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Hindi Chudai Kahani • पठन समय: 13 मिनट • पढ़ा गया: 506 बार

सविता दीदी की जवानी के दीवाने-4(Savita didi ki jawani ke deewane-4)

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10 Apr 2018 को प्रकाशित

सविता दीदी की जवानी के दीवाने-4(Savita didi ki jawani ke deewane-4)
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पिछला भाग पढ़े:-सविता दीदी की जवानी के दीवाने-3

आपने पिछले भाग में पढ़ा होगा कि मेरी और सविता दीदी की चुदाई शुरू हो चुकी थी। मैं सविता दीदी को ट्यूबवेल पर जोरदार चोदने ही वाला था, तभी उसी बीच दीदी ने बोला कि एक बार जाकर खेतों में पानी देख लो कि सब कुछ सही है या नहीं।

मैं जाना तो नहीं चाह रहा था उन्हें छोड़ कर, क्योंकि जब आपको ऐसी कमसिन लड़की मिली हो जिसका सील तुम खुद ही 10 मिनट पहले तोड़े हो, तो उसकी ठुकाई बीच में कैसे रोक सकते हैं? पर क्या करता, मुझे पानी देखने के लिए खेतों में जाना ही पड़ा। आगे क्या हुआ अब पढ़िए-

मैं जब खेत में पानी देख कर आया, तो तभी मुझे पानी की टंकी दिखी जिसमें ट्यूबवेल का पानी गिर रहा था। तो मैंने सोचा कि आज ही मैं इन्हें पानी में भी चोदूंगा। पर दिक्कत ये थी कि पानी की टंकी ट्यूबवेल वाले रूम के बाहर थी, जो कि घास फूस से बनी छप्पड़ के नीचे थी। तो मैंने सोचा कि क्यूं ना इसमें भी एक राऊंड कर लें, यही सोचता हुआ मैं ट्यूबवेल वाले रूम में अन्दर गया तो मैंने देखा कि सविता दीदी अभी भी वैसे ही नंगी लेटी थी, और अपने बूब्स को अपने हाथों से दबा-दबा कर खुद मदमस्त हो रही थी।

वो अपने होठों को काट रही थी, और अपने पैरों को समेट रही थी। इससे यही पता चल रहा था कि ये बहुत गर्म हो गई थी और इन्हे जबरदस्त चुदाई चाहिए‌ थी। और अगर मैंने उन्हे दबा कर नहीं चोदा, तो ये पक्का कोई दूसरा लंड ढूंढेंगी। और अगर मेरे रहते हुए कोई और दीदी को पेलता खाता, तो मुझे भी अच्छा नहीं लगता।

इसलिए मैं उन्हें ऐसा तड़पते देख रह नहीं पाया, और मैं बेकाबू हो गया। मैं तुरन्त सविता दीदी के ऊपर टूट पड़ा, और उनकी चूचियों को दबोचने लगा, और खूब अच्छी तरह से मसला। जिससे दीदी की चूचियां लाल हो गयी, और तब तक मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। तो मैं दीदी के ऊपर बैठ गया, और दीदी की चूचियों के बीच अपने लंड को फंसा कर दीदी की चूचियों को दबाने लगा। फिर धीरे-धीरे मैंने दीदी की चूचियों को चोदना शुरू किया।

मुझे ऐसा करते देख दीदी को भी मजा आ रहा था, पर उन्हें क्या पता ये खुशी अभी आंसू में भी बदलेगी। मैंने करीब दीदी की चूचियों को 5 मिनट तक चोदा, और चूचियों को चोदते-चोदते ही मैंने दीदी को मस्त कर दिया था। फिर वो जैसे ही आह भरने के लिए मुंह खोली मैंने सट से लंड उनके मुंह में ठूंस दिया, जिसका दीदी को थोड़ा भी अंदाजा नहीं था। अब मैं अपना लंड दीदी के मुंह में गपागप-गपागप पेलने लगा।

दीदी की आवाज़ नहीं निकल पा रहा थी, बस मुंह में खच खच खच खच की आवाज़ और दीदी की गेंगें-गेंगें की आवाज़ आ रही थी, जो कि मुंह में चोदने पर हर लड़की के मुंह से आती है। दीदी के मुंह में चोदते-चोदते ही दीदी ने मेरा लंड अपने हाथों से पकड़ लिया, और फिर टोपे को चूसने लगी, और उनके मुंह से निकलती गर्म सांसे मेरे लंड को तपा रही थी।

कुछ ही देर में मेरी जवान दीदी अपनी जवानी का नशा मुझे दिखा ही दी, और मेरे लंड को अपने मुलायम होठों से चूस-चूस कर मेरे लंड को झड़ने पर मजबूर कर दिया। फिर जैसे ही मैं झड़ने को हुआ अपनी स्पीड बढ़ा दिया, और दीदी के मुंह में एक ही झटके में लंड पेल दिया।

इससे दीदी की आवाज़ एक दम से बन्द हो गयी और मेरे लंड का रस पिचकारी से निकलते रंग की तरह सफेद गाढ़ा सा रस दीदी के मुंह में निकल गया, जिसने दीदी का मुंह पूरा वीर्य से भर गया। फिर मैंने दीदी की तरफ देखा तो दीदी का मुंह गुस्से से लाल पीला हो रहा था। शायद उन्हें मुंह में वीर्य पसन्द नहीं था, पर मैंने उनकी चूचियों को मसला और चूसने लगा। तभी मैंने देखा कि दीदी अपने मुंह से वीर्य उगल चुकी थी, और अपने हाथों में लेकर अब मेरे लंड पर ही मेरा वीर्य लगाने लगी।

जैसे ही मेरा वीर्य मेरे लंड पर दीदी लगा कर मेरे लंड को मसलने लगी, मेरा लंड फिर एक-दम टाईट हो गया।‌ फिर मैंने तुरन्त दीदी को एक किस किया, और अपने लंड को दीदी की चूत के छेद पर रख कर एक धक्का मारा, तो मेरा आधा लंड दीदी की चूत को चीरता हुआ चूत में समा गया।

दीदी की जोरदार चीख निकली: ओहह आराम से अइई उउउम्म।

पर मैंने उनकी चीख को नज़र अंदाज करके एक और तेज का झटका मारा तो मेरे लंड के पूरा अंदर घुसते ही चूत से गच्च की आवाज आई। मुझे लग गया कि दीदी के चूत की हलक तक मेरा लंड घुस गया। दीदी को बहुत दर्द हो रहा था। उनकी आंखों में आंसू थे, पर वो इस दर्द को सह रही थी, मतलब वो आंसू खुशी के थे।

मैं फिर अपना लंड जल्दी-जल्दी अन्दर-बाहर करने लगा, और सटासट-सटासट चूत में लंड घुसाने लगा। कुछ ही देर में पूरे रूम में मादक आवाज आह… आह… आह… आह… की आवाज़ आने लगी। हम दोनों कुछ ही देर में हांफने लगे, और तभी दीदी खूब तेज बोली कि मैं गई मैं गई, मेरा निकलने वाला है। और ऐसा कहते-कहते अचानक से दीदी की चूत ने पानी छोड़ दिया, जिससे मेरा लंड भीग सा गया।

पर मुझे ये अच्छा लगा कि मेरी वजह से दीदी आज झड़ गयी थी, और अब दीदी का पानी निकलते ही दीदी शान्त सी लग रही थी। पर मैं फिर से धक्के मारना शुरू किया, और करीब 5 मिनट मैं धक्के मारता रहा। दीदी मेरे हर धक्के को सहते रही, और मेरे हर धक्के पर अपनी आंखों को बन्द कर लेती। वो दर्द की वजह से तड़प उठती, पर दीदी मजे भी ले रही थी।

फिर कुछ ही देर में दीदी फिर से मदहोश हो गई, और वो अब मुझे नीचे लेटने को बोली। वो खुद मेरे ऊपर आ गई। फिर उन्होंने मेरे लंड के ऊपर ही अपनी चूत को रगड़ना शुरू किया, जो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मेरी आंखे बन्द हो रही थी। तभी दीदी ने मेरे लंड को अपनी चूत पर सेट किया, और हल्की सी ऊपर होकर मेरे ऊपर बैठ गयी। इससे मेरा लंड दीदी की चूत में घुस गया।

इस बार मुझे बहुत दर्द हुआ, क्योंकि मेरे लंड की चमड़ी इस बार दीदी के बैठने से ऊपर की ओर सिकुड़ गयी,‌ तो मैं चीख उठा।‌ पर दीदी भी अब मेरा साथ देने लगी थी। तो मैंने भी पीछे से शाॅट मारना शुरू किया। करीब मैंने 8-10 धक्के मारे होंगे, तो मैं थक गया। फिर दीदी मेरे लंड के ऊपर उछलने लगी, जिससे उनकी चूचियां बाउंस करने लगी, जो बहुत ही मनमोहक था।

उनकी चूचियों को उछलता देख मैंने तुरन्त उन्हें अपने ऊपर झुका लिया, और उनकी चूचियों को फिर से पीना शुरू किया। मैं पीछे से अपनी कमर उठा-उठा कर धक्के मारने लगा, और मेरे लंड के अन्दर जाते ही दीदी की चूत से फट फट फट फट, सट सट सट सट की आवाज़ें आने लगी। ये फट फट की आवाज़ सुन कर मैं और तेजी से अपना लंड अन्दर-बाहर पेलने लगा, तो दीदी की आह भी निकलने लगी।

फिर जब दीदी की आह निकलती तो उनकी‌ गर्म सांस को अनुभव कर मैं और तेजी से अपने लंड को दीदी की चूत में पेलते जाता। मैं धक्के पर धक्का मार रहा था। उधर दीदी की चूचियां आपस में टकराई जा रही थी। धीरे-धीरे मुझे एहसास होने लगा कि मेरा निकलने वाला था, तो मेरी स्पीड और बढ़ गई, और मैंने अपना लंड दीदी की गुलाबी चूत में सट सट सट सट पेलना शुरू किया।

मेरी स्पीड दो गुनी हो चुकी थी। दीदी भी मुझे पकड़ कर अपनी तरफ खींचने लगी थी, शायद वो भी झड़ने ही वाली थी। मुझे भी जैसे ही एहसास हुआ कि मेरा बस निकलने ही वाला था, मैंने भी दीदी को कस कर पकड़ लिया और उनके होठों पर अपना होंठ रख कर एक जोरदार झटका मारा।

दीदी की चूत से बहुत तेज फट-फट की आवाज आई, और मैं तुरन्त झड़ गया। पर जब मेरा माल दीदी की चूत में निकला, तो दीदी का शरीर गनगना गया, और वो मुझे अपनी तरफ खींच कर कस कर पकड़ ली, और मेरी आंखों में आंखें डाल कर मुझे देखने लगी।

मैंने दीदी को इशारे में ही बोला कि मैंने अन्दर डाल दिया, पर अभी भी दीदी बिना कुछ बोले मेरी आंखों में देखे जा रही थी। मुझे ऐसा लगा कि मैंने गलत कर दिया क्या। तो मैंने जल्दी से उठने का प्रयास किया और दीदी का हाथ छुड़ाना चाहा। तो दीदी ने फिर से मुझे कस कर पकड़ कर अपनी ओर भींच लिया, और मुझे किस करने लगी। मैं अभी भी चुप था कि पता नहीं क्या होने वाला था, पर तब भी 2 मिनट तक दीदी मुझे किस करती रही तो मैंने भी उनका साथ दिया और किस करने लगा।

तभी दीदी फिर मेरे चेहरे को ऊपर करके मेरी आंखों में देखने लगी। शायद दीदी कुछ बोलना चाह रही थी, पर बोल नहीं पा रही थी, और तभी उन्होंने मेरे चेहरे को अपनी चूचियों पर कर दिया। तो मैंने उनके इशारे को समझा, और मैं उनकी चूचियों को पीने लगा, और फिर देखते ही देखते मैंने उनकी चूचियों के उभार का एहसास किया। ऐसे लग रहा था कि चूचियां उभर रही थी।

क्योंकि चूचियां टाईट हो चुकी थी। और अब तक मेरे लंड ने अपना पूरा काम कर दिया था, और वीर्य की एक-एक बूंद दीदी की चूत में गिरा चुका था। तभी फिर दीदी ने मेरे चेहरे को ऊपर करके मेरी आंखों में देखा, और फिर बोली-

दीदी: राजू तुम मेरे साथ ऐसे ही रहोगे ना?

मैं: हां दीदी।

दीदी: तुम मुझे धोखा तो नहीं दोगे?

मैं: कैसा धोखा दीदी?

दीदी: तुम मुझे छोड़ तो नहीं दोगे?

मैं: अरे नहीं दीदी, क्या कोई इतनी जवान माल को छोड़ना चाहेगा, और ये सुन कर दीदी हल्की सी मुस्कान दी।

दीदी: मुझसे एक वादा करो।

मैं: कैसा वादा दीदी?

दीदी: तुम कभी भी ये बात किसी को नहीं बताओगे कि हम दोनों के बीच ऐसा कुछ हुआ था।

मैं: अरे आप टेंशन मत लीजिए, हम दोनों ऐसे ही मजे लेते रहेंगे, और किसी को पता भी नहीं चलने देंगे।

तो दीदी ने हल्की सी मुस्कान दी, और मुझे चूमने लगी। तभी मैंने दीदी से कहा कि दीदी अब मुझे आपकी गांड मारनी है। तो दीदी बोली कि आज नहीं अब फिर कभी। मैंने जिद किया कि दीदी आज मौका मिला है आज ही कर लेते हैं तो दीदी बोली कि प्लीज फिर कभी।

तो मैंने बोला कि करूंगा तो आज ही करूंगा। तो दीदी भी मेरी बातों में आ गई और मुझे हां बोल दी। मैं खुशी से उछल पड़ा। पर मुझे क्या पता था कि ये मेरी जिद ही हम दोनों को फंसाने वाली है, और मेरी इस जिद की वजह से दीदी को कोई और भी चोदेगा। वो दिन मुझे अभी भी याद है कि कैसे मेरे ही पड़ोसी लड़के ने मेरी सविता दीदी को मेरे सामने ही झुका कर बहुत पेला था।

इसके अगली कहानी में आपको बताऊंगा कि कैसे हम दोनो पकड़े गए, और फिर हम दोनो की चुदाई के बारे में घर पर किसी को ना बताने के लिए मेरे ही पड़ोसी लड़के ने मेरी दीदी को जम कर पेला। फिर मेरे साथ मिल कर उसने दीदी को कैसे पेला और दीदी की नस ढीली कर दी।

जानने के लिए बने रहें अपने भाई राजू के साथ, और कमेंट करके जरूर बताएं कि आपको ये दीदी की चुदाई की आप बीती कहानी कैसी लगी।

धन्यवाद!

अगला भाग पढ़े:-सविता दीदी की जवानी के दीवाने-5

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