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लड़कियों की गांड चुदाई पठन समय: 23 मिनट पढ़ा गया: 1,074 बार

अनजान लड़की से ट्रेन में दोस्ती और चुदाई-2

आर्यन rocko

31 Jul 2021 को प्रकाशित

अनजान लड़की से ट्रेन में दोस्ती और चुदाई-2
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इस सेक्स स्टोरी के पिछले भागअनजान लड़की से ट्रेन में दोस्ती और चुदाई-1में आपने पढ़ा कि मैंने दिया के घर में उसकी जबरदस्त चुदाई की थी.अब आगे …

दिया की जबरदस्त चुदाई करने के बाद हम दोनों अभी बिस्तर पर लेटे हुए थे और एक दूसरे को देखे जा रहे थे.मैंने कहा- दिया कैसा लगा ट्रेलर?दिया ने मुस्कुराते हुए पूछा- ये ट्रेलर था?मैंने कहा- हां अभी तो पूरी रात बाकी है मेरी जान.दिया बोली- ओके देखती हूं कितना प्यार करते हो.

अब हम दोनों बाथरूम में गए और दोनों नहा कर बाहर निकले. मैंने बाथरूम में भी नहाते टाइम उसके चूचों को मसला और बहुत चूमा चूसा भी. मुझे अब भूख लगी थी, तो दोनों ने जल्दी से कपड़े पहने और खाना खाया.मैं बोला- जान चालू करें फिर से … जो ट्रेलर देखा था, उसको मूवी बनाना तो होगा ना.तो दिया बोली- ये सब अब रात में करना … मुझे तो अभी बस आपके साथ सोना है.

मैंने भी उसकी बात मान ली और हम दोनों बातें करने लगे.

काफी देर तक बातें करते हुए कब दोनों सो गए, पता ही नहीं चला. करीब 7 से 8 बजे के बीच मेरी आँख खुली. देखा तो दिया मेरे पास नहीं थी. मैं रूम से बाहर निकल के उसको ढूँढने लगा. मैंने आवाज लगाई- दिया कहां हो?तो उसकी आवाज आई- बेबी, मैं तैयार हो रही हूँ. तुम फ्रेश हो जाओ.

मैंने हामी भरी और बाथरूम में घुस गया. कुछ ही देर में मैं भी जा कर फ्रेश होकर बाहर निकल आया. पर अभी भी दिया रूम में ही थी. मैंने पूछा- कितना टाइम लगेगा?तो दिया बोली- बस हो गया.मैं दरवाजे के पास ही खड़ा था. कुछ देर में जैसे ही दरवाजा खुला, तो मैं दिया को देखता ही रह गया. क्या कमसिन परी जैसी लग रही थी … मानो जैसे खिलता हुए गुलाब हो. मेरी तो दिया से नज़र ही नहीं हट रही थी. दिया ने उस समय हरे रंग का लहँगा टाइप का कुछ पहना हुआ था, जो उसके ऊपर बहुत फब रहा था और वो पूरी तरह से परी लग रही थी.

दिया मुस्कुराती हुई बोली- क्या हुआ … क्या देख रहे हो?मैं उसके पास गया और उसके होंठों को चूमते हुए बोला- ये देख रहा हूँ तुम तो बहुत ही सुंदर लग रही हो.मैंने झट से उसे अपनी बांहों में कस के दबा लिया और उसके होंठों को चूमते हुए बोला- बेबी एक छोटा सा ट्रेलर और हो जाये.तो दिया झट से बोली- नहीं … अभी नहीं … मैं अभी कुछ नहीं करूँगी … नहीं तो सब खराब हो जाएगा. जब वापस आऊँगी न … तब करना, जो भी करना है ओके.मैं थोड़ा नाराज हो गया तो वो बोली- अब क्या हुआ मेरे बेबी को … आपका चेहरा क्यों उतर गया … यार आप समझो ना … अगर अभी किया, तो सब दुबारा से तैयार होना होगा.मैंने कहा- कुछ भी खराब नहीं होगा, मैं बोल रहा हूँ न.दिया बोली- ओके एक काम करो आप यहां क्या करोगे … आप भी मेरे साथ चलो.मैंने कहा- ठीक है … पर मुझे एक छोटा सा ट्रेलर दिखाना है.दिया थोड़ा गुस्सा में कहने लगी- मुझे पता है … आप मानोगे नहीं … ठीक है पर जल्दी करो, जो भी करना है और याद रखना कि कुछ भी खराब नहीं होना चाहिए.

दिया के इतना बोलने की देर थी कि मैंने उसको कस के पकड़ कर दीवार के सहारे खड़ा कर प्रिया और अब उसके कान के पीछे के हिस्से को चूमने और चूसने लगा. अगले ही पल मैंने एक हाथ को उसकी गर्दन को सहला रहा था, तो दूसरा हाथ उसके कपड़े के ऊपर से उसके चूचों को सहलाने लगा.दिया को भी अब नशा सा हो रहा था, तो वो मुझे खुद अपने पास खींच कर मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर चूसने लगी. मैंने भी उसके होंठों को जोर जोर से चूसना चालू कर प्रिया.

इतने में दिया बोली- देखो ये जल्दी खत्म करो और हमें शादी में जल्दी जाकर वापस भी आना है … उधर मुझे देर नहीं करनी है, ऐसे मौके का मुझे पूरा फायदा उठाना है. प्लीज़ जल्दी से करो, जो भी करना है.मैंने उसकी बात सुनते ही उसके लहँगे को ऊपर किया और देखा तो जो मैं लाल रंग की पैंटी और ब्रा लाया था दिया ने वही सैट पहना हुआ था. मैंने सोचा अभी टाइम ज्यादा नहीं है, तो मैंने उसकी पैंटी को उतार प्रिया और अपनी पैंट को खोल कर नीचे कर प्रिया और अपने अंडरवियर को भी नीचे कर प्रिया.

मेरा लंड भी खड़ा था मैंने दिया से कहा- जान बस एक काम कर दो.दिया बोली- जल्दी बोलो.मैंने अपने लंड पर हाथ रख कर बोला- इसे गीला कर दो.

दिया जल्दी से नीचे बैठी और मेरा लंड अपने मुँह में लेकर जोर जोर से चूसने चाटने लगी. उसके लिपस्टिक लगे लाल लाल होंठों में अपना लंड देख कर मुझे तो बहुत अच्छा लग रहा था, मेरा मन कर रहा था कि ये बस ऐसे ही चाटती रहे.कुछ देर में लंड पूरी तरह से गीला हो गया था. अब मैंने दिया को खड़ा किया और फिर से उसके सामने खड़ा हो गया. मैंने थूक को हाथ में लेकर दिया की चूत में लगा प्रिया और कहा- दिया, अब इसको लगाने का काम तुम करो.

उसने मेरा लंड को पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर रखा और बोली- करो अब.उसकी चूत भी गीली हुई पड़ी थी और मेरे लंड को उसकी गर्मी पूरी तरह से महसूस हो रही थी. मैंने भी देर न करते हुए हल्का सा पीछे हुए और एक जोरदार धक्का लगा प्रिया.

इससे दिया हुमच गई. उसकी ‘आआह आओआह …’ निकलने लगी थी. अभी उसकी चूत में आधा ही लंड गया था. मैंने धक्के लगाना जारी रखा.

दिया की चूत में लंड जाते ही उसके होंठ और भी रसीले हो गए और अब मैं उसके होंठों का रस भी पी रहा था और धीरे धीरे अपने लंड से उसकी चूत की चुदाई भी कर रहा था. दिया इस समय फुल मस्ती में आ गई थी. अब तक मेरा लंड भी धीरे धीरे करते हुए उसकी चूत में पूरी तरह से फिट हो गया था.

अब मैंने उसको चोदने की स्पीड इतनी तेज कर दी, जैसे मानो कोई ट्रेन लेट हो गई हो और उसे जल्दी से अपने स्टेशन पर पहुंचना हो. मैंने दिया को दीवार के सहारे टिकाए हुए उसकी दोनों टांगें अपनी हाथों में ले लीं और वो अब लगभग मेरी गोद में थी. जिससे उसकी चूत में लंड भी अच्छे से अन्दर बाहर हो रहा था. उसने दीवार का सहारा छोड़ प्रिया था और मेरी कमर से अपनी टांगें कस ली थीं. अब वो अपनी गांड उछाल उछाल के मेरा लंड अपनी चूत में ले रही थी. वो चुदाई के नशे में बोले जा रही थी- आह … मजा आ गया … चोदो राजा … और जोर जोर से चोद दो बेबी … आह … और जोर जोर से आआआह … ओह्ह … पूरा अन्दर तक जा रहा है.

कुछ देर बाद मैंने उसके गोद में से नीचे उतार प्रिया और उसका मुँह दीवार की तरफ कर प्रिया. इस बीच अब मुझे उसकी चूतड़ दिखे तो मन हुआ कि अभी गांड में लंड को ही डाल दूँ. पर मैंने देखा कि यह मौका ठीक नहीं है. अगर अभी इसे पता चला कि मैं इसकी गांड मारना चाहता हूँ तो शायद ये चुदे भी न … इसलिए मैंने उसकी चूत मारना ही ठीक समझा.

मैंने जल्दी ही उसकी चुत में लंड को डाला और उसकी जोर जोर से चुदाई करने लगा. उधर लंड की सटासट पम्पिंग से लगातार दिया की सिसकारी निकलते हुए और तेज हुई जा रही थीं. वो बोले जा रही थी- चोदो बेबी … और जोर जोर से!मैंने और तेजी से उसको चोदना जारी रखा. इतनी ही देर में मैंने पूरा पसीने से नहा गया था. कुछ ही देर ऐसे चुदाई करते हुए हुआ होगा कि दिया अब और जोर जोर से सांसें लेने लगी. उसकी चुदास भरी सिसकारियां और तेज हो गईं. कुछ ही पलों में वो एक तेज ‘आआ … अहअ … अअअह … ओह्ह …’ करते हुए झड़ गई. उसके गर्म पानी से मेरा भी पानी उसकी चूत में ही निकल गया.

दो मिनट तो हम ऐसे ही खड़े रहे. मैंने उसको जोर से पकड़ रखा था और मेरा लंड अभी भी उसकी चूत में था. फिर दिया मुझे अलग हुई और बोली- आप तो बोल रहे थे कि कुछ नहीं होगा, ये क्या हालत बना दी मेरी?मैंने कहा- सॉरी बेबी.दिया बोली- ठीक है … पर अब जल्दी से हाथ मुँह धोकर तैयार हो जाओ और मैं भी जा रही हूँ.

दिया ने मुझे एक होंठों को चूमा और वो फिर से तैयार होने चली गई. पर बस मेरे मन में एक ही बात चल रही थी कि आज रात को दिया की गांड मारनी है.

कुछ ही देर में हम दोनों ही तैयार हो कर नीचे चले गए. हम दोनों शादी में अलग अलग गए. वहां जाकर मैंने देखा कि दिया अभी थोड़ा बिजी है, तो मैं टेंट से बाहर निकला और कैमिस्ट की दुकान पर जा कर सेक्स ज्यादा देर तक करने के लिए एक गोली ले ली. इसके बाद मैं फिर से शादी में आ गया.

इतने में दिया की नजर मुझ पर पड़ी, वो इशारे में ही पूछ रही थी- कहां गए थे?मैंने भी बस इशारे में बोल प्रिया कि यहीं था.

शादी में काफी सारे चोदने लायक माल आए थे, पर दिया जो माल बन के घूम रही थी और जो उसकी अदाएं थीं, वे मुझे और भी पागल कर रही थीं.

कुछ ही देर में खाना खाने के बाद अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था, तो मैंने फिर से इशारे में पूछा कि घर कब चल रही हो? तो दिया ने भी इशारे में ही कहा- बस 10 से 20 मिनट में.

मैंने अब कॉफी ली और गोली को कॉफ़ी के साथ पी गया. गोली पीने के 15 मिनट बाद अब मुझे मेरा शरीर गर्म होने लगा. मैंने दिया के पास जाकर बोला- चलो ना यार … फिर से खड़ा हो गया है.तो दिया हंस कर बोली- ठीक है चलो … मेरी भी फड़क रही है.

घर पहुंचते ही पहले मैं अन्दर गया. मुझसे रहा नहीं जा रहा था. मैं बस गेट के पास ही खड़ा हो गया था. जैसे ही दिया घर के अन्दर आई और पीछे मुड़ी. उसने दरवाजे को कुंडी लगाई और मैंने भी देर ना करते हुए पीछे से ही चूचों को दोनों हाथों से पकड़ लिया.दिया बोली- इतनी भी जल्दी क्या है?मैं बिना कुछ बोले ही उस पर टूट पड़ा और पीछे से दोनों हाथों से उसके चूचों को पकड़ कर दबाने लगा और उसकी गर्दन को चूमने लगा. दिया बोले जा रही थी, पर मुझे कुछ सूझ नहीं रहा था. मैं अपना काम करने में लगा हुआ था. मैंने एक हाथ नीचे से उसके लहँगे के अन्दर डाल प्रिया और उसकी चुत को सहलाने लगा.

तभी दिया का हाथ भी पीछे को आया और वो मेरे लंड को जीन्स के ऊपर से ही सहलाने लगी. मैंने उसकी ड्रेस को कंधे से थोड़ा नीचे किया, जिससे उसकी पीठ दिख रही थी. मैं उसकी पीठ को चूमने लगा. कुछ ही देर में मैंने उसके कपड़ों को उतार प्रिया और साथ ही अपने कपड़े भी निकाल दिए. दिया अब लाल ब्रा और पैंटी में मेरे सामने थी. क्या गजब की लग रही थी मानो कोई गुलाब हो.

मैंने वैसे ही यानि बिना मोड़े ही दिया को अपने पास खींचा और उसको पीछे से ही जकड़ कर उसकी गर्दन को चूमने लगा. मैंने अपना एक हाथ को उसकी पैंटी के अन्दर डाल कर उसकी चूत के दाने को रगड़ने लगा, जिससे दिया और भी उत्तेजित होने लगी.

फिर मैंने उसको मोड़ कर सीधा किया और उसके रसीले होंठों को चूसने लगा. साथ ही मैं उसकी चुत के दाने को लगातार रगड़ रहा था, जिससे दिया मस्ती भरी सीत्कारें ले रही थी. मैंने दिया की ब्रा को नीचे किया और उसके एक चुचे को चूसना शुरू कर प्रिया. साथ ही उसके दूसरे चुचे को दबाना शुरू कर प्रिया.

फिर मैं उसके पेट को सहलाता हुआ नीचे उसकी चूत की तरफ अपना हाथ को ले गया और आराम आराम से उसकी चुत कर दाने को रगड़ने लगा. इसके बाद मैंने नीचे बैठ कर उसकी दोनों टांगों को खुला किया और पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को चाटने लगा.

दिया को भी अच्छा लग रहा था. कुछ ही पलों में मैंने उसकी उसकी पैंटी को निकाल प्रिया. देखा कि उसकी चूत पूरी पानी पानी हुई पड़ी थी.

मैंने उसकी चूत के दाने को जैसे ही अपनी जीभ से चाटा, वो थोड़ा उछल सी गई. मैंने उसकी चुत के दाने को होंठों में दबा लिया, जिससे दिया और भी ज्यादा गर्म हो गई. मैंने उसकी चूत में सीधे दो उंगलियां डालीं और जोर जोर से अन्दर बाहर करने लगा. दिया की सांसें अब और भी तेज होने लगी थीं. मैंने उसकी चूत में उंगली अन्दर बाहर करने की रफ्तार और तेज कर दी, जिससे कुछ ही देर में दिया ‘ओह्ह … बेबी मैं गई …’ कहते हुए झड़ गई. उसने मेरा सर पकड़ कर अपने चूत में दबा प्रिया.

अब बारी दिया की थी. दिया नीचे बैठी और मैं खड़ा था. वो मेरा लंड पकड़ कर कभी चूसती, तो कभी चाटती … मुझे तो इतना मजा आ रहा था, जैसे मैं स्वर्ग की सैर कर रहा होऊं. सच में क्या बताऊं दोस्तो आज मेरा दिन बन गया था.

कुछ देर उसने मेरा लंड चूस चूस कर लाल कर प्रिया. मुझसे भी रहा नहीं गया. फिर मैंने दिया को खड़ा कर के उसे दीवार की तरफ उसकी पीठ कर के उसके होंठों पर जोर जोर से चूमा चाटी करना शुरू किया. साथ ही अपने हाथों से दिया की एक टांग उठा कर ऊपर को किया और अपना लंड उसकी चूत पर रखकर धक्का दे मारा. दिया की एक प्यारी सी सिसकारी निकल गई.

मेरा लंड अभी भी आधे से कम ही अन्दर गया होगा, पर मैंने दिया को ऐसे ही पकड़े रखा और फिर धीरे धीरे उसकी चूत में अपना लंड अन्दर बाहर करने लगा. इसी के साथ साथ उसके होंठों को चूसता भी रहा. दिया भी मेरा पूरी तरह से साथ दे रही थी. कुछ ही देर में मैंने दिया की चुदाई करना शुरू कर प्रिया. मैंने लंड को इतनी तेजी से अन्दर बाहर किया कि दिया की हालत खराब हो गई. उसकी तो पूछो ही मत वो इतनी तेज चीखें निकाल रही थी … मानो सील तुड़वा रही हो.

अभी इस तरह से चोदते हुए मुझे कुछ मिनट ही हुए होंगे कि उसे थकान सी होने लगी. मुझसे भी ज्यादा देर ऐसे खड़े नहीं हुआ गया और अब लंड खींच कर उसे पलट जाने को कहा.वो पलट गई तो मैंने उसको घोड़ी बना प्रिया. आह उसका पिछवाड़ा देख कर मेरा लंड हिनहिनाने लगा. उसकी चिकनी और मस्त कमर को पकड़ कर मैं एकदम से चिपक गया. मैंने दिया की चूत में लंड डाला और फिर से उसकी चुदाई चालू कर दी. कुछ ही देर में मैंने दिया की चुदाई करने की स्पीड बढ़ा दी और हम दोनों की चुदासी सिसकारियां पूरे कमरे में गूंजने लगीं. मैंने फुल स्पीड से चुदाई करी, तो हम दोनों ही पसीने से भीग गए थे.

दिया की जितनी तेज आवाज निकलती ‘ऊऊह … ओय्य्य … य्य्यीईई … स्सस्स यश … ऊओह्ह कम ऑन बेबी … फ़क मी … आह … ऊऊऊह … और जोर से … आह … आज प्यास बुझा दो …’ मैं उसको और भी तेज चोदने लगता.

तभी दिया की चुदाई करते हुए मेरी नजर उसकी गांड की छेद पर टिक गई. मेरा मन मचल उठा और उसके चूतड़ों पर मैंने थप्पड़ मारना चालू कर प्रिया. उसकी गांड को थप्पड़ मार मार के लाल कर प्रिया.

गोली खाने से मेरा तो पानी अभी आना नहीं था, पर शायद दिया अभी तक एक बार झड़ चुकी थी. मैंने उसकी चुदाई जारी रखी, तो दिया बोली- मेरा हो गया है. मैं थक गई हूँ.

मैंने सोचा इसकी गांड मारने के लिए कुछ तो करना होगा. मैंने कहा- लाओ जान, आपकी तेल से मालिश कर देता हूं.दिया बोली- ओके ठीक है.

मैं उसको बेड पर ले गया और पहले उसको पीठ के बल लेटा प्रिया और तेल लेकर उसकी पूरी बॉडी पर लगा प्रिया. पहले तो उसके चूचों को गोल गोल अपने हाथों से घुमाता, तो कभी दबाता और सहलाता.

अगले कुछ पल बाद मैं थोड़ा नीचे उसके पेट पर आया और उसकी नाभि को सहलाने लगा. दिया फिर से गर्म होने लगी थी. मेरे मन में ये ही चल रहा था कि किस पोजीशन में इसकी गांड की चुदाई करूँ, जिससे पकड़ सही से बनी रहे.

मैं उसकी चूत के दाने की मालिश करने लगा. उसकी चूत फिर से गर्म हो चुकी थी और मैंने 2 उंगली में तेल लगा कर उसकी चूत में डाल कर अन्दर बाहर करने लगा.कुछ देर बाद अब मैंने दिया को पेट के बल लेटा प्रिया, लेकिन अब मेरा मन बन गया था कि मुझे क्या करना है.

मैंने उसकी पीठ से लेकर उसके चूतड़ तक सब जगह तेल लगा कर उसे सहलाने लगा और जानबूझ कर उसके चूतड़ों को अलग कर के उसकी गांड के छेद पर ज्यादा तेल डाल रहा था ताकि तेल उसकी गांड में चला जाए.

फिर मैं उठा और उसके मुँह के पास आकर उसके मुँह में अपना लंड डाल प्रिया. दिया मेरे लंड को चूस रही थी. कुछ ही देर में मेरा लंड फिर से फिर से टाइट हो गया और अब तक दिया भी पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी. अब मैंने अपने लंड को तेल से गीला किया और दिया की गांड पर तेल डाल पर उसकी पीठ को एक हाथ से सहलाने लगा था, जिसे उसको शक ना हो.

कुछ ही देर में मैं उसकी गांड को मसलने लगा. मैंने अपना लंड उसकी गांड पर रख एकदम झटके से उसकी गांड में पेल प्रिया.वो भी एकदम से चौंक गई और जोर से चीख पड़ी- ओई … आह्ह.अभी तो सुपारा ही अन्दर गया होगा, लेकिन वो दर्द से से रोने लगी- ऊऊह … ये क्या कर रहे हो प्लीज बाहर निकालो … ओह्ह … मुझे बहुत दर्द हो रहा है!

मैंने लंड को निकाला नहीं … कुछ देर उसको प्यार करने लगा. कुछ देर बाद मैं धीरे-धीरे हिलने लगा. उसकी गांड इतनी कसी थी कि मैं ठीक से झटके भी नहीं दे पा रहा था. मैं थोड़ी देर ऐसे ही रहा. वो कुछ शांत हुई … फिर मैं धीरे-धीरे आगे-पीछे करने लगा. तो वो फिर छटपटाने लगी और छूटने की कोशिश करने लगी. वो दर्द के मारे कराहने लगी … तो मैंने उसके दर्द की परवाह किए बिना एक झटका और मार प्रिया. अबकी बार मेरा आधा लंड उसकी गांड में जा चुका था.

अभी आधा लंड ही अन्दर गया था और वो दर्द के मारे चीखें मारने लगी- आह बेबी अपना लंड बाहर निकाल लो … बहुत दर्द हो रहा है.लेकिन मैंने नहीं निकाला. थोड़ी देर बाद मैंने एक और धक्का मारा और उसकी एक जोर की आवाज आई- आह हा … हह ह …उसकी आँखों से आंसू आने लगे. मैंने बिना उसकी परवाह किए बिना, उसकी चुदाई शुरू कर दी.

फिर कुछ देर में दिया की दर्द भरी चीखें सिसकारियों में बदल गईं … उसे भी मजा आने लगा और वो अपनी गांड को आगे-पीछे करने लगी. वो बोले जा रही थी- और जोर से चोदो मुझे … और जोर से मारो मेरी गांड ह्हआआह … ह्ह्ह्म्म …कुछ मिनट दिया की गांड मारने के बाद अभी भी उसकी गांड टाइट थी. दिया भी पूरी मस्त हो गई थी. काफी देर तक उसको ऐसे ही चोदता रहा. फिर मैंने दिया को डॉगी स्टाइल में उसको आने को कहा, अब मैंने लंड को उसकी गांड पर रखा और इस बार मैं एक ही झटके में पूरा लंड उसकी गांड में डालना चाहता था. पर अभी भी उसकी गांड थोड़ी टाइट थी. इसलिए मेरा आधा लंड ही अन्दर जा पाया. लंड पेलने के बाद मैंने उसकी गोरी-गोरी गांड पर थप्पड़ मारना शुरू किये. इससे दिया उछल पड़ती थी और उसकी ‘आह्ह्ह …’ निकल जाती.

कुछ झापड़ मारने के बाद देखा कि उसकी गोरी गांड लाल हो गई थी. मैंने दिया की कमर जोर से पकड़ी और एक और जोर से धक्का लगा प्रिया. दिया फिर एक बार चीख उठी ‘आह्ह … ओओह … म्मम्मीईई …’ मगर मैं पूरी मस्ती में था और दिया की कमर पकड़ कर उसकी जोरदार चुदाई करने में लगा था.

पूरा कमरा हम दोनों की चुदाई की आवाजों से गूंज रहा था. दिया लगातार सीत्कार रही थी- आइया … अह्ह्ह … ऊऊह्ह …लम्बी चुदाई के दिया अब अकड़ने लगी और बोलने लगी- बेबी … मेरा होने वाला है …मैंने फुल स्पीड में कुछ धक्के मारे होंगे और दिया की गांड में सारा माल डाल प्रिया. उसके अगले पल में ही दिया भी झड़ गई. हम दोनों थक गए थे तो दोनों ही एक दूसरे के ऊपर पड़ गए.

फिर मैंने उस रात को उसकी 2 बार और लम्बी लम्बी चुदाई करी और सुबह 5 बजे ही उसके घर से निकल गया … क्योंकि उसके भाई का कोई पता नहीं था, कब आ जाए.

तो यह थी मेरी गांड चुदाई की कहानी. अपने सुझाव जरूर बताएं मुझे … और मेल करके बताएं कि कैसी लगी आपको मेरी कहानीsupport@mohakkisse.com

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अनजान लड़की से ट्रेन में दोस्ती और चुदाई

कुल भाग: 2
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