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जवान लड़की पठन समय: 8 मिनट पढ़ा गया: 419 बार

कालू बन गया चोदू-1

अमित दुबे

28 Mar 2019 को प्रकाशित

कालू बन गया चोदू-1
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दोस्तो, मैं रोहित दुबे…आपने मेरी कहानियाँ पढ़ी और पढ़ कर मुझे जो मेल किए उसके लिए मैं दिल से आभारी हूँ।

दोस्तो, बात बहुत पुरानी है, मेरा चेहरा कुछ लम्बा सा और मैं साँवला सा था, घर में सब मुझे ‘कालू-कालू’ बोलते थे।उस समय मुझे पता नहीं था कि आज का कालू… किसी के धोखे से इतना बड़ा चोदू रोहित दुबे बन जायगा।

दोस्तो, बात है गर्मी के मौसम की छुट्टियों में हमारे घर मेरी बुआजी और मामा जी के लड़के लड़कियाँ और हम 3 भाई, कुल मिला कर 8-10 जनों का ग्रुप बन जाता था।

पर दोस्तो, पता नहीं क्यों पर मुझे मेरी बुआजी की ननद की लड़की पूजा का ही इंतजार रहता था, शुरू से ही उसके प्रति एक लगाव सा था और क्यों ना हो, पूरा बचपन साथ खेल कर बीता था, पर जब इस बार वो आई तो पता नहीं क्यों बार बार उसके पास जाने और उसके साथ रहने का मन करता था।

जब हम घर घर खेलते थे तो पता नहीं क्यों… बस उसका पूजा का पति बनने में ही मजा आता था, और उसके हाव-भाव से भी लगता था कि वो भी मेरे साथ अच्छा महसूस करती है।

जब हम सभी आँखों में आँखें डाल कर एक टक देखने वाला खेल खेलते तो मन करता कि बस पूजा की आँखों में देखता ही रहूँ।

मैं उसे साइकल पर बिठा कर पूरे शहर में घूम लेता और मुझे बिल्कुल थकान नहीं होती।

इस तरह छुट्टियाँ बीत जाती और मैं अगली छुट्टियों का इंतजार करने लगता।

हम कभी कभी बीच में किसी पारिवारिक कार्यक्रम में मिलते तो बस एक दूसरे से बात करने में ही पूरा वक्त गुजरता !

दोस्तो, बस यही लगता कि यही लाइफ है, यही सब कुछ है।बस एक ही गाना याद आता कि तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है, अंधेरों से भी मिल रही रोशनी है…

पर धीरे धीरे दोस्तों से और टीवी से पता चलने लगा कि लड़की के होंठ चूसने-चूमने और उसे गले लगाने में आनन्द मिलता है।

और ना चाहते हुए भी मेरा ध्यान उसके उरोज और उसके फिगर पर जाने लगा।

पर मेरे मन में गलत कुछ भी नहीं था क्योंकि बस मैं उसी को अपना मानता था और किसी लड़की पर मरी नजर भी नहीं जाती थी।

पर मुझमें ऐसा कुछ भी खास नहीं था कि पूजा जैसी लड़की मेरी तरफ आकर्षित होती।

हाँ, हम बहुत अच्छे दोस्त थे, वो भी शायद इसलिए क्योंकि मैं उसकी हर बात मानता था।

इस बार गर्मी में सबके बिस्तर छत पर बिछाये गए और किस्मत मेरे साथ थी कि पूजा और हम एक ही बिस्तर पर पास पास सोये।

मेरी तो मानो लॉटरी लग गई, आगे क्या हुआ, फिर कभी पर इस बात में कोई शक नहीं है कि मैं उसे बहुत प्यार करता था।

तो आलम यह था कि पूजा और हम छत पर एक ही बिस्तर पर सोये थे और एसा नहीं था कि इससे पहले हम एक बिस्तर पर ना सोये हों।

कई बार हम एक ही बिस्तर पर सोते थे पर इस बार मेरे मन में एक चोर था इसलिए बस यही सोच रहा था कि क्या किया जाए…

दोस्तो, गाण्ड भी फट रही थी कि कुछ करूँ और ऐसा ना हो कि पूजा जाग जाए।

रात के एक बजे तक मैं जागता रहा और सोचता रहा कि क्या करूँ, कैसे करूँ…

और वो मस्ती से नींद निकाल रही थी।

बीच में एक दो बार मैंने उसके बाल और चेहरे पर प्यार से हाथ लगाया भी… पर इससे ज्यादा कुछ करने की हिम्मत ही नहीं हुई।

पता नहीं कब मेरी आँख लग गई और सुबह हो गई, मुझे बहुत अफ़सोस हुआ कि मैं कुछ नहीं कर पाया।

पर मैंने सोचा कि कल रात कुछ भी हो जाये, मैं अपनी पूजा जान को एक बार उसके होंठ पर चुम्मा तो जरूर दूँगा।

पूरा दिन खेल कूद के बाद जब रात आई और फिर से हम बिस्तर पर आ गए।

मुझे आज भी अच्छे से याद है कि उस दिन पूजा ने एक लेगी और अमरेला फ्राक पहन रखा था।

तो मैंने सोच रखा था कि मैं पूजा के अधरों का रसपान जरूर करुँगा।

जब सब सो गए, उसके बाद मैं पूजा के करीब खिसका और धीरे धीरे उसके होंठों की तरफ बढ़ता गया पर मेरे दिल की धड़कन राजधानी एक्सप्रेस की रफ़्तार से चल रही थी।

क्या अहसास था यार… जब उसकी और मेरी साँस मिली तो जैसे मैं उसकी सांसों में खो सा गया।

पर दोस्तो, कहते हैं ना कभी कभी खड़े लंड पर चोट हो जाती है।

मेरे और उसके होंठ जैसे ही मिलने वाले थे, पता नहीं क्या हुआ, वो एकदम से हिली और मेरी गांड फटी के रह गई।

पर दोस्तो, उसमें थोड़ी सी हलचल हुई और वो पलट कर सो गई।

अब उसकी पीठ मेरी ओर थी और मेरा अपने ऊपर काबू नहीं था।

पहली बार मैंने अपने शरीर में सेक्स की गर्मी महसूस की थी, मेरा मासूम सा कुंवारा लण्ड कड़क हो चुका था।

अब मैंने सोचा कि पूजा के होंठ ना मिलें, ना सही, इसकी पीठ पर ही हाथ लगाया जाए।

मेरे बचकाने मन ने बोला मुझे कि होंठ पर किस करो या नग्न पीठ पर हाथ लगाओ, बात तो बराबर है।

उसकी फ्राक में जो पीठ की ओर चेन थी, मैंने उसे पकड़ा और धीरे धीरे खोलने लगा।

दोस्तो, अब की लाइफ में देखा जाए तो कई लड़कियों के कपड़े पलक झपकते खोल चुका हूँ पर उस टाइम पूजा की फ्राक की चेन खोलने का मजा ही कुछ और था।

मैं बड़ी सावधानी से उसकी चेन नीचे करता जा रहा था।

करीब चौथाई घन्टे की मशक्कत के बाद मैंने चेन पूरी खोल दी।

जब उसकी नग्न पीठ के दर्शन हुए तो मैं देखता रह गया।

पूजा बहुत ही गोरी थी।

फिर मैंने उसकी पीठ पर अच्छे से हाथ फेरा।

दोस्तो, बता नहीं सकता वो अहसास… आज की चुदाई से भी मस्त था क्योंकि उस टाइम पर मेरा किशोर मन चुदाई के बारे में जानता भी नहीं था।

दोस्तो, ऐसे ही वो रात भी गुजर गई, अब मैं दिन में भी कोई मौका नहीं छोड़ता, कभी पति पत्नी के खेल में उसे पकड़ लेता और कभी छुपन छुपाई के खेल में…वो जहाँ जा के छुपती, वहाँ जाकर उससे चिपकने की कोशिश करता।

इस रात मेरे मन में डर नाम की कोई चीज नहीं थी, जैसे ही सब सोए और पूजा को भी नींद लगी, मैंने भी उसी के तकिये पर अपना सर रख लिया और उसकी सासों में खो गया।

जैसे ही अपने होंठ उसकी तरफ बढ़ाए और उसके और मेरे होंठ स्पर्श हुए और ‘ऊऊम्म म्म… म्म… म्मम्म्म्हा…’ क्या अहसास था…

बस मैं उसके होंठ चूसता रहा।

बीच बीच में मैं रुक जाता और उसे साँस लेने देता और फिर उसके होंठ चूसता।

दोस्तो, पूजा करीब 30 दिन मेरे यहाँ रुकी और शायद ही कोई दिन ऐसा गया हो जिस दिन मैंने रात को उसके होंठ ना चुसे हों।

कई बार मैं उसके कपड़े भी इधर उधर कर देता।

इससे ज्यादा क्या करते हैं, इसकी समझ तो मुझे थी नहीं !

तो आज मैं अपनी कलम को यहीं विराम देता हूँ।

आप कहानी के अगले भाग का इंतजार करें और मुझे मेल करते रहें।

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कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

कालू बन गया चोदू

कुल भाग: 2
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पाठकों की राय

3 टिप्पणियां

मापा

1 month ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

संदीप जयपुर

2 months ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

p

peach goat

2 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

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