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Parivar Me Chudai पठन समय: 23 मिनट पढ़ा गया: 801 बार

कहानी मेरे परिवार में हुए संभोग की-10

neel38romana

20 May 2020 को प्रकाशित

कहानी मेरे परिवार में हुए संभोग की-10
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पिछले भाग में आपने देखा कि मां और चाची आपस में चुदाई कर रही थी बड़े मजे के साथ। मुझे बहुत अजीब लग रहा था। तभी मैं उठा और किचन से पानी पी कर बाहर आया, और उनका ये काम बिगाड़ने के लिए जोर से आवाज लगा दी।

मैं बाहर ही हाल में बैठ गया। इतने में दोनों डर कर एक-दूसरे से अलग हो गए, और मां चाची का नाइट ड्रेस पहन कर मेरे पास आई। अब आगे…

मां: बेटा तू यहां क्यों बैठा है इतनी रात में?

मैं: मुझे रात में आपको चोदने की आदत हो गई है। और चाची आई हुई है, तो आपको चोद नहीं पाया। इसलिए नींद नहीं आ रही है।

मां: धीरे बोल, वो सुन लेगी तो बहुत बुरा हो जाएगा।

मैं: और ये आप चाची की नाइट ड्रेस क्यों पहने हुई हो?

मां डर के मारे पसीने-पसीने हो गई।

मां: मैं उसका ड्रेस पहन कर देख रही थी कि मैं कैसी लगती हूं। मुझे अच्छा लगा तो मैं ऐसे ही उसका ड्रेस पहन कर सो गई।

मैं: कही कुछ और तो नहीं चल रहा?

मां‌ (डरते हुए): क्या चलेगा, कु, कु, कुछ नहीं चल रहा।

मैं: तो आप इतना कांप क्यों रही हो?

मां: मैं नहीं कांप रही। रात बहुत हो गई है, जा जाके सोजा।

मैं: आपको चोदने का बहुत मन हों रहा है। बस एक बार चोदने दो। मैं चोद के सो जाऊंगा।

मां: कैसी बात कर रहा है। तेरी चाची घर पर ही है।

उसने हमको चोदते हुए देख लिया तो हमारी गांड मार देगी।

मैं: नहीं, मुझे चोदना है। बस एक बार, फिर सो जाऊंगा।

मां: ये बहुत मुश्किल है बेटा आज। प्लीज आज मान जा बस।

मैं: नहीं, प्लीज बस एक बार।

मां: जिद्द मत कर।

मैं: मुझे चाहिए मतलब चाहिए और इसके आगे कुछ नहीं।

मां: ठीक है, पर तेरी चाची को सोने दे। पहले वो सो जायेगी, फिर मैं तेरे रूम में आऊंगी।

मैं: अभी चलो ना, वो सो ही तो रही है। मुझे अंदर देखने दो।

मां: नहीं-नहीं तू अंदर मत जा ( चाची अंदर नंगी चादर ओढ़ कर सोई थी। मैं अंदर जाता तो उनका भांडा फूट जाता। इसलिए वो मुझे रोकने लगी)। मैं थोड़ी देर में पक्का आ रही हूं। अभी तू जा यहां से।

फिर मैं अन्दर अपने रूम में आ गया।

मां चाची से: राधिका हमको ये रोक कर सोना होगा।

चीकू बाहर ही बैठा है और उसको नींद नहीं आ रही है।

चाची: फिर मुझे आज अधूरे सोना पड़ेगा( उदास होकर)?

मां: तू चिंता मत कर, मैं कल तेरी प्यास मिटा दूंगी सबके जाने के बाद।

चाची: चीकू तो सुबह भी रहेगा।

मां: उसे कल बाहर भेज दूंगी। वो मेरे ऊपर छोड़ दे।

पर अभी सो जाते है। वरना उसे सब पता चल जायेगा।

चाची ने हां कहा और वो दोनों सोने लगे।

1 घंटे बाद मां रात को मेरे कमरे में 2 बजे आई, और मुझे उठाया और बोली-

मां (गुस्से से): ले मैं आ गई। अब चोद ले जितना चोदना है।

मैं: गुस्सा क्यों होती हो? खुशी नहीं देता तुमको चोद कर?

मां: देता है। पर वो आई है, तुझे सोचना चाहिए ना ये सब।

मैं: छोड़ो ना, वो सो गई ना?

मां: हां वो सो गई।

मैं: तो अब हमारा शुरू करें?

मैंने मां को अपनी ओर खींचा। फिर अपनी और उनकी नाइट ड्रेस उतार कर उनकी चूत चाटने लगा। मां गीली होती जा रही थी। मैंने उन दोनों को आधे में ही रोक दिया था इसलिए।

मैंने मां के मुंह में अपना लंड डाला और गुस्से में मुंह को चोदने लगा जोर-जोर से। मेरा लवड़ा मां के गले के अंदर पूरा जा रहा था। वो उल्टी करने की हालत में आ गई थी। उसने मुझे हटाया और बोली-

मां: आज पागलों की तरह क्यों हरकत कर रहा है? आराम से नहीं कर सकता?

मैं: ठीक है, आराम से करता हूं।

मैंने हल्के-हल्के डाला उनके मुंह में अपना लंड।‌‌ फिर नीचे उतर कर उनकी चूत में अपना लवड़ा डाल कर चोदने लगा।

मैं: कैसा लग रहा है मेरी रांड?

मां: बहुत मजा आ रहा है, मेरे चोदरे बेटे आह। अपनी मां की चूत को चोद-चोद के लाल कर देता है।

मैं: बहुत मजा आता है ऐसे चोद कर तुझे।

मां: आह आह आह।

मैंने मां को काफी देर तक अलग-अलग पोजीशन में चोदा। उनको हर एक तरफ से चोदे जा रहा था।

चोदने के कारण पूरा रूम ठप-ठप फद-फद की आवाज से भर उठा था। फिर मैंने मां को उल्टा लिटा कर डॉगी स्टाइल में लाया, और पीछे से उनकी गांड मारे जा रहा था।

हम दोनों एक-दूसरे को चोदने का मजा ले रहे थे। हम दोनों को पता नहीं था, कि हमें कोई देख रहा था।

जी हां दोस्तों, चाची हमें पीछे से चोदते हुए देख रही थी। ये मुझे तब पता चला जब मां की सिसकियों के अलावा किसी और की सिसकियों की हल्की आवाज आ रही थी।

मैंने हल्का सा गर्दन को टेढ़ा किया और आईने में देखा तो चाची बाहर खड़े होकर अपनी चूत मसल रही थी। मैं ये सब देख कर खुश हुआ कि कम से कम चाची को तो नहीं चोद पाया अब तक। पर शायद वो ये सब देख कर अपनी कावली चूत मुझे चोदने दे।

मैं खुश होकर मां को और जोर से चोदने लगा। हम दोनों पूरे एक-दूसरे की हवस में भीग चुके थे। मां को इतने देर तक चोदने के बाद हम दोनों एक दूसरे में झड़ गए और मैं उनके ऊपर लेट गया।

मैं जानता था चाची अब भी बाहर खड़ी थी।

मैं: कैसा लगा मेरी मीनाक्षी रांड?

मां: बहुत सुकून मिलता है तुझसे चुद कर मुझे।

मैं: मैं हमेशा ऐसे ही जिंदगी भर तुझे चोद कर खुश रखूंगा मेरी रांड।

हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे एक साथ। मैंने मां को 2nd राऊंड के लिए फिर तैयार किया। और फिर से जम कर मां की चुदाई की।

हमे चोदते हुए टाइम का पता नहीं चला। 3:30 बज गए थे। मां उठी और बोली-

मां: चल अब मैं राधिका के पास जा रही हूं। उसे कहीं शक ना हो जाए।

मैं: ठीक है मेरी रांड, अब मैं भी सोऊंगा।

मां अपने कपड़े पहन रही थी। चाची वहां से अपने कमरे में चले गई। फिर मां भी चली गई।

मैं खुश था कि आज मां को चाची के सामने चोदा। क्योंकि शायद इससे चाची का मन मेरे लिए बदल जाए। मां और चाची दोनों सो गए, और मैं भी सोने लगा।

सुबह मैं उठा 9 बजे। घर पर पापा और चाचा कब आए मुझे पता ही नहीं चला। थोड़ी देर बाद मैं मां के पास गया और पूछा-

मैं: पापा लोग कब आए?

मां: वो दोनों सुबह 5 बजे आए है।

मैं: और चाची कब गई?

मां: वो तेरे चाचा आए, तभी उसके साथ चली गई।

मैं: अच्छा।

मां: जा जाकर अब फ्रेश होजा। मैं नाश्ता लगा देती हूं फिर तेरा। फिर तुझे आज अपनी दुकान भी जाना है।

मैं समझ गया कि मां चाची की हवस को पूरा करने के लिए मुझे घर से बाहर भेज रही थी। मैंने सोचा मेरा काम तो हो गया था। क्यों ना अब इन दोनों को भी मजा लेने दिया जाए।

मैं: हां ठीक है, मैं चला जाऊंगा।

मैं नहा धो कर खाना खा कर रेडी होकर 11 बजे दुकान की ओर निकल गया।

मैं शॉप में बैठे-बैठे बोर हो रहा था। मैंने सोचा अब घर चला जाए।

मैं पापा को बोला: मैं घर जा रहा हूं, अब आप लोग दुकान समभाले।

मैं 3 बजे घर पहुंचा तो नीचे ताला बंद था। मैं समझ गया मां कहा थी, और क्या कर रही थी। मैं तुरंत भाग कर ऊपर गया। चाची और मां की चुदाई खत्म हो चुकी थी शायद, और वो एक-दूसरे से बात कर रही थी हाल में आकर।

चाची: आज कही जाकर मेरी प्यास बुझी है मीनाक्षी।

मां: मेरी भी। तूने मेरे तन बदन को आज महका दिया। ये चुदाई हमेशा याद रहेगी मुझे।

चाची: मुझे भी।

मां: मुझे इतना मजा आया कि मैं तुझसे अब बार-बार चुदाना पसंद करूंगी राधिका।

चाची: आपने मेरी बरसों की प्यास मिटाई है दीदी। आज से मैं आपकी हूं। जब दिल करे आप मुझे चोद लेना।

और वो एक-दूसरे की बाहों में बाहें डाल कर चूमे जा रहे थे। ये सुन कर कितना घटिया लग था कि वो दोनों लेस्बियन होते जा रहे थे।

मैं नीचे गया सीढ़ी पर और उपर आ रहा हूं करके पैर बजाते हुए उपर गया। वो दोनों समझ गए कि कोई आ रहा था, और वो दोनों अलग होकर एक-दूसरे से बाते करने लगे। मैं अंदर गया तो मां बोली-

मां: आ गया बेटा। कैसा रहा तेरा दिन दुकान में।

मैं: अच्छा रहा। पर मुझे भूख लगी तो खाने के लिए घर आ गया। चलो ना कुछ खिला दो मुझे।

मां: अच्छा चल मैं आती हूं।

चाची को मां ने अलविदा किया और वो घर आ गई। मां नीचे आई तो मैंने मां को पकड़ लिया और बोला-

मैं: भूख तो एक बहाना था। मुझे तो बस अपनी मां को चोदने आना था।

मां मुझे अलग कर रही थी और मुझे चोदने के लिए मना करने लगी।

मैं: क्या हुआ, दूर क्यों कर रही हो?

मां: अभी मन नहीं है, रात में करेंगे।

मैं: क्यों ऐसा क्या हो गया आपको, जो आज पहली बार मुझे मना कर रही हो?

मां: बस आज थोड़ा सुबह से काम के कारण थकान लग रही है।

मैं: काम के कारण थकान लग रही है कि जो आपने किया उससे आपको थकान लग रही है?

मां: क्या बोल रहा है तू?

मैं: सही बोल रहा हूं। आप और चाची एक दूसरे को चोद रहे थे ना?

मां इतना सुन कर गुस्से से आग बबूला हो गई और मुझे 3 झापड़ जोर-जोर से मारे।

मैं एक-दम से रूठ कर रोने लगा।

मां: साले मादरचोद, तुझे मैंने जरा सा क्या ढील दी, तू ये सब बोलेगा अपनी मां से( और ये बोल कर 2 झापड़ और मारे)?

मैं (रोते रोते): हां मार लो मुझे। पर कल रात में आप दोनों का ये कर्मकांड देख लिया था मैंने। तभी आप चाची का नाईटी ड्रेस पहन कर आई थी बाहर।

मां एक-दम क्षण भर के लिए बेहोशी की हालत में आ गई। उनके हाथ पैर कांपने लगे। मां बोली-

मां: तो तूने देख लिया हम दोनों को?

मैं: हां सब कुछ। आपको अब मुझसे नहीं चाची से लगाव हो गया है इस चुदाई में और तभी आपने मुझे इतना मारा मैं जा रहा हूं।

मैं रोते-रोते अंदर चला गया और सो गया। मैं सीधे रात को उठा। मां ने मुझे खाना खाने बुलाया, पर मैं नहीं गया।

इतने में पापा आकर बोले: आ बाहर आ और खाना खाले।

मैं बाहर गया तो मां मुझे करुणा की नजरों से देख रही थी। मानों वो मुझसे माफी मांगना चाह रही हो। मैंने उनसे बात नहीं की।

पापा ने पूछा: ये तेरे गाल में हाथो के निशान कैसे? किसी ने तुझे मारा क्या बता?

मैं चुप होकर खाना खा रहा था, इतने में मां बोली-

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मां: हां मैंने मारा आज गुस्से से। ये मुझसे जाने की जिद कर रहा था वापस इसलिए।

पापा: कोई जवान बेटे को इतना मारता है क्या कि उसका जबड़ा ही लाल जो जाए?

मां: माफ कर दो जी, वो बात ही ऐसे कर रहा था।

मैंने खाना खाया और अंदर अपने रूम चला गया। रात को मां 1 बजे मेरे रूम में आयी, और रोते हुए मुझे जगा कर कहने लगी-

मां: मुझे माफ कर दे बेटा, मैंने आज तुझे बहुत मारा है।

मैं चुप हो कर सोने लगा।

मां: मुझसे बात कर बेटा, प्लीज।

मैं: आप चले जाओ यहां से, मुझे कोई बात नहीं करनी।

मां: माफ कर दे ना बेटा, प्लीज।

मैं: मैंने बोला ना आप जाओ यहां से।

मां मेरे उपर आकर लेटने लगी, और सॉरी बोलते हुए मुझे किस्स करने लगी। मैंने मां को धकेल दिया और बोला-

मैं: आप जाओ यहां से। मुझे आज से कुछ नहीं करना आपके साथ। अब आपको जो भी करना है चाची के साथ ही करके खुश रहना।

मां रोते-रोते चली गई और जाते-जाते बोली-

मां: मैं मर जाऊंगी, अगर तूने मुझसे बात नहीं की तो।

मैं चुप रहा और मां चली गई।

अगली सुबह

मां जान-बूझ कर मेरे से बात करने की कोशिश करने लगी। पर मैंने मां के सामने घास नहीं डाली, और चुप रहा।

मैंने थोड़ी देर बाद नाश्ता किया, और बाहर निकल गया घर से मुंह फुला कर। मां बहुत उदास थी। उसको समझ नहीं आ रहा था कि क्या कर दिया उसने। मां सबके जाने के बाद और मेरे भी जाने के बाद चाची के घर गई उसे सब बताया-

मां: उसने हमको रात में देखा था, और उसने ये बात कही तो मुझे बहुत बुरा लगा, और उसे मैंने कल बहुत मारा था।

चाची: क्यों मारा आपने उसे इतना? उसे बहुत बुरा लग रहा होगा।

मां: क्या करूं मुझे उस वक्त बहुत बेकार लगा और गुस्से में मार दिया।

चाची: कोई बात नहीं उसे आने दो, उससे मैं बात करूंगी।

मां: हम क्या नज़र दिखाएंगे उसको राधिका? मुझे तो अपने आप में ये सोच-सोच कर ही घिन्न आ रही है।

चाची: अब इतना भी मत घृणा करो इस चीज से। आप भी इसके पीछे जिम्मेदार हो कहीं ना कहीं।

मां: क्यों बोल रही है ऐसा तू राधिका? मैंने तेरी खुशी के लिए किया ( रोते हुए)।

चाची: बुरा मत मानना दीदी। पर आपको एक बात बोलना चाहती हूं बड़े दिनों से। आपकी इजाजत हो तो बोलूं?

मां: खुद की नजरों से तो गिर ही गई हूं। अब तू भी बोल दे।

चाची: मुझे सब पता है आपके और चीकू के बारे में, कि आपका और उसका अब क्या रिश्ता है।

मां: क्या बोल रही है तू समझ नहीं आ रहा मुझे?

चाची: अब बनो मत दीदी, मुझे सब पता चल गया है। आपका और चीकू का रिश्ता अब मां बेटे का नहीं, बल्कि चुदाई का हो गया है।

चाची: मैंने आप दोनों को कल रात में मजे से चुदाई करते देखा, और उस दिन आपकी बाते भी सुनी।

मां जोर-जोर से रोने लगी और कहने लगी-

मां: मैं सब तरफ से बर्बाद हो चुकी हूं। ना रिश्ते में मां बन पाई, ना तेरे साथ बहन बन कर रह पाई।

चाची: छोड़ो ये सब बात और रोना बंद करो।

मुझे मालूम है कि जब चूत में खुजली होती है तो बाप बेटा या भतीजा कुछ नहीं सूझता।

चाची: हम तीनो को ये बात आपस में पता चल चुकी है कि हमारा अब क्या रिश्ता है।

मां: क्या? क्या चीकू को पता है कि तू जानती हैं हम मां बेटे एक-दूसरे को चोदते है करके?

चाची: हां बहुत अच्छे से।

मां: हे भगवान, मुझे चक्कर आ रहा है। मैं मर क्यों नहीं गई ये सुनने से पहले?

चाची: ऐसी अशुभ बाते मत बोलो। आपके मरने से पहले मैं मर जाऊं।

मेरी वजह से सब हुआ है ना, मैं कहती ना आपको तो ये बात ही ना होती।

मां: अब हम क्या करे राधिका?

चाची: देखो अब उसे सब पता चल ही गया है, तो कोई बात नहीं। इन सब को ठीक करने का एक ही रास्ता है।

मां: बता ना कौन सा?

चाची: चीकू आपको चोदता है, इसमें कोई बुरी बात नहीं है। पर उसे मनाने के लिए और इन सब लफड़ों से दूर होने के लिए अब।

मां: अब क्या?

चाची: अब मुझे भी उसको खुद को चोदने देना होगा। तभी हमारे बीच बन पाएगी। वरना हम तीनों एक-दूसरे के बिना अधूरे रह जायेंगे।

मां: ये तू क्या बोल रही है राधिका? एक और नए गंदे रिश्ते की शुरुआत करनी होगी?

चाची: गंदा था, अब नहीं रहेगा। जब तीनों जान ही चुके है तो अब एक-दूसरे को सजा क्यों दे।

मां: पर क्या ये ठीक होगा? क्या चीकू तुझे चोदने के लिए मानेगा।

चाची: हां यही ठीक होगा। अब हमारे बीच और चीकू मुझे चोदने के लिए मानेगा या नहीं वो आप मुझ पर छोड़ दो। मैं उसे मना लूंगी। पर एक बात है।

मां: अब क्या बात रह गई ( उदासी भरी आवाज में)?

चाची: आप बुरा नहीं मानोगे जब चीकू मुझे चोदेगा

मां: अब बुरा मानने को रह ही क्या गया है राधिका?

चाची: तो ठीक है अब से तीनों एक-दूसरे से चुदेंगे, और किसी को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।

मां: मुझे अब कोई परेशानी नहीं होगी। बस मेरा रूठा हुआ बेटा मान जाए।

चाची: उसकी चिंता आप मत करो, मैं देख लूंगी।

ये कह कर उन दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाया और एक-दूसरे के आंसू पोछे, और खुद को शांत किया।

मैं शाम को वापस घर लौटा। मां ने मुझसे पूछा-

मां: कहा गया था बेटा?

मैं: मैं कही भी जाऊं, आपसे मतलब?

मां: ऐसा मत बोल बेटा। तू ही तो सब कुछ है मेरा।

मैं: हां सब मालूम है। बस कुछ दिनों की बात है। फिर मैं वापस चला जाऊंगा। फिर आप खुश रहना।

ये बोल कर मैं जाने लगा।

मां: रुक ना चीकू।

मैंने मां की एक बात नहीं सुनी, और अपने रूम के अंदर चला गया। मां रोती रही।

खाना खाने का टाइम हुआ। उसने मुझे आवाज लगाई-

मां: खाना तैयार है, आजा।

मैं नहीं गया, और बोल दिया-

मैं: मैंने बाहर खा लिया है, आप लोग खाओ।

मां रोते-रोते चली गई। और चाची को जाकर ये सब बात बोल दी।

और वो घर आ गई। मैं अपने रूम में था। मुझे प्रियंका की आवाज आई। मुझे लगा वो अनीता के पास आई थी।

वो मेरे पास आई और बोली: भैया, आपको मां खाने के लिए ऊपर बुला रही है।

मैं: मुझे नहीं खाना, मैंने खा लिया है आज बाहर।

वो ठीक है बोल कर चली गई, और चाची को बता दिया कि मैंने बाहर खा लिया है। और मैं नहीं खाने वाला था। थोड़ी देर बाद चाची नीचे आई, और मुझसे बोली-

चाची: ऐसे कैसे नहीं खायेगा तू। तुझे खाना पड़ेगा खाना। तैयार है तू? आजा सब साथ में बैठ कर खाएंगे।

मैं ( गुस्से से): एक बार में आप लोगों को बात समझ में नहीं आती? मैंने खा लिया है, और मुझे नहीं खाना है।

चाची: ठीक है मत खा दोनों घर में। मैं भी देखती हूं तू कब तक बाहर खाना खाता है।

पर याद रखना ऐसा करके तू अपनी मां से दूर हो रहा है।

और मुझसे भी खुद को अलग कर रहा है। भूल जाना की तेरी कोई चाची है अब से।

वो भी उदास होकर अपने घर चली गई।

मुझे एहसास हुआ कि मैं शायद गलत कर रहा था। मैं अपने गुस्से के कारण अपने हस्ते खेलते परिवार को तोड़ रहा था।

मैंने खुद को समझाया कि मेरे ऐसा करने से एक नहीं बल्कि तीनों रिश्ते खराब हो रहे थे। पहला मेरा और मां का, दूसरा मां और चाची का, और तीसरा मेरा और चाची का।

मैंने सोचा अब सब कुछ मुझे ही भूल कर अपनी मां और चाची को माफ कर देना चाहिए है। उनसे बात करनी चाहिए।

मैं तुरंत अपने बेड से उठा, और मां के पास गया और उनसे लिपट गया पीछे से। मैंने इतने दिनों बाद उन्हें मां की नजरों से देखा और मां की नजरों से ही लिपटा।

मैं मां से बोला-

मैं: मैं बहुत बुरा हूं ना मां, जो आपको इतना दुख दिया, और ना जाने क्या-क्या कह गया?

मां रोने लगी और मुझे गले लगा कर बोली-

मां: ऐसा मत बोल बेटा, मेरी गलती है जो तुझे मारा है।

मैं: कोई बात नहीं मां। आप मां हो मेरी, और आपका हक बनता है ये करने का।

मुझे माफ कर दो मां। मुझसे गलती हो गई है।

मां और मैं फूट-फूट कर रोने लगे धीमी आवाज में।

मां: कोई बात नहीं बेटा। मुझे भी तुमपे हाथ नहीं उठाना था।

मैं: कोई बात नहीं मां।

मां ने मुझे माथे पे किस किया और बोली-

मां: जा बेटा, तेरी चाची भी बहुत परेशान है इन सब के कारण। और वो गुस्से में है। जा उसे मना ले। वरना वो दुखी ही रहेगी।

मैं: हां मैं उनसे भी माफी मांगने जा रहा हूं।

मां: जा बेटा, और हां एक और बात।

मैं: बोलो।

मां: वो जो कहे मान लेना। खाना के लिए बोले तो खा लेना, और रुकने बोले तो रुक जाना।

मैं: हां मैं मना नहीं करूंगा। अब जा रहा हूं उनके पास मैं।

अगर रात हुई तो समझ जाना मैं उनके यहां रुक रहा हूं।

मां: फिर आज मीनाक्षी को कौन चोदेगा फिर?

मैं: तू चिंता मत कर, तेरा बेटा जिंदा है। वहीं आके तेरी हवस मिटाएगा।

मां: मेरे लाल उम्माह ( उन्होंने मुझे होंठो में किस्स किया और जाने को बोला)

फिर मैं चाची के घर चला गया।

कहानी में अभी ट्विस्ट बाकी है मेरे दोस्तों।

अब आगे की कहानी अगले भाग में जानिए, कि कैसे चाची और मेरे बीच की गुत्थी सुलझी और मैंने और चाची ने दोनों ने भूख मिटाई।

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कहानी मेरे परिवार में हुए संभोग की

कुल भाग: 5
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