पिछला भाग पढ़े:-गांव के लड़कों ने छोटी बहन काव्या को अपने जाल में फंसाया-3
आशा है आपने पिछली चुदाई कहानी को पढ़ लिया होगा। आगे की कहानी-
कुछ देर की ट्यूबवेल वाले कमरे में भयंकर चुदाई के बाद सोनू के मन में आता है कि क्यूं ना बारिश में चोदा जाए। पर उसे ये अंदाजा नहीं था कि ये उसकी सबसे बड़ी गलती साबित होने वाली थी। फिर कुछ ही देर में सोनू, काव्या को बारिश में भीगते हुए चोदने के लिए बोला। पर काव्या ने खुले में चुदने से मना कर दिया। इस पर सोनू ने बोला चलो सरसों के खेत में चलते हैं।
फिर दोनों सरसों के खेत में जाकर चुदाई करने लगे। सोनू काव्या को कुतिया बना कर उसकी चूत में पीछे से जोर-जोर से लंड पेलने लगा, तो चूत से फट फट फट फट की आवाज निकलने लगी।
पर अब उत्तेजना का एक नया खेल शुरू होने वाला था। लाखन और मोहन, जो अब तक केवल दूर से तमाशा देख रहे थे, धीरे-धीरे उस सरसों के लहलहाते खेत की ओर बढ़ने लगे जहाँ सोनू और काव्या अपनी ही दुनिया में खोए हुए थे। हवा में सरसों की खुशबू और काव्या की सिसकियों का शोर मिला हुआ था। लाखन ने मोहन को इशारा किया कि वे दोनों अलग-अलग दिशाओं से उन्हें घेरें, ताकि भागने का कोई रास्ता ना बचे।
सोनू पूरी शिद्दत से काव्या के जिस्म का रस ले रहा था। काव्या की आँखें बंद थी और वह बस उस आनंद को महसूस कर रही थी। उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि उनकी इस गोपनीयता में अब कोई सेंध लगाने वाला था। जैसे ही लाखन और मोहन करीब आए, उन्होंने जान-बूझ कर सूखी टहनियों पर पैर रखा।
‘कड़क…’आवाज सुनते ही सोनू ठिठक गया। उसकी सांसें फूल रही थी। उसने घबरा कर चारों ओर देखा, “काव्या, कोई है यहाँ!”
काव्या ने झटपट अपनी अस्त-व्यस्त ओढ़नी से खुद को ढकने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। लाखन और मोहन सरसों के घने पौधों के बीच से मुस्कुराते हुए बाहर निकल आए।
लाखन: “अरे वाह सोनू बेटा, तुम तो बड़े खिलाड़ी निकले! गाँव में सब को लगता है कि तुम सीधे-साधे हो, और यहाँ तो तुम राजू की बहन के साथ गुलछर्रे उड़ा रहे हो?”
सोनू के चेहरे का रंग उड़ गया। वह हकलाते हुए बोला, “चाचा… वो… हम… प्लीज किसी को बताइएगा मत।”
मोहन (काव्या की ओर कामुक नजरों से देखते हुए): “बताएंगे क्यों नहीं? राजू को पता चलेगा तो गाँव में खून-खराबा हो जाएगा। पर हां, अगर तुम हमें खुश कर दो, तो शायद हम अपनी जुबान बंद रख सकें।”
काव्या कांप रही थी। उसकी खूबसूरती इस डर में और भी निखर रही थी। लाखन आगे बढ़ा और काव्या के पास जाकर खड़ा हो गया। उसने बड़े प्यार से, पर अधिकार के साथ काव्या के चेहरे को छुआ।
लाखन: “डर मत लाडो, हम तो बस इस जवानी का थोड़ा सा हिस्सा मांग रहे हैं। सोनू तो बच्चा है, असली मजा तो हम खिलाड़ी देंगे।”
काव्या मन ही मन सोचती है अब आगे क्या होगा? चाचाओं ने अपनी चाल चल दी थी। उन्होंने सोनू को एक कोने में बैठने का आदेश दिया और काव्या को अपनी बांहों के घेरे में ले लिया। काव्या के पास अब कोई चारा नहीं था। वह जानती थी कि अगर वह शोर मचाएगी तो उसकी बदनामी होगी, और अगर चुप रहेगी तो इन दो भूखे भेड़ियों की प्यास बुझानी पड़ेगी।
लाखन और मोहन अब धीरे-धीरे काव्या के और करीब आने लगे, लाखन ने काव्या के कानों के पास जाकर धीरे से फुसफुसाया, “अब देख, असली खेल कैसे शुरू होता है।”
मोहन ने सोनू की ओर देखते हुए कहा, “बैठ और देख, ताकि तुझे भी पता चले कि किसी औरत को मुकम्मल कैसे किया जाता है।”
खेत की खामोशी अब एक नए और गहरे अहसास में बदलने वाली थी, जहाँ काव्या की जवानी और इन दोनों की हवस का मिलन होने जा रहा था। क्या काव्या इन दोनों का सामना कर पाएगी या वह भी इस नए अनुभव के सैलाब में बह जाएगी?
लाखन और मोहन ने अब सारी मर्यादाएं ताक पर रख दी थी। सरसों के पीले फूलों के बीच काव्या की गोरी देह किसी कीमती संगमरमर की मूरत जैसी लग रही थी, जिसे अब ये दोनों अपने तरीके से तराशने वाले थे।
लाखन ने सोनू को डपट कर एक तरफ बैठने का इशारा किया। सोनू लाचार और सहमा हुआ सा किनारे जा बैठा, जबकि उसकी आंखों के सामने उसकी माशूका अब दो अनुभवी मर्दों के बीच घिर चुकी थी।
लाखन ने बिना वक्त गंवाए काव्या को पीछे से अपनी फौलादी बांहों में जकड़ लिया। उसके हाथ काव्या के उभरे हुए स्तनों पर जा टिके, जिन्हें उसने बेरहमी से मसलना शुरू कर दिया।
काव्या: “आह्ह… चाचा… छोड़िए… बहुत दर्द हो रहा है…”
लाखन: “अरे अभी तो सिर्फ छुआ है लाडो, असली दर्द और मजा तो अब शुरू होगा।”
उधर मोहन भी पीछे नहीं रहा। उसने काव्या के सामने घुटनों के बल बैठ कर उसकी जांघों को फैलाया और उसकी गीली चूत पर अपनी जीभ फेर दी। काव्या का पूरा शरीर बिजली के झटके की तरह कांप उठा। एक तरफ लाखन उसके ऊपर के बदन को नोच रहा था, तो दूसरी तरफ मोहन नीचे से उसे पागल कर रहा था।
लाखन ने काव्या को ज़मीन पर लेटने का हुक्म दिया। उसने अपनी लुंगी खोली, तो उसका विशाल और काला लंड किसी भूखे सांप की तरह बाहर निकल आया। काव्या उसे देख कर खौफ से भर गई—सोनू का औज़ार तो इसके सामने कुछ भी नहीं था।
लाखन: “आज इसकी चीखें इस पूरे सरसों के खेत में गूंजनी चाहिए।”
Train me ek raat: Maya ki kaya
फिर लाखन उसके पैरों के बीच आ गया। उसने अपने लंड की टोपी को काव्या की दरार पर रगड़ा, जिससे काव्या सिसक उठी। फिर एक झटके में उसने अपना भारी भरकम औज़ार अंदर ठूंस दिया।
“आह्ह्ह्ह्ह… माँ मर गईईई…!” काव्या की चीख निकली, पर लाखन ने उसकी परवाह नहीं की। वह सांड की तरह झटके मारने लगा। ‘पट-पट-पट-पट’ की आवाज़ अब पहले से कहीं ज़्यादा तेज़ और भारी थी।
मोहन भी कहाँ शांत बैठने वाला था। जब लाखन नीचे से प्रहार कर रहा था, मोहन ने अपना लंड काव्या के मुँह के पास लगा दिया।
मोहन: “चूस इसे रंडी!”
काव्या हवस के इस चक्रव्यूह में फंस चुकी थी। एक तरफ से लाखन उसकी चूत फाड़ रहा था और दूसरी तरफ वह मोहन का लंड चूसने पर मजबूर थी। पूरा खेत अब कराहों और टकराने की आवाज़ों से गूंज रहा था। लाखन की रफ़्तार अब बेकाबू हो गई थी। वह काव्या के नितंबों को पकड़ कर उसे हवा में उठा-उठा कर पटक रहा था। काव्या का कोमल शरीर इन दो दरिंदों के बीच पिस रहा था, पर धीरे-धीरे उस दर्द में एक अजीब सी उत्तेजना घुलने लगी थी।
लाखन ने आखिरी कुछ भयानक झटके मारे और अपना सारा गर्म लावा काव्या की चूत की गहराई में छोड़ दिया। वह निढाल होकर उसके ऊपर गिर पड़ा। लेकिन खेल अभी खत्म नहीं हुआ था, क्योंकि मोहन अब अपना लंड लेकर तैयार खड़ा था।
मोहन: “लाखन भाई, अब मेरी बारी है। इसे तो अभी और भी बहुत कुछ झेलना है।”
काव्या बेसुध पड़ी थी, उसकी जांघों के बीच से सफ़ेद चिपचिपा पदार्थ बह रहा था। लेकिन मोहन ने उसे दोबारा अपनी गोद में ले लिया। शाम की ये रंगीनियां अब और भी गहरी होने वाली थी।
मोहन का सब्र अब पूरी तरह जवाब दे चुका था। जैसे ही लाखन काव्या के ऊपर से हटा, मोहन ने झपट्टा मार कर उसे अपनी बाहों में भर लिया। काव्या अभी लाखन के वारों से संभल भी नहीं पाई थी कि मोहन ने उसे ज़मीन से ऊपर उठा लिया। और मन ही मन गोद में उठा कर प्रहार करने का सोच लिया था।
मोहन ने काव्या की दोनों टांगों को अपनी कमर के इर्द-गिर्द लपेटने को कहा और उसे हवा में ही थाम लिया। काव्या का पूरा वजन अब मोहन के हाथों और उसके लंड पर आने वाला था।
मोहन: “लाखन भाई, तूने तो बस इसका स्वाद चखा है, अब देख मैं इसकी चूत का क्या हाल करता हूं!”
मोहन ने काव्या की पतली कमर को अपने मजबूत हाथों से दबोचा और एक ज़ोरदार हूक भरा। जैसे ही उसने नीचे से ऊपर की ओर झटका मारा, उसका मोटा लंड काव्या की गहराई को नापता हुआ सीधा गर्भाशय से जा टकराया। ‘फटटटटटटटटटटटट…!’
काव्या की आँखें फटी की फटी रह गई। हवा में झूलते हुए जब मोहन ने उसे ठोंकना शुरू किया, तो उसकी कमर की पकड़ इतनी सख्त थी कि काव्या हिल भी नहीं पा रही थी।
धमाकेदार आवाज़ें और तड़प मोहन अब एक सधे हुए खिलाड़ी की तरह उसे हवा में ही उछाल-उछाल कर ले रहा था। हर बार जब वह उसे नीचे की ओर खींचता, काव्या की चूत से ‘चट-चट-फट-फट’ की ऐसी आवाज़ आती जो दूर तक सुनाई दे रही थी।
मोहन के झटके: वह किसी मशीन की तरह तेज़ी से अपनी कमर चला रहा था।
काव्या की हालत: काव्या के हाथ मोहन के कंधों को बुरी तरह नोच रहे थे। उसके स्तन हवा में पागलपन की हद तक ऊपर-नीचे उछल रहे थे, जिन्हें देख कर लाखन पास खड़ा होकर अपनी वासना मिटा रहा था।
काव्या: “ओह्ह्ह… मोहन चाचा… बस… मर जाऊँगी… फाड़ दिया आपने…”
मोहन: “चुप रह रंडी! अभी तो तुझे आसमान की सैर करानी है।”
मोहन ने उसे एक पेड़ के तने से सटा दिया और हवा में ही उसे तेज़-तेज़ पटकने लगा। काव्या का शरीर अब पसीने से तरबतर हो चुका था। मोहन का हर वार इतना गहरा था कि काव्या को लग रहा था कि उसका जिस्म दो हिस्सों में बंट जाएगा।
लाखन पास आकर काव्या के कानों में फुसफुसाया, “देख ले छमिया, इसे कहते हैं असली मर्दानगी। तेरा सोनू तो बस ऊपर-ऊपर खेल रहा था।”
सोनू दूर बैठा अपनी प्रेमिका को दो दरिंदों के हाथों नीलाम होते देख रहा था, पर उन दोनों की ताकत और रसूख के आगे उसकी बोलने की हिम्मत नहीं थी। मोहन का जोश अब चरम पर था। उसने काव्या की कमर को और ज़ोर से भींचा और अपने अंतिम प्रहार करने लगा, ‘फट-फट-फट-फटटटट फटटटटटट की आवाज के साथ ओह माई रंडी काव्या यू आर सैक्सी !’
काव्या की चीखें सरसों के खेत को चीरती हुई आसमान की ओर जा रही थी, और मोहन का चेहरा कामवासना के उस आनंद से लाल हो चुका था जिसे वह सालों से दबाए बैठा था। उसने एक आखिरी, सबसे ज़ोरदार झटका मारा और अपनी पूरी ताकत काव्या के अंदर उड़ेल दी। काव्या बेजान होकर उसके गले लग गई, उसकी सांसें तेज़ चल रही थी और शरीर बुरी तरह कांप रहा था।
जानने के लिए बने रहें अपने भाई राजू के साथ। कमेन्ट करके जरूर बताएं कहानी कैसी लगी, धन्यवाद !
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