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Group Sex Story पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 1,189 बार

इन्दौर में दो लंड और तीन चुत का ग्रुप सेक्स-3

रवि स्मार्ट

30 Jun 2021 को प्रकाशित

इन्दौर में दो लंड और तीन चुत का ग्रुप सेक्स-3
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मैंने कहा- अगले राउंड में विनय आंचल की चुत चोदेगा और हम सभी देखेंगे!यह सुन कर आंचल बोली- क्यों मुझे मरवाने का इरादा है क्या, पता है मेरे पीछे इतना दर्द हो रहा है अभी तक!तभी विनय बोला- ओये मेरी जान, जब गांड मरवाने से नहीं मरी तो अब साली चुत में लंड लेने से क्या तेरी जान निकल जायेगी?तो आंचल बोली- अरे नहीं, वो बात नहीं!

उसकी बात सुन कर सारिका एकदम बोली- मादरचोद साली, गांड तो बड़ी उठा उठा कर मस्ती से चुदवा रही थी, अब क्या हो गया भोसड़ी की?आंचल फिर बोली- असल में बात यह है कि मैं रवि के साथ करना चाहती थी!

हम सब उसकी बात सुन कर खिलखिला कर हंस पड़े, मैंने कहा- अच्छा तो यह बात है, क्यों विनय क्या कहता है?वो फिर बोली- विनय से तो मैंने कर लिया, अब आपसे करवाने का इरादा था, बाकी आपकी इच्छा!

तभी अब तक चुप बैठी निशु बोल उठी- इसका मतलब मेरी जोड़ी विनय जी के साथ!अभी उसने अपनी बात पूरी भी नहीं की थी कि सारिका बीच में ही बोल पड़ी- हाँ यह सही रहेगा!

उसके बाद हम सभी कुछ देर के लिए बैड और सोफे पे बैठ कर रेस्ट करने लगे।जैसे कि मैंने बताया, हम सभी थक चुके थे तो निशु और सारिका हमारे लिए चाय और कुछ स्नेक्स ले आई।

हम कुछ देर तक रेस्ट करने के बाद हम अगले राउंड के लिए तैयार थे।

अब मेरी और आंचल की जोड़ी बनी और विनय और निशा की!आंचल बेशक मेरे साथ ही लुधियाना से आई थी परन्तु सेक्स हम बहुत दिनों के बाद कर रहे थे तो आंचल पहले से ही मेरे साथ एक बार करना चाहती थी।हम तो वैसे भी अब चार दिन यहीं रहने वाले थे तो और बहुत से मौके आने थे।

सारिका हम सभी का साथ देने लगी, सबसे पहले विनय ने निशु को गोद में उठाया और साथ पड़े सोफे पे पटक प्रिया, उसके बाद उसने निशु की चुत को अपने मुंह में लिया और उसको चूसते हुए उसकी चुत के दाने को दांतों में लेकर हल्के हल्के दबाने लगा।

निशा विनय की इस हरकत से फिर से उत्तेजित हो गई थी और सिसकारने लगी।

इधर मैं और आंचल एक दूसरे के होंठों को होंठों में लेकर चूस रहे थे। हम अपनी जीभ भी एक दूसरे के मुंह में डाल देते, हमें ऐसे बहुत मजा आ रहा था, मैं साथ साथ आंचल के मम्मों को भी दबा रहा था।

तभी हमें अचानक निशु के चीखने की आवाज सुनी- आआह… उई..हमने उधर देखा तो विनय ने निशु को घोड़ी बनाकर उसकी चुत में लंड डाल प्रिया था और दोनों मस्त होकर चुदाई करने लगे थे, जब विनय आगे को झटका लगाता तो निशु भी अपने चूतड़ पीछे को करके उसके शॉट का स्वागत करती और उसका साथ देती, साथ साथ निशु की सिसकारियां निकल रही थीं- उम्म्ह… अहह… हय… याह…

उन दोनों को देखकर मैंने आंचल को अपनी गोद में बिठाया और प्यार से उसकी चुत में लौड़ा डाल प्रिया, हम भी चुदाई में मग्न हो चुके थे। गोद में बिठा कर चुदाई करने से हमें मजा आ रहा था, क्योंकि एक तो उसके होंठ मेरे होंठो से मिल जाते थे, हम किस कर लेते थे, और दूसरा मैं आंचल की चूचियों को भी आसानी से चूस लेता था, मैं आंचल के चूतड़ों के नीचे हाथ लेजा कर उसकी गांड को पकड़ कर उसे ऊपर नीचे होने में साथ देता था।

हम धीरे धीरे चुदाई कर रहे थे, उसका पेड़ू मेरे पेड़ू से आकर जुड़ जाता और मेरे टट्टों के ऊपर तक लंड आंचल की चुत में चला जाता! आंचल को बहुत मजा आ रहा था, जब आंचल ऊपर को होती तो मेरा लंड बाहर होता तो फिर से वो बहुत तेजी से नीचे लंड पे गिरती तो हम दोनों को बहुत मजा आता।इस तरह हमारी चुदाई जोरों पर थी।

तभी मैंने देखा कि सारिका एक टक हम दोनों जोड़ों को चुदाई करते हुए देख रही है तो मैंने उसे देखते हुए कहा- उफ़ साली, कैसे लग रही हैं तुम्हारी बहनें चुदती हुईं… आह्ह्ह ले कुतिया चुद!

यह सुन कर सारिका बोली- मैं तो यह सोच रही हूँ कि बुलाया तो मैंने था रवि को… और भोसड़ी वालीं नम्बर पहले ये ले गईं।मैंने कहा- ओह आह साली, यह बात है, तो कोई न रात पूरी तुम्हारी ही है आह आह सी सी…मैं निशु को चोदता हुआ बोल रहा था।

सारिका फिर बोली- यह तो मुझे पता है, ये तो कुछ देर की ही मेहमान हैं, उसके बाद हमारी फाइनल कुश्ती होगी, वहां पता चलेगा कौन किस से जीतता है।

तभी विनय निशु को चोदता हुआ बोला- अरे कौन सी कुश्ती से जीतना है आह…इधर मैं आंचल को कभी ऊपर करता और कभी नीचे… जोर जोर से चोद रहा था, आंचल ने अपना एक मम्मा मेरे मुंह में दे प्रिया था, मैं उसकी निप्पल चूर रहा था, नीचे मेरे लंड आंचल की चुत के अंदर था।आंचल की चुत से थोड़ा थोड़ा पानी निकलने लगा था।

उधर विनय और निशा ने अपनी पोजिशन बदल ली थी, अब निशा लेटी हुई थी और विनय ऊपर से उसे चोद रहा था।मैंने भी आंचल की गांड से पकड़ा, थोड़ा ऊपर को उठाया और हल्के से उसकी चुत से बिना लंड निकाले उसे घुमा प्रिया जिससे आंचल की पीठ मेरी तरफ हो गई और मैंने पीछे से उसकी गांड को पकड कर हल्का सा एक झटका उसकी चुत में और लगाया।वो मजा ले रही थी, जोर जोर से सिसकारियाँ लेकर बोली- उन्ह आह साले चोद प्रिया, आह चोद जोर से आह उई…

यह सुनकर मुझे भी जोश आ गया, मैंने आंचल की दोनों टांगें अपने कन्धों पर रखीं और जोर जोर से उसकी चुत के अंदर लंड की ठोकर मारने लगा और आंचल सिसकाते हुए अपनी चुत में लग रहे झटकों का मजा लेने लगी। मैं जैसे ताबड़तोड़ आंचल की चुत चोद रहा था वैसे ही विनय भी निशु की चुदाई मेरे बराबर पूरी मस्ती से कर रहा था।

बस मैं आंचल को बैड पे चोद रहा था और निशु सोफे पे विनय से चुद रही थी।

मैंने जोर से झटका आंचल की चुत के अंदर लगाया और आंचल की चुत से उसकी कसमसाती गर्म जवानी की पिघलती धार ने मेरा लौड़ा भिगो प्रिया, वो बोली- उई आह आह सी सी चुद गई! चोद प्रिया मेरे यार… आह आह! चुत चुद गई! ऐसे ही और चोद दे राजा आई सी सी!

तभी मैंने और मस्त होकर उसकी चुत के अंदर जोर जोर से दो तीन झटके और लगाए और मैंने उकसाते हुए कहा- आई आह सी सी साली चुद कुतिया बहनचोद चुद चुद चुद मादरचोद! देख तेरी सहेली भी साथ चुद रही है तेरे यार से कुतिया! आह आह चुद भोसड़ी की… ले लौड़ा मेरा लौड़ा! मेरी रांड और ले…

आंचल की पूरी जवानी पिघल कर मेरे लौड़े पे बरस चुकी थी और मैं अभी भी अपने लौड़े की बरसात के इंतज़ार में था, मैंने पास में देखा कि निशु विनय से चुद चुकी थी, उसने विनय का लंड चुत से निकाल प्रिया था, विनय सोफे पे बैठा था और निशा को नीचे बिठा कर अपना लौड़ा निशु को चुसवा रहा था।निशा भी मस्ती से विनय का लंड जोर जोर से चूस रही थी और उसका रस निकालने की कोशिश में थी।

मैंने उन्हें देख कर चुद चुकी आंचल की चुत से अपना लंड निकाला उसे बाजू से पकड़ कर निशु के पास लेजा कर बैठा प्रिया, मैं खुद विनय के बराबर सोफे पे जाकर बैठ गया।

आंचल निशु के बराबर बैठ कर मेरा लौड़ा अपने मुंह में लेकर चूसने लगी।

आंचल का लंड चूसने का ढंग बहुत शानदार था क्योंकि वो लंड के छेद पे अपनी लार टपका टपका कर उसको चूस रही थी। ऐसे लंड चूसने से मेरी उत्तेजना बहुत बढ़ रही थी और हम दोनों मर्दों की सिसकारियाँ भी कमरे में गूंज रही थीं।

तभी निशु ने विनय के लंड को इतना जोर से चूसा कि विनय अपने आप को सम्भाल न पाया और उसकी जवानी का फव्वारा सीधा निशु के मुंह पर फ़ूट पड़ा और वो एक के बाद एक धार निशु के नाक, आँख, लिप्स और मुंह को भिगाता रहा।

उसे देखकर आंचल ने भी मेरे लंड पे अपने मुंह से जीभ से एक बड़ी सी लार टपकाई और उसे छेद पे जीभ से रगड़ प्रिया जिससे मेरे लौड़े ने भी आंचल की जीभ पे ही बरसात कर दी, आंचल ने तो अपने मुंह को बिल्कुल भी इधर उधर न किया बल्कि पूरा मुंह खोल कर मेरे लंड से टपक रहा रस अपने मुंह में ले लिया, मैंने उसके सर को पकड़ कर अपना पूरा लौड़ा उसके मुंह में डाल प्रिया और सर को पीछे से दबा प्रिया। जब तक मेरा पूरा लौड़ा आंचल के मुंह में खाली न हुआ, मैंने उसके सर को नहीं छोड़ा।

कुछ देर तक वहीं ऐसी ही स्थिति में रहने के बाद हम सभी अलग अलग हुए और आंचल और निशु दोनों सफाई के लिए वाशरूम की तरफ भाग गईं।विनय बोला- उफ़ यार, बहुत मजा आया!

हम भी उठ कर वाशरूम में अपनी सफाई कर के आये और अब हम सभी बहुत ज्यादा थक गये थे। हमें भूख भी बहुत लग चुकी थी। तो मैंने सारिका को बोला- डार्लिंग, बहुत भूख लगी है, कुछ खाने को दो!तो सारिका तुरंत बोली- ओये होए अब आ गई सारिका की याद? अब उनसे ही कहो जिनके सर जोड़ कर सोफे पे बैठे थे एक साथ!और हंसने लगी।

तभी निशा वहां आई, बोली- क्या हुआ?मैंने कहा- भूख लगी है यार! और आपकी यह सिस्टर कुछ खाने को नहीं दे रही!तो निशा बोली- अरे कोई बात नहीं, हम हैं न!

तभी फिर सारिका बोल उठी- हाँ हाँ ये मैडम है न, जो अभी कुछ देर पहले बड़ी मस्ती ले रही थी, साली बाहर से लेकर आ अगर कुछ खिलाना है, किचन से मत लेकर आना!

ऐसे हम सभी हंसी मजाक में मस्त हो गये और एक एक करके सभी फ्रेश हुए, नहा कर फ्री हो गए, हल्के कपड़े पहने।

तब तक सारिका, निशु और आंचल ने मिल कर खाना लगा प्रिया था।

खाना खाने के बाद हम सभी ने कुछ देर फिर रेस्ट की और टी वी देखा और उसके बाद हम फिर बातें करने लगे।

कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

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इन्दौर में दो लंड और तीन चुत का ग्रुप सेक्स

कुल भाग: 4
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पाठकों की राय

1 टिप्पणी

कुशाल सिंह

3 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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