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Hindi Chudai Kahani पठन समय: 9 मिनट पढ़ा गया: 831 बार

नये साल के दिन मैंने छोटी बहन काव्या की जबरदस्त गांड मारी-1(Naye saal ke din maine chhoti behan Kavya ki zabardast gaand maari-1)

rajukavya

27 Nov 2014 को प्रकाशित

नये साल के दिन मैंने छोटी बहन काव्या की जबरदस्त गांड मारी-1(Naye saal ke din maine chhoti behan Kavya ki zabardast gaand maari-1)
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जैसा कि आपने मेरी पिछली कहानी में पढ़ा होगा कि कैसे मैंने अपनी छोटी बहन काव्या की चुदाई की। उस दिन जब मैंने काव्या से बोला कि अब गांड मारूंगा तो वो दर्द की वजह से छटपटा रही थी। तो उसने बोला कि,‌ “अब दो दिन तक मुझसे बोलना भी मत”।

तो इस वजह से मैं उसे मनाने लगा कि किसी तरह अपनी गांड मुझे सौंप दे, ताकि मैं उसकी गांड की खुदाई करके मजे ले सकूं और उससे मिलने वाले असीम सुख का आनन्द प्राप्त कर सकूं। पर उसने मुझे हाथ तक नहीं लगाने दिया।

उसके बाद मां-पापा घर लौट कर आ गए, तो हम दोनों को कभी चुदाई करने का मौका नहीं मिल पाता था। दिन बीतते गए, हफ्ते बीत गए, महीने बीतने लगे, पर कोई मौका नहीं मिला। फिर मैं एक दिन बहुत हिम्मत करके रात में काव्या के रूम में जाकर उसको किस करने लगा और उसे चुदाई के लिए तैयार करने लगा।

हम दोनों किस कर रहे थे। फिर जैसे ही मैंने काव्या की कुर्ती को निकाल ब्रा के ऊपर से ही चूचियां मसलनी शुरू की, तुरन्त काव्या की सिसकारियां निकलने लगी। उसकी सिसकारियों की वजह से मैं जोश में होश खो बैठा और काव्या की चूचियों को दांत से काट लिया। तो काव्या चीख निकल गयी।

चीख सुन कर मां जब आई तो हम दोनों डरे हुए थे। पर इस बार जब मां ने पूछा क्या हुआ तो काव्या बोली, “कुछ नहीं मां, वो छिपकली ऊपर से बिस्तर पर गिर गई थी”। तो मां ने मुझसे पूछा कि, “12 बजने वाले हैं, सोना नहीं है क्या”? तो मैंने बोला कि, “सोना है मां, पर अभी थोड़ी देर और काम कर लूं फिर”।

फिर मां चली गई। उनके जाने के करीब 10 मिनट बाद काव्या देखी तो उसकी चूची के निप्पल पर मेरे दांत के निशान आ गए थे। तो मैंने उससे माफी मांगी। पर वो तुरन्त मुझे गले से लगा कर बोली, “ये दर्द अच्छा था और मजा भी आया”। और मेरे होठों पर अपना होंठ रख कर बोली, “मुझे ले चलो यहां से दूर, जहां हम हो, तुम हो, और हम दोनों की चुदाई हो बस”।

इतना कहते ही वो मेरे ऊपर चढ़ गयी, और मुझे किस करने लगी। उस रात हम दोनों एक-दूसरे के साथ कपड़े के ऊपर-ऊपर से ही खूब मजे किए, और उसी दौरान मेरे लंड से पानी निकल गया।

फिर ऐसे ही दिन बीतते गए, पर हमें चुदाई का मौका नहीं मिला। पर कहते हैं ना जब भगवान देता है तो छप्पर फाड़ कर देता है।

फिर पापा और मम्मी नये साल के पहले ही कुछ काम के सिलसिले में मुम्बई निकल गए। काव्या के सेमेस्टर में दो सब्जेक्ट के एग्जाम बचे होने की वजह से वो नहीं गयी, तो मुझे भी रूकना पड़ा, जो हम दोनों के लिए अच्छा साबित हुआ। पापा ने बोला कि, “काव्या को जो भी चीज की जरूरत हो, ला कर दे देना”। मैंने बोला, “ठीक है पापा, मैं अच्छे से ख्याल रखूंगा”। और फिर मां-पापा चले गए।

फिर मैं पापा के जाते ही तुरन्त काव्या से बोला कि, “चलो आज मूवी देखने चलते हैं”। तो काव्या बोली कि, “अभी आज नहीं, मेरे एग्जाम के बाद चलेंगे”। तो मैंने बोला, “देख ले, मैं जा रहा हूं”। तो वो कुछ सोच कर बोली कि, “कोई मूवी घर पर ही देख लेंगे साथ में लैपटाप में”। मैंने कुछ देर तक सोचा और  फिर कुछ खुराफाती मेरे दिमाग में आया और मैंने बोला, “ठीक है फिर घर पर ही देख लेंगे”।

फिर मैंने बोला, “मैं बाजार जा रहा हूं, अभी आता हूं”।‌ तो वो भी बोली कि, “ठीक है”। मैं बाजार गया और मेडिकल स्टोर से कंडोम के 4 पैकेट ले आया, क्यूंकि इसकी जरूरत पड़ने वाली थी इन दिनों। और खाने के लिए काव्या के लिए बर्गर ले आया जो काव्या को बहुत पसन्द था। फिर काव्या बर्गर खाने के बाद मुझे थैंक्स बोली। तो मैंने उससे कहा, “थैंक्स से काम नहीं चलेगा”। तो हम दोनों क्या बात किए, वो पढ़िए-

मैं: कुछ याद है तुझे हमारी कुछ चीजें अधूरी रह गई हैं?

काव्या: अनजान बनते हुए, कौन सी चीजें?

मैं: भूल गई पागल?

काव्या: आप बताओ ना तब याद आएगा मुझे?

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मैं: ठीक है रात में बताऊंगा। चलो पहले खाना बना कर खा लेते हैं।

काव्या: ठीक है भैया, मैं तब तक सब्जी काट लूं।

फिर हम दोनों खाना बना कर खाए, और दोनों बैठ कर टीवी देखने लगे। तभी मैंने काव्या से पूछा कि, “तेरा एग्जाम 31 को है ना”? तो वो बोली कि, “हां 31 दिसम्बर को और फिर 5 जनवरी को है”। तो मैंने उसे बोला कि, “ठीक है अच्छे से पढ़ाई कर”। पर मैंने उसे ये नहीं बोला कि मुझे कुछ तूफानी करने का मन था।

फिर वो 31 को अपना एग्जाम देकर आई और बहुत खुश नज़र आ रही थी। तो जब मैंने उसके खुशी का राज पूंछा तो वो बोली, “एग्जाम बहुत अच्छा हुआ है”। मैंने उसे बोला कि, “बस ऐसे ही पढ़ती रहो, पर मेरा भी ख्याल रखा करो”।

काव्या बोली, “आपका ख्याल? आपका ख्याल तो रखूंगी ही, आपको कैसे भूल जाऊंगी”? उसने मुझे एक झप्पी दी और मेरे कान में बोली, “आज रात तैयार रहना, कुछ तूफानी करते हैं”। मैंने बोला कि, “मैं भी यही सोच रहा था, पर मैंने कुछ बोला नहीं”। तो काव्या बोली, “भैया आप भी ना इतना शरमाते क्यूं हो? मैं आपकी ही तो हूं”।

फिर 31 दिसम्बर की शाम मैं काव्या को लेकर मार्केट घूमने गया, और फिर वहां हम दोनों ने टिक्की और बर्गर खाया, और साथ में नये साल के उपलक्ष्य में केक काटने के लिए केक ले लिया हमने। फिर हम दोनों घर आ गए। घर आकर हम दोनों टीवी आन करके बैठ गए। फिर मां-पापा का काल आया तो हम दोनों ने बात की। फिर बैठ कर लैपटाप पर मैंने एक पॉर्न मूवी चलाई और देखने लगे।

रात के करीब 10 बज चुके थे, तो ठंड भी बढ़ने लगी थी, पर हम दोनों पॉर्न देख कर गर्म होने लगे और काव्या मेरे करीब आकर मुझसे चिपकने लगी। मैं भी उसकी चूचियों को मसलने लगा और धीरे-धीरे करके वो मेरे कपड़े निकालने लगी। मैं भी उसके कपड़े निकाल दिया, और अब वो एक-दम नंगी हो चुकी थी। उसके 34” के पपीते के आकार की चूचियां हवा में झूल रही थी। उसकी गोरी टांगो और मांसल जांघो के बीच उसकी चूत हल्की-हल्की झांटो के बीच छुपी हुई थी।

पर मैं तुरन्त केक ले आया और दोनों ने मिल कर केक काटा, और एक-दूसरे को खिलाया। तभी मैंने केक लिया और काव्या की दोनों चूचियों तथा उसके चूत पर केक का क्रीम लगा दिया। तो काव्या भी मेरे खड़े लंड पे और मेरे सीने पर लगा दी। फिर मैं तुरन्त उसकी चूचियों से क्रीम को चाट-चाट कर खत्म करने लगा तो वो मजे में झूम रही थी। उसकी चूचियां टाईट होने लगी थी, और निप्पल तन चुके थे।

इससे मुझे ये एहसास हो गया कि वो गर्म हो रही थी। फिर मैंने उसकी चूत के अन्दर अपनी जीभ लगा दी, और तुरन्त काव्या उछल गयी। शायद ये स्पर्श उसे बहुत अच्छा लगा था।‌ वो अपने होठों को दांतो से दबाने लगी, और फिर जीभ दबाते हुए मुंह से सांस खींचने लगी, जो अत्यंत पीड़ा या आनंद के कारण मुंह से निकल रहा था। वो ‘सी सी’ करते हुए सीत्कार करने लगी।

मैंने चाट कर पूरा केक साफ कर दिया। काव्या की चूत की भीनी खुश्बू मुझे मदहोश कर रही थी। मेरा लंड बार-बार सलामी दे रहा था। तभी काव्या को मैंने इशारे में बोला, तो वो मेरे लंड को चूसने लगी और क्रीम साफ करने लगी।

कुछ ही देर मे हम दोनों चुदाई के लिए तैयार हो गए थे, और काव्या भी अब मुझे चोदने के लिए उकसाने लगी थी। मेरा हर एक स्पर्श उसके बदन में झटके दे रहा था, और वो अपने पैरों को सिकोड़े जा रही थी।

इसके आगे की कहानी अगले पार्ट में। कमेंट करके बताइएगा कहानी कैसी लगी।

धन्यवाद!

अगला भाग पढ़े:-नये साल के दिन मैंने छोटी बहन काव्या की जबरदस्त गांड मारी-2

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