होम पर वापस जाएं
कोई मिल गया पठन समय: 5 मिनट पढ़ा गया: 1,148 बार

दिल्ली से लखनऊ-2

आशीष

18 May 2021 को प्रकाशित

दिल्ली से लखनऊ-2
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

प्रेषक : रिन्कू

कुछ देर बाद मैंने अपना एक हाथ उसके सीट के पीछे वाली बैक पर रख लिया और बोला- यार, बस की सीट आराम दायक नहीं है।

वो बोली- बैक सीट ऐसे ही होती है।

मैं कुछ सोच ही रहा था, वो बोली- मुझे नींद आ रही है !

मैं बोला- ठीक है, सो जाओ।

उसने अपना सर मेरे कंधे पर रख लिया और आँखें बंद कर ली।

इधर मेरे लंड खड़ा हो गया और फनफ़नाने लगा कि बस अब सब कुछ हो जाये।

वो मेरे से सटी हुई थी और मेरे धड़कनें तेज थी। अब मेरा दिलो-दिमाग मेरे काबू में नहीं था।

मैंने धीरे से अपना हाथ उसके चूचियों से सटा प्रिया। बस जब जब झटके लेती, तब तब चूची दबती। मुझे मज़ा आ रहा था और उसे भी।

फ़िर उसने अपना एक हाथ मेरी जांघ पर रख प्रिया, मुझे काफी अच्छा महसूस हो रहा था।

अब मुझे डर नहीं लग रहा था। मैंने उसकी एक चूची को अपने हाथ में ले ली और दबाने लगा। वो मना भी नहीं कर रही थी ..

मैंने दूसरी चूची भी सहलानी शुरू कर दी। अब उसकी साँसें तेज़ होने लगी थी और उसका भी हाथ चलने लगा था। उसने मुझे कस के पकड़ लिया। हम दोनों काफी ज्यादा सटे हुए और चिपके हुए थे एक दूसरे से।

मैंने उसकी टीशर्ट में एक हाथ डाल प्रिया। अब उसकी नग्न चूचियाँ मेरे हाथ में थी और मैं कस के उनको दबा रहा था। कुछ देर में ही ब्रा का हुक भी खोल प्रिया मैंने ! अब उसकी दोनों चूचियाँ आज़ाद थी और बिल्कुल तनी हुई थी, मैं उनकी घुन्डियाँ मसलने लगा जिससे वो और ज्यादा उत्तेजित हो रही थी और साँसे तेज़।

उससे भी रहा न गया। उसने एक हाथ से उसने मेरा लण्ड पकड़ लिया और जोर से सहलाने लगी। मेरे लंड से पानी निकलने लगा था।

इधर मैंने चुम्बन भी शुरू कर प्रिया, मैं और वो दोनों जबरदस्त चूमा-चाटी कर रहे थे, उसके होंठ मीठे और मुलायम थे, मेरा मन कर रहा था कि खा जाऊँ संतरे की इन ख़ट्टी-मीठी फ़ांकों को !

उसने मेरे लण्ड को सहलाना तेज़ कर प्रिया और मेरा लण्ड मोटा और लम्बा होकर अपने फुल मोशन में आ गया था। मैं उत्तेज़ना के चरम पर था और मेरा लण्ड आग उगलने को तैयार !

इधर मैं उसकी दोनों चूचियों को जोर जोर से दबा रहा था, उधर उसने मेरे लण्ड को मसल मसल कर बुरा हाल कर रखा था।

मैंने उसे सीट पर ही लिटा सा प्रिया और खुद उसके ऊपर हो गया। मैंने उसकी जींस का बटन भी खोल प्रिया और हाथ उसकी पैंटी के अन्दर डाल प्रिया। मैं उसकी योनि में ऊँगली करने लगा पर उसने मना कर प्रिया।

पर मैं नहीं रुका और करता रहा, अब वो ऊँगली करने पर उचक रही थी और उफ़ उफ़ उफ़ की हल्की आवाज़ कर रही थी….

उसकी चूत मोटी और कसी थी और वो पूरे जोश में थी- सेक्स के चरम पर।

मैंने ऊँगली करना जारी रखा, वो जोर जोर से उचक रही थी और धीरे धीरे बोल रही थी- फक मी फक मी …

इतने में मुझे अहसास हुआ कि कुछ गीला गीला ..वो झड़ चुकी थी पर उसने मेरे लण्ड को कस कर पकड़ा हुआ था और आगे-पीछे कर रही थी।

और अगले कुछ ही पलों में मैं भी झड़ गया।

दोस्तो, उस रात उसकी चुदाई नहीं हो पाई क्योंकि मेरे पास कंडोम नहीं था और मैं कोई खतरा भी नहीं लेना चाहता था, जाहिर है कि वो भी शायद इससे आगे ना बढ़ने देती बस में !

फिर हम दोनों करीब बीस मिनट के बाद एक दूसरे से अलग हो गये, उसने अपनी जींस चढ़ाई और मैंने अपना लोअर।

सुबह के चार बज चुके थे, बस एक ढाबे पर रुकी, ड्राईवर चाय पीने के लिए रुका था। हम दोनों भी नीचे उतरे और फ्रेश होकर आगे बैठ गये। दोनों बहुत खुश थे, थोड़ी देर बाद मैं सो गया।

सुबह हो चुकी थी, लखनऊ आने वाला था तो उसने मुझे जगाया, उसने पूछा- लखनऊ में कहाँ रुकोगे?

मैं बोला- कंपनी का गेस्ट हाउस है, उसी में।

पूछा- कहाँ पर है?

मैं बोला- विनीत खंड में !

वो बोली- पास में ही मेरा होस्टल है। फिर उसने मुझे अपना ईमेल और फ़ोन नंबर प्रिया, बोली- कोई प्रॉब्लम हो तो कॉल कर लेना !

और उसने मेरा भी नंबर लिया।

लखनऊ आ चुका था और हम दोनों अपने अपने रास्ते चले गये। मुझे लखनऊ करीब दस दिन रुकना था। मुझे इस बात का दुःख था कि रात को चुदाई नहीं हो पाई पर मुझे क्या पता था कि किस्मत फिर एक बार मौका देगी..

दो दिन के बाद उसका एक फ़ोन आया और फिर जो हुआ वो आपको अगली कहानी में सब विस्तार से बताऊंगा…

तब तक आप अपने विचार और सुझाव मुझे जरूर बताएँ !

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

श्रृंखला

कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

दिल्ली से लखनऊ

कुल भाग: 2
यह एक बहु-भाग कहानी है। अपनी पसंदीदा कड़ी पर जाने के लिए ऊपर क्लिक करें।

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

प्रशंसिका ने दिल खोल कर चूत चुदवाई-5
कोई मिल गया

प्रशंसिका ने दिल खोल कर चूत चुदवाई-5

थोड़ी देर बाद रचना ही बोली- डियर, जब तुम्हारा स्पर्म निकलता है…तभी मैंने उसे टोकते हुए बोला- स्पर्म नहीं वीर्य बोलो, चुदम-चुदाई के खेल में हिन्दी शब्द बोलने में ज्यादा मजा आता है।

7 मिनट 484
स्टेशन पर मिली भाभी को ट्रेन में चोदा
कोई मिल गया

स्टेशन पर मिली भाभी को ट्रेन में चोदा

दोस्तो, मैं सन्नी आहूजा रोहतक से.. एक बार फिर से हाज़िर हूँ आपके सामने एक सच्ची कहानी लेकर..मुझे लगता है कुछ लोगों को यह कहानी सच ना लगे.. मगर यह बिल्कुल सच्ची कहानी है। मुझे खुद विश्वास नहीं कि ऐसा कैसे हो गया..हुआ ऐसा कि अपने बिजनेस के चक्कर में...

9 मिनट 874
मैं अपने दफ्तर में रंडी बन गयी
कोई मिल गया

मैं अपने दफ्तर में रंडी बन गयी

हॉट ऑफिस सेक्स स्टोरी मेरे बॉस से मेरी चुदाई की है. सबसे पहले बॉस ने मेरी चूत मारी और फिर उसके बाद तो मेरी चुदाई का सिलसिला रुका ही नहीं.

19 मिनट 362

पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

संजय सिंह gkp

1 month ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

प्रीति पटेल

2 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।