होम पर वापस जाएं
रिश्तों में चुदाई पठन समय: 6 मिनट पढ़ा गया: 1,116 बार

बदलते रिश्ते -4

रानी मधुबाला

19 May 2017 को प्रकाशित

बदलते रिश्ते -4
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

रामलाल जब लिंग धोकर बाथरूम से लौटा तो उसके गोरे, मोटे और चिकने लिंग को देख कर सुनीता की योनि लार चुआने लगी। योनि रामलाल के लिंग को गपकने के लिए बुरी तरह फड़फड़ाने लगी और अनिता ने लपक कर उसका मोटा तन-तनाया लिंग अपने मुँह में भर लिया और उतावली हो कर चूसने लगी।

रामलाल बोला- बहू, तू अब अपनी जांघें फैलाकर चित्त लेट जा और अपने नितम्बों के नीचे एक हल्का सा तकिया लगा ले।‘ऐसा क्यों पिता जी?’‘ऐसा करने से तेरी योनि पूरी तरह से फ़ैल जाएगी और उसमें मेरा यह मोटा-ताज़ी, हट्टा-कट्टा डण्डा बिना किसी परेशानी के सीधा अन्दर घुस जाएगा।’सुनीता ने वैसा ही किया।

रामलाल ने बहू के योनि-द्वार पर अपने लिंग का सुपाड़ा टिकाकर एक जोरदार झटका मारा कि उसका समूचा लिंग धचाक से अन्दर जा घुसा।सुनीता आनन्द से उछल पड़ी। वह मस्ती में आकर अपने कूल्हे और कमर उछाल-उछाल कर लिंग को ज्यादा से ज्यादा अन्दर-बाहर ले जाने की कोशिश में जुटी थी।

रामलाल बोला- बहू, तेरी तो वाकयी बहुत ही चुस्त है। कुदरत ने बड़ी ही फुर्सत में गढ़ी होगी तेरी योनि।सुनीता बोली- आपका हथियार कौन सा कम गजब का है। पिता जी, सच बताइए, सासू जी के अलावा और कितनी औरतों की फाड़ी है आपके इस मोटे लट्ठे ने?

रामलाल सुनीता की योनि में लगातार जोरों के धक्के लगाता हुआ बोला- मैंने कभी इस बात का हिसाब नहीं लगाया। हाँ, तुझे एक बात से सावधान कर दूं। मेरे-तेरे बीच के इन संबधों की तेरी पड़ोसन जिठानी को को जरा भी भनक न लग जाए। वह बड़ी ही छिनाल किस्म की औरत है, हमें सारे में बदनाम करके ही छोड़ेगी।’‘नहीं पिता जी, मैं क्या पागल हूँ जो किसी को भी इस बात की जरा भी भनक लगने दूँगी। वैसे, आप एक बात बताओ, क्या यह औरत आपसे बची हुई है?’

रामलाल जोरों से हंस पड़ा, बोला- तेरा यह सोचना बिल्कुल सही है बहू, इसने भी मुझसे एक बार नहीं, कितनी ही बार ठुकवाया है। ‘अच्छा, एक बात और पूछनी है आपसे..?’‘पूछो बहू…’‘पहली रात को क्या सासू जी आपका यह मोटा हथियार झेल पाई थीं?’

‘अरे कुछ मत पूछ बहू, जब मेरा तेरी सास के साथ ब्याह हुआ था तब उस पर अभी जवानी भी पूरी नहीं चढ़ी थी और मैं 18 साल का। इतना तजुर्बा भी कहाँ था तब मुझे कि पहले उसकी योनि को सहला-सहला कर गर्म करता और जब वह तैयार हो जाती तो मैं उसकी कुंवारी व अनछुई योनि में अपना लिंग धीरे-धीरे सरकाता। मैं तो बेचारी पर एकदम से टूट पड़ा था और उसे नंगी करने उसकी योनि के चिथड़े-चिथड़े कर डाले थे। बस उसकी नाजुक सी चूत फट कर खून के टसूए बहाती रही थी पूरे तीन दिन तक ! अगली बार जब मैंने उसकी ली तो पहले उसे खूब गर्म कर लिया था जिससे वह खुद ही अपने अन्दर डलवाने को राज़ी हो गई।

सुनीता तपाक से बोली- जैसे मेरी योनि को सहला-सहला कर उसे आपने खौलती भट्टी बना प्रिया था आज। पिता जी, इधर का काम चालू रखिये …एक वार, सिर्फ एक बार मेरी सुलगती सुरंग को फाड़ कर रख दीजिये। मैं हमेशा-हमेशा के लिए आपकी दासी बन जाऊँगी।‘ले बहू, तू भी क्या याद करेगी… तेरा भी कभी किसी मर्द से पाला पड़ा था। आज मुझे रोकना मत, अभी तेरी उफनती जवानी को मसल कर रखे देता हूँ।’

ऐसा कह कर रामलाल अपने मोटे लिंग पर तेल मलकर सुनीता पर दुबारा पिला तो सुनीता सिर से पैर तक आनन्द में डूब गई। रामलाल के लिंग का मज़ा ही कुछ और था पर वह भी कब हिम्मत हारने वाली थी। अपने ससुर को खूब अपने नितम्बों को उछाल-उछाल कर दे रही थी।अंतत: लगभग एक घंटे की इस लिंग-योनि की धुआधार लड़ाई में दोनों ही एक साथ झड़ गए और काफी देर तक एक-दूजे के नंगे शरीरों से लिपट कर सोते रहे।

बीच-बीच में दो-तीन वार उनकी आँखें खुलीं तो वही सिलसिला दुबारा शुरू हो गया। उस रात रामलाल ने बहू की चार बार चूत मारी और हर बार में दोनों को ही पहले से दूना मज़ा आया।सुनीता उसी रात से ससुर की पक्की चेली बन गई। अब वह ससुर के खाने-पीने का भी काफी ध्यान रखती थी ताकि उसका फौलादी डंडा पहले की तरह ही मजबूत बना रहे, पति की नपुंसकता की अब उसे जरा भी फ़िक्र न थी।हाँ, इस घटना के बाद रिश्ते जरूर बदल गए थे।

रामलाल सबके सामने सुनीता को बहू या बेटी कहकर पुकारता परन्तु एकांत में उसे मेरी रानी, मेरी बुलबुल आदि नामों से संबोधित करता था।और सुनीता समाज के सामने एक लम्बा घूंघट निकाले उसके पैर छूकर ससुर का आशीर्वाद लेती और रात में अपने सारे कपड़े उतार कर उसके आगे टांगें फ़ैला कर पसर जाती थी।आजकल रामलाल अपनी बहू सुनीता के साथ कामक्रीड़ा के लिये मौके ढूंढने में लगा रहता था।

अपने बेटे अनमोल को वह अक्सर विवाह-शादियों में भेजता रहता था ताकि वह अधिक से अधिक रातें अपनी पुत्र-वधू सुनीता के साथ बिता सके।सुनीता से यौन-सम्बंध बनाने के बाद से वह पहले की अपेक्षा कुछ और अधिक जवान दिखने लगा था।

कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

जेठ के लंड ने चूत का बाजा बजाया-2
रिश्तों में चुदाई

जेठ के लंड ने चूत का बाजा बजाया-2

मेरी सेक्स कहानी के पिछले भाग में आपने पढ़ा था कि मैं और मेरे जेठजी, हालात की वजह से रसोई में एक दूसरे से चिपक कर खड़े थे. मैं मन ही मन में जेठजी की पहल का इंतजार कर रही थी. पर जेठजी ने कोई पहल नहीं की.अब आगे:

17 मिनट 1,012
स्पर्म थैरेपी-5
रिश्तों में चुदाई

स्पर्म थैरेपी-5

प्रेषक : मुन्ना लाल गुप्ता

13 मिनट 357
कमाल की हसीना हूँ मैं-36
रिश्तों में चुदाई

कमाल की हसीना हूँ मैं-36

“यहाँ कोई नहीं आयेगा और किसे परवाह है? देखा नहीं हॉल में सब नंगे नाच रहे थे।” कहते हुए उन्होंने मेरी स्कर्ट खींच दी और मेरे सैंडलों के अलावा मुझे बिल्कुल नंगी कर प्रिया और खुद भी बिल्कुल नंगे हो गये।

10 मिनट 930

पाठकों की राय

0 टिप्पणियां
इस कहानी पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!
🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।