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Group Sex Story • पठन समय: 7 मिनट • पढ़ा गया: 413 बार

जन्म दिन का तोहफ़ा-3

रवीश सिंह

08 Jun 2022 को प्रकाशित

जन्म दिन का तोहफ़ा-3
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दोस्तो, मैं अपनी क्लाइंट लिंडा के कहने पर मैं उसकी मित्र मीरा के जन्मदिन का तोहफ़ा बन शहर से दूर एक फार्म हाउस पर था। रात को मीरा को चांदनी रात में और अब कनिका को खुले में चोद चुका था।

जब मैं नंगी कनिका को उठा कर अन्दर ले गया तो अन्दर का माहौल देख कर मैं दंग रह गया।

अन्दर लिंडा और मीरा सिर्फ पेंटी पहने सिगरेट और शराब पीते हुए नाश्ता कर रही थी और वहाँ एक विदेशी मर्द भी था उसे देख कनिका तपाक से मेरी गोद से उतरी और भाग कर उस आदमी के गले लग गई और मीरा और उस मर्द के बीच वैसे ही खड़ी हो बतियाने लगी।

लिंडा को जरुरत तो नहीं थी फिर भी उसने बताया कि डेव दरसल उन तीनों के कॉलेज का मित्र था जो इंग्लैंड से मीरा को बर्थडे की बधाई देने आया था- ‘हम सब कॉलेज के न्यूडस् (नग्न) क्लब के सदस्य है और सदस्य गोआ पहुँच रहे हैं इसलिए हम सब गोआ निकल रहे हैं।’

“तो तुम अभी चुद कर आई हो?” डेविड ने कनिका के चूतड़ अपनी मुट्ठी में भींचते हुए पूछा।

हाँ में सर हिलाते हुए उसने झुक कर डेव को चुम्बन जड़ प्रिया। झुकते ही उसकी चूत और मेरा वीर्य निकालती गांड मीरा की ओर खुल गई। मीरा ने मौके का फायदा उठाते हुए कनिका की चूत और गांड चाट ली। सब उसकी इस हरकत पर हंस पड़े, सिवाए मेरे।

लिंडा मुझे अपने कमरे में ले गई और बोली, “डेव ने हमें सरप्राइज प्रिया है इसलिए प्रोग्राम में थोड़ा बदलाव है। हम तीनों डेव के साथ जा रही है। मेरी कार यहीं है तुम लेकर निकल जाओ। मुम्बई आकर जब मैं फ़ोन करूँ तब जहाँ बोलू, कार छोड़ देना और कहना कि तुम गैराज से आये हो कार ठीक करा के। और ये कुछ पैसे रख लो बाकी हिसाब मैं रिया से कर लूँगी।”

थोड़ी ही देर में तीनों देवियाँ डेविड उर्फ़ डेव के साथ फुर्र हो गई। मैं भी सामान लेने मुड़ा तो पीछे केअर टेकर की पत्नी को खड़ा पाया। उसका नाम कमली था, कमली ने कहा- आप तो खाना खाकर जाइए, क्योंकि मैंने सभी के लिये खाना बनाना शुरू कर प्रिया था।

“कोई बात नहीं तू और तेरा पति तो है?” मैंने कहा।

“ना वो तो अब रात को ही आएगा, दारु पीकर !” कमली रुँआसी होकर बोली।

“कोई ना, मैं हूँ ना तेरे मुर्गे खाने को !” मैंने उसके चूचों को घूरते हुए कहा।

कमली इशारा समझ गई और अपने वक्षों को देखते हुए बोली, “ये नहीं, वो मुर्गे जो तन्दूर में डाले हैं…”

“… वैसे साहब आपका मस्त है !” कमली ने बात पूरी की।

मेरी समझ में आ गया कि जब तक कमली मुझे साहब समझेगी, दूरी बनाये रखेगी। बात आगे बढ़ाने के लिए मैंने कहा, “साहब नहीं हूँ रे ! वो तो मेम लोगों की सेवा करवाने के लिए साथ ले आई।”

“वैसे कैसी सेवा, मैं सब जानती हूँ, कभी साहब किसी को लाते हैं, कभी मेमसाहब किसी को, यह तो यहाँ चलता ही रहता है, पैसे वालों के चोचले हैं।” कमली सहज होकर बोली।

“तू सब देख कर गर्म नहीं होती है?”

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“मज़ा तो आता है, पर पति से ही काम चलना पड़ता है। वो हरामी भी दारु पी कर ढीला पड़ जाता है।” कमली शरमाते हुए बोली और खाना देखने चली गई।

मैं भी नाश्ता कर निकलने की सोच रहा था पर कमली की बातें याद आ गई “खाना खा के चले जाना… आपका मस्त है !” और बार बार उसके बड़े बड़े काले वक्ष-उभारों को देखने की उत्सुकता हो रही थी।

थोड़ी देर सिगरेट पी घर के पिछवाड़े चला गया तो देखा कमली चूल्हे पर चिकन पका रही है। उसकी साड़ी निचे बंदी होने के कारण गांड की दरार थोड़ी थोड़ी दिख रही थी। अपने पल्लू से पतीला उतार वो मुड़ी और मेरे पर नज़र पड़ी तो सकपका गई और पल्लू कंधे पर डालना भूल गई। उसके सफ़ेद ब्लाउज में सांवले मम्मे और काले निप्प्लों ने मेरे लंड को फुफकारने पर मजबूर कर प्रिया।

“तुम मेरे लंड के बारे में कुछ कह रही थी, तुमने कब देखा?” मैंने बेशर्मी से पूछा।

“अभी जब तुम कनिका मैडम के साथ झरने में थे !”

“पास से देखना है? छू के?” मैंने सवाल दागा।

कमली ने कोई जवाब नहीं प्रिया और नज़र झुका कर वहीं खड़ी रही। मैंने आगे बढ़ कर उसके मम्मे मसलने शुरू किये और फिर ब्लाउज खोल उन्हें चूमने लगा। कमली का हाथ भी मेरे बरमूडा पर चलने लगा तो मैंने अपना टी-शर्ट और बरमूडा उतार नंगा हो गया। कमली अब मेरे लौड़े को सहला कर बड़ा कर रही थी। मैंने उसकी साड़ी निकाल दी और ब्लाउज भी।

मैं कमली की मांसल जांघों को चूमने लगा तो कमली खटिया में कसमसाने लगी। मैंने उसके पेटीकोट और पेंटी को उतारा तो झाटों का घना जंगल था। ऐसे तो कमली के आर्म पिट्स में भी बाल थे पर झाटों का झुरमुट ज्यादा ही घना था।

कहाँ रात को और सवेरे चिकनी गुलाबी चूदें चाटी और चोदी और कहाँ यह जंगल। जो भी हो कमली की जवानी में एक ताजग़ी थी। मैं उसके लुभावने चुचे चूस रहा था तो उसने मेरा लंड पकड़ चूत पर लगा प्रिया।

“करो ना, खुजली हो रही है चूत रानी में !”

मेरे अनुमान से कहीं ज्यादा टाइट थी कमली की चूत। घुसते ही लंड को मज़ा आ गया। कमली की चिल्कारियों के बीच मैं पूरे जोर से चोद रहा था। लग रहा था कि खटिया ही टूट जायेगी। कमली भी उचक उचक कर चुदा रही थी। थोड़ी देर में कमली का पानी निकल गया पर मैं अभी भी कड़क था। थोड़ी देर बाद मेरा माल निकलने को हुआ तो चूत से निकाल झाटों में स्खलित हो गया।

कुछ देर उस पर पड़ा रहा फिर दोनों नहाये और साथ साथ खाना खाया। मैं मुम्बई के लिए रवाना हो गया।

कुछ घंटों में तीन चुदाई की पर कमली की चूत की कसावट बार बार उत्तेजित कर रही थी।

कहानी कैसी लगी, बताइये।

रवीश सिंह

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जन्म दिन का तोहफ़ा

कुल भाग: 3
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Hi friends, jaisa ki kahani ke pichle part mein maine aapko bataya ki kaise Lakhan ne lights off hote hi meri biwi ko kiss kiya, aur uske bobs pe laga cake khaaya. Ye story ka part 3 hai. Ab aage ki kahani ki aur badhte hai.

8 मिनट 570

पाठकों की राय

2 टिप्पणियां
ह

हरदेव सिंह

4 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

न

निखिल शर्मा

5 months ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

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