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ग़ोवा में सुहागरात-2

रोहित मल्होत्रा

17 Jul 2016 को प्रकाशित

ग़ोवा में सुहागरात-2
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प्रेषक : अमित मल्होत्रा

मेरी बात पर वो सोच कर बोली- तुम सही हो।

अब मुझे नींद आ रही थी तो मैंने कहा- चलो, अब वापस चलते हैं।

उसने कुछ ना कहा और हम कमरे की तरफ़ चल पड़े। उसके कमरे के पास आकर जैसे ही मैंने उसे ‘गुड-नाईट’ कहा वो पलट कर बोली, “क्या मैं आज की रात आप के साथ गुजार सकती हूँ? देखो मना मत करना तुमने ही कहा था कि जिसके साथ अच्छा लगे उसके साथ समय बिताना चाहिये ! मुझे सिर्फ़ एक रात दे दो प्लीज !”

उसके बोलने पर मैं ना जाने क्यों मना ना कर सका। हम दोनों अब अपने कमरे में थे। पूजा अब बदली-बदली सी लग रही थी।

रुम में आने के बाद उसने पूछा- क्या मेहमान को कुछ पिलाओगे नहीं !

मैंने तुरन्त फ़्रिज खोल कर पेप्सी की केन निकाल ही रहा था कि उसने आ कर बियर की एक बोतल निकाल ली और बोली, “मैं ये पियूँगी !

और मुँह से बोतल लगा कर पीने लगी। थोड़ा सा पीते ही उसने बोतल को झटके से नीचे रख प्रिया और अजीब सा मुँह बना कर बोली, “ये तो कड़वी है !”

मेरी हँसी निकल गई। मैं समझ गया कि पूजा ने शायद पहली बार बियर पी थी।

वो बोली- पूरे मुँह का टेस्ट बिगड़ गया।

मैंने तुरन्त फ़्रिज मे से कैडबरी निकाल कर उसे प्रिया और मैंने भी तोड़ कर खा ली तो वो बोली, “मैं मानती हूँ कि मुझे बियर नहीं पीना आता पर तुम्हें शायद कैडबरी खाना सिखाना पड़ेगा।”

पूजा एकदम से मेरे पास आकर अपने हाथों में कैडबरी लेकर मेरे मुँह में डाल दी और मुझे चुम्बन करने लगी। मेरे लिये उसका चुम्बन करने का तरीका ही नया था, वो पूरी जीभ मेरे मुँह में घुमा रही थी। कैडबरी कभी उसके मुँह में चली जाती, कभी मेरे मुँह में और उसका मीठा स्वाद… अय.. हय.. मैं कह नहीं सकता कि मुझे कितना मजा आ रहा था।

हम एक-दूसरे को चुम्बन करते रहे, जब तक कैडबरी खत्म नहीं हो गई।

बाद में पूजा ने हँसते हुए कहा, “देखा कैडबरी कैसे खाते है !”

अब तो मुझे भी लगने लगा कि कैडबरी आज तक मैं सचमुच गलत तरीके से खा रहा था।

एक कदम पूजा बढ़ा चुकी थी अब मेरी बारी थी मैंने भी उसे निराश नहीं किया… और मैंने कहा, “तुम्हें भी कैडबरी पूरी तरीके से खिलाना नहीं आता मै सिखाता हूँ तुम्हें।”

और मैंने उसे अपने बांहों में भर लिया और एक जोरदार चुम्बन लिया। मैं उसे बेड की तरफ़ ले गया और हमने एक-एक कर के अपने कपड़ों को अपने बदन से अलग किया और एक-दूसरे से लिपट गए।

अब मेरी बारी थी मैंने कैडबरी उसके सीने के दोनों निप्पलों पर लगाया और हाथों से मसलने लगा। वो एकदम बेचैन हो गई। तब मैंने मुँह से बारी-बारी से पूजा के चूचुकों को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा।

अब तो पूजा भी अपने हाथों से कैडबरी ले कर अपने चूचुकों पर लगा कर मुझे चूसने में मदद करने लगी।

कम से कम 15 मिनट तक हम यही करते रहे। उसके बाद मैं पूजा के दोनों पैरों के बीच की घाटी को देखा, निहायत ही खूबसूरत, एकदम सफाचट, डबल-रोटी की तरह फूली हुई थी। मैंने उसको सहला कर धीरे से अपनी एक उंगली अन्दर डाल कर आगे-पीछे की, तो वो कमर उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी। अब मैंने थोड़ा नीचे आकर पूजा की दोनों टाँगों को पकड़ कर थोड़ा सा फ़ैलाया।

उफ़… ! क्या नजारा था… घाटी में प्यारी सी दरार…!

गुलाबी माल देख कर अब तो मेरा भी धैर्य जवाब देने लगा और उस प्यारी से दरार में अपना मुँह सटा प्रिया और अपनी जीभ का कमाल दिखाने लगा।

पूजा के मुँह से, “आह… आह्ह… आह्ह… ओह्ह… यू मेक मी मैड…” आवाज आने लगी।

मैं भी 10-12 मिनट तक लगा रहा और अचानक उसने मेरा सर कस कर अपने पैरों के बीच दबाया और एकदम से पूजा अकड़ गई। मैं समझ गया कि पूजा झड़ चुकी थी और थोड़ा शान्त हो गई। हम अलग हो गए।

मैंने अब साथ नहाने का प्रस्ताव रखा, वो मान गई। मेरे बाथरूम में बाथ-टब भी है और वो इतना बड़ा है कि दो लोगों के लिये एकदम फ़िट है। मैंने गरम पानी चालू कर प्रिया बाथ-टब में थोड़ा खुशबूदार लिक्विड सोप डाल प्रिया।

अब मैं और वो बाथ-टब में बैठ कर एक-दूसरे को साबुन के झाग से मसाज करने लगे। पूजा भी खूब एन्जॉय कर रही थी। अचानक ही उसने मेरे ‘कुतुब-मीनार’ को पकड़ लिया और बड़े प्यार से सहलाने लगी। थोड़ी देर हाथों से पानी में आगे-पीछे करने के बाद उसने अपने मुँह में मेरा लौड़ा ले लिया !

दोस्तो, मैं कभी किसी महिला को अपने मुँह में लेने को नहीं कहता, क्योंकि ये करना किसी-किसी को अच्छा नहीं लगता।

मगर पूजा पूरे मूड में थी। अब तो मैं भी पागल हो उठा। बाथ-टब से उसे अपनी गोद में उठा कर मैं बेड पर ले गया और चुम्बन करते हुए उसके ऊपर आ गया।

पूजा की दोनों टाँगों को फ़ैलाकर मैंने अपना ‘सामान’ उसकी योनि के दरार पर रगड़ने लगा।

पूजा बोल पड़ी, “डालो भी.. अब बर्दाश्त नहीं होता !”

मैं समझ गया कि लोहा गर्म है, हथौड़ा मार दो।

मैंने पहले कंडोम पहना क्योंकि-

सेक्स करने से पाप नहीं होता…

ऐसा करने से ‘सामान’ खराब नहीं होता…

हमेशा कोन्डम लगा कर करना मेरे दोस्त…

क्योंकि ‘सामान’ के पास दिमाग नहीं होता…

सो कोन्डम पहन कर मैंने लौड़े को पूजा की चूत के मुँह पर रख कर धीरे-धीरे दबाव बना कर अन्दर डालने लगा। कोई खास परेशानी नहीं हुई, मेरा अन्दर चला गया। पूजा ने मुझे कस कर पकड़ रखा था और उसके नाखून मेरी पीठ में धंस रहे थे, पर मुझे उसकी परवाह नहीं थी।मैं बस कमर को धीरे-धीरे आगे-पीछे करने लगा, तो पूजा भी, “आह… आह्ह… ओह्ह… ओह्ह… फ़क मी…” चिल्लाने लगी और कमर उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी।

अब वो पूरी मस्ती में थी। बाद में हमने पोजीशन बदली, अब वो ऊपर थी और मैं नीचे। पूजा गजब की घुड़सवार साबित हो रही थी। अचानक उसकी रफ़्तार तेज हो गई अब मैं भी मन्जिल के करीब पहुँच रहा था।

दोस्तो, यही खेल रात भर चला। पूजा और मैं सुबह 5.30 बजे तक मजे करते रहे। बाद में पूजा ने कैडबरी मुँह में लेकर चुम्बन लिया। चुम्बन क्या था दोस्तो, स्वर्ग का आनन्द था।

पूजा ने जाते-जाते कहा, “तुम मुझे अच्छे लगे और तुम एक मर्द हो, जो औरत के अहसास को समझता है। मेरी शादी भले महेन्द्र से हुई पर सही मायनों में सुहागरात तुम्हारे साथ मनाई और तुम भी मुझे नहीं भुला पाओगे !”

उसने एक दीर्घ चुम्बन लिया और चली गई।

अब मैं भी क्या सोता ! लगभग सुबह हो चुकी थी। मैं फ़्रेश होने बाथरूम में घुस गया। नहा कर मैंने अपने लिये नाश्ता मँगाया, नाश्ता करने के बाद मैं रिसेप्शन पर गया तो देखा मेरे नाम का एक गिफ़्ट पैकेट पड़ा था। खोल कर देखा तो उसमें कैडबरी चॉकलेट का बड़ा पैकेट था और एक लैटर भी था। ज्यादा कुछ नहीं बस इतना लिखा था… ‘आप ने जो कुछ भी किया मेरे लिये उसका धन्यवाद, मैं आप से बिना मिले वापस जा रही हूँ, इसका मुझे बेहद अफ़सोस है। आप बुरा मत मानना और महेन्द्र को सिर्फ़ इतना बोलना कि मैं अपने घर चली गई हूँ, वो अभी भी अपने कमरे में सो रहा है। बाय !’

बस मेरी कहानी इतनी सी है, पर दोस्तो, एक बात बोलना चाहता हूँ शादी करने के लिये आप यह मत देखो कि आप किससे प्यार करते हो? जरुरी यह है कि आप से कौन प्यार करता है। आप शादी उससे ही करो। पूजा ने सिर्फ़ एक बार फ़ोन किया वो महेन्द्र से तलाक ले रही है और उसके घर वाले उसकी दूसरी शादी की तैयारी कर रहे हैं। मैं भी ऊपर वाले से उसकी खुशी की दुआ माँगता हूँ। वो उसका आखिरी फोन था। मैंने उसे फोन करने की कभी कोशिश नहीं की, ना ही कभी उसने फोन किया।

हाँ… पर एक बात है मैं जब भी कैडबरी चॉकलेट देखता हूँ तो उसकी बहुत याद आती है।

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ग़ोवा में सुहागरात

कुल भाग: 2
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पाठकों की राय

1 टिप्पणी

राहुल विश्वकर्मा

3 months ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

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