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Group Sex Story पठन समय: 18 मिनट पढ़ा गया: 402 बार

शहर में जिस्म की आग बुझाई- 4

मुस्कान सिंह

10 Mar 2019 को प्रकाशित

शहर में जिस्म की आग बुझाई- 4
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मेरे जिस्म की आग मेरे पति के बॉस ने मेरी जोरदार चुदाई करके ठंडी कर दी. लेकिन उसका मन मेरी चूत से नहीं भरा था. उसने मेरी गांड की चुदाई भी की. इसके अलावा …

दोस्तो, मैं फिर से आपके साथ अपनी मस्ती भरी जिन्दगी की कहानी लेकर हाजिर हूँ।

अभी तक आपने पढ़ा कि कैसे मैंने और सुखविन्दर ने पहली बार चुदाई की. यह किसी गैर मर्द के साथ मेरी पहली चुदाई थी.

दूसरे राउंड में उन्होंने एक और जोर का धक्का देकर पूरा का पूरा लंड पुद्दी में उतार प्रिया और मेरी कमर को दोनों हाथ से पकड़ के मुझे चोदना शुरू कर प्रिया। इस बार तो वो और तूफानी अन्दाज में चुदाई कर रहे थे।कुछ देर तक चोदने के बाद मुझे घोड़ी बनने के लिए बोले और मैं घोड़ी बन गई। इस तरह से तो उनका लंड और भी टाईट लग रहा था। करीब 10 मिनट तक ऐसे चोदने के बाद उन्होंने लंड बाहर निकाल लिया और मुझे फिर से पेट के बल लेटा प्रिया और बोले- जान अब तुम्हें थोड़ा दर्द और सहन करना होगा।

मैं बोली- क्यूँ अब क्या करोगे?“कुछ नहीं … अब तुम्हें गांड से चोदना है.”“नहीं नहीं … वहां नहीं!”“क्यों?”“वहां आज तक नहीं किया है … वहां बहुत दर्द होगा।”

मगर वो मान नहीं रहे थे तो थोड़ी ना नुकर के बाद मैं भी मान गई।

वो तुरंत ही तेल की बोतल ले आये और मेरी गांड में छेद में कुछ तेल लगाया और कुछ अपने लंड में लगाया।

मैं वैसे ही पेट के बल लेटी रही, उन्होंने मेरी गांड को फैला प्रिया और छेद में लंड को लगा कर मेरे ऊपर लेट गए और धीरे धीरे लंड पे जोर देकर अन्दर करने लगे। लंड भी छेद को चौड़ा करते हुए अन्दर जाने लगा।मेरे मुंह से उस वक्त बस- मह्ह्ह ओओओ ओह्ह मह्ह्ह आह्ह नहीईईईईई ना … छोड़ो न!मगर वो कहाँ मानने वाले थे … धीरे धीरे कर के पूरा लंड मेरी गांड में पेल प्रिया। मूसल जैसा लंड मेरी गांड में एकदम चिपक सा गया था।

मुझे उतना ज्यादा दर्द नहीं हुआ क्योंकि उन्होंने बहुत आराम से ही डाला था।

फिर धीरे धीरे उन्होंने मेरी गांड चोदनी शुरू की. लंड बहुत ही ज्यादा टाईट जा रहा था, मैं बिल्कुल मछली जैसी मचल रही थी- आअह्ह्ह नहीई ईईई आअह्ह्ह ऊऊऊईईईई आआआअह्ह ऊऊऊईईई छोड़ोओओ ओह्ह्ह ओओओ नहीईईईई ईईईईई बस्स करो!मगर वो धीरे धीरे ही मुझे चोदे जा रहे थे.

कुछ देर में मैं कुछ सामान्य हुई, तब उन्होंने अपने धक्के तेज़ कर दिये।अब मुझे भी अच्छा लग रहा था। अब तो वो भी जोरदार धक्के लगाने लगे. मेरे चूतड़ भी मस्त हिल रहे थे और उनको देख वो और जोश में आकर तेज़ी से चुदाई किये जा रहे थे।

करीब 15 मिनट तक चुदाई के बाद सुखविन्दर ने अपना पूरा पानी मेरी गांड में ही गिरा प्रिया और फिर से हम दोनों निढाल होकर लेट गए। हम दोनों के ही बदन पसीने से तर थे।

उस रात हम दोनों ने एक बार और चुदाई की और फिर सो गये।

अगले दिन दोपहर में 2 बार फिर चुदाई हुई।

अभी हम दोनों के पास 3 दिन और थे और हम दोनों ही इस समय का पूरा फायदा लेना चाहते थे। हम दोनों ही चुदाई में एक दूसरे के काबिल थे वो जितना भी तेज़ चुदाई करते, मैं सह लेती थी।2 दिन में हम दोनों चुदाई में इतना खुल चुके थे कि पूरी कामसूत्र के हर अन्दाज आजमा चुके थे। उन्होंने जितनी बार भी मेरी चूत गांड की चुदाई की, हर बार मेरा पानी जरूर निकाल प्रिया था।और सच कहूँ तो ऐसी ही चुदाई मुझे चाहिए थी, मैं उनसे पूरी तरह सन्तुष्ट थी।मेरे अन्दर अब उनके प्रति ये भावना बिल्कुल नहीं थी कि वो मुझसे काफी बड़े हैं।

इसी तरह चुदाई करते हुए हम दोनों को 3 दिन हो चुके थे और अभी भी पति को आने में 2 दिन का वक्त था।

तीसरे दिन रात में ऐसे ही चुदाई करने के बाद हम दोनों नंगे एक दूसरे से चिपके हुए बात कर रहे थे।और तभी उन्होंने मुझसे पूछा- क्या तुम कभी ग्रुप में चुदाई करना चाहोगी?“मतलब?”“मतलब कि तुम अकेली रहो और तुम्हारे साथ दो मर्द रहें। या फिर तुम दो औरत रहो और मैं रहूँ।”मैंने कहा- नहीं … ऐसा तो मैंने कभी सोचा नहीं है।

तो वो बोले- अगर तुम्हारी कोई सहेली हो तो क्या हम ऐसा मजा लें किसी दिन?मैंने कहा- ऐसी तो मेरी कोई सहेली नहीं जो ये सब करे … और मैं अपनी किसी सहेली को ये सब बता भी नहीं सकती।तो वो बोले- अगर मैं अपने किसी दोस्त को बुला लूँ तो?

कुछ देर सोचने के बाद मैं बोली- कौन दोस्त?“है मेरा एक दोस्त … वो भी किसी को नहीं बतायेगा. अगर तुम चाहो तो हम इस खेल का और खुल कर मजा लेते हैं। बहुत मजा आयेगा।”मैं बोली- नहीं, मुझे डर लग रहा है! ये सब नहीं।वो बोले- अरे कुछ नहीं होगा … तुम्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।

मैं चुप ही रही और वो मेरी सहमति पा गये थे।

अगली ही सुबह वो अपने किसी दोस्त से फोन पर बात कर रहे थे. मैंने ध्यान नहीं प्रिया और अपने घर के काम में लगी रही।कुछ देर बाद उन्होंने मुझे बताया कि शाम को उनका दोस्त आ रहा है।मैंने कहा- आप भी ना … ये सब मत करो, किसी को पता चला तो अच्छा नहीं होगा।वो बोले- अरे कुछ नहीं होगा. तुम ज़रा भी चिंता मत करो।

मेरे मन में अज़ीब ख्याल आ रहे थे और तन में एक अज़ीब सी गुदगुदी भी।3 दिन में ही मैं कहाँ से कहाँ पहुँच गई थी। कभी अपने तन की प्यास बुझाने के लिए तड़पती थी और अब वो सब कर रही हूँ जिसके बारे में कभी सोचा भी नहीं था।

इस तरह शाम के 4 बजे थे कि उनके दोस्त का फोन आया, उन्होंने दूसरे कमरे में जाकर बात की और फिर मेरे पास आ कर बोले- शाम का खाना मत बनाना; मेरा दोस्त बाहर से ही लेकर आ रहा है; वो 7 बजे तक आ जायेगा।मैं मुस्कुराती हुई बोली- आज तो लग रहा है मेरी खैर नहीं है।“वो बोले कैसे?”“क्या कैसे तुम दो मर्दों के बीच में मेरा क्या होगा … पता नहीं।”

इतना सुनते ही उन्होंने मुझे बांहों में खीच लिया और मेरी कमर को जकड़ते हुये बोले- आज तुझे रन्डी बनना है … ये सोच ले बस! आज तुझे रात भर में इतना चुदना है कि तेरी पूरी प्यास बुझ जायेगी। मगर आज के बाद तू बस मेरी ही रहेगी. ये सब बस आज के लिये है, इसके बाद ये सब नहीं होगा।

इतने में दरवाजे में आवाज हुई और मैं एकदम से डर गई. मैंने उन्हें तुरंत ही दूसरे कमरे में जाने के लिए कहा और आवाज देकर बोली- कौन?बाहर से एक लड़की की आवाज आई- भाभी मैं हूँ नेहा!नेहा मेरे बगल वाली की बेटी है।

मैंने तुरंत दरवाजा खोला और पूछा- क्या बात है नेहा?नेहा ने कहा- मेरे यहाँ पानी नहीं आ रहा है. क्या मैं आपके यहाँ नहा सकती हूँ? मुझे अपनी सहेली के यहाँ पार्टी में जाना है।मैंने कहा- हाँ नहा लो।नेहा अन्दर आई और मैंने दरवाजा बन्द किया.

नेहा की उम्र 19-20 साल के करीब है और हम दोनों की अच्छी जान पहचान है।

अन्दर आ कर उसने तुरंत कपड़े उतारे और बाथरूम में नहाने चली गई।

मैं तुरंत उस कमरे में गई जिस कमरे में सुखविन्दर थे। मैंने उन्हें परदे के पीछे छिपा प्रिया क्योंकि नेहा नहा कर उसी कमरे में तैयार होने आती।कुछ ही देर में नेहा बाहर आई और उसी कमरे में आ गई।

मैंने देखा कि वो केवल गीली चड्डी में ही कमरे में आ गई है। उसे क्या पता था कि वहां मेरे अलावा और कोई भी मौजूद है।

उसने वहीं पे अपनी चड्डी उतार दी और पूरे जिस्म में क्रीम लगाने लगी उसकी गांड ठीक उसी तरफ थी जहाँ सुखविन्दर छुपे थे.मैंने देखा तो सुखविन्दर चुपके से उसे देख रहे थे,वो झुक कर अपनी टांगों में क्रीम लगा रही थी. उसकी गांड का गुलाबी छेद ठीक सुखविन्दर की तरफ था.

मैंने नेहा को थोड़ा छेड़ना शुरू किया- नेहा तू तो बहुत गोरी है रे!“अरे नहीं भाभी … इतनी भी नहीं हूँ।”“नहीं सच में तू मस्त दिख रही है बिना कपड़ों के। तेरा कोई दोस्त तो जरूर होगा?”“अरे भाभी … है … मगर आप किसी को बता मत देना।”“नहीं नहीं, मैं क्यों बताऊँगी बल्कि अगर कभी मेरी मदद की जरूरत हो तो बोलना।”“ठीक है भाभी।”

फिर मैंने पूछा- उसके साथ कुछ किया भी है या ऐसे ही?वो शर्माती हुई बोली- बस एक दो बार भाभी। मिलने के लिए जगह ही कहाँ है।मैंने कहा- अरे मेरे यहाँ बुला लिया कर … यहाँ बस मैं अकेली ही तो रहती हूँ।वो खुश होकर बोली- सच भाभी?“हाँ सच बोल रही हूँ, किसी को नहीं बताऊँगी।”

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इतने में वो तैयार हो गई और एक बार फिर से मुझसे पूछने लगी- सच ना … किसी को नहीं बोलोगी ना?मैंने हाँ कहा और फिर वो वहां से चली गई।

मैंने दरवाजा लगाया और अन्दर आई और सुखविन्दर को बाहर निकलने को बोली.जैसे ही वो बाहर आये तो मैं देखी उनका लंड एकदम टाईट था।मैंने पूछा- ये क्या … अभी से ये खड़ा हो गया।वो बोले- अरे इतनी मस्त माल को नंगी मेरे सामने लाओगी तो क्या होगा इसका? लग रहा था कि अभी लंड निकाल कर गांड में डाल दूँ इसकी!मैं हंसती हुई बोली- अरे छोटी है अभी वो!“अरे कहाँ है छोटी … इतनी बडी गांड हो गई उसकी … एकदम सही माल है। और तुमने सुना नहीं कि खुद बोल रही कि एक दो बार चुद गई है।”

हम दोनों ऐसे ही बात करते रहे और कुछ ही देर में मैंने देखा कि 7 बजने वाले है मैंने उनको याद दिलाया कि उनका दोस्त 7 बजे आने वाला है।उन्होंने तुरंत फोन किया और उससे बात करने लगे।

मैंने घर को थोड़ा साफ किया और बिस्तर को अच्छे से बिछाकर तैयार होने लगी।

ठीक 7 बजे दरवाजे में आवाज हुई. मैंने पूछा- कौन?बाहर से आवाज आई- मैं हूँ अभिजीत।सुखविन्दर ने कहा- हाँ वहीं है!

और मैंने दरवाजा खोला। सामने एक हट्टा कट्टा 45 से 50 साल का आदमी था। मैंने उसे अन्दर आने के लिए कहा और फिर दरवाजा बंद कर प्रिया।

उसके हाथ में एक थैला था जिसमें कुछ खाने पाने का सामान था। उसने मुस्कुराते हुए वो थैला मुझे प्रिया और मैं उसे लेकर किचन में चली गई.मेरे पीछे पीछे सुखविन्दर भी आ गए और मेरी मदद करने लगे।उसमें खाना था और शराब की 2 बोतलें थी. मैं समझ गई कि इन लोगों का पीने का भी प्लान है.

सुखविन्दर ने वो बोतलें फ्रिज में रख दी। उस थैले में एक शर्ट भी था मगर मैंने उस पर ध्यान नहीं प्रिया और हम दोनों बाहर आकर अभिजीत के पास बैठ गए और बात करने लगे।हम तीनों ही काफी हंसी मजाक की बातें कर रहे थे.

ऐसे ही रात के 9 बज चुके थे, बाहर मेरे कालोनी का माहौल भी शान्त हो चुका था।सुखविन्दर ने मुझे कहा- अब किसी के आने का डर नहीं है, चलो अन्दर रूम में ही खाना खाते हैं।और हम तीनों अन्दर बैडरूम में गए. अभिजीत को वहीं छोड़ हम दोनों किचन में जा कर खाने का इन्तजाम करने लगे।

सुखविन्दर ने कहा- खाना अभी रहने दो, कुछ देर से ले जाना, अभी कुछ दारू का सुरूर चढ़ने दो।उसने 3 ग्लास बर्फ सोडा और शराब लिए और हम दोनों बैडरूम में आ गए।मैंने कहा- मैं तो पीती नहीं हूँ, आप लोग इसका मजा लीजिये.

मगर सुखविन्दर ने कहा- नहीं, आज तो हमारा साथ देना पड़ेगा आपको!मेरे मना करने के बाद भी उसने 3 ग्लास में शराब बनाई।

पहले तो मैंने कुछ झिझक दिखाई मगर सुखविन्दर ने अपने हाथ से मुझे पहला ग्लास पिला प्रिया. कुछ ही देर में सुखविन्दर ने दूसरा ग्लास भी तैयार कर प्रिया, मगर उन्होंने कहा- मुस्कान, मैंने तुम्हारे लिए जो शर्ट मंगाया है, उसको पहन के दिखाओ जरा।मैंने पूछा- कौन सा शर्ट?तो वो किचन से वही शर्ट ले आये जो थैले में था और मुझे देकर बोले- लो जाओ जल्दी पहन आओ।

मैंने उसे देखा तो वो एक जालीदार नाईट शर्ट था, बहुत ही छोटा।मैं बाथरूम में गई और उसे पहन लिया. मैंने देखा कि वो तो बहुत ही छोटा है मेरी जाँघों तक ही आ रहा है। फिर मैंने सोचा कि जब ये सब कर ही रही हूँ तो क्या शर्माना … और मैंने अपनी ब्रा भी उतार दी और फिर रूम में उन दोनों के पास चली गई।

वहां जा कर देखा तो वो दोनों भी अपने कपड़े उतार चुके थे और केवल चड्डी में ही थे दोनों।मुझे उस शर्ट में देख कर दोनों की आँखें फटी की फटी रह गई। मेरा गोरा अर्धनग्न बदन उस लाल जालीदार शर्ट में एकदम दमक रहा था, मेरे बड़े बड़े दूध एकदम बाहर निकलने को आमादा थे।

सुखविन्दर ने मुझे आपने पास बुलाया और दोनों के बीच में मुझे बैठा लिया।इसके बाद अभिजीत ने मुझे दूसरा ग्लास पिलाया.

अब मुझे शराब का नशा होने लगा था। अभिजीत का हाथ मेरी जाँघों को सहलाते जा रहा था। इसके बाद तीसरा और फिर चौथा ग्लास हम सबने ख़त्म किया।अब हम तीनों ही पूरी तरह नशे में चूर हो चुके थे।

सुखविन्दर उठे और सामने रखी टेबल किनारे की और म्युजिक प्लेयर में म्यूजिक लगा दी. मेरे हाथ पकड़ के उन्होंने मुझे अपने पास खींचा और अपनी बांहों में लेकर डांस करने लगे.हम दोनों को देख अभिजीत भी आ गया और मेरे पीछे से चिपक गया।

उन दोनों का ही लंड एकदम टाइट हो गया था, दोनों ने ही मेरे जिस्म से खेलना शुरू कर प्रिया था। मैं एक जवान औरत उन दो अधेड़ों के बीच में दबी हुई थी।

कुछ ही देर में दोनों ने मुझे नंगी कर प्रिया। मेरा गोरा बदन देख के अभिजीत बोला- वाह यार … आज तो किस्मत खुल गई। ऐसी माल तो सपने में भी नहीं चोदा।मैं उस वक्त नशे में मस्त थी.

फिर वो दोनों पलंग में बैठ गए और अपने लंड निकालकर मुझे चूसने को कहने लगे. मैं भी मस्ती में आकर एक के बाद एक लंड चूसने लगी. दोनों का लंड था बहुत मस्त लम्बा भी और मोटा भी।काफी देर तक चूसने के बाद उन दोनों ने मुझे बिस्तर पर पटक प्रिया और मेरे ऊपर आ गए, दोनों मेरे जिस्म से खेलने लगे कोई पुद्दी चाट रहा था कोई दूध से खेल रहा था।मेरी सिसकारी पूरे कमरे में गूँज रही थी।

कुछ देर बाद अभिजीत में मेरे पैरों को फैला प्रिया और लंड को पुद्दी में लगा कर एक बार में ही अन्दर डाल प्रिया.मेरी तो चीख निकल गई.तभी सुखविन्दर बोले- चुप मादरचोद साली … इतने में फट रही है? अभी तो खेल शुरू किया है हमने!और सुखविन्दर ने अपना लंड मेरे मुँह में डाल प्रिया और मुँह को चोदने लगे।

अभिजीत मेरी फुद्दी को पेलने लगा और करीब 5 मिनट में सुखविन्दर ने पूरा पानी मेरे मुँह में भर प्रिया, न चाहते हुये भी मुझे पूरा पानी गटकना पड़ा।कुछ देर में अभिजीत भी झड़ गया.मैं कब झड़ गई थी मुझे पता भी नहीं चला।

सुखविन्दर ने तुरंत ही 3 ग्लास शराब फिर बना ली और फिर मुझे भी पिला प्रिया.अब तो मुझे सच में कुछ समझ में नहीं आ रहा था।

उन दोनों ने मुझे पलंग के पास खड़ा किया और सामने से सुखविन्दर ने पुद्दी में लंड डाल प्रिया और मेरा एक पैर उठा लिया. तभी पीछे से अभिजीत ने अपना लंड मेरी गांड में लगा प्रिया और पूरा लंड अन्दर उतार प्रिया और दोनों ने मुझे दबा कर चुदाई शुरू कर दी.

फिर तो मेरी किस किस तरह से चुदाई हुई क्या बताऊँ, कभी फुद्दी में कभी गांड में कभी दोनों जगह एक साथ।कभी लेटा कर, तो कभी खड़े कर के हर तरह से मैं उस रात चुदती रही।मेरे पूरे जिस्म में उन दोनों का वीर्य लगा हुआ था।

जब मैं सुबह उठी तो सुबह के 11 बज गए थे।हम तीनों नंगे ही सोये हुए थे.

कुछ देर बाद हम तीनों फ्रेश हुए और नाश्ता करने के बाद अभिजीत चला गया।मगर सुखविन्दर आज फिर रुकने वाले थे।

हम दोनों उस दोपहर साथ में नहाये और बाथरूम में ही चुदाई की।और रात में फिर 2 बार चुदाई हुई।और अगली सुबह सुखविन्दर चले गए।

मगर तब से जो सिलसिला शुरू हुआ है वो आज भी जारी है। अक्सर ही मेरे पति कही न कहीं बाहर जाते है और हम दोनों चुदाई का मजा लेते हैं।अब मेरी बेटी है मगर हम दोनों किसी न किसी तरह अपनी प्यास बुझा लेते हैं।

दोस्तो, सुखविन्दर के अलावा भी मैंने कई लोगों से सेक्स किया. वो सब कहानी भी आप लोगों तक पहुँचाऊँगी. मेरी अगली कहानी का इन्तजार ज़रूर करियेगा क्योंकि उसमें आपको पता लगेगा कि जो मेरी पड़ोस की लड़की थी नेहा … वो हम दोनों के साथ कैसे शामिल हो गई।यह एक इत्तेफाक ही था मगर सुखविन्दर ने नेहा की भी चुदाई कर दी।यह कहानी आप जल्दी ही पढ़ेंगे.

आपकी मुस्कानsupport@mohakkisse.com

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शहर में जिस्म की आग बुझाई

कुल भाग: 4
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पाठकों की राय

1 टिप्पणी

प्राची पीयूष

3 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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