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Group Sex Story पठन समय: 23 मिनट पढ़ा गया: 874 बार

कमसिन जवानी की चुदाई के वो पन्द्रह दिन-6

वन्द्या

05 Nov 2023 को प्रकाशित

कमसिन जवानी की चुदाई के वो पन्द्रह दिन-6
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अब तक आपने पढ़ा था कि मैं एक मॉल में थी, मेरी चूत और गांड में उस मॉल के दो वर्कर लड़कों के लंड घुसे हुए थे. मैं उनके साथ मॉल के रेस्ट हाउस में चुदवा रही थी. वे लड़के मुझसे मौसी के यहां की शादी में आने की बात कर रहे थे, जिसमें वे अपने साथ एक या दो नीग्रो को लाने के लिए भी कह रहे थे.नीग्रो लोगों का लंड बहुत बड़ा और मोटा होता है. मुझे भी अपनी चूत और गांड में किसी विदेशी नीग्रो के लंड को लेने की तलब मचने लगी थी.अब आगे …

हिमांशु मेरे दोनों दूध पकड़ के कस के चोदने लगा. इतने में हरीश बोला- यार अब थोड़ा पोजीशन बदल लें … तू हिमांशु पीछे आजा और गांड में डाल ले … वन्द्या की गांड बहुत मस्त है. मैं भी आगे से पेल कर इसकी चूत की चुदाई का मजा कर लूं.हिमांशु बोला- ठीक है आ जा.

फिर उन दोनों ने पोजिशन को बदला. हरीश नीचे लेट गया वो मुझसे बोला कि तू मेरे ऊपर आ जा और अपनी चूत मेरे लंड पर सैट करके बैठ जा.

मैं हरीश के ऊपर चढ़कर अपनी चूत में उसका लंड पकड़ कर बैठ गई. उसका खड़ा लंड फचाक से मेरी चूत में घुस गया. मेरे मुँह से हल्की सी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ की आवाज निकली. उसका पूरा लंड चूत में घुस गया था. मैं बोली- तेरा लंड बहुत मस्त है.

मैं हरीश के लंड पर उछलने लगी. मैं हरीश के ऊपर थी, जिससे उसकी छाती मेरे मम्मों से मिल गई, मेरे होंठ हरीश के होंठों से जुड़ गए. हरीश मेरा सर पकड़ कर होंठों को चूसने लगा. अब पीछे हिमांशु ने मेरे कूल्हों को फैला कर मेरी गांड में थूक लगाया और गांड में थोड़ी उंगली डाल कर अपना लंड फिट करके अन्दर जैसे ही डाला. मुझे फिर से थोड़ा दर्द हुआ. उसने ताकत लगाई, तो पूरा घुस गया. फिर वे दोनों मुझे चोदने लगे. अब मेरी चूत में हरीश का लंड और गांड में हिमांशु का लंड घुसा हुआ था.

दोनों अन्दर बाहर जम के मेरी चुदाई करने लगे.

हरीश बोला- वन्द्या तू सच सच बता कि क्या तेरी मम्मी भी चुदवाती है … तू अपनी मम्मी से जमा ले, मेरा एक दोस्त है, वो बहुत बड़े घर का लड़का है. उसे आंटियों, बड़ी उम्र की लुगाई चोदने का बड़ा चस्का ही. जैसे तेरी मम्मी है न … उसे ऐसी ही 40-45 साल की औरतें ही चाहिए. वह लड़कियों को नहीं चोदता. अगर तू अपनी मम्मी से उसकी बात जमा देगी, तो तुझे मैं मालामाल करवा दूंगा. साथ ही तेरी मम्मी को भी! जो तू बोलेगी, हो जाएगा. तू मेरा फोन नंबर ले जाना. जैसा भी हो मुझे बता देना. तुझे फुल टाइम रंडी बनना हो तो भी बताना, मैं तुझे कभी क्लाइंट की कमी नहीं होने दूंगा. वन्द्या तेरे पास मैं एक से एक रईस क्लाइंट भेजूंगा.

इतना कहकर हरीश मेरी चूत में बहुत तेजी से लंड डालकर मेरे निप्पल को चूसने लगा.हरीश बोला- तेरी चूत बहुत गर्म है … ऐसा क्यों?मैं बोली- मुझे नहीं पता है कि क्यों चूत इतनी ज्यादा गर्म रहती है. सभी कहते हैं कि तेरी चूत अन्दर बहुत गर्म रहती है … वो भी आग की तरह. उनको ऐसा लगता है कि उनका लंड जल जाएगा. पर मुझे कुछ नहीं पता, यह जो भी है नेचुरल है.

हिमांशु पीछे से मेरी गांड में बहुत जोर से अपने लंड को अन्दर बाहर लंड करने लगा था. वो मेरे बाल खींचकर मुझे गाली देने लगा.वो बोला- साली बहुत मस्त गांड है तेरी … गजब चुदवाती है भैन की लौड़ी … बहुत मजा आ गया तुझे चोद कर वन्द्या … मैं धन्य हो गया. अब मुझे लगता है कि तुझे अपनी बीवी बना लूं … तू जो कहेगी सो करूंगा.

मैंने उसे गाली देते सुना तो मैं भी गाली देते हुए बोली- अभी तो बनी ही हूं तेरी बीवी … भोसड़ी के चोद जितना दम हो … मादरचोद भोसड़ीवाले कुत्ते … फाड़ दे मेरी गांड … और जोर से धक्का लगा अपने लंड का … और तेजी से घुसा कमीने.वह भी गाली देने लगा, बोला- साली छिनाल की रंडी की लड़की … मादरचोदी बहुत मस्त है.

हिमांशु अपने लंड के मेरी गांड में जोर जोर से झटके मारने लगा और बोला- तेरी गांड में बहुत गर्मी है कुतिया … अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा. मेरा काम हो गया … आह ले!वो गर्म गर्म पिचकारी छोड़ने लगा. उसने मेरी गांड में लंड की मलाई को भर प्रिया. वो झड़ कर मुझसे लिपट गया और साथ ही हांफने लगा, दो-तीन मिनट वो मुझसे लिपटा रहा, फिर बोला- इसको चोदने में बहुत मजा आया … गजब की लड़की मिल गई यार … क्या किस्मत थी हम दोनों की.

फिर उसने मुझे छोड़कर वहीं से एक पेपर उठाया और अपना लंड पौंछ कर जल्दी से कपड़े पहन लिए.हिमांशु के उठते ही हरीश बोला- वन्द्या अब तू उठ जा, तुझे दूसरी पोजिशन में चोदता हूं.

वो हिमांशु से बोला- तू कुछ अच्छी अच्छी फोटो ले ले … इसकी फोटो दिखाकर इसका भी कुछ फायदा करवाएंगे. कुछ रईस धनी लोगों को इसके पास भेजेंगे, जिससे इसका शापिंग और मेकअप ज्वेलरी आदि का पैसा इसको खर्चे के लिए मिलता रहेगा.हिमांशु ने मोबाइल निकाला और मेरी अलग अलग पोज़ में नंगी फोटो लेने लगा.

फिर हरीश ने अब मुझे उल्टा करके लिटा प्रिया और बोला- अब मैं तेरी चूत का बाजा जमके बजाता हूं. देख मेरा स्टैमिना.उसने मेरी टांगों को पकड़ कर खींच लिया. वो मुझसे बोला कि थोड़ा उठकर कुतिया जैसी बन जा वन्द्या … तुझे डॉगी स्टाइल में चोदता हूं.

उसने मुझे कुतिया बना प्रिया और मेरे बाल पकड़ कर पीछे से मेरी चूत में अपना लंड जोर से घुसा प्रिया. लंड घुसा कर वो बोला- बहुत बड़ी कुतिया है तू वन्द्या … साली तू बहुत मादरचोदी है … आज तुझे रगड़ कर चोद देता हूं.मैं भी गाली देते हुए बोली- हां कुत्ते चोद मादरचोद … जितना दम हो चोद मुझे … भैन के लंड चोद चोद के फाड़ दे मेरी चूत … आह मैं बहुत प्यासी हूं.

अब मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. हरीश मुझे जमके चोदने लगा. वो रगड़ रगड़ के लंड चूत के अन्दर बाहर करने लगा. उसने पीछे से मेरे दूध पकड़ कर दबा दिए.वो बोला- तेरी चूत में बहुत गर्मी है वन्द्या … अब मेरा काम हो गया. जल्दी बोल लंड रस कहां लेगी?मैं बोली- साले अभी मत झड़ना मेरा काम नहीं हुआ … मैं फिर अधूरी रह जाऊंगी … मुझसे कुछ बर्दाश्त नहीं हो रहा है. हरीश तू तो बोल रहा था कि तेरा बहुत स्टेमिना है मादरचोद … और मुझे पूरा संतुष्ट करोगे … तो अब क्या हुआ?

परन्तु मेरे कहने का कोई असर नहीं पड़ा. हरीश ने मेरी चूत में अपना गर्म गर्म लंड रस भर प्रिया और मेरे ऊपर चढ़ कर लिपट गया.वो हांफता हुआ बोला- आह्ह … मुझे जन्नत मिल गई … वन्द्या तू बहुत सेक्सी है … तेरी प्यास बुझाने के लिए कोई विदेशी ही चाहिए … इंडियन कल्चर से तू अलग है वन्द्या … तू बहुत मस्त माल है.लंड से फ्री होकर हरीश अपना काम करके उठ गया.

अब मुझसे बिल्कुल नहीं रहा जा रहा था. मैं हरीश से बोली- प्लीज बाहर से किसी को भेज दो … वो आए और मुझे चोद दे … मुझे जम के चुदवा दो … जल्दी से भेजो किसी को … वो मेरी आग बुझा दे. मैं चुदास से तड़प रही हूं साले … मुझे अभी चुदवाना है … किसी को भी भेज दो … नहीं तो मैं ऐसे ही तड़पती रहूंगी. जब अभी मैं यहां आई थी, तो दो-तीन लोगों ने मेरी थोड़ी थोड़ी चुदाई की थी, पर किसी ने मेरी हालत को नहीं समझा. सबने मुझे अधूरा छोड़ प्रिया. हरीश तुम ऐसा मत करो. जल्दी से किसी को भेजो.तब हरीश बोला- सॉरी यार अभी तो कुछ नहीं हो सकता … हम दोनों की नौकरी चली जाएगी … प्लीज अभी मत दबाव बनाओ … हम तेरी इस कमी को पूरी करा देंगे. हम तेरे पैर पड़ते हैं.

वो साला मेरे पैर छूने लगा. हरीश बोला- हम किसी को बाहर जरा सा भी कहने जाएंगे तो बाहर गड़बड़ हो जाएगी. इधर कोई भी हमसे इतना नहीं खुला है. हमें तुरंत नौकरी से निकाल प्रिया जाएगा. प्लीज उठ जाओ वन्द्या.

वे मुझे पकड़कर उठाने लगे. बगल में वाशरूम था, वे बोले- अन्दर चली जाओ यार … सब धो लो जल्दी से … और यह नई ड्रेस पहन कर बाहर आ जाना. हम लोग बाहर जा रहे हैं.वो दोनों लड़के दोनों कपड़े पहन कर गेट खोल कर बाहर चले गए.

इधर मैं तड़पती रही और मजबूरीवश उठ कर वाशरूम में आ गई. इधर आकर मैंने अपने आगे पीछे सब धोया. अपनी चूत और गांड को पानी से डाल डाल कर अच्छे से साफ किया और फिर वह जो नई ड्रेस लाए थे. उसमें से मैंने एक रेड कलर की पैंटी पहनी और फिर स्कर्ट समीज और टॉप सहित पहन लिया. वे मुझे चुदाई की गिफ्ट दे गए थे. सच में बहुत ही अच्छी ड्रेस थी. इसके अलावा दो पैंटी भी थीं. मैं अपने पुराने कपड़ों को लपेट कर बाहर आ गई.

अभी भी मेरी चूत में बहुत आग लगी थी. मैं बेहद चुदासी थी. उधर जो भी आदमी दिखता, मैं बस उसकी पेंट के जिप तरफ देखती, पर किसी ने कुछ नहीं समझा. जब मैं बाहर आई तो मम्मी ने बोला- आ गई … चल सोनू तू भी कपड़े पसंद कर ले.

मेरा मन नहीं कर रहा था. मैं बोली- तुम ही देख लो, जो भी मेरे लिए देखना है.तब उन्होंने 4-5 लहंगे निकाले. उनमें से दो को मैंने पसंद किया.राज अंकल बोले- ये दोनों पैक कर दो.

इतने में वहां पर ठाकुर साहेब आ गए. वे मुझे देखने लगे. देख कर बोले- वन्द्या तुमने अपने लिए ले लिया?मैं बोली- हां ले लिया … पर अभी मेरा मूड नहीं है.वह मेरे पास आकर कान में बोले- मेरे दो फ्रेंड तुझे देखने के लिए बाहर खड़े हैं.

ठाकुर साहब राज अंकल को बोले- तुम और शॉपिंग कर लो. फिर मेरी मम्मी की ओर इशारा करके बोले- उनको भी मेरी तरफ से 4 साड़ियां और दिला दो, तब तक मैं वन्द्या को कुछ नाश्ता करा देता हूं.मम्मी ने जैसे ही सुना कि चार साड़ी और ले लो. बस ये सुनते ही मम्मी भी खुश हो गई थीं. वे बोलीं- जा सोनू अंकल के साथ चली जा, कुछ खा पी ले. मैं अभी आती हूं.

मेरी मम्मी बहुत लालची हैं. उन्होंने सोचा कि जब कोई और दिला रहा है तो क्यों न कुछ साड़ियां और ले ही लूं.

मैं ठाकुर अंकल की तरफ देखने लगी. मैं अभी भी मदहोश थी. मैं नीचे चूत की आग से बहुत प्यासी थी, तो उनकी तरफ देखने लगी.वे मेरी चुदास समझ गए और बोले- आजा तुम्हें कुछ खिला लाता हूं.

मैं उनके साथ शॉप से बाहर आई, तो देखा कि एक फॉर्चूनर खड़ी थी. राजा अंकल मुझे उधर मुझे ले गए. जो साहब फॉर्च्यूनर में बैठे थे, उनको ठाकुर साहब ने कुछ कान में बोला और वह मेरी तरफ एकटक देखने लगे.ठाकुर साहब ने मुझसे कहा- वन्द्या तू इस गाड़ी में बैठ जा … मैं तेरा नाश्ता यहीं भेज रहा हूं.

गाड़ी का गेट खुला था. मैं बिना सोचे अन्दर जा कर बीच वाली सीट में बैठ गई. पीछे उस सीट में दो बहुत पहलवान की तरह दिखने वाले रईस धनी व्यक्ति बैठे हुए थे. उनकी उम्र लगभग 45 से 50 साल के बीच थी. वे दोनों मुझे वासना से देखने लगे.

फिर एक ने कहा- यार, बहुत ही जबरदस्त माल है … पर बहुत छोटी लग रही है.दूसरा बोला- तुझे इससे क्या करना है. तू तो माल देख.

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उन दोनों ने अपना अपना परिचय मुझे प्रिया. एक कुर्ता पजामा में थे, उन्होंने अपना नाम अनिल सिंह बताया और जो सफारी सूट में थे, उन्होंने अपना नाम महेश गुप्ता बताया.उन्होंने मुझसे मेरा नाम पूछा कि तुम्हारा क्या नाम है?मैंने अपना नाम बताया कि मैं वन्द्या हूं.वो बोले- इस लाइन में कब से हो?मैं बोली- अभी बिल्कुल नई हूं … एकदम फ्रेश हूं.

उन्होंने ड्राइवर को कहा कि गाड़ी थोड़ा आगे मॉल के आगे ले लो, जहां एकांत सा हो.

उधर थोड़ा दो-चार मिनट बात करके परिचय ले कर, वे मुझसे बोले कि तुम्हें मिलने से पहले देखना चाहते थे, तो देख लिया है. अगर कहो तो दो-चार मिनट आगे चल कर ‘ठीक से …’ देख लें, कोई दिक्कत तो नहीं है. तुम्हें भी कुछ पूछना हो, तो पूछ लेना.मैंने कहा- मुझे कोई दिक्कत नहीं है.

उनका ड्राइवर गाड़ी वहां से करीब 200 मीटर आगे ले गया. वहां कुछ पेड़ लगे थे … खाली प्लॉट जैसा बना था. उधर लाइट नहीं थी. उसने वहीं ले जाकर गाड़ी को लगा प्रिया.

तब अनिल सिंह ने ड्राइवर को बोला- तुम थोड़ा बाहर हो आओ, हम लोग जरा आराम से बात कर लें … वे ठाकुर भाई कुछ खाने का ले आएं तो बता देना.

ड्राइवर ने गाड़ी स्टार्ट रखी … क्योंकि एसी ऑन था. उसने गेट बंद किया और बाहर हो गया. ड्राइवर के नीचे उतरते ही महेश मुझसे बोला कि थोड़ा बीच में आ जाओ. उन्होंने मुझे बीच में बिठा लिया. फिर ठाकुर को फोन लगाया कि ठाकुर भाई हम लोग वन्द्या का ऊपर ऊपर से थोड़ा टेस्ट ले रहे हैं. कोई दिक्कत तो नहीं होगी. उन्होंने फोन को स्पीकर में किया हुआ था. तो उधर से मूछों वाले ठाकुर साब बोले कि अरे महेश भाई … थोड़ा नहीं पूरा टेस्ट कर लो … कोई दिक्कत नहीं है.

मुझे अजीब सा लगा कि इनको ये तो मुझसे पूछना चाहिए था और ये लोग ठाकुर से पूछ रहे हैं.महेश ने फोन में बोला- ठाकुर, कुछ अभी जितना पैसा देना हो तो बोलो, हम लोग दे देते हैं.ठाकुर साब बोले- अभी जो करना है करिए … बाद में इकट्ठा दे ले लेंगे. अपनी राज भाई से पूरी बात है.

इतना कहकर महेश ने फोन काट प्रिया. फोन रखते ही गाड़ी के अन्दर की एक लाइट जलाई और दोनों मुझे बकरे के जैसे देखने लगे.वो बोले- यार तू दिखती है बहुत छोटी उम्र की … पर बहुत ही खूबसूरत है. अभी यह नई ड्रेस ली है क्या?ये कहते हुए अनिल ने मेरे सीने में हाथ रख प्रिया. वो मेरे टॉप के ऊपर से ही दूधों पर हाथ फेरने लगे. मुझे थोड़ा संकोच सा लगा.मैंने कहा- कई महीने पहले ही मैंने अठारह पूरे कर लिए हैं.

तभी महेश ने सीधे मेरे गालों में किस करके मेरे होंठों में अपने होंठ रख दिए. उनकी सांसें मेरी सांसों से मिलने लगीं और मेरे जिस्म की गर्मी भी बढ़ने लगी.अनिल ने मुझसे बोला- तुम अपने पैर ऊपर सीट पर कर लो … हम लोग बस तुम्हें अच्छे से देखना चाहते हैं. तुम्हें हमारे साथ बहुत मजा आएगा.

फिर अनिल ने खुद से ही मेरे पैर पकड़ कर सीट में रख दिए. इसके बाद अनिल मेरी स्कर्ट को धीरे-धीरे ऊपर करने लगा. जैसे ही मेरी स्कर्ट जांघ तक पहुंची.वह जांघों को चूमने लगा और बोला- महेश भाई, ये लड़की बहुत चिकनी माल है.

उसने मेरे स्कर्ट को और ऊपर को जैसे ही चढ़ाया, तो उसको मेरी पैंटी दिखी. मेरी पैंटी में फूली हुई उसे वो जगह दिख गई … जहां अन्दर मेरी चूत थी. उसने सीधे वहां अपने होंठ रख दिए. होंठ रखते ही उसे गीला सा लगा तो बोला कि यार इसकी पेंटी तो गीली सी है, लगता है वन्द्या की चूत बह रही है. मतलब ये पहले से चुदासी है और चुदने ही आई है.

अब अनिल ने सीधे मेरे पैंटी के अन्दर चूत पर हाथ डाल प्रिया. सच में वहां मेरी चूत चिपचिपा रही थी.उसने मुझसे बोला- तू तो बहुत गर्म है … अभी मन है क्या तेरा?मैं कुछ नहीं बोली पर चुदने के लिए अन्दर से मैं बहुत पागल थी … क्योंकि मुझे उन दोनों चूतियों ने भी अधूरा चोद कर छोड़ प्रिया था.

महेश ने बोला- इसकी पेंटी उतार लेते हैं अपन इसके लिए दूसरी ला देंगे. ये गीली हो रही है.

अनिल ने सीधे कमर में मेरे पेंटी की इलास्टिक को हाथ से पकड़ा और खींच लिया. उसने मेरी नई पैंटी को नीचे करके उतार प्रिया और पीछे सीट की तरफ फेंक दी. फिर मेरी टांगें फैलाकर अपनी उंगली को मेरी चूत में रख कर उंगली अन्दर घुसा दी. उंगली अन्दर होते ही मैं उछल पड़ी.

अनिल बोला- यार इसकी चूत में तो आग लगी है … साली अन्दर से बहुत गर्म हो रही है … क्या करें?तब महेश बोला- कुछ नहीं यार अभी थोड़ा टाइम है … सीधे लंड डाल कर चोद दे.

महेश ने फिर से ठाकुर को फोन लगाया और बोला कि यार ठाकुर दादा … ये वन्द्या बहुत चुदासी है … बहुत गजब का माल लेकर आए हो तुम … हम क्या करें, इसे लेकर अपने बंगले में निकलें क्या? तुम लोग आ जाओगे?ठाकुर साब बोले- एक मिनट, मैं राज भाई से बात करता हूं … लाइन होल्ड रखना.

उन्होंने राज अंकल को आवाज देकर बुलाया और फोन राज को दे प्रिया.

महेश ने बोला- राज भाई, बहुत टॉप की आइटम लाए हो … धन्यवाद तुम्हारा. इस लड़की का भी हमारा लेने का बहुत मन कर रहा है, हम लोगों से भी इसको देखने के बाद से ही कंट्रोल नहीं हो रहा है. सच यही है, अब तुमसे झूठ क्या बोलना. हम इसे लेकर चले जाएं क्या? तुम लोग आ जाना.तो राज अंकल बोले- एक मिनट का टाइम दो … मैं बताता हूं, इसकी मम्मी साथ में हैं. उसको बोल दूं … फिर आप ले जाना. हम लोग आ जाएंगे.

राज अंकल ने फोन कट कर प्रिया और दो मिनट बाद फिर से उनका फोन आया. उधर से राज अंकल बोले- ठीक है महेश भाई, आप लोग निकल जाओ … मैंने इसकी मम्मी को बोल प्रिया कि वन्द्या को आराम करना है, उसकी तबीयत थोड़ी ठीक नहीं है. यहां ठाकुर साहब के दोस्त उनके भाई जैसे हैं, उनका बंगला भी है. वन्द्या को वहीं भेज दे रहा हूं. थोड़ा फ्रेश होकर आराम कर लेगी. तब तक हम लोग अच्छे से खरीददारी करके चलते हैं. तो इसकी मम्मी ने कह प्रिया है कि ठीक है जीजाजी, जैसा ठीक लगे. आपकी ही तो सब व्यवस्था है … उसको आराम करने दो. आज उसकी तबीयत थोड़ा ठीक मुझे भी नहीं लग रही है. महेश भाई कोई दिक्कत नहीं है, आप लोग निकल जाओ. हम आ जाएंगे.

महेश बोला- अनिल भाई, राज से ग्रीन सिग्नल मिल गया है. अब कोई दिक्कत नहीं है. चलो, ड्राइवर को बुला लो, अपन चलते हैं. उधर अपने नौकर को भी फोन करो कि बढ़िया वाली स्कॉच दारू चिकन और सब लेकर जल्दी पहुंच जाए.

अनिल सिंह ने वहीं से किसी को फोन किया कि जो जो तुम्हें बोला था, सब लेकर बंगले में पैक करा कर आ जाओ … और दो बॉटल की जगह दो और बढ़ा देना. कुछ लोग ज्यादा भी हो सकते हैं. किसी चीज की कमी नहीं पड़ना चाहिए. मुझे बोलना ना पड़े.

फिर अनिल ने एक फोन और लगाया. उसने महेश से पूछा कि महेश भाई बात हुई थी, अपनी अब्दुल मियां से … उसको भी बुला लें … वो भी अपना पार्टनर है.

महेश ने बोला- फिर अब्दुल और रमीज दोनों आएंगे, कह दो अगर खाली हों, तो आ जाएं … अपन ने पहले ही उनको बोल प्रिया था कि कनका से माल बुलाया है. शायद वो आ रही है … उसकी बड़ी तारीफ सुनी है. अगर वो आई, तो तुम्हें बुला लेंगे, अब न बताया और कल को उसे पता चलेगा ही, तो वो बोलेगा कि अकेले अकेले माल चख लिया, बताया भी नहीं. इसलिए एक बार बोल ही दो. वह जब भी कोई आइटम लाया है तो उसने अपने को भी पूछा है.

अनिल ने तुरंत फोन लगाया दो-तीन घंटी के बाद फोन उठा तो अनिल बोला- अब्दुल भाई आप और रमीज भाई दोनों आ जाओ … कनका से आने की जिसकी बात हुई थी … वह आइटम आ गई है.अब्दुल उधर से जो भी बोले हों, अनिल ने उत्तर में बोला- अरे फोटो भेजने की जरूरत नहीं अब्दुल भाई … आज तक अपन ने जितने भी आइटम बुलवाए हैं … उनमें से सबसे टॉप की है. तुमने आज तक ऐसी देखी भी नहीं होगी. फिर भी कह रहे हो तो फोटो भेज देते हैं.

फोन कट करके उसी मोबाइल से जल्दी से दो-तीन फोटो क्लिक की, वह भी मेरी चूत में उंगली डाले हुए … मैं तो पागल हो रही थी. अनिल ने उसे मेरी फोटो भेज दीं. फोटो भेजते ही उधर से फोन आ गया.

अनिल ने स्पीकर ऑन करके पूछा- कैसी लगी अब्दुल भाई?उधर से आवाज आई- यार यह तो कोहिनूर है, सब छोड़ कर मैं और रमीज आ रहे हैं. तुम लोग तो साले शुरू हो गए … बहुत जबरदस्त लौंडिया है … साली को देख कर ही कंट्रोल नहीं हो रहा है. यह तो कहीं से कहीं तक रंडी लगती ही नहीं है … यह तो अभी लिटिल माल है … पर गजब है.

इतना कहकर उसने फोन काट प्रिया.

इन पन्द्रह दिनों तक मेरी चुत की आग कैसे ठण्डी हुई, यह सब मैं आपको पूरे विस्तार से लिखूंगी.आपके कमेंट्स का इन्तजार रहेगाsupport@mohakkisse.comकहानी जारी है.

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11 मिनट 1,178

पाठकों की राय

3 टिप्पणियां

अंजलि शर्मा सेक्सी

1 month ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

शिल्पा पंजाब

2 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

बदनाम

2 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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