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जवान लड़की पठन समय: 16 मिनट पढ़ा गया: 986 बार

कट्टो रानी-4

समीर

19 Nov 2020 को प्रकाशित

कट्टो रानी-4
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कहानी का पहला भाग :कट्टो रानी-1कहानी का तीसरा भाग :कट्टो रानी-3

योजना के अनुसार नेहा ने घर आने के लिए सुलेखा भाभी का सहारा लिया.

उसने आंटी से कहा- मम्मी… भाभी और मैं सोने जा रहें हैं, घर की चाबी दे दो.

आंटी ने कहा- चाबी समीर ले गया है वो हमारे ही घर पे सो रहा है, तुम भाभी के साथ जाओ और मोनू को भी ले जाना उसको कल स्कूल भी तो जाना है.

थोड़ी देर में नेहा, भाभी और मोनू आ गए, नेहा ने मोनू से कहा- तू जाकर अपने कमरे में सो जा, हम तीनों नीचे ही सोएगें, अगर कोई आएगा तो दरवाज़ा भी तो खोलना है.

मोनू ऊपर चला गया और नेहा ने जीने का दरवाज़ा बंद कर प्रिया.फिर हमारा खेल शुरु हुआ…

नेहा को मैंने गोद में उठाया और अंदर कमरे में ले जाकर बैड पर पटक प्रिया. मैं उसे बेतहाशा चूमने लगा और उसके कपड़े उतारने लगा, तो नेहा ने शरमाते हुए कहा- समीर… भाभी देख रहीं हैं.मैंने भाभी की तरफ देखा तो भाभी मुस्कराकर बोली- देवर जी बड़ी जल्दी में हो, भाभी को तो भूल ही गये.मैंने कहा- आप भी आ जाओ भाभी सब मिल कर मजा करेगें. भाभी ने पास आकर कहा- तुम दोनों मज़े करो, मैं तो बस तुम्हें देख कर ही काम चला लूंगी और मुझे पहरा भी तो देना है कहीं कोई आ गया तो?इतना कहकर मेरे होठों पे चुम्बन प्रिया और बाहर की तरफ चली गईं.

फिर मैंने झटाक से नेहा के सारे कपड़े उतार दिए सिर्फ़ पेंटी को छोड़कर और उसे बिस्तर पर लिटाकर चूमने लगा. मेरे सामने एक कच्ची कली नंगी पड़ी थी और मुझे यह सब एक हसीन सपने की तरह लग रहा था. कमरे में पूरी तरह उजाला था और नेहा का गोरा बदन सोने की तरह चमक रहा था. मैंने नेहा की रसीली चूचियों को मसलना शुरु किया और उसके चूचुकों से रस पीने लगा.

नेहा की सीत्कारें पूरे कमरे में गूंज रहीं थी, घर में कोई नहीं था तो हम दोनों ही कामुक आवाज़ें निकाल कर सेक्स का पूरा मजा ले रहे थे.नेहा- आह्… ओह्ह्ह… आह्ह्ह आऊच… समीर! मैं कहीं भागी थोड़ी ना जा रही हूँ बाबा, ज़रा आराम से करो ना.मैं- ओह मेरी रानी, तू तो मेरी है पर कमबख्त यह वक्त तो भागा जा रहा है ना, फिर ये मौका मिले न मिले.

फिर मैंने नेहा की पेंटी भी उतार फ़ेंकी. क्या बताऊँ यार, एकदम गोरी और लाल-लाल चूत थी उसकी एकदम अंग्रेजन की तरह. उसकी चूत ही इतनी प्यारी थी कि बिना हाथ लगाए ही मैंने अपनी जीभ उसकी चूत पर लगा दी.

नेहा बिस्तर पर सिकुड़ने लगी और खिलखिलाते हुए कहने लगी- यह क्या कर रहे हो समीर, मुझे तो गुदगुदी सी हो रही है.मैंने कहा- मेरी जान तेरी चूत पहली बार चुदते हुए शरमा रही है, आज इसकी सारी शर्म निकाल दूँगा.

फिर मैं नेहा की चूत चाटने लगा, अपनी जीभ को उसकी चिकनी चूत में डालने लगा लेकिन उसकी चूत की सील बंद होने के कारण सिर्फ़ जीभ का अग्र भाग ही नेहा की चूत में जा पा रहा था. फिर मैं उसकी चूत को अपने होठों में भर-भर कर चूसने लगा और उसके चूत के दाने को धीरे-धीरे अपने दांतों से मसलने लगा.

नेहा बुरी तरह छ्टपटा रही थी और जोर जोर से सीत्कार रही थी- आआ…ह्ह्ह्ह ऊओह्ह्ह्ह समीर! बहुत अच्छा लग रहा है, मजा आ रहा है… आआऊच आह्ह!मैंने कहा- मेरी जान ये तो शुरुवात है असली मजा तो तुझे चुदाई में आएगा.

तभी मेरा ध्यान कमरे के दरवाज़े की तरफ़ गया तो मेरी आँखें हैरानी से फ़टी रह गईं, मेरे सामने चौंका देने वाला नज़ारा था.सुलेखा भाभी दरवाज़े के सामने कुर्सी पर बिल्कुल नंगी बैठी हुई थी और अपनी टांगों को फ़ैला कर अपनी चूत को उंगली से चोद रही थी. नेहा और मैं इतनी मदहोशी में थे कि हमें पता ही नहीं चला कि भाभी कब से वहाँ बैठी थी, इतने दिनों बाद भाभी की कंटीली जवानी देख कर मेरी आँखों में चमक आ गई.

भाभी ने मुझे अपनी ओर आने का इशारा किया तो मैं अपने आप को रोक नहीं पाया और नेहा को छोड़कर भाभी के पास चला गया. भाभी ने अपनी टांगें और फ़ैलाकर ऊपर उठा लीं, मैं समझ गया कि वो मुझे अपनी चूत चूसने का निमंत्रण दे रहीं हैं. तो मैं देर ना करते हुए भाभी की चूत को अपने होठों से पकड़-पकड़ कर चूसने लगा. भाभी अपनी चूत की चुदाई पहले ही उंगली से कर चुकी थीं, इसलिए उनकी चूत से काम रस बह रहा था जिसे मैं बड़े मज़े से चाटे जा रहा था. भाभी अपनी चूत को पहले ही मसल चुकी थीं, इसलिए ज्यादा देर तक नहीं टिक सकीं और मेरे सिर को पकड़ कर अपनी चूत पर दबाने लगीं.

मैं समझ गया कि भाभी अपने काम रस से मेरा मुँह धोने वाली हैं. पर मैं उनका काम रस पीने के मूड में नहीं था इसलिए मैंने अपना मुँह उनकी चूत से हटाया और अपनी दो ऊँगलियों से उनकी चूत चोदने लगा. कुछ ही देर में भाभी जोर-जोर से आह्ह्ह ओ… ओ… ह्ह्ह ऊउफ़्फ़ ह्हाआए एएए सी… आह्ह करती हुई झड़ने लगीं. सारा पानी झड़ने के बाद मैंने भाभी की चूत को एक कपड़े से अच्छी तरह साफ़ किया और खड़ा हो गया.

भाभी मेरे लंड पर हाथ फ़िराने लगी, फिर पैंट से बाहर निकाल कर चूसने लगीं. कुछ देर बाद भाभी खड़ी हुई और मेरा लंड पकड़ कर मुझे नेहा के पास ले गईं, और नेहा से मेरा लंड चूसने को कहा.

नेहा मना करने लगी तो भाभी ने उसे समझाया कि लंड चूसने में बड़ा मजा आता है और बिना लंड चूसे तो चुदाई का मजा ही नहीं है. नेहा फिर भी नहीं मानी तो भाभी मेरा लंड चूस-चूस कर नेहा को चुम्बन देकर मेरे लंड का स्वाद नेहा को देने लगी.

ऐसा करने से नेहा की जीभ को मेरे लंड का स्वाद लग गया और उसकी शर्म जाती रही. अब उसने मेरा लंड थाम लिया और उसे नीचे से ऊपर तक चाटने लगी, मेरे टट्टों को मसलने लगी.

फिर उसने मेरा लंड चूसना शुरु किया, वो मेरे लंड को गपागप चूस रही थी और मेरे मुँह से कामुक आवाज़ें निकल रही थीं… आअह्ह्ह ओह्ह्हा आह्ह और चूस मेरी जान मेरे लंड को पूरा मुँह में ले.

ऐसा कहकर मैंने अपना लंड उसके मुँह में पूरा अंदर तक ठूँस प्रिया और उसका मुख चोदन करने लगा.

फिर भाभी ने कहा- चल अब देर ना कर! जल्दी से इस बेचारी की सील तोड़ दे! अगर कोई आ गया तो बेचारी तड़पती रह जाएगी. मैंने अपना लंड नेहा के मुँह से बाहर निकाल लिया, भाभी ने नेहा को लिटाया और उसकी चूत को चूस कर कहा- ले समीर, जल्दी कर! इसकी चूत चुदने के लिए तैयार है!

और इतना कहकर भाभी ने नेहा की चूत पर ढेर सारा थूक डाल प्रिया. मैंने नेहा की टांगों को अच्छी तरह फ़ैलाया और अपना लंड नेहा की चूत पर रगड़ने लगा जिससे वो बिस्तर पर नागिन की तरह कसमसाने लगी. भाभी ने मेरी पीठ पर एक चांटा मारा- क्यूँ तड़पा रहा है बेचारी को, जल्दी से इसकी चूत की सील तोड़…

फिर मैंने लंड को चूत के द्वार पर रखा और झटके से लंड को अंदर करने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहा, नेहा की चूत भाभी के थूक से बहुत चिकनी हो चुकी थी इस कारण मेरा लंड फिसल गया. मैंने फिर से निशाना साधा और शॉट लगाया और इस बार मेरे झटके से लंड नेहा की चूत में घुस गया.

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नेहा की चूत की सील खुल चुकी थी लेकिन अभी मेरा लंड नेहा की चूत में आधा ही घुस पाया था. नेहा की आँखों में खुशी के आँसू छलक आये और वो जोर-जोर से सिसक रही थी, फिर मैंने नेहा की हालत देखकर अपना लंड नेहा की चूत से बाहर निकाला.

नेहा ने अपनी चूत का हाल देखने के लिए अपना हाथ चूत की तरफ उठाया लेकिन भाभी ने उसका हाथ पकड़ लिया और उसके हाथ से अपने चूचे दबवाने लगीं, अगर नेहा अपनी चूत में आए खून को देख लेती तो वो बहुत ज्यादा घबरा जाती.

भाभी और मैं नेहा के चूचों को मसल रहे थे और मैं कभी नेहा को तो कभी भाभी को चूम रहा था. थोड़ी देर बाद जब नेहा सामान्य हुई तो मैंने फिर से अपना लंड नेहा की चूत में डाल प्रिया और धीरे-धीरे झटके लगाने लगा. अब नेहा को भी मजा आने लगा तो उसने अपनी टांगे उठाकर मेरी कमर पर लपेट लीं और अपनी कमर हिला-हिलाकर अपने आनन्द का सिगनल देने लगी. हम काफ़ी देर तक इसी मुद्रा में सम्भोग के आनन्द में डूबे रहे.

भाभी हमारे बगल में लेटी हुई थी और हमें देखकर अपनी चूत को मसल रही थी और मैं भाभी के चूचों को दबोच रहा था. तभी नेहा का शरीर अचानक से सिकुड़ने लगा, उसकी आँखें बंद होने लगीं और नेहा मुझे अपनी टांगों के बीच में कसने लगी. मैं समझ गया कि अब नेहा झड़ने वाली है, मैंने भी अपनी गति को बढ़ाया और तेज़ी से धक्के देकर नेहा की चूत को चोदने लगा.

थोड़ी देर बाद नेहा ने अपनी आँखें बंद कर ली और आंह्ह ऊउह्ह्ह्ह ओह्ह्ह सी…सी… करके झड़ने लगी. उसके कामरस में इतना उबाल था कि मैं भी पिंघल गया और पूरी तेज़ी के साथ चोदते हुए उसकी चूत में ही झड़ने लगा.

नेहा की चूत में लंड फंसाये मैं उसके ऊपर ही पड़ा हुआ था. भाभी मेरे सिर पर हाथ फ़ेरते हुए कहने लगी- उठो ना देवर जी, अब छोड़ भी दो बेचारी को और इसकी चूत को थोड़ा सांस तो लेने दो, मेरी चूत पर भी कुछ तरस खाओ और अब इसका भी बाजा बजा दो.

मैं नेहा के ऊपर से उठा तो उसकी चूत से ढेर सारा कामरस बाहर निकला और उसके चूतड़ों से होता हुआ चादर पर गिर गया. भाभी ने नेहा से पेशाब कर आने को कहा ताकी उसका गर्भ ना ठहरे और नेहा बाथरुम चली गई.

मैंने चादर पर गिरा हुआ कामरस कपड़े से साफ़ किया और फिर से बिस्तर पर लेट गया. अब भाभी मेरे ऊपर आ गई और मुझे चूमने लगी, मैं भी भाभी के होंठों का रसपान करने लगा.

भाभी कहने लगी- समीर, तुम मुझे इतने दिनों बाद मिले हो, आज तो मुझे जन्नत की सैर करा दो मेरे राजा.मैंने कहा- क्यों नहीं भाभी, आप इतने दिनों बाद मिली हो तो आपकी खातिर तो करनी ही पड़ेगी!इतना कहकर मैं भाभी को चोदने के लिए उठने लगा, तो भाभी ने मुझे धक्का देकर लिटा प्रिया.भाभी- तुम्हें उठने की ज़रूरत नहीं है, जो मुझे चाहिए मैं अपने आप ले लूँगी.

भाभी मुझे चूमती हुई नीचे लंड तक पहुँच गई और बड़े प्यार से मेरे लंड को सहलाने लगी जिससे मेरा लंड अपने विशाल रूप में आने लगा. फिर भाभी ने मेरा लंड पूरा का पूरा अपने मुँह में ले लिया और चुप्पे लगाने लगी.

मेरे मुँह से आह्ह्ह ओह्ह्ह भाभी… मेरी रानी, क्या मस्त चुस्क्कड़ है तू! निकल रहा था और मैं अपनी कमर उछालने लगा.इतने में नेहा वहाँ आ गई- ओ… तो देवर-भाभी की रास लीला शुरु हो गई, मेरी प्यारी सी चूत का भौंसड़ा बना प्रिया और अब दोनों मिल कर ऐश कर रहे हो.

नेहा मेरे मुँह के उपर टांगें चौड़ी करके अपनी चूत दिखाने लगी- देखो समीर, तुमने मेरी चूत का क्या हाल बना प्रिया है, बेचारी कितनी रो रही है अब इसे पुचकार तो दो…

इतना कहकर नेहा ने अपनी चूत मेरे मुँह पर रख दी और रगड़ने लगी. मैं नेहा की चूत में अपनी जीभ घुमाने लगा, उसकी चूत एकदम फ़्रैश लग रही थी शायद वो धोकर आई थी. अब नेहा की चूत खुल चुकी थी तो मेरी जीभ उसकी चूत में पूरी अंदर जा रही थी.

उधर… भाभी चूस-चूस कर मेरे लंड़ का पानी निकालने पर तुली थी पर मैंने अपने आप को संभाला हुआ था ताकी भाभी की जोरदार चुदाई कर सकूँ.

फिर नेहा ने भाभी को हटा प्रिया और हम 69 की मुद्रा में आ गए. अब नेहा मेरे लंड के चुप्पे लगाने लगी और साथ-साथ अपनी चूत को जोर-जोर से हिलाकर मेरे मुँह पर रगड़ रही थी. थोड़ी देर के बाद नेहा ने मुझे संभलने तक का मौका ना देते हुए अपनी चूत का सारा पानी मेरे मुँह पर झाड़ प्रिया. मैंने नेहा को अपने ऊपर से हटाने की कोशिश की पर नाकाम रहा, उसने मेरे मुँह को अपनी टांगों के बीच कस कर जकड़ा हुआ था और लगातार अपनी चूत मेरे मुँह पर रगड़े जा रही थी. जब मेरी सांस रुकने लगी तो मैंने नेहा की चूत के दाने को दांतों से काट लिया, तब जाकर नेहा ने मुझे अपने चुंगल से आज़ाद किया, तब मुझे एक जवान लड़की की ताकत का अंदाज़ा हुआ.

भाभी जोर-जोर से हंसने लगी- समीर, दिन में तो मैंने अपनी लिप्सटिक से तुम्हारा मुँह लाल किया था लेकिन नेहा ने तो अपने काम रस से तुम्हारा मुँह एक दम से सफेद बना प्रिया है, शाबाश नेहा…

मैं बाथरुम में गया और अपना मुँह अच्छी तरह साबुन से धोया, कुल्ला किया और वापस कमरे में गया.

नेहा- क्यों समीर… मेरे रस को पीने से कुछ ताकत आई या नहीं…?यह कह कर नेहा और भाभी हंसने लगीं.मैं- अब देखो… मैं तुम दोनों का क्या हाल करता हूँ.भाभी- मैं तो कब से तड़प रही हूँ राजा, कर दे मेरा काम तमाम.

मैं जैसे ही बैड के नजदीक गया, भाभी ने मुझे बिस्तर पर लिटा प्रिया और मेरे ऊपर चढ़ गई, भाभी ने मेरा लंड अपनी चूत से लगाया और झटके से बैठ गई. एक ही बार में मेरा पूरा का पूरा लंड भाभी की चूत में चला गया और भाभी की आह निकल गई. भाभी उछल उछल कर अपनी चूत चुदवा रही थी और मैं भी नीचे से झटके लगा रहा था.

कुछ देर बाद मैंने भाभी को अपने नीचे लिटा लिया और भाभी की जबरदस्त चुदाई की और भाभी के सारे कस-बल निकाल दिए.

हम तीनों ने मिलकर सुबह के 4 बजे तक सैक्स का जी भर कर लुत्फ़ उठाया, मैंने अपने काम रस से भाभी और के मुँह का मेकअप भी किया ठीक उसी तरह जैसे नेहा ने मेरा किया था.

तो दोस्तो, यह थी… कुंवारी चूत के साथ मेरे संभोग की कहानी.आपको यह कहानी कैसी लगी, मुझे मेल करके बतायें, मुझे आपकी मेल का बेसब्री से इन्तजार रहेगा. मेरी कहानी को अपना कीमती समय देने के लिए… धन्यवादsupport@mohakkisse.com

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कट्टो रानी

कुल भाग: 4
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

लव कुमार

3 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

विक्रम गोयल

4 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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