मेरा नाम राहुल है, उम्र 20 साल। मैं पर्निया में कॉलेज में पढ़ता हूं। हमारे घर की सबसे खूबसूरत और सबसे आकर्षक चीज हैं मेरी मां — सुधा शर्मा। उम्र 42 साल है, लेकिन देखने में वो 32-33 साल की जवान औरत से भी ज्यादा मादक लगती हैं। उनका रंग गोरा है, चेहरा भरा-भरा। बड़ी-बड़ी काली आँखें जो शर्म से झुक जाती हैं। गुलाबी मोटे होंठ और कमर तक लंबे घने काले बाल जो अक्सर खुले रखती हैं।
उनका शरीर सचमुच देवी जैसा है। कद 5’4″, वजन करीब 70 किलो, चौड़ी कमर, पेट पर हल्की नरम चर्बी, मोटी-मोटी नरम जांघें और सबसे खास। उनकी बहुत भारी 38D साइज की दूधिया छातियाँ जो साड़ी में हमेशा उभरी रहती हैं। गांड भी गोल-मटोल और चलते समय धीरे-धीरे हिलती रहती है। पापा की मौत के बाद मां बहुत अकेली पड़ गई थी। वो दिन-रात घर चलाने के लिए मेहनत करती, लेकिन पैसा हमेशा कम पड़ता।
हम लोग एक पुराने 2 BHK मकान में किराए पर रहते हैं। मकान मालिक हैं लाला रामप्रसाद — उम्र 68-69 साल, मोटे-तगड़े, सफेद बाल, मोटी सफेद मूछें और चेहरे पर हमेशा एक चालाक, लालची मुस्कान। वो शहर के बड़े अमीर आदमी हैं। लेकिन बहुत लालची और कामुक किस्म के हैं। उनकी नजरें औरतों पर घूमती रहती है। पिछले कई महीनों से हमारा किराया बाकी चल रहा था — कुल 48 हजार रुपये हो चुके थे। लाला जी बार-बार आकर धमकी देते, “पैसा दो वरना घर खाली कर दो।”
एक शाम लाला जी अकेले आए। मां रसोई से बाहर आई। आज उन्होंने हल्की पीली साड़ी पहनी थी जिसमें उनकी छातियाँ और कमर बहुत उभर रही थी। लाला जी ने मां को ऊपर से नीचे तक घूरा और भारी आवाज में बोले, “सुधा बहू, अब तो 48 हजार हो गए हैं। मैंने बहुत इंतजार कर लिया। या तो पूरा पैसा दो, या घर खाली कर दो। लेकिन… एक और रास्ता भी है।”
मां घबरा गई। “क्या रास्ता लाला जी?”
लाला जी मुस्कुराए, उनकी आँखें मां की भारी छातियों पर टिकी हुई थी। “तुम अभी भी जवान और बहुत खूबसूरत हो बहू। इतनी बड़ी-बड़ी दूधिया छातियाँ, मोटी जांघें, गोल गांड… ऐसी औरत को अकेले रहना नहीं चाहिए। मैं भी अकेला बूढ़ा हूं। अगर तुम थोड़ा मेरे साथ अच्छा व्यवहार करो, रात में कभी-कभी मेरे पास आ जाया करो, तो सारा बकाया माफ कर दूँगा। आगे का किराया भी सिर्फ आधा कर दूँगा। कभी-कभी एक्स्ट्रा पैसे भी दे दूँगा। क्या कहती हो बहू? सोच लो… कल शाम तक बता देना। वरना कल सामान बाहर।”
मां का चेहरा लाल हो गया। उन्होंने साड़ी का पल्लू सीने पर कस कर खींच लिया और काँपती आवाज में बोली, “लाला जी… प्लीज ऐसा मत कहिए। मैं विधवा हूं… मेरे बेटे के सामने… यह बहुत गलत है। मैं कभी नहीं कर सकती। आप कृपा करके थोड़ा और समय दे दीजिए।”
लाला जी जोर से हँसे। “बहू, पाप-पुण्य बाद में देखेंगे। अभी तो घर और बेटे का भविष्य देखो। कल शाम तक फैसला कर लेना।” कह कर वो चले गए।
मां ने पहले जोर से मना कर दिया। वो रोते हुए कह रही थी कि वो ऐसा नहीं कर सकती। लेकिन लाला जी ने सख्ती दिखाई — “कल शाम तक फैसला कर लो, वरना ताला लगवा दूँगा।”
दो दिन बाद शाम को मां ने मुझे कहा, “राहुल बेटा, सो जा। काफी थक गया होगा कॉलेज से। मैं किचन की साफ-सफाई करके सो जाऊंगी।” उनकी आवाज में कुछ अजीब-सा था। मैं समझ गया कि कुछ गड़बड़ है, लेकिन चुप-चाप लेट गया। मन में शक था, लेकिन मैंने इंतजार किया।
9:20 बजे के करीब मुख्य दरवाजे की हल्की आवाज आई। मैं चुपके से उठा और दरवाजे की दरार से देखने लगा। लाला रामप्रसाद अंदर आ गए थे। मां ने तुरंत दरवाजा बंद कर दिया। लाला जी ने मां को दीवार से सटा कर जोर से चूम लिया। मां ने हल्का विरोध किया, “लाला जी… राहुल सो रहा है… प्लीज…” लेकिन लाला जी ने उनकी कमर पकड़ कर और जोर से चूमते हुए बोले, “चुप रह बहू… आज मैं तुझे यही, तेरे घर में जम के चोदने वाला हूं। बहुत दिन से इंतजार कर रहा था।”
फिर दोनों मां के बेडरूम में चले गए। मैं धीरे-धीरे उनके कमरे के दरवाजे के पास जाकर खड़ा हो गया। दरवाजा थोड़ा खुला था, अंदर का सब कुछ साफ दिख रहा था।
अंदर पहुँचते ही लाला जी ने मां को बिस्तर पर धकेल दिया। मां पीठ के बल गिर गई। लाला जी ने मां की नीली साड़ी का पल्लू खींच कर पूरी तरह हटा दिया और बोले,“वाह सुधा… आज तेरी साड़ी में तू और भी मादक लग रही है।”
उन्होंने ब्लाउज के सारे हुक एक-एक करके खोलने शुरू किए। हर हुक खुलते ही मां की भारी दूधिया छातियाँ और उभर रही थी। ब्लाउज पूरी तरह खुल गया तो लाला जी ने ब्रा भी उतार कर फेंक दी। मां की दोनों भारी छातियाँ अब पूरी तरह नंगी हो गई। लाला जी की आँखें चमक उठी।
“अरे वाह… कितनी भारी और नरम छातियाँ हैं तेरी सुधा। इतने साल बेकार पड़ी थी।” उन्होंने दोनों हाथों से छातियों को जोर-जोर से पकड़ा और मसलने लगे। उँगलियाँ नरम गोश्त में गहरी धंस रही थी।मां कराह उठी, “आह्ह्… लाला जी… धीरे… दर्द हो रहा है…”
लाला जी हँसे, “दर्द? अभी तो मजा आने वाला है बहू।” फिर उन्होंने झुक कर एक निप्पल मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगे। जीभ से चाटते, दाँतों से हल्का काटते। दूसरी छाती को हाथ से मसलते रहे। मां की सिसकारियाँ निकलने लगी — “आह्ह्… लाला जी… नहीं… राहुल… आह्ह…”
लाला जी ने मां की साड़ी को कमर तक ऊपर चढ़ा दिया। फिर पैंटी पर हाथ रखा और एक झटके में घुटनों तक सरका दी। मां की गोरी, थोड़ी बालों वाली चूत अब पूरी तरह नंगी और चमक रही थी। लाला जी ने अपनी पैंट उतारी। उनका मोटा, काला, लंबा लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था। सिर लाल और चमकदार।
“देख सुधा… तेरे लिए कितना खड़ा है मेरा लंड।” उन्होंने मां की जांघें चौड़ी की, लंड का मोटा सिरा चूत के मुंह पर रखा और धीरे-धीरे रगड़ने लगे। मां सिसक रही थी, “लाला जी… प्लीज… धीरे… बहुत मोटा है…”
लाला जी ने एक जोरदार धक्का मारा। आधा लंड अंदर चला गया। मां जोर से चीख पड़ी, “आआह्ह्… फट जाएगी…!”दूसरे धक्के में पूरा मोटा लंड एक-दम से मां की चूत में घुस गया। लाला जी ने तेज चुदाई शुरू कर दी। “पच… पच… पच… पच…” की जोरदार आवाज कमरे में गूंज रही थी। हर धक्के के साथ मां की भारी छातियाँ जोर-जोर से उछल रही थी। लाला जी झुककर छातियाँ चूसते, मसलते, काटते और चोदते जा रहे थे।
मां अब खुद अपने कूल्हे ऊपर उठा-उठा कर जवाब देने लगी थी। उनकी सिसकारियाँ बहुत तेज और कामुक हो गई थी, “हाय लाला जी… और गहरा… आह्ह… फाड़ डालो… जोर से चोदो मुझे… हाँ… बस यहीं… और तेज…”
लाला जी हाँफते हुए बोले, “ले रंडी… तेरी चूत तो बहुत भूखी निकली। कितने दिन से सूखी थी ना? आज मैं तुझे पूरी तरह भर दूँगा। बोल… मजा आ रहा है ना बूढ़े के मोटे लंड का?”
मां शर्म से सिर हिला रही थी लेकिन शरीर बेकाबू था — “हाँ… आह्ह… मजा आ रहा है… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो…”
लाला जी ने मां की टांगें अपने कंधों पर रख ली और अब और भी गहरी, तेज चुदाई करने लगे। हर धक्का इतना जोरदार था कि बिस्तर हिल रहा था और “पच-पच” की आवाज तेज हो गई थी। मां की चूत से सफेद झाग निकलने लगा था। लाला जी बीच-बीच में रुक कर लंड पूरी तरह बाहर निकालते और फिर एक-दम से घुसाते। मां हर बार चीखती — “आह्ह… मार डालोगे… हाय… गहरी… और गहरी…”
करीब 20 मिनट तक इस जोरदार चुदाई के बाद लाला जी ने मां को घुटनों के बल करवाया — डॉगी स्टाइल में। मां की मोटी गोल गांड अब लाला जी के सामने थी। उन्होंने पीछे से लंड घुसाया और फिर से तेज धक्के मारने लगे। एक हाथ से मां की कमर पकड़े हुए थे, दूसरे हाथ से छातियाँ दबाते और खींचते। मां खुद पीछे धक्के दे रही थी — “हाँ लाला जी… मेरी गांड पकड़कर चोदो… आह्ह… और जोर से… मैं आपकी रंडी हूं आज से… चोदो मुझे… फाड़ दो…”
लाला जी ने मां की गांड पर जोर-जोर से थप्पड़ मारे। “ले… ले रंडी… तेरी गांड भी बहुत नरम है।” फिर उन्होंने मां की पीठ चाटनी शुरू कर दी। चुदाई और तेज हो गई।
आखिरकार लाला जी जोर से गरजे — “ले सुधा… ले मेरी माल… सारी अंदर ले ले… भर जा तेरी चूत…”
और उन्होंने मां की चूत के अंदर गाढ़ा-गाढ़ा गर्म वीर्य छोड़ दिया। मां भी पूरी तरह काँप उठी और जोर से झड़ गई — “आआह्ह… मैं भी… आ गई… हाय…!”
दोनों कुछ देर उसी हालत में पड़े रहे। मां की चूत से लाला जी का गाढ़ा वीर्य बाहर निकल कर जांघों पर बह रहा था। कमरे में सेक्स की गंध फैल गई थी। लाला जी ने मां के बाल पकड़ कर उनका सिर उठाया और बोले, “अब से हर हफ्ते 3-4 बार यहीं आऊँगा। राहुल देखे या ना देखे, कोई फर्क नहीं पड़ता। समझ गई? तू अब मेरी रखैल है सुधा।”
मां शर्म से सिर झुका कर धीरे से बोली, “जी… लाला जी…”
लाला जी कपड़े पहन कर चले गए। मां बिस्तर पर नंगी पड़ी कुछ देर तक साँस लेती रहीं। उनकी छातियाँ अभी भी हिल रही थी। फिर धीरे से उठी और कपड़े ठीक करने लगीं।
मैं चुपके से अपने कमरे में वापस आ गया। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मां को इस हाल में देख कर गुस्सा, शर्म और अजीब उत्तेजना — तीनों एक साथ उभर रहे थे। मेरा अपना लंड भी पूरा खड़ा हो गया था।
मां ने बाद में मुझे कुछ नहीं बताया, लेकिन मैं जान गया था कि अब हमारा किराया का झंझट खत्म हो गया है… लेकिन एक नया, बहुत गहरा और कामुक सिलसिला शुरू हो गया है।