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Group Sex Story पठन समय: 13 मिनट पढ़ा गया: 534 बार

मेरे दोस्त की पत्नी और हम तीन -5

सरस चन्द्र

29 Jul 2024 को प्रकाशित

मेरे दोस्त की पत्नी और हम तीन -5
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दोस्तो, मैं आपका अपना सरस एक बार फिर हाजिर हूं अपनी कहानी के अगले और अंतिम भाग के साथ। मेरी ग्रुप सेक्स कहानी पढ़ने के बाद आप में से किस किस पाठक और पाठिका ने कहानी पढ़ते हुए अपने आप को इस ग्रुप सेक्स में शामिल किया, किसने अपने आप को सरस, रमन और सोहित माना तो किसने नीलम का किरदार निभाया, मुझे बताइएगा जरूर।सभी भाभियों और चाचियों से मेरा निवेदन है कि आप मुझे मेल लिखकर जरूर बतायें कि सरस की कहानियां आपका पानी निकाल पाती है या नहीं।

कहानी के पिछले भाग में आपने पढ़ा कि हम तीनों नीलम के साथ बेडरूम में नंगे पड़े हुए थे। मैं नीलम का मुखचोदन कर उसे अपने वीर्य का पान करवा चुका था और रमन अब अपनी बारी संभालने के लिए उत्सुक था।अब आगे:

रमन ने नीलम भाभी को बिस्तर पर लिटा प्रिया। सोहित ने नीलम की चूत को चाट चाट कर पूरा गीला कर प्रिया था। उसकी चूत से पानी झरने की तरह झर रहा था। शायद सोहित के लगातार चूत चाटने के कारण नीलम एक बार झड़ चुकी थी।

“चोदो रमन चोदो, अपनी भाभी की चूत की आग को आज तुम तीनों मिलकर भी शांत नहीं कर पाए तो लानत है तुम तीनों की मर्दानगी पर!”नीलम के मुंह से ये शब्द सुनकर हम तीनों ही जोश में आ गए और रमन ने नीलम के पैरों को खोलकर अपने लंड को उसकी चूत पर लगा प्रिया और अगले ही पल एक ही झटके में पूरा का पूरा लन्ड फिसलता हुआ नीलम की चूत में गहराई तक समा चुका था।

नीलम अचानक हुए इस हमले से संभल नहीं पाई और आनन्द और दर्द के दोहरे मिश्रण के कारण अपनी गान्ड को उठाकर चिहुंक पड़ी। नीलम के गांड उठाने की वजह से रमन का लन्ड और भी अधिक गहराई तक नीलम की चूत में समा गया। रमन थोड़ा रुका और नीलम को आराम लेने देने लगा। नीलम के मुंह को अब सोहित चोद रहा था। लगातार मुंह चोदन की वजह से नीलम का मुंह शायद दर्द करने लगा था या फिर चूत में लंड को पाकर नीलम का उतना ध्यान मुंह में पड़े लंड पर नहीं था। इसलिए सोहित का लन्ड नीलम ठीक तरह से चूस नहीं पा रही थी।

मैंने नीलम के बूब्स पर मोर्चा संभाला हुए था।

रमन नीलम की चुदाई किए जा रहा था। जब भी सोहित का लन्ड नीलम के मुंह से बाहर आता तो नीलम के मुंह से एक ही आवाज आती- चोदो रमन … चोद डाल अपनी भाभी को … अहहआह उम्महअह आहआह!नीलम अपने आनन्द के चरम पर थी। रमन लगातार उसकी चूत को अपने लन्ड के शॉट से बजाए जा रहा था। पूरा कमरा थप थप थप के साथ अहहआह वाहउह उम्म्ह… अहह… हय… याह… ऊम्म अहहह की सिसकारियों से गूंज रहा था। हम चारों ही एक अलग दुनिया में थे।

करीब दस मिनट की चुदाई के बाद रमन की स्पीड अब तेज होने लगी थी। शायद वो अब झड़ने वाला था। रमन नीलम को जानवरों की तरह तेजी से चोदे जा रहा था। रमन का हर एक शॉट अब नीलम को ऊपर खिसका देता और सोहित का लन्ड नीलम के मुंह से निकल जाता। सोहित अब नीलम के पेट पर आ गया था और नीलम चिल्लाने लगी थी- चोद रमन चोद … चोद डाल मुझे … अह्हह आह आह … आह हम्मम … कर दे मेरी चूत की आग को ठंडा रमन, चोद मेरे प्यारे राजा … चोद डाल अपनी भाभी को … आह अह्हह हआह हम्म!

“भाभी, मेरा होने वाला है!” रमन बोला।“हाँ आजा मेरे राजा, तेरे साथ मैं भी अपना पानी निचोड़ दूंगी. भर दे मेरी चूत को!” और नीलम अपनी गांड उठाकर खुद भी लंड को गहराई तक लेने की कोशिश करने लगी।थोड़ी देर बाद रमन नीलम की चूत की गर्मी के आगे टिक नहीं पाया और शायद नीलम भी अपने अंजाम तक पहुंच गई थी। रमन नीलम के पैरों के बीच अपना मुंह फंसाकर उसके पेट पर निढाल होकर गिर गया। नीलम उसके बालों में अपने हाठों को घुमाने लगी। मैं और सोहित भी नीलम को किस करने लगे थे।

रात का एक बज चुका था और हम अभी तक अपनी प्यास, अपनी वासना को शांत करने की नाकाम कोशिश में लगे हुए थे।

थोड़ी देर आराम करने के बाद हम फिर से एक नए घमासान के लिए तैयार हो गए। अबकी बार मैं और सोहित दोनों एक साथ नीलम की जवानी पर हमला बोलने वाले थे। नीलम को कमर के सहारे बगल से बिस्तर पर लिटाकर हम दोनों ने नीलम को अपने बीच सैंडविच के मसाले की तरह दबा लिया था। नीलम ने अपनी एक टांग रमन के कंधे पर टिका दी जो सबसे नीचे बैठकर उसके पैरों को किस कर रहा था। नीलम ने जैसे ही अपनी टांग उठाई, उसकी चूत खुलकर मेरे लन्ड के सामने आ गई और गांड सोहित के लंड के सामने। हम दोनों ने एक साथ मोर्चा संभाला.

और आने वाले पल के लिए नीलम शायद तैयार थी, शायद वो भांप चुकी थी कि हम क्या करने वाले थे। मैंने अपने लन्ड को नीलम की चूत पर और सोहित ने अपना लन्ड नीलम की गांड पर टिका प्रिया। रमन और मैं धीरे धीरे अपने अपने लन्ड अब अंदर घुसाने लगे। नीलम को चूत की बजाय गांड में लंड लेने में ज्यादा तकलीफ हो रही थी। वो अपने आप को आगे खिसकाकर पीछे से होने वाले हमले से बचने की कोशिश करना चाह रही थी लेकिन आगे से मैंने दबाकर उसे जकड़ा हुए था तो नीलम हिल भी नहीं पा रही थी।

जैसे जैसे हमारे लंड उसकी चूत को, गांड को चीरते हुए अंदर जा रहे थे, नीलम की तकलीफ बढ़ती जा रही थी। जब हम अपने पूरे लंड नीलम की चूत और गांड की गहराई में उतार चुके तो नीलम को शांति देने के बहाने से थोड़ा रुके और उसके होंठों को और गर्दन को चूमने लगे। रमन उसकी जांघों को चूम रहा था।

अब नीलम भाभी की आँखें बंद सी होने लगी, शायद उसे अब आनन्द की अनुभूति होने लगी थी।

वक़्त की नजाकत देखते हुए हमने दोनों तरफ से एक साथ धक्के लगाना शुरू किया। नीलम के मुंह से ‘आश्चह अहह आह आह हम्म हाः ह्हहम्म …’ की आवाजें निकलना शुरू हो गई। नीलम बड़बड़ाने लगी- चोदो सरस चोदो मेरी चूत को!

मैं उसके बूब्स को पी रहा था और उसकी चूत की गहराई को अपने लन्ड की लम्बाई से नापे जा रहा था। नीलम आनंदित हो रही थी- फ़ाड़ दो मेरी गान्ड को सोहित … आह्ह हम्मम … वाह कितना मजा आ रहा है। कब से मैं इस आनंद के लिए तड़प रही थी। आह्ह हम्म अहह ओहह अःह्ह आह हम्म्म महम्म … आह चोदो … सरस फ़ाड़ दो मेरी चूत को। मेरी इस चूत को अपनी दासी बना लो सरस … आह्ह हम्मम अह ओह हअःह्ह आह हम्म आह!

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नीलम बड़बड़ा रही थी, हम दोनों भाभी की चुदाई किए जा रहे थे। सोहित कुछ ज्यादा ही जोश में था और उसकी गान्ड को बड़ी स्पीड से चोद रहा था।“फ़ाड़ दो मेरी चूत को … मेरी गान्ड को मेरे शेरो … फ़ाड़ डालो!” नीलम चिल्ला रही थी।

आठ दस मिनट तक धक्के मारने के बाद हम दोनों ने अपनी जगह बदल ली और सोहित को मैंने नीलम की चूत का स्वाद चखने के लिए भेज प्रिया और मैं नीलम की गांड का स्वाद चखने के लिए आ गया।

एक बार फिर से हम दोनों के लंड नीलम की गांड और चूत की गहराई में थे। हम दोनों ने नीलम को चोदना शुरू किया और नीलम ने सिसकारियां भरना। नीलम की सिसकारियां हमें और ज्यादा उत्तेजित कर रही थी।“मैं झड़ने वाला हूं भाभी!” सोहित बोला।

सोहित को फ्री स्टाइल में चूत की चुदाई का अवसर देने के लिए मैं नीलम की गांड से अलग हो गया और सोहित नीलम को सीधा करके अब उसके ऊपर चढ़कर आ गया। सोहित ने एक ही झटके में अपना पूरा लंड नीलम की चूत में उतार प्रिया और नीलम चिल्लाई- अःह्हह अह हम्म आह आह आहम्म!

सोहित नीलम को बहुत ही तेज चोद रहा था। इस तेजी में नीलम के उछलते हुए 32″ के बूब्स बहुत मस्त लग रहे थे। सोहित अपने वीर्य से नीलम की चूत को लबालब कर चुका था। नीलम की चूत से सोहित का वीर्य बाहर निकालने लगा था। सोहित ने अपने आप को नीलम की बांहों में ढेर कर प्रिया था। कुछ देर बाद सोहित उठा और अपने आप को फ्रेश करने बाथरूम में चला गया।

नीलम ने अपनी चड्डी से अपनी चूत को साफ किया और मेरी तरफ देख कर मुस्कुराई। यह मुस्कुराहट मेरे लिए इशारा थी कि ‘आओ, अब तुम भी अपने आप को मेरे अंदर समाहित हो जाने दो। अपने आप को मेरी बांहों के साए में ढेर होने दो।’मैं उठकर उसके पैरों के बीच में आ गया और अपना लन्ड नीलम की चूत में घुसा प्रिया।

नीलम चिहुँकी … मैंने धक्के मारना शुरू किया और नीलम ने सिसकारियां भरना ‘आह मेरे सरस … अब इत्मीनान से मेरी चूत बजाओ … आह्ह हम्म अहह ओहह अःह्हह … चोदो सरस आह! चोदो मेरी चूत को … आह हम्म्म महम्मह आह!नीलम मेरे लंड के हर शॉट के साथ ही मुझसे ज्यादा लिपटती जा रही थी। शायद वो भी मेरी तरह अपनी मंजिल के करीब थी। नीलम की चूत में लगने वाला हर एक धक्का मुझे मेरी मंजिल के करीब ले जा रहा था।

अब वो वक़्त आ गया जब हम दोनों शांत होने वाले थे। हम दोनों ने एक दूसरे को अपने बहुपाश में जकड़ लिया था और अपनी कामाग्नि को शांत करने लिए दोनों की तरफ से धक्के शुरू कर दिए। नीलम अपनी गांड उचकाकर मेरे लन्ड का सहयोग करने की कोशिश कर रही थी और मैं अपने लन्ड के झटके से उसे वापस नीचे पटक देता।

कुछ धक्कों के बाद मैंने अपना वीर्य नीलम की चूत में भर प्रिया और शायद नीलम की चूत भी अपना वीर्य मेरे लन्ड को चखा चुकी थी। नीलम ने मुझे कसकर अपनी बांहों में भर लिया और मुझे किस करने लगी। साथ ही मैं भी उसे किस करने लगा।

अब तक रमन और सोहित भी आ चुके थे। हम दोनों एक साथ लेटे हुए थे। हम चारों एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा दिए।सुबह के दो बज रहे थे। मैंने रमन और सोहित को तैयार होने के लिए कहा क्योंकि हम मोहित के जागने तक रुकना नहीं चाहते थे।

रमन गाड़ी निकालने लगा और सोहित कपड़े पहनने। मैं अभी तक नीलम से चिपटा हुए था।“अब तो खुश हो मेरी जान … या अब भी कोई ख्वाहिश बाकी रह गई?” मैं नीलम के कान में फुसफुसाया।नीलम शर्मा गई और अपना मुंह मेरे सीने पर रखकर मुझे थैंक्स बोलने लगी- बस मुझे इसी तरह चोदते रहना! मैं सेक्स की प्यासी हूं!कहकर नीलम मुझे किस करने लगी। मैं मुस्कुरा प्रिया।

“अब हमें चलना चाहिए क्योंकि आधे घंटे में चार बज जाएंगे। फिर तुम्हें भी आराम करना है।” मैंने नीलम को कहा।नीलम ने हमें रोकना चाहा लेकिन हम अपने कमरे पर वापस आ गए।

पूरे रास्ते हम तीनों की निगाहें आपस में एक ही सवाल करती रही कि आखिर यह जो भी हुआ क्या सही हुआ?इस सवाल के जवाब में आप सभी के मेल्स का मुझे इंतज़ार रहेगा।

मैं यहां संदेश देना चाहूंगा अच्छे घरों की उन सभी भाभियों, चाचियों और खूबसूरत हसीनाओं को जो शादीशुदा हैं या कुंवारी हैं, जो घर में अकेली रहती हैं या जिनके पति घर से बाहर रहते हैं या जो अपने साथी से संतुष्ट नहीं हैं दिन रात सेक्स की आग में जलती रहती है, सेक्स करना तो चाहती हैं लेकिन समाज और घर के डर से कह नहीं पाती, बदनामी के डर से कर नहीं पाती। सही भी है आजकल की इस दुनिया में ‘किस पर भरोसा करे, किस पर नहीं करे’ बड़ा ही मुश्कल है ये तय कर पाना।

मुझे आप सभी के मेल का इंतजार रहेगा मेरा मेल आईडी है support@mohakkisse.com

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मेरे दोस्त की पत्नी और हम तीन

कुल भाग: 5
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

विक्रम चौहान

1 month ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

आशीष मोरे

2 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

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