लेखक : अमन सिंह
हेलो दोस्तो, मेरा नाम अमन है, मैं हरियाणा में अम्बाला का रहने वाला हूँ। मैं आपको एक सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ, यह कहानी मेरी और मेरे दोस्त की बहन के बारे में है। उस समय मैं एन्जीनियरिंग के दूसरे साल में दिल्ली कॉलेज में था और मेरा दोस्त रोहित मेरे साथ ही रहता था, रोहित का घर नॉएडा में है। हम पक्के दोस्त थे।
बातों बातों में उसने बताया था कि उसकी बहन बी.टेक कर रही है।
एक बार इम्तिहान के पास ही हमने योजना बनाई कि हम दोनों पेपरों में रोहित के घर ही रह कर पढ़ाई करेंगे क्योंकि पेपरों में हमारी छुट्टियाँ भी बहुत होती हैं और उसके घर वाले उसके गाँव गए हुए थे। इसलिए हम रोहित के घर चले गए।
पहले चार दिन तो ठीक था लेकिन पाँचवें दिन अचानक उसके घर वाले वापिस आ गए क्योंकि उसके पापा एक टूरिंग जॉब है और उन्हें कोई जरूरी काम पड़ गया था इसलिए वो वापिस आ गए।
जब मैंने पहली बार उसकी बहन रितु को देखा तो वो इतनी सेक्सी लग रही थी कि पूछो मत ! गोरा रंग, पतली कमर, फिगर 34-28-34 था उसने टॉप पैंट पहनी हुई थी पर मैं एकदम ख्यालों से बाहर आया और मैंने सोचा कि यह मेरे दोस्त की बहन है, मैंने सारे बुरे ख्याल अपने दिमाग से मिटा दिए। अगले दिन घर पर रोहित, रितु उनकी माँ और मैं था, सब कुछ ठीक था, हम रोहित के बेडरूम में पढ़ रहे थे कि अचानक रितु आई और रोहित से बात करने लगी।
तभी रोहित ने बताया कि यह मेरा दोस्त अमन है। मैंने रितु को हेलो किया, उसने मुझे हेलो किया।
थोड़े दिनों बाद रितु मुझसे खुल कर बात करने लगी। एक दिन उसने एक कॉल करने के लिए मेरा मोबाइल मांगा, मैंने दे प्रिया पर मैं यह भूल गया कि मेरे मोबाइल में सेक्सी क्लिप पड़ी थी। उसने मुझे मेरे मोबाइल बीस पच्चीस मिनट बाद प्रिया मैंने कोई ध्यान नहीं प्रिया और ऐसा कई बार हुआ पर मैंने ध्यान नहीं प्रिया।
एक दिन रितु नहा कर आ रही थी, उसने सिर्फ तौलिया ही लपेटा हुआ था, मैं तो देखता ही रह गया उसे ! उसकी अदाएँ इतनी सेक्सी थी कि क्या बताऊँ ! पर मैं कुछ नहीं कर पाया और मैंने अपना ध्यान बंटाया।
पर एक दिन रोहित के किसी करीबी रिश्तेदार की मौत हो गई और रोहित और उसकी माँ को उसके गाँव जाना पड़ा। गाँव में तीन चार दिन लगने वाले थे पर उसे मुझ पर भरोसा था वो मुझे और रितु को घर पर छोड़ गया। मेरे मन में भी ऐसा वैसा कोई ख्याल नहीं था।
अगले दिन मैं सोफे पर बैठ कर पढ़ रहा था और रितु टीवी देख रही थी तो हम दोनों बात करने लगे।
रितु- अमन तुम्हें सबसे ज्यादा क्या पसंद है?
मैं- मुझे ज्यादातर घूमना पसंद है, तुम्हें क्या पसंद है?
रितु- मुझे टीवी देखना !
मैं- हाँ वोतो है ही ! मैं जिस दिन से आया हूँ, तुम बस टीवी देखती हो या बातें !
रितु- अओ अओ अ अच्छा? तुम्हें कैसे पता कि मैं टीवी ही देखती रहती हूँ? तुम तो बेडरूम में पढ़ते रहते हो ना !
मैं- नहीं नहीं, तुम गलत समझ रही हो !
रितु- क्या गलत समझ रही हूँ?
मैं-… मैं बोल ही नहीं पा रहा था क्योंकि मैं फंस गया था, मैं उसे देखता था।
थोड़ी देर चुप रहने के बाद रितु बोली- क्या तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?
मैं हैरानी से- नहीं नहीं मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है।
रितु- तो फिर पहले थी क्या?
मैं- नहीं कोई नहीं थी… क्या तुम्हारा कोई बॉयफ़्रेन्ड है क्या?
रितु- नो वे… वैसे तुम क्यों पूछ रहे हो?
मैं- वैसे ही ! और तुम क्यों पूछ रही थी !
रितु- मैं भी वैसे ही पूछ रही थी।
थोड़ी देर बाद रितु और मैं एक दूसरे की आँखों में देखने लगे और मुझे पता नहीं क्या हुआ, मैं उठ कर रितु के पास जा कर बैठ गया और उसकी आँखों में देखने लगा,
क्या लग रही थी वो ! वो मुझे देख रही थी, मैं उसे !
और मैंने उससे पूछा- क्या तुम्हें बॉयफ्रेंड चाहिए?
रितु- हाँ मुझे चाहिए।
मैं- तो क्या तुम मेरी गर्लफ्रेंड बनोगी?
रितु कुछ नहीं बोली और जब मैं वहाँ से उठने लगा तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- हाँ !
मैंने उसके हाथ पकड़े और उसे उठाया और अपने होंठ उसके होंठों से जोड़ दिए। मैं उसके होंठों को चूसने लगा। क्या रस था उनका ! वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी।
मैं- तुम्हारे होंठों का रस बेमिसाल है !
रितु शर्मा गई और वहाँ से भाग गई। मैं उसके पीछे गया और उसे पकड़ लिया, मैं बोला- अब क्या कहोगी तुम?
रितु- आई लव यू !
मैं- आई लव यू टू मेरी जान !
रितु- अब ना छोड़ो मुझे !
मैं- अभी कहाँ मेरी जान, बॉयफ्रेंड हूँ ! तुम्हें ऐसे कैसे छोड़ दूँ?
रितु- तो फिर कैसे छोड़ोगे?
मैंने रितु को उठाया, बेडरूम में ले जाकर बेड पर गिरा प्रिया और उसके ऊपर चढ़ गया।
तभी रितु बोली- रात तक तो इंतजार करो मेरे पिया !
मैं- ठीक है मेरी जान !
नर्स ने लौड़ा चूसा, चूत चुदवाई
और मैंने उसे एक लंबी सी किस की और रितु रसोई में रात के लिए खाना बनाने लग गई।
तभी रितु ने मुझे दही लाने को कहा। मैं दुकान की ओर चल प्रिया, मैं ख़ुशी से मचल रहा था। तभी मैं सोचने लगा कि मेरा यह पहला अनुभव है और मेरा जल्दी छुट जायेगा तो रास्ते में एक केमिस्ट की दुकान से मैंने देर से छुटने वाली गोली ली, उसे आते वक्त रास्ते में ही खा लिया और मैं घर आ गया।
मैंने और रितु ने साथ में डिनर किया और मैं बेडरूम में जाकर बेड पर लेट गया। रितु घर के सारे काम निपटा कर कमरे में आ गई।
मैं- आओ मेरी जान !
रितु शरमा रही थी, तभी मैं उठा और उसे बेड पर लेटा प्रिया। मैंने रितु के होंठों को अपने होंठों से चिपका लिया और चूसने लगा। क्या रस था उनमें ! वो भी पूरा साथ दे रही थी।
तभी मैं रितु की जाँघों पर हाथ फेरने लगा। रितु गर्म हो रही थी और मेरा भी लंड तन चुका था। मैं कपड़ों के ऊपर से ही उसके जिस्म पर हाथ फेर रहा था। हम दोनों गर्म हो चुके थे।
मैं- रितु क्या तुमने पहले कभी किया है?
रितु- नहीं, कभी नहीं ! अब डार्लिंग ये तड़फ बर्दाश्त नहीं होती ! चोद दो मुझे ! मिटा दो मेरी प्यास !
मैं उसके मुख से ऐसी भाषा सुनकर हैरान हो गया।
मैं- प्यास तो मुझे भी बहुत है मेरी जान !
रितु मेरे लंड को पैंट के ऊपर से ही सहलाने लगी। मैंने उसके टॉप को उतारा और उसके गोल गोल मम्मे मेरे सामने थे। मैं उन्हें दबाने लगा। उफ़ कितने नर्म थे उसके मोमे ! मैं उसके उरोज पागलों की तरह चूसने लगा। मैं चूसता रहा, रितु सिसकारियाँ ले रही थी, उसे और मुझे पूरा मजा आ रहा था !
अब मैं रितु के ऊपर बैठ गया और उसके चूचे दबाने लगा। मैं पूरे जोर से उसके स्तन मसलने लगा।
रितु- दर्द हो रहा है अमन !
मैं- मेरी जान, अभी मजा भी आयेगा।
और मैं उसके मोमे मसलता रहा, 10-15 मिनट के बाद रितु के मोमे पूरे सख्त और लाल हो गये थे। अब मैंने उन्हें फिर से चूसा और मैंने रितु की पैंट और पैंटी दोनों निकाल दी।
अब रितु मेरे सामने पूरी नंगी थी, क्या सेक्सी फिगर था उसका कि क्या बताऊँ ! मैं रितु की चूत मसलने लगा, रितु आहें भरने लगी। थोड़ी देर चूत रगड़ने के बाद रितु की चूत ने पानी छोड़ प्रिया और उसकी चूत और मेरा हाथ गीला हो गया।
तभी रितु उठी और मेरे कपड़े उतारने लगी और जैसे ही उसने मेरा अंडरवियर उतारा तो मेरा तना हुआ 5″ लम्बा और मोटा लंड देख कर हैरान हुई और उसने मेरा लंड पकड़ कर उससे खेलने लगी। मैं बेड पर लेट गया और वो मेरे ऊपर बैठ कर मेरी मुठ मारने लगी। मुझे पूरा मजा आ रहा था, तभी मैंने उससे कहा- रितु मेरी जान, मुँह में ले लो इसे !
रितु- नहीं, मैं मुँह में नहीं लूँगी !
मैं- ले लो मेरी जान, मज़ा आयेगा तुम्हें भी !
तब रितु मेरा लंड मुँह मैं लेकर चूसने लगी। मुझे ऐसा मजा पहले कभी नहीं आया था, मैं तो स्वर्ग में था ! तब भी मेरा लंड पूरी तरह तना था और वो गोली पूरा असर दिखा रही थी।
मैं- मेरी रानी आ जा, अब मैं तेरी प्यास बुझाता हूँ।
रितु- अओ मेरे राजा, बुझा दे मेरी प्यास !
मैंने रितु को फिर से पहले की तरह अच्छी तरह से मसला और चूसा। वो फिर से पूरी लाल हो चुकी थी।
रितु- जानू अब और मत तड़फाओ, डाल दो मेरी चूत में अपना लंड !
मैं- अभी लो मेरी रानी !
मैंने लंड को चूत के मुँह पर रखा और जोर से धक्का प्रिया मगर लंड चूत में नहीं घुसा। मैंने एक और बार कोशिश की मगर मैं फिर से नाकाम रहा।
अब मैंने लंड को चूत में पूरी तरह धंसाया और जोर का झटका मारा पर सिर्फ टोपा अंदर गया। मैंने एक और झटका मारा और आधा लंड चूत में घुस गया !
रितु- ओ ओ ओ दर्द हो रहा है अमन ! इसे बाहर निकालो !
मैं- थोड़ी देर में तुम्हें मजा आएगा मेरी जान !
रितु तड़फ उठी और लंड को निकलवाने की कोशिश करने लगी। मैंने देखा कि उसकी चूत में से खून निकल रहा था। मैंने हार ना मानते हुए एक और जोरदार झटका मारा और पूरा लंड अंदर चला गया।
रितु की आँखों से आँसू आने लगे। मैंने रितु के होंठों से अपने होंठ चिपका रखे थे और मैं उसे चूसने लगा।
थोड़ी देर बाद वो शांत हो गई तो मैंने लंड अंदर बाहर करना शुरू कर प्रिया।
10-12 मिनट बाद वो मेरा साथ देने लगी तो मैंने स्पीड बढ़ा दी।
रितु- ओ ओ ओ सि सि सिस मारो मेरे राजा ! और मारो मेरी चूत को !
मैं- फिकर मत कर मेरी रानी ! सारी रात मजा दूँगा तुझे !
मैं रितु को पूरी तेजी से चोदता रहा। लगभग 30 मिनट चुदाई के बाद रितु तीन चार बार झड़ चुकी थी और मैं भी झड़ने वाला था।
मैं- मेरी जान, मैं झड़ने वाला हूँ।
रितु- जो तुम करना चाहो, वो करो !
मैं तभी रितु की चूत में ही झड़ गया और जैसे ही मैंने अपना लंड बाहर निकाला, मेरा लंड पूरा लाल थ और छिल चुका था। रितु की चूत भी पूरी रक्तरंजित थी।
हम दोनों सारी रात एक दूसरे से लिपट कर नंगे ही सोते रहे। जब सुबह हुई तो रितु मेरे पास ही थी। मैंने उसे चूमा और बाद में प्रेग्नन्सी की गोलियाँ लाकर दी।
फ़िर हमने कई बार सेक्स किया वो सारे किस्से सुनने के लिए मुझे मेल करें।