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Hindi Chudai Kahani पठन समय: 14 मिनट पढ़ा गया: 547 बार

मल्लिका मेरी जान (आंटी की बहू)-1(Mallika meri jaan (aunty ki bahu)-1)

dilip1780

13 Feb 2015 को प्रकाशित

मल्लिका मेरी जान (आंटी की बहू)-1(Mallika meri jaan (aunty ki bahu)-1)
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हाय दोस्तों, मैं दिलीप फिर से एक बार अपनी कहानी ले आया हूं। आपने पिछली स्टोरी में पड़ा के कैसे मैंने अपने पड़ोस वाली आंटी की चूत मारी थी। अब उसकी बहु मल्लिका की चूत चुदाई की कहानी।

अगर वो स्टोरी नहीं पड़ी है तो ज़रूर पढ़े। तब ज्यादा मजा आएगा। आप लोग जी-चैट कर सकते है मुझे, और स्पेशली 30 से 55 इयर्स की औरतों का स्वागत है।

सुबह 10 बजे आंटी के रूम पे पहुंच गया था, और आप तो जानते है कि अंकल दवा खा कर इस दुनिया से अपना कनेक्शन काट के गहरी नींद में चले जाते है। बेडरूम में आंटी की दोनों टांगे हवा में लहरा रही थी। पायल की आवाज फुल स्पीड में आंटी की कमर के हिसाब से बज रही थी, और मैं आंटी की दोनों टांगों के बीच में अपने लौड़े से आंटी की चूत पूरी ताकत से चोद रहा था। आंटी उह आउच करते हुए मेरा लौड़ा अपनी चूत में ले रही थी। आंटी अपने होंठों को काटते हुए कभी अपने एक मम्मा दबा रही थी, तो कभी दोनों साथ में। वो अपनी गांड उठा-उठा कर मेरा लौड़ा अपने चूत में भर रही थी।

हमारी जांघो के टकराव से जो थप-थप की आवाज़ आ रही थी, उस पर सोने पे सुहागा कि आंटी की चूड़ियों की खनखनाहट, पायल की आवाज़, ऊपर से आंटी के मुंह से ऊंह आह आह उफ्फ और गंदी-गंदी गालियां माहौल को और रंगीन बना रही थी।

आंटी: ओह उफ्फ आह और आह और मार अपना उफ्फ लौड़ा। उफ्फ मर गई।मेरी चूत में आह ओह मजा आ गया। आई ई ई उई और दे।

मैं: ले मेरी रांड, आह आह, और ले मेरा लौड़ा। साली मादरचोद मजा आ गया तेरी चूत में। उफ्फ पागल बना दिया छिनाल तूने।

आंटी की चूत अब पानी छोड़ रही थी। मेरा लौड़ा अब आंटी की चूत में सटासट अंदर बाहर चल रहा था। हम दोनों चुदाई के नशे में इतने खो गए थे कि हमारी चुदाई को कोई देख रहा है, इसका भी होश नहीं था हमें।

वो मल्लिका थी आंटी की बहू जो चुपके से अपनी बूढ़ी सास की हवस से भरी चुदाई देख रही थी। अब मैं आंटी की टांगों उनके पेट से मरोड़ कर, उनकी गांड थोड़ी उठा कर अपने लंड को उनकी भीगी चूत में दे रहा था। आंटी बेतहाशा मुझे गालियां दे कर उकसा रही थी, और बड़ी गंदे तरीके से सिसकियां लेते हुए मुझे अपने ऊपर खींच कर, मेरे मुंह में मुंह डाल कर, स्मूच देते हुए अपनी पूरी कमर की ताकत लगा कर, गांड उछालते हुए मेरे पूरे लौड़े को अपनी चूत में ले रही थी।

उनकी आंखे बड़ी-बड़ी हो गई थी। वो मेरे मुंह के अंदर अपनी थूक से भर के मेरी पीठ पर नाखून के जख्म बना रही थी। आंटी अब अपने आखिरी पड़ाव में आ चुकी थी, और मैं भी आंटी की चूत को मन चाहे तरीके से रौंद रहा था।

आंटी के मुंह से अपना मुंह हटा कर मैं हमारी पोजीशन और चुदाई का मजा सामने वाली‌ अलमारी के शीशे में देख रहा था (कभी चुदाई के वक्त आइने में चुदाई देखने का मजा तो कुछ और है)।

आंटी: आह मर गई उफ्फ आ आ उफ्फ मेरा पानी ई ई आ गया। हाय मार दिया तूने भड़वे उई आउच।

अचानक शीशे में मुझे ऐसा लगा कि कोई परछाई हमारी चुदाई छुप के देख रही थी। मेरी तो गांड फट गई उस वक्त। लेकिन मैंने सोचा अगर किसी को कोई प्रॉब्लम होती तो वो सीधे अंदर आ जाता, ना कि छुप के देखता। बस यही सोच कर मैंने चुदाई जारी रखी, देखूं तो सही कौन हमें देख रहा था, और मुझे वो दिख गई। वो और कोई नहीं मल्लिका थी जो अपनी चूत को अपनी सलवार के ऊपर से रगड़ रही थी। जब पता चला कि अब खतरा नहीं था, तो मैं और जोश में आ कर चुदाई करने लगा।

मैं: आंटी क्या चूत है तेरी, ओ ओह मजा आ गया। आंटी मेरा पूरा लौड़ा निगल लिया तेरी चूत ने, आह उफ्फ तेरी मां का भोसड़ा। तेरी बहू को चोदूं क्या? रंडी औरत है तू, आह मजा आ गया। ले साली रांड, और ले। वाह उफ्फ आज तो लंड फाड़ के मानेगी तू।

आंटी: भड़वे उफ्फ आह, मेरी आह बहु को उफ्फ,‌ मेरी आह बहु को बीच में क्यों ला आह आह रहा है? मेरे से जी नहीं आह आह आउच भरा क्या तेरा, जो उसकी भी चूत आह चाहिए तुझे हरामी।

मैं: हां रंडी, तेरी बहू भी चाहिए। अभी तेरी ढीली चूत कब तक मारूंगा आह आह?

वहां शायद मल्लिका परेशान हो गई थी, कि इन दोनों की चुदाई में मेरा नाम क्यूं ले रहे थे। लेकिन उसने अपना हाथ अपने पजामा के ऊपर से एक बार भी नहीं हटाया था। जब भी मैं और आंटी चुदाई के वक्त बात कर रहे थे, तब उसकी उंगलियां और ज्यादा तेज़ चल रही थी।

मैं: मुझे तो अब मल्लिका की चूत भी चाहिए। आंटी रुक तुझे मल्लिका समझ कर चोदता हूं रंडी कि औलाद।

और फिर मैंने अपनी पोजीशन बदल कर आंटी को घोड़ी बनाया, और उनकी एक टांग को ऊपर बेड पे रख कर उनके पीछे आ गया। फिर उनकी कमर को पकड़ कर पीछे से उनकी चूत में लौड़ा डाल कर धक्के मारना शुरू कर दिया। जब-जब मैं आंटी को धक्के मार रहा था, तब उनके ढीले मम्मे और उनका मंगलसूत्र उछल-उछल के ऊपर-नीचे हो रहे थे। अब मैंने भी मल्लिका का नाम लेना शुरू कर दिया।

मैं: ओह ओह मल्लिका, तेरी चूत तो आग उगल रही है। आह मल्लिका तेरी चूत का पानी कब चाटने देगी मेरी रांड? आह मल्लिका तेरे चूत ने तो मेरा पूरा लौड़ा जकड़ के रखा है, मादरचोद उफ्फ मेरी जान आह।

आंटी: और दे आह ओह आह आह मेरा पानी आ रहा है, और जोर से आह आह और ले मल्लिका का नाम। आह मर गई मैं, उसका आह नाम लेते ही तेरा लौड़ा अंदर तक जा रहा है आह ओह आह।

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मेरी जांघें आंटी की गांड से टकरा रही थी‌। थप थप खन खन की आवाज उफ्फ आह भरी सिसकियां, आंटी मानो पागल हो गई थी। वहां मल्लिका की भी हालत खराब हो रही थी। वो अपना पजामा अपनी जांघों तक नीचे ला कर, अपनी लाल पैंटी के अंदर हाथ डाल कर अपनी चूत को जोर-जोर से सहला रही थी। अब तो ये सीन देख कर मैं भी पागल हो गया था। मैं अपनी पूरी ताकत लगा कर आंटी के चूत में लौड़ा पेले जा रहा था।

आंटी: उफ्फ मैं आई आई आह आह उफ्फ आह।

ये कह कर आंटी ने अपनी चूत का फव्वारा खोल दिया। मेरा लौड़ा जैसे किसी लावा रस में भीग गया हो। आंटी हांफते हुए अपनी गांड मेरे लौड़े पे मार रही थी। वो तो ऐसे झड़ रही थी, जैसे पहली बार झड़ी हो। आंटी ने इतना पानी छोड़ा के जैसे वो मूत रही हो। आंटी के पानी से पूरा बिस्तर गीला हो गया था। आंटी अब पूरी ढीली हो गई थी। उसने खुद को बिस्तर पे छोड़ दिया, लेकिन मैंने उनकी कमर पकड़ रखी थी, जिस वजह से वो बिस्तर पर लेट नहीं पाई। मैं पीछे से उसे जोर-जोर से चोद रहा था, और मेरी नज़र शीशे से मल्लिका पे थी। उसकी यह हालत देख कर अब तो मैं भी पानी छोड़ने वाला था।

मैं: आह मेरी जान मल्लिका कब तेरी चूत मिलेगी? कब तक तेरी सास की चूत मारता रहूं? उफ्फ मल्लिका कब तेरी चूत का पानी मिलेगा मुझे आह मल्लिका मेरी रांड, मेरी छिनाल।

जब-जब मैं मल्लिका का नाम ले रहा था तब-तब मल्लिका की हरकत और ज्यादा बढ़ जाती। मैं मौका गवाना नहीं चाहता था। मैंने आंटी की कमर छोड़ी और उनके बाल पकड़ कर अपनी छाती से चिपका लिया, और दोनों हाथों से मम्मे मसलते हुए उनकी चूत मारने लगा। मेरी जुबान उनके पसीने से भरी गर्दन को चाट रही थी, तो कभी उनके कान के होल अपनी जुबान डाल देता। बड़ी भयंकर वाली चुदाई चालू थी उस कमरे में।

मैंने एक हाथ से उनके मम्मे मसल कर, एक हाथ से उनके कमर को पकड़ के, उनके कान में कहा: जरा शीशे में तो देखो।

और आंटी ने बड़ी मुश्किल से अपनी आंखें खोल कर जब शीशे में देखा, तो दीवार के एक कोने में आंटी को मल्लिका का आधा जिस्म नज़र आया। आंटी की तो गांड फट गई। आंटी ने मल्लिका को देख लिया था लेकिन मल्लिका आंखें बंद करके अपनी चूत को अपनी उंगली से शांत करने की कोशिश कर रही थी। लेकिन मल्लिका की आंखें बंद थी, ये आंटी देख नहीं पाई।

अब आंटी मुझसे छूटने की कोशिश करने लगी, लेकिन अब चिल्ला भी नहीं सकती थी। अब तो बहु ने अपनी सास को चूत में अपने से कम उमर के पड़ोसी का लंड लेते देख लिया था। आंटी मुझे धीमी आवाज में खुद को छोड़ने की गुहार करने लगी। लेकिन आप लोग तो जानते है कि मैं तो बड़ा हरामी हूं। चाहे बम फट जाए, लेकिन चुदाई पूरी कर ही रुकता हूं।

मैंने आंटी से कहा: डरो मत, अगर उसे आना होता तो वो दस मिनट पहले आती।ऐसे छुप-छुप कर चुदाई नहीं देखती। उसको जरा ध्यान से देखो क्या हालत है उसकी। अब तो वो इतनी गरम हो गई है कि अपने सगे बाप का भी लौड़ा अपनी चूत में अपनी मां के सामने लेने से भी नहीं डरेगी। बस अब आखिरी एक मिनट, उसके बाद मल्लिका की चूत भी मिल जाएगी मुझे। आंटी बस साथ दो।

आंटी भी समझ गई थी। अब जो होगा देखा जाएगा।

मैं: आंटी मेरा भी आ रहा है आह मेरी मल्लिका मेरी जान कब चूत चटवाऐगी? मुझे कब अपने चूत का पानी पिलायेगी? आह आह मल्लिका मल्लिका मेरा पानी आह मल्लिका उफ्फ आह मेरा पानी।

आंटी: हां भड़वे, उफ्फ, मैं हूं तेरी मल्लिका, आह आह अब उफ्फ मत रुक आह। मल्लिका को तेरी रंडी बनाऊंगी आह उफ्फ,‌ निकाल तेरा पानी आह आह उई ऊ ऊ आह।

बस अब क्या था। मेरा पानी आंटी की चूत में निकलना शुरू हुआ। मैं जोर-जोर से मल्लिका का नाम लेते हुए अपना पानी आंटी की चूत में छोड़ रहा था। वहां मल्लिका आंखें बंद कर दीवार के सहारे खड़ी हो गई, और अपने पैंटी में उंगली को चूत की गहराइयों में ले जाने की नाकाम कोशिश कर रही थी। उसे इतना भी होश नहीं था कि अब वो पूरी तरीके से शीशे के सामने आ गई थी।

मैंने अब मौका गवाना उचित नहीं समझा। मैंने आंटी को बिस्तर पर धकेल दिया, और अपने कदम मल्लिका की और बढ़ा दिये। जैसे-जैसे मैं मल्लिका के पास आ रहा था, मुझे उसकी सिसकारियां सुनाई देने लगी। वह पसीने से भीगी थी। पूरी पैंटी पे उसकी चूत से रिसते हुए पानी ने पैंटी के आगे के पूरे भाग को गीला किया हुआ था। उसकी चूत से आते पानी की खुशबू मैं महसूस कर रहा था। बहुत दिनों बाद एक जवान चूत मिलने वाली थी।

मैं कुछ ज्यादा ना सोचते हुए उसके सामने आ कर अपने घुटनों पर बैठ गया। अब उसकी वह पैंटी में छुपी हुई चूत बस आधे फुट की दूरी पर थी। मैं उसकी गांड को जकड़ के उसकी चूत को अपने मुंह पे ले आया। यह हमला अचानक हुआ था।

मल्लिका जैसे किसी सपने से जाग गई हो, और उसे हैरत इस बात की हो रही थी कि जो आदमी अब तक उसकी सास को चोद रहा था, वह आदमी अब उसकी पैंटी सूंघ रहा था। मल्लिका ने अपना हाथ पैंटी से निकाला और मेरे सिर को अपने चूत से दूर करने की कोशिश करने लगी, और मुझे दूर जाने को बोलने लगी। लेकिन मैं भी कहा सुनने वाला था। मैंने एक हाथ से उसकी गांड को पकड़ लिया, और दूसरे हाथ से उसकी पैंटी को साइड से उसकी चूत को खोल दिया।

उफ्फ क्या चूत थी मल्लिका की, पूरी चिकनी। उसकी चूत की काली पंखुड़ियों के बीच में गुलाबी चूत, उसमें आता उसके चूत का चिपचिपा पानी, उसकी महक किसी को भी दीवाना कर दे। मल्लिका मेरे बाल को पकड़ के मुझे अपने चूत से अलग करने की कोशिश कर रही थी, और वह अपनी सास से कह रही थी कि-

मल्लिका: मम्मी इसे दूर होने के लिए कहिए। मैं कोई ऐसी-वैसी औरत नहीं हूं। इसे आप दूर कीजिए, नहीं तो मैं सब को बता दूंगी कि तुम दोनों के बीच क्या चल रहा है।

अगला भाग पढ़े:-मल्लिका मेरी जान (आंटी की बहू)-2

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