 500

पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

रोहित कुमार सिन्हा

2 months ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

रजनीश झा

2 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।