दोस्तो अभी तक आपने पढ़ा कि कैसे कुछ साल पहले विकास की भाभी अंजना ने उसकी हालत को पहचाना, उसकी मदद की, उसे सेक्स के बारे में बताया, लड़की पटाने के कुछ गुर बताये, चुदाई करना सिखाया, का मजा प्रिया.अब आगे:
इस घटना को हुए दो साल बीत चुके है, विकास अब पूरा मर्द बन चुका है, आज उसकी जिंदगी बिल्कुल वैसी ही है जैसी की किसी दूसरे अमीर, हैंडसम और विश्वास से भरे हुए युवक की होती है। एक गर्लफ्रैंड बनती है… कुछ दिन तक मिलना जुलना, फिर चुदाई, उसके बाद झगड़े शुरू! और दोनों ही अपने अपने रास्ते और अगला रिश्ता शुरू!अब तक विकास तीस से ज्यादा कॉलेज की लड़कियाँ पटा कर चोद चुका है. कॉलेज में सब टीचर और स्टूडेंट्स उसके बारे में जानते हैं कि वो कितनी सरलता से जिस लड़की को चाहे पटा लेता है. यह सब उसकी भाभी अंजना की दी हुई शिक्षा का ही कमाल है.
कॉलेज या बाहर… विकास के दोस्त ज्यादा नहीं हैं, उसके केवल तीन दोस्त हैं, उसका सबसे करीबी दोस्त है इशांत, इशांत विकास से करीब सात साल बड़ा है और बेहद सुलझा हुआ इंसान है. विकास के लिए वो दोस्त भी है और बड़ा भाई भी! इशांत और विकास एक दूसरे को बचपन से जानते हैं, दोनों पिता दोस्त जो थे।21 साल की उम्र में ही इशांत के सर से माँ का साया उठ गया था पर इशांत ने अपने आप को ही नहीं सम्भाला बल्कि अपने पिता के बिज़नेस को भी बखूबी संभाल लिया और इतना ही, उसने अपने प्रिय पेशे टीचिंग को भी छोड़ा नहीं और अपनी मेहनत के बल पे आज 28 साल की उम्र में ही वो विकास के कॉलेज में ही असिस्टेंट प्रोफेसर है।
विकास के बाकी दो दोस्त है विजय और माधव, दोनों उसके हमउम्र उसकी ही क्लास में पढ़ते हैं। इन तीन दोस्तों के अलावा विकास अभी की गर्लफ्रैंड है सुहानी।सुहानी एक मध्यम वर्ग की सीधी सादी लड़की है जो पढ़ने में काफी अच्छी है और अच्छे नम्बरों से पास होकर एक अच्छी नौकरी करना चाहती है ताकि अपने अध्यापक पिता का बोझ कुछ कम कर सके।सुहानी विकास की ही क्लास में पढ़ती है और क्लास टॉपर है उसका अदिति राव हैदरी सा मासूम सा चेहरा और काइली जेनर से होंठ और बदन उसे कालेज की सबसे प्रोपोज़ की जाने वाली लड़की बनाने के लिए काफी थे.कॉलेज के बहुत से लड़के उसके सामने प्रोपोज कर चुके थे मगर उसने किसी को घास नहीं डाली मगर कॉलेज के पहले दिन से जब से उसने विकास को देखा, उसे प्यार करने लगी थी पर उसके लिए पढ़ाई सब चीज़ों से पहले थी. फिर विकास की हर महीने प्रेमिका बदलने की आदत भी उसे अपने दिल की बात कहने से रोक देती पर विकास के बार बार प्रोपोज़ करने पर धीरे धीरे वो मान गयी।
सुहानी और विकास के बीच का रिश्ता दोनों के लिए बिल्कुल अलग था। जहाँ विकास के लिए वो भी बस एक गर्लफ्रैंड है, लड़की है, मौक़ा मिलते ही उसका बदन इस्तेमाल करेगा और उसे छोड़ देगा. वहीं सुहानी उसे अपना सब कुछ मान चुकी है, अपने दिल में बसा चुकी।
इशांत विकास से कई बार कह चुका है कि सुहानी से अलग हो जाए पर विकास के दिल में सुहानी के तराशे हुए बदन को पाने की चाहत आग की तरह जल रही है जो उसे एक खतरनाक मोड़ की ओर धकेल रही है।इस समय में भी वो अपने आफिस में विकास को यही समझाने की कोशिश कर रहा है।
इशांत- विकास, दोस्ती, प्यार या केवल वासना के लिए बनने वाले रिश्तों में फ़र्क होता है। तुम कहते हो कि तुम और सुहानी दोस्त हो और कुछ नहीं पर यह कैसी दोस्ती है जिसमें झूठ बोला जाए।विकास- यार तुम मुझे समझते नहीं हो और पुराने ख्यालात के आदमी हो! आज दोस्ती में सब चलता है और उसे पता है कि हम सिर्फ दोस्त हैं।इशांत- तो तुम उसे ‘आई लव यू’ क्यों कहते हो?विकास- मैं तुमसे भी तो कहता हूँ।इशांत- विकास झूठी सफाई मत दो, वो तुम्हारी बाकी प्रेमिकाओं जैसी नहीं है, वो सच में तुम्हें प्यार करती है।विकास- यार बस कर भाषण देना!
वो इतना कह कर दरवाजे को ज़ोर से पटकते हुए बाहर चला जाता है।दोस्तो, विकास की दास्तान काफी हो गयी. जितनी देर वो क्लास लगा रहा है, हम चलते हैं अकीरा और अंजली के पास जो इस समय सुल्तानपुर की बस में बैठी हुई हैं।
विक्रांत ने ईशा को लंड दिखाने की शर्त पूरी कर दी थी और उसकी पूरी वीडियो भी बनाई थी, जिसे उसने अकीरा को भेज कर बता प्रिया कि उसने शर्त पूरी कर दी है.
दीपिका(अंजली)- सिमरन(अकीरा)… तो विक्रान्त ने पहला काम पूरा कर ही प्रिया?सिमरन- हाँ लगता तो यही है।दीपिका- तो वीडियो देखते हैं ना?सिमरन- यहाँ बस में देखें?दीपिका- यार, खाली तो पड़ी है बस… गिनती के चार पांच लोग हैं, वो भी पीछे दूर बैठे हैं, डर की कोई बात नहीं है।
“तू कहती है तो ठीक है…” सिमरन मोबाइल पे वीडियो चलाते हुए- यार, यह तो अकेला ही है पर नंगा क्यों नहा रहा है?दीपिका विक्रांत का तना हुआ लौड़ा घूरते हुए- इस साले विक्रांत का हमेशा खड़ा रहता है क्या?
सिमरन- देख देख, कोई आ रहा है… ओह यह तो उसकी सेक्रेटरी ईशा है।दीपिका- दिमाग वाला है स्कीम खेल गया। हा.. हा.. हा… देख तो कैसे बेचारी का मुँह खुला का खुला रह गया विक्रांत का लंबा लंड देख कर!सिमरन- देख साली कुतिया कैसे ताड़ रही है लंड को जैसे खा ही जायेगी!दीपिका- बेचारी को सदमा लग गया है अजगर जैसा लंड देख के! पर है मस्त माल… इसकी चुदाई देखने में मज़ा आएगा.तभी वीडियो में विक्रान्त बाहर चला जाता है!“हट यार… यह तो चला गया।”
सम्भोग से आत्मदर्शन-25
सिमरन- कुछ भी बोल, बेचारी ईशा की हालत देखने वाली थी। लगता है कि उसने पहली बार इतना बड़ा लंड देखा है. और क्या पता लंड ही पहली बार देखा हो? और एक बात बता… विक्रान्त के बाहर जाने का तुझे क्यों इतना दुख हो रहा है?दीपिका- सच कहूँ तो मुझे एक बार तो लगा था कि एक्शन बस होने ही वाला है। और विक्रांत के हाथों इस छुई मुई जैसी ईशा की चुदाई देख कर मज़ा ही आ जाता। तू विक्रांत को अगला काम क्या देगी?सिमरन- पता नहीं।दीपिका- तू इसे काम दे कि यह ईशा से नॉन वेज सेक्स चैट करे।सिमरन-सेक्स चैट का मज़ा – फोन सेक्स… हम्म बड़ी चुदक्कड़ है साली तू! और तीसरा काम होगा ईशा की चुदाई… है ना?दीपिका- सही समझी मेरी जान! यहाँ जंगल जैसी जगह में मैं तू देख कर ही मज़ा ले लेंगे।सिमरन- मुझे मंज़ूर है… पर पहले तुझे बताना होगा कि सिल्ली का आगे क्या हुआ? मंजूर है?दीपिका- वादा। कंडक्टर बता रहा था कि बस एक घंटे के बाद एक ढाबे पर रुकेगी, वहीं बताऊँगी तुझे कि कैसे मैंने एक और गलती की और सिल्ली ने कैसे मौके का फायदा उठा कर मेरी गांड फाड़ी।
दोस्तो, जब तक इन दोनों की बस रुकती है और अंजली(दीपिका) अपनी आगे की कहानी सुनना शुरू करती है, हम देख लेते हैं कि दिनेश क्या खिचड़ी पका रहा है चंडीगढ़ में:
दिनेश की बहू कॉलेज गयी हुई है और बेटा थाने… बेचारा घर में अकेला टीवी देख रहा है। बेचारा थोड़ा उदास है विक्रांत वाली वीडियो देखने के बाद क्योंकि उसे लग रहा है कि चिड़िया (ईशा) तो निकल गयी हाथ से और अगले कुछ समय तक तो उसकी दाल गलने वाली नहीं है।
पर तभी उसे रुक्मणी का ख्याल आता है “माल तो यह भी खरा है… किस्मत आजमाई जा सकती है.” वो अपने मन में सोचता है और विक्रांत के घर पहुंच जाता है। उसे पता है कि इस समय घर पर रुक्मणी के अलावा कोई और नहीं होगा।
दिनेश पहुंचा तो रुक्मणी सामने आई, उसके गदराए बदन को घूरते हुए उसने पूछा- विक्रान्त है घर पे?रुक्मणी- नहीं साहब तो ऑफिस गए हैं।दिनेश जानबूझ कर… क्योंकि वो जानता है कि रुक्मणी उसे चाय पीने के लिए ज़रूर पूछेगी- ठीक तो मैं चलता हूँ। घर पर अकेला था तो सोचा विक्रांत से मिल आता हूँ।रुक्मणी- आप बैठिये न. मैं चाय ले कर आती हूँ।दिनेश- नहीं नहीं, तुम्हें चाय की तकलीफ करने की कोई ज़रूरत नहीं है।रुक्मणी- अरे… तकलीफ कैसी, बस दो मिनट तो लगेंगे।दिनेश- ठीक है।वो घर के अंदर आता है और लॉबी में बैठ जाता है।
रुक्मणी उसके चाय और टोस्ट बना कर ले आती है।दिनेश- इतनी मेहनत क्यों की आपने…रुक्मणी- इसमें तकलीफ की क्या बात है। आप कह रहे थे कि घर पर अकेला हूँ तो मुझे लगा कि कुछ खाने के लिये भी बना दूँ क्योंकि खाली पेट चाय पीना अच्छा नहीं होता।दिनेश- आपने तो मुझे मेरी पत्नी की याद दिला दी, वो भी चाय के साथ हमेशा कुछ न कुछ बना देती थी।
रुक्मणी नीचे ज़मीन पर बैठते हुए- तो आपकी पत्नी अब आपके साथ नहीं रहती हैं?दिनेश- नहीं उसे गुज़रे हुए कई साल हो गए। पर आप नीचे क्यों बैठ गईं क्या मैं इतना डरावना दिखता हूँ?रुक्मणी उठ के दिनेश की बगल में बैठते हुए- ओह, सुन कर बुरा लगा। पर आपके बच्चे तो होंगे?दिनेश- बेटा और बहू हैं… पर उन्हें अपने काम हैं, नौकरी है।रुक्मणी- आप उनसे बात क्यों नहीं करते कि कुछ समय आपको भी प्रिया करें?
दिनेश बेहद दुखी होने का नाटक करते हुए- इसमें उनका कोई दोष नहीं है, आज का समय ही ऐसा है कि अपनों के लिए किसी के पास समय नहीं। मेरी तो उम्र हो चुकी जाने की… बस दिन गिन रहा हूँ कि ऊपर वाला कब बुलायेगा।रुक्मणी कुछ झिझकती है पर दिनेश को बेहद दुखी देख उसके हाथ पर हाथ रखते हुए कहती है- दिनेश जी, ऐसी बातें क्यों करते हैं, अभी तो आप बूढ़े कहीं से नहीं लगते।दिनेश मौके का लाभ उठा कर रुक्मणी से सट कर बैठ जाता है- अब जीने की और इच्छा नहीं होती रुक्मणी जी, अकेला अकेला जीना भी कोई जीना हुआ क्या?रुक्मणी दिनेश के दुख को अपने दुख जैसा समझ के पिघल जाती है- आप ऐसा क्यों सोचते हैं, साहब हैं और आपको कभी भी अकेला महसूस हो तो आप मेरे पास आ सकते हैं। दुखी तो सभी हैं, मैं भी हूँ, पर हिम्मत हारने से क्या होता है।दिनेश- रुक्मणी जी, आपकी बातें सुन कर लग रहा है जैसे इस दुनिया में मेरा भी कोई है जो मेरे दर्द को समझता है।
दिनेश अपनी चाल चल चुका था और इसके बाद रुक्मणी उसके साथ खुलती गयी।पाठकों को दिनेश का चरित्र कपटी लग सकता है पर वो कपटी नहीं है, बस स्त्रियों के मामले में जब उसे कोई स्त्री अच्छी लगने लगती है और अपनी इन्द्रियों पे काबू नहीं रहता तो वो कुछ चालाकी का इस्तेमाल करता है पर तभी जब उसे लगे कि स्त्री भी तैयार है बस समाज की बंदिशों के कारण कह नहीं पा रही।रुक्मणी के साथ भी वो ऐसा ही कर रहा है।
आगे क्या हुआ… यह मैं आपको इस हिंदी एडल्ट स्टोरी के अगले भाग में बताऊँगी।support@mohakkisse.com