किस्से पर वापस जाएं
चाची की चुदाई पठन समय: 9 मिनट पढ़ा गया: 668 बार

मेरी काम वासना के रंगीन सपने -4

इमरान

12 Jul 2014 को प्रकाशित

मेरी काम वासना के रंगीन सपने -4
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

अब तक आपने पढ़ा..

फिर मैंने सोचा.. मेरे गद्दे और चादर पर अपना रस छोड़ेगा… ईएश.. कितना गंदा काम.. ऐसा कितने बार उसने रस छोड़ा होगा? मुँह में लार और पेशाब की तरह वीर्य भी काफ़ी पर्सनल चीज़ है। दूसरों के लिए अछूत सी होती है।

बेचारा और कर भी क्या सकता है.. मुझे सुबह चादर धोने के लिए डालनी ही होगी.. गद्दे को बाद में देखूँगी।इन्हीं ख़यालों में मग्न होकर अपने बेडरूम के बिस्तर पर लेट गई।मुझे नींद नहीं आ रही थी.. भान्जे की हरकत दिमाग़ में छाई रही।

मुझे अपने कुँवारे दिन याद आ गए.. मैं सोचने लगी कि कब से कर रहा था यह हरकत..? इस पढ़ाकू बुद्धू में इतनी सेक्स की प्रेरणा कैसे आ गई..? किताब कहाँ से लाया..? क्या जानता है सेक्स के बारे में..? वीर्य स्खलन के वक़्त सीत्कारी भरता है क्या..?मर्दों को चरम सुख पर कैसा अनुभव होता होगा?

अब आगे लिख रही हूँ..

धीरे-धीरे मेरे ख़याल और भी रंगीन होने लगे कि उसका लण्ड कैसा होगा.. कितना बड़ा होगा.. वीर्य कैसा होगा? क्या उसने किसी लड़की के साथ सेक्स किया है? उसकी कोई गर्लफ्रेंड तो नहीं है.. जिसके साथ वो सब कुछ कर चुका हो.. इसे ‘स्वयं सुख’ के बारे में किसने बताया होगा? लड़कें ‘स्वयं सुख’ पाने के लिए के कितने तरीकों से अपने अंग को उत्तेजित करते हैं.. एकांत में हस्तमैथुन करने के बाद जब वीर्य छोड़ते हैं.. तो उसका क्या करते हैं? भान्जे के वीर्य की गंध कैसी होगी?

मेरा पूरा जिस्म पसीने से भीग गया था। मैं काफ़ी गरम हो चुकी थी.. तुरंत हाथों से अपनी ‘छोटी’ को प्रेरित करने लगी। दिमाग़ में विकृत कल्पनाएँ अभी भी कुछ शेष बची थीं.. मेरा जी करने लगा कि भान्जे की तरह अपने कामांग को किसी चीज़ के साथ रगड़ कर सुख पा जाऊँ..। तभी मेरी नज़र एक मोटी मोमबत्ती पर पड़ी.. जो अक्सर बिजली जाने पर जला लेती थी.. वो बिस्तर के बगल के टेबल पर रखी थी।

उसे मैंने हाथ में लेकर अपनी योनि के लिए परखा.. काफ़ी बड़ी और मोटी सी थी.. लंबे समय तक ‘जलने’ वाली।

मोमबत्ती को बिस्तर से लंबाई के हिसाब सटा कर रख दिया.. जब मैं लेटती तो ठीक उस जगह लगा दी.. जहाँ मेरी योनि आ रही थी.. फिर मैं ठीक उसके ऊपर लेट गई और अपने हाथों से उसको ठीक किया ताकि मोमबत्ती की लंबाई मेरी योनि के ठीक नीचे हो।

मोमबत्ती को योनि छिद्र पर दबाया तो एक मधुर अनुभव हुआ.. योनि और बत्ती के बीच मेरी नाईटी और पेटीकोट के कपड़े थे.. इस वजह से दर्द या चुभन नहीं था.. लेट कर मैंने जवानी की उन किताबों की कहानियाँ याद किया और धीरे से योनि को मोमबत्ती से रगड़ने लगी।

पति देव को अच्छी तरह मालूम था कि मैं कभी-कभी हस्तमैथुन मैथुन कर लेती हूँ.. कई बार मेरी सिसकियाँ सुनकर उठ जाते और गौर से मुझे देखते रहते। उनकी आँखों के सामने ही मैं अपनी योनि को ज़ोरों से घिसती और रगड़ती रहती और मादक स्वरों में मिल रही सुख का आनन्द लेती रहती।

अब की ज़ोरदार सीत्कारियों से पति जागे और बोले- चुपचाप करो ना.. या दूसरे कमरे में जाकर रगड़ लो..मुझ पर उनकी बातों का कोई असर नहीं हुआ.. मेरे कपड़े योनि के रस से गीले हो चुके थे।कुछ ही पलों के बाद मेरा शरीर हल्का हुआ और एक मीठी नींद आने लगी.. मैंने बत्तियाँ बुझा दीं।

सब लोगों के दिमाग़ में सेक्स की प्रेरणा और दबाव एक जैसे नहीं होती।कुछ लोगों में सेक्स की इच्छा बहुत होती है.. तो कुछ लोगों में सेक्स की इच्छा मामूली सी होती है।

मैं उन लड़कियों में से हूँ जिनमें काम वासना और रति की इच्छा 19 साल के उम्र से ही कुछ ज़्यादा ही उभर उठी थी।

शादी मेरे लिए उस द्वार का टाला गया था.. जिसको खोलना मेरे जैसी कुँवारी लड़कियों के लिए पाबंदित था। जबकि उस दौर में मेरी कुछ सहेलियों के ब्वॉय-फ्रेण्ड थे.. जिनके साथ उन्होंनें इस द्वार को तोड़ डाले थे.. पर मैं ऐसे परिवार से थी.. जहाँ इच्छाओं को लाज और इज़्ज़त के बल पर दबा देना चाहिए जैसी मान्यताएं थीं।इस सबके लिए शादी के बाद कोई पाबंदी नहीं होती है।

मेरी कम उम्र में शादी हो गई थी.. लेकिन तब भी मेरा शरीर शादी के बाद सेक्स के लिए पूरी तरह से तैयार था।कम उम्र में ही मेरी माहवारी शुरू हो गई थी और मैं इस सब के लिए परिपक्व हो गई थी।एक मर्द को सुख देकर उसके बच्चे की माँ बनने के लिए मैं समर्थ थी। केवल 19 साल की उम्र में मेरा जिस्म एक 25 साल की औरत की जवानी से भारी था।

सुहागरात को मैंने सिर्फ़ थोड़े ही देर तक लाज शर्म का ढोंग किया और पहली ही रात में मैं लड़की से औरत बन गई थी। जब मेरे पति ने मेरे कौमार्य को भंग करते हुए अपनी जवानी को मेरे यौवन में समा दिया और अपना बीज मेरी कोख में बो दिया।

पूरी तरह से विवस्त्र.. मैंने हर उल्लंघन को तोड़ दिया और पति को अपनी अनछुई जवानी के मर्मांग को खुलकर परोस दिया।

पतिदेव ने मेरे उन हर अंग को दबा-दबा कर खूब टटोले और चूमने लगे.. जिन्हें आज तक मेरे सिवा और कोई नहीं देख सका था। पति की उस मदभरी सख़्त ‘मर्दानगी’ को जब मैंने अपने हाथ में लिया.. तो मेरा मन उस मधुर अनुभव को पूरी तरह से संभाल नहीं पाया और मैंने कामुक सीतकारियाँ भरते हुए.. उसे दबा-दबा कर.. अपने मदभरे यौन अंग के छिद्र से मिला दिया।

सुहागरात वैसे ही कटी.. जैसे मैंने सपना देखा.. पर मेरी ज़िंदगी सिर्फ़ एक दिन की ख़ुशी थी.. पति की छोटी सोच.. छोटी सोच से ग्रसित सड़ा सा आत्मसम्मान.. निकम्मापन इत्यादि.. बहुत जल्दी ही बाहर आ गए।

खुशी के कुछ पल जल्दी ही ख़तम हो गए और हमारे बीच एक बर्फ की दीवार बनने लगी.. जो सीधे बिस्तर पर ख़त्म हो रही थी। पति अपनी कमज़ोरियों को पत्नी पर ज़ाहिर करने लग जाए.. तो शादी की गर्मी लगभग ख़्त्म ही समझो।

बिल्कुल मेरे माता-पिता की तरह पति भी मेरी खूबसूरती से परेशान थे। उनकी नाकामयाबी.. मेरे खूबसूरती से हर पल हार रही थी।

उनके ज़हन में बस एक ही ख़याल था कि लोग यही बात कर रहे होंगे कि ऐसी हसीन बीवी के साथ ऐसा नाकामयाब इंसान कैसा? इस छोटे ख्याल की वजह से उन्होंने मेरे साथ आँखें मिलाना भी छोड़ दिया।बिस्तर पर बर्फ की दीवार जम चुकी थी और हमारे दोनों के बीच मीलों का फासला बन चुका था.. जिसके कारण हमारा मिलन पूरी तरह से बन्द हो गया था।

केवल 20 साल की उम्र में ही मेरे विवाहित जीवन का आखिरी पत्ता गिर चुका था.. कभी-कभी उनके मन में थोड़ी सी आत्मविश्वास भरी हिम्मत उभरती.. और वो रात को मेरे ऊपर मुझे आज़माने के लिए चढ़ जाते थे.. ऐसे मौकों पर मैं भी खुलकर उनका साथ देती.. यही सोचकर कि बुझते दिए में तेल डाल कर ज्योति को और तेज करूँ.. लेकिन ज्योति थोड़ी देर में ही बुझ जाती और वो बिना कुछ हासिल किए ही ढेर हो जाते।

अपने पति के साथ वो अधबुझी आग एक सुलगती लौ की तरह मेरे अन्दर ऐसी आग लगाकर रह जाती.. जो मुझे रात भर जलाती रहती।आख़िर मायके जाकर की सहेलियों से मिली.. और हस्तमैथुन प्रयोग सीख कर उसके उपचार से खुद को शांत करने लगी।

पिताजी ने इस बेरंग शादी को अपनी नाकामयाबी के क़िस्सों में एक और किस्सा बनाकर अपना मुँह मोड़ लिया।

दोनों बहनें बच्चों की परवरिश में मग्न मुझसे दूर हो गईं। माँ भी क्या करती.. खुद हालत से मजबूर मुझे भी वही नसीयत देती.. जो उन्होंने अपनी जीवन में इस्तेमाल किया।हालत से सुलह कर लो और पूजा-पाठ में लगे रहो..

केवल 20 साल की उम्र में पूजा-पाठ कैसे होगा? जब मन और तन की माँगें ज़ोर पकड़ रही हैं। मन को कैसे काबू करूँ? जवानी की आग को कैसे बुझा दूँ?

यही सब सोचते हुए मैं अपने भांजे से रिश्ता बनाने के लिए सोचने लगी।मेरे प्रिय साथियो, इस दास्तान की लेखिका नगमा तक आपके विचारों को भेजने के लिए आप डिसकस कमेंट्स पर लिख सकते हैं..धन्यवाद।

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

श्रृंखला

कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

मेरी काम वासना के रंगीन सपने

कुल भाग: 4
यह एक बहु-भाग कहानी है। अपनी पसंदीदा कड़ी पर जाने के लिए ऊपर क्लिक करें।

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

बुआ के साथ अधूरे सेक्स का राज हमेशा रहेगा राज
चाची की चुदाई

बुआ के साथ अधूरे सेक्स का राज हमेशा रहेगा राज

हाफ सेक्स Xx चुदाई कहानी में मेरी बुआ के घर में मैं बुआ की बिना ब्रा की चूचियां देखता था. एक दिन मैं उनके साथ लेटा था तो मैंने उनके साथ क्या क्या किया?

11 मिनट 1,126
गाँव की विधवा चाची को चोदा
चाची की चुदाई

गाँव की विधवा चाची को चोदा

आंटी सेक्स कहानी में मुझे भाभियों और चाचियों को चोदने में मजा आता था. बाहर से पढ़ाई पूरी करके मैं गाँव आया तो घर के पास वाली विधवा चाची को चोदने की इच्छा बलवती हुई.

13 मिनट 483
चाची की गर्म बहन की शानदार चुदाई
चाची की चुदाई

चाची की गर्म बहन की शानदार चुदाई

हॉट न्यूड सेक्स स्टोरी में मैं चाचा के घर गया तो वहां उनकी छोटी साली आई हुई थी. मस्त माल हो चुकी वो शादी के बाद. मैं उसे देखते ही अपना लंड सहलाने लगा.

11 मिनट 1,036

पाठकों की राय

1 टिप्पणी

जानू शर्मा

6 days ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।