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रेलगाड़ी का मज़ेदार सफ़र -1

स्वीट राज

11 Jul 2017 को प्रकाशित

रेलगाड़ी का मज़ेदार सफ़र -1
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मैं अन्तरवासना का नियमित पाठक हूँ, मैं काफी समय से अपनी कहानी भेजने के बारे में सोच रहा था। मैं आज अपनी कहाँ लेकर आपके सामने हाजिर हूँ।

मैं बिहार का रहने वाला हूँ, दिल्ली में नौकरी करता हूँ। अभी नवम्बर के महीने में मैं राजधानी एक्सप्रेस से पटना जा रहा था। मेरा साइड लोअर बर्थ था। ट्रेन निर्धारित समय से थी। मैं अपना सामान लेकर अपनी सीट पर जाकर बैठ गया।

थोड़ी देर में एक 22-23 साल की लड़की मेरे सामने आकर बैठी। उसका साइड अपर बर्थ था। बला की खूबसूरत थी वो । उसकी चूचियाँ बड़ी मस्त थी। बार-बार मैं उसकी चूचियाँ देख रहा था, नजर नहीं हट रही थी।

ट्रेन लगभग छः बजे चली। तब तक हमने एक दूसरे से बात करना शुरू कर प्रिया था। वो ऍम सी ए करने के बाद दिल्ली में किसी सॉफ्टवेयर कंपनी में जॉब कर रही थी। हमने कम्बल से अपना पैर ढक लिए क्योंकि सर्दी बहुत थी। रात को आठ बजे हमने खाना खाया।

खाना खाने के बाद वो बोली- क्या आप उपर के बर्थ पर सो जायेंगे?मैं तैयार हो गया और सोने जाने लगा।तो वो बोली- अभी से क्या सोना, थोड़ी देर बात करो।

हमने कम्बल अपने पैरों पर फ़ैला कर बात करना शुरू किया। मेरा ध्यान बार बार उसकी चूचियों पर जा रहा था, जो उसके स्वेटर पर से भी काफी बड़ी लग रही थी।

जब मैं उसकी चूचियों को देखता तो वो मुस्कुरा देती, इससे मेरा हौसला और बढ़ रहा था।

मैंने फिर अपना पैर कम्बल के अंदर उसके पैर से धीरे से सटाया तो वो कुछ नहीं बोली और मुस्कुरा दी।

मैं समझ गया कि वो भी मस्ती के मूड में है। मैंने धीरे-धीरे अपना पैर उसके जांघों के बीच में रख प्रिया और उसकी चूत पर जींस के ऊपर से ही रगड़ने लगा।

अब वो भी गरम हो गई थी।फिर मैंने उससे कहा- तुम लेट जाओ !वो लेट गई। मैं उसके पैरों की तरफ बैठा था, मैंने अपना एक पैर जो बर्थ की तरफ़ था उसे मोड़ कर खड़ा कर लिया ताकि किसी को पता न चले।अब मैंने उसकी जिप धीरे धीरे खोली और अपने हाथ उसकी खुली जिप से पैंटी के अंदर डाला, उसकी चूत एक दम चिकनी थी। उसकी चूत गीली हो चुकी थी। मैं उसकी चूत को धीरे-धीरे रगड़ने लगा। मेरा आठ इंच का लंड एकदम से खड़ा हो गया था, मैं उसके हाथ में अपने लंड देना चाहता था पर ऐसा करना संभव नहीं था क्योंकि ऐसा करने से लोगों को शक हो सकता था।

हम बातें कर रहे थे और मैं उसकी चूत को सहला रहा था, वो मुस्कुरा रही थी। मेरा तो मन हो रहा था कि अभी उसकी पैंटी उतारूँ और लंड उसकी चूत में पेल दूँ लेकिन क्या करता, मज़बूरी थी।

कुछ देर तक उसकी चूत मसलने के बाद मैंने अपनी एक उंगली उसकी चूत में डाल दी।

क्या मस्त चूत थी ! मैं अपनी ऊँगली आगे-पीछे करने लगा। करीब दस मिनट के बाद मेरी उंगली गीली हो गई तो मैंने अपनी उंगली निकाल ली। वो शांत हो गई पर मेरी उत्तेजना बरक़रार थी।

मैंने उससे बोला- मुझे तेरी चूत देखनी है !तो वो बोली- यहाँ कैसे?

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मैंने उसे बताया कि जब सब सो जायेंगे तो बाईं तरफ़ वाले बाथरूम में तुम पहले चली जाना, थोड़ी देर के बाद मैं आकर दो बार खटखटाऊंगा। इसके बाद मैं ऊपर वाले बर्थ पर चला गया और इंतजार करने लगा कि कब उसकी चूत देखने को मिलेगी।

करीब दो घंटे के इंतजार के बाद वो बाथरूम की तरफ गई। करीब पाँच मिनट के बाद मैं गया और बाथरूम के दरवाजे पर दो बार खटखटाया तो उसने दरवाजा खोला और मैं अंदर चला गया।

मैंने अंदर जाते ही उसे अपनी बाहों में भर कर चूमना शुरू कर प्रिया। मैं उसके होठ चूस रहा था और अपने हाथों से उसके चूतड़ सहला रहा था, वो काफी गरम हो गई थी।

थोड़ी देर में मैंने उसके टॉप के अंदर हाथ घुसा प्रिया और उसके टॉप को ऊपर किया। गुलाबी पारदर्शक ब्रा में उसकी चूचियाँ क़यामत ढा रही थी। मैं उन्हें जोर-जोर से मसलने लगा। उसके मुँह से आह की आवाज निकल रही थी। फिर मैं उसकी चूचियों को मुँह में लेकर चूसने लगा। कुछ देर चूसने के बाद मैंने उसकी जींस खोली। उसकी पैंटी भी गुलाबी रंग की थी, मैंने उसकी पैंटी उतारी।आह, क्या मस्त चिकनी चूत थी।

मैंने उसकी चूत चाटना शुरू किया तो उसके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी। करीब दस मिनट तक मैं उसकी चूत चाटता रहा, अब उसकी चूत से पानी निकलने लगा था।फिर वो बोली- अपना भी तो दिखाओ।

मैंने अपना आठ इंच का लंड निकाल कर उसके हाथों में दे प्रिया।मैंने उसे बोला- मेरा लंड चूसो !पहले तो वो मना कर रही थी, फिर वो तैयार हो गई और मेरा लंड चूसने लगी।

मुझे काफी मजा आ रहा था, जब मुझे लगा कि अब मेरा वीर्य निकलने वाला है तो मैंने उसके मुँह से अपना लंड निकाल लिया।वो बोली- इतना मोटा और बड़ा लंड मेरी चूत में कैसे जा सकता है?तो मैंने बोला- अभी दिखाता हूँ !

मैंने उसके वाशबेसिन के सहारे आगे की तरफ झुका प्रिया, उसकी चूत अब पीछे से एकदम सामने आ गई थी, मैं अपना लंड उसकी चूत पर रख कर धीरे धीरे धकेलने लगा, उसे थोड़ा दर्द हो रहा था।मैं धीरे धीरे लंड डालने लगा और थोड़ी देर में मेरा लंड पूरी तरह उसकी चूत में चला गया।

फिर मैं धीरे धीरे उसकी चूत चोदने लगा, मैं पीछे से धक्का मार रहा था और वो अपनी गांड पीछे के तरफ कर के धक्के लगा रही थी। मैं उसकी गांड पकड़ कर जोर जोर से धक्के मार रहा था, करीब दस मिनट की चुदाई के बाद वो झड़ गई।

पर मेरा लंड अभी भी खड़ा था। अब मैंने उसे वाश बेसिन पर बैठा प्रिया और उसकी चूत चोदने लगा । करीब 15 मिनट तक उसकी चूत की चुदाई की और जब लगा कि मेरा वीर्य अब निकलने वाला है तो मैंने अपना लंड उसकी चूत से निकाल कर वीर्य बाहर गिरा प्रिया और हमने अपने कपड़े ठीक किए।हमने एक दूसरे को चूमा और बाहर आकर अपने बर्थ पर लेट गए।

सुबह करीब 5 बजे मैंने नीचे उसके बर्थ पर आया और कम्बल को अपने पैरों पर रख कर बैठ गए और बातें करने लगे।

मैं कभी उसकी चूचियों को दबाता और कभी अपने पैरों से उसकी चूत रगड़ता। इस प्रकार छः बज गए और ट्रेन पटना पहुँच गई। हमने एक दूसरे का मोबाइल नम्बर लिया।उसे लेने उसका भाई आया था, ट्रेन से उतरकर वो अपने भाई के साथ चली गई।

मैं दस दिन के बाद दिल्ली वापस लौट गया और वो करीब एक महीने के बाद दिल्ली लौटी। फिर हमने फ़ोन पर बात की। मैंने अब तक उसकी चूत दो बार और चोदी।इसके बारे में मैं बाद में बताऊंगा।आशा है कि आपको मेरी आपबीती पसंद आई होगी। आप अपना जवाब मुझे ईमेल कर सकते हैं।support@mohakkisse.com1881

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रेलगाड़ी का मज़ेदार सफ़र

कुल भाग: 2
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पाठकों की राय

1 टिप्पणी

बिंदास हंक

2 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

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