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सुमन- अतुल का माल-3

उषा मस्तानी

20 Jun 2015 को प्रकाशित

सुमन- अतुल का माल-3
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सुमन सीधी होकर पलंग पर बेसुध होकर लेट गई। अतुल भी बेसुध हो रहा था, मेरा लण्ड खाली हो गया था लेकिन मुझे लग रहा था कि मुझे सुमन की गाण्ड और चोदनी चाहिए।

मेरा लण्ड चुदी हुई सुमन को देखकर दुबारा खड़ा हो रहा था।

सरीना बोली- सुमन और अतुल, आप आराम करिए मैं और राजीव आपके लिए अनार का जूस लाते हैं।

मैं और सरीना जूस लेने बाहर आ गए।

सरीना और मैं नंगे थे। सरीना ने रसोई में आते ही मेरा लण्ड मुँह में ले लिया और चूसते हुए बोली- पहले तुम मुझे चोद दो ! मेरी चूत चुदाई देख देख कर बहुत खुजला रही है।

किचन के पत्थर पर टाँगे चौड़ी करके सरीना इस तरह झुक गई कि उसकी चूत में आराम से घुसाया जा सकता था। मेरी चोदने की इच्छा तो सुमन की थी पर सरीना को मैं नाराज नहीं कर सकता था। मैंने अपना आठ इंची लण्ड सरीना की चूत में डाल प्रिया और सरीना को चोदने लगा। चुदते चुदते सरीना अनार के दाने निकालने लगी और जूस बनाने लगी। सरीना को पता था कि कैसे चुदा जाता है। किसी भी मर्द को इस तरह चुदाई की गुरु औरत चोदने में दुगना मज़ा देती है। मुझे भी उसे चोदने में मस्त मज़ा आ रहा था। जूस तयार होने के पाँच मिनट बाद मेरा लण्ड उसकी चूत में खाली हो गया।

सरीना और मैं चार ग्लास जूस बना कर कमरे में आ गए। हम सब नंगे थे, शर्म सबकी छूट गई थी, सबने साथ साथ जूस पिया।

सुमन ने उठकर सरीना को बाँहों में भरा और बोली- सरीना, सच बहुत मज़ा आया, आप नहीं होतीं तो यह अतुल कुत्ता गाण्ड का मज़ा न खुद लेता और न मुझे दे पाता। सच आज जन्नत का मज़ा आया जब अतुल ने मेरी गाण्ड में शताब्दी दौड़ाई तो मुझे ऐसा लगा कि गाण्ड मरवाते मरवाते मर ही न जाऊँ ! सच, बता नहीं सकती कि कितना मज़ा आ रहा था। सरीना, सच मेरी प्यारी सरीना, आज तुम न होतीं तो इतना मज़ा नहीं आता।

सरीना सुमन की चूचियाँ सहलाती हुई बोली- अरे रानी, सेक्स में बहुत मज़ा है ! अभी तो तुमने दो लण्डों का स्वाद थोड़ा सा ही चखा है। जब साथ साथ चूत और गाण्ड में घुसेंगे, तब देखना कितना मज़ा आएगा। अभी तो और मज़े करवाऊँगी बस तू रण्डी बन कर मज़े ले।

अतुल बोला- सरीना जी, मेरा लण्ड तो इसकी गाण्ड में घुस कर चोट खा रहा था, देखिये पूरा लाल हो रहा है।

सरीना ने एक पप्पी अतुल के सुपारे पर ली और बोली- राजा, मज़े भी तो खूब लिए हैं। थोड़ी चोट लग भी गई है तो क्या हुआ। अभी तो इसे रात भर बैटिंग करनी है। सुमन जी भी जब चलेंगी तो इनकी गाण्ड दुखेगी।

सुमन के चुचक नोचते हुए सरीना बोली- राजीव जी का लण्ड गाण्ड में और डलवा लेना फिर कभी गाण्ड फटवाने में दर्द नहीं होगा।

सुमन बोली- नहीं बाबा नहीं ! राजीव का लण्ड अगर घुस गया तो मैं तो मर जाऊँगी।

सरीना हँसते हुए बोली- लण्ड से औरतें मरने लगतीं तो दुनिया कब की खत्म हो गई होती, चलो अब गर्म पानी से नहा लो। रात में दोनों यहीं रुकना, पति का फोन आएगा तो बाथरूम में जाकर सुन लेना।

दोनों रात को रुकने के लिए राज़ी हो गए। सुमन नहाने चली गई।

नहा कर जब सुमन बाहर आई तो बोली- सरीना जी, सच मेरी गाण्ड तो बहुत दुःख रही है, हाय, मुझे तो एसा लग रहा है 2-3 दिन मैं ठीक से नहीं चल पाऊँगी।

सरीना मुस्कुराते हुआ बोली- सुमन जी, आप सही कह रही हैं, यह दर्द 5-6 दिन में सही होगा। और कोई भी औरत जो गाण्ड मरवाती होगी दूर से आपकी चाल से समझ जाएगी कि आपकी गाण्ड मारी गई है। इस दर्द को थोड़ा कम करने के लिए मेरी समझ से आप अपनी चूत किसी लबे और मोटे लण्ड से मरवाएँ लेकिन प्यार से। अगर आप बुरा न मानें तो रात को राजीव जी के साथ सोयें वो प्यार से रात में आपकी सिर्फ चूत मारेंगे और सुबह आपको दर्द कम लगेगा।

सुमन बोली- राजीव जी का लण्ड बहुत सुन्दर है। मेरा खुद उनसे और चूत मरवाने का मन कर रहा है। अपने पति के अलावा अब तक मैंने सिर्फ़ चार लण्डों से चुदवाया है। उन सब में राजीव का लण्ड बहुत सुन्दर और सबसे बड़ा है। सच सरीना जी, मुझे चुदवाओ, आज मैं सारे मज़े लेना चाहती हूँ, कल हो या न हो, मेरे पति भी दस दिन बाद आएँगे, फिर पता नहीं इतनी आज़ादी कब मिलेगी !

और सुमन चूत मरवाने को राजी हो गई।

सरीना ने मुझे समझा प्रिया कि रात मैं सोने के समय सुमन की प्यार से कई आसनों से चूत मारूँ और सुबह 5 बजे तक प्यार से चोदूँ और अपने लण्ड को सुमन की चूत में ज्यादा से ज्यादा घुसा कर रखूँ ।

सरीना अतुल से बोली- अतुल जी, आपको गाण्ड मारने के अभी और गुर सिखाने हैं, आज रात मुझे आपके साथ सोना पड़ेगा नहीं तो अकेले में आप किसी औरत की गाण्ड नहीं मार पाएंगे। आप तो सुमन की चूत पिछले एक साल से मार रहे हैं, आज इस कुतिया को थोड़ा राजीव जी से बज लेने दें।

अतुल बोला- सरीना, मुझे गाण्ड मारना सीखना है मुझे आपके साथ ही सोना है।

सरीना और अतुल दूसरे कमरे में चले गए। मैं सुमन के साथ था। सुमन अब मेरे बेडरूम में थी।

उनके जाते ही वो पलंग पर लेट गई और मैं भी उसके बगल में लेट गया।

मुझसे चिपकते हुए बोली- राजीव जी, गाण्ड बहुत दुःख रही है हम दोनों ने करवट ली और एक दूसरे के होंठों में होंठ डालकर चूसने लगे। मेरा लण्ड उसकी चूत के होंठों पर छू रहा था। सुमन को प्यार से मैंने भींच लिया उसकी चूत के होटों को छू-छू कर मेरा आठ इंच लम्बा लण्ड पूरा कड़क हो रहा था।

मैंने सुमन को सीधा किया और धीरे धीरे से पूरा लण्ड उसे चूमते हुए उसकी चूत में सरका प्रिया। अब मेरा लण्ड उसकी चूत में घुसा हुआ था। सुमन की चूत थोड़ी फटी हुई थी इसलिए लण्ड आराम से घुस गया।

सुमन मेरे होंठ चूसते हुए बोली- सच, आज तो बहुत मज़ा आ रहा है। मेरी कामवाली उमा ने मुझे चुदने का शौकीन बनाया है, बिना चुदे नहीं रह पाती। अतुल से उमा ने ही मेरी दोस्ती कराई थी। सच अतुल ने ही मुझे सिखाया है कि असली चुदाई क्या होती है। हम दोनों महीने में दो बार उमा के घर पर चुदाई का मज़ा लेते हैं। उमा ने अपने नासिक वाले भाई से भी मुझे 2-3 बार चुदवाया है। मेरा पति चोदता तो अच्छा है लेकिन 4-5 साल एक ही लण्ड से चुदने से मैं बोर हो गई थी।

सुमन अब खुल गई थी, मस्ती में बोलती जा रही थी- एक दिन उमा ने मुझे चूत में बैंगन करते हुए देख लिया तब मैंने उसे बताया की मेरी चूत कुछ नया मज़ा चाहती है। इसके बाद उमा ने मेरी दोस्ती अतुल से कराई। 3-4 महीने दोस्ती के बाद पहली बार अतुल से चुदी। मेरी यह पहली गेर मर्द से चुदाई थी। सच, इनसे छुप छुप कर चुदवाती हूँ, इसका अलग ही मज़ा है। एक बार मेरा कुछ अलग मज़ा करने का मन कर रहा था तो उमा मुझे कल्याण अपने मौसाजी के पास ले गई, वहाँ पर उसके मौसाजी ने उमा और मुझे 4-5 घंटे अपने बिस्तर पर नंगा लेटाया और हम दोनों की चूत मारी। सच बुड्ढे 55 साल के मौसा से चुदवाने का अलग ही मज़ा आया।

इसके बाद उसने कहा- राजीव जी, आपका लौड़ा बहुत सुंदर है, इसे मेरी चूत में घुसाए रखो ! सच में बड़ा मज़ा आ रहा है।

मेरा लण्ड सुमन की चूत फाड़े हुए था। मेरा मन अब उसकी सुरंग में धक्के मारने को कर रहा था। सुमन भी आगे पीछे होकर चुदने का मज़ा ले रही थी एक शांत चुदाई सी चल रही थी।

थोड़ी देर बाद सुमन बोली- राजीव, पीछे से अपने शेर को चूत में घुसा दो और इसे चोद दो ! अब रहा नहीं जा रहा है !

मैंने सुमन को घुमा के तिरछा किया और दोनों हाथों से उसकी चूचियाँ दबा ली और चूत में पीछे से लण्ड घुसा प्रिया। मेरा लण्ड उसकी चूत में घुस गया था। धीरे-धीरे से उसकी छोटी छोटी चूचियाँ दबाते हुए मैंने सुमन की चूत चोद रखी थी। आनन्द से भरपूर उसकी सिसकारियाँ गूँज रही थी।

इस बीच सुमन का मोबाइल बजा।

सुमन बोली- मेरे पति का है !

मैंने लण्ड बाहर खींच लिया तो सुमन बोली- घुसाए रखो ! निकालते क्यों हो? तुमसे चुदते हुए पति से बतियाने का मज़ा ही अलग है।

मैंने उसकी चूत में लण्ड दुबारा घुसा प्रिया, धीरे धीरे मेरा लौड़ा उसकी चूत चोद रहा था। सुमन ने फ़ोन उठा लिया।

सुमन फ़ोन पर बोली- डार्लिंग कैसे हो?

सुमन ने स्पीकर फ़ोन ऑन कर प्रिया था। उधर से एक पप्पी की आवाज़ आई और उसके पति ने कहा- रानी, मुझे तो तुम्हारे बिना नींद नहीं आ रही ! लौड़ा हाथ में पकड़े हुए हूँ। तुम क्या कर रही हो? सुमन बोली- चुदवा रही हूँ ! चूत में लण्ड डलवा रखा है ! मज़े कर रही हूँ !

कहानी जारी रहेगी।

आपकी उषा

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सुमन- अतुल का माल

कुल भाग: 4
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

रोहित गुप्ता 2

1 month ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

सविता रण्डी

2 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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