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Hindi Sex Story पठन समय: 5 मिनट पढ़ा गया: 1,132 बार

गाँव की कुसुम और उसकी आपबीती-4

राहुल श्रीवास्तव

22 Sep 2013 को प्रकाशित

गाँव की कुसुम और उसकी आपबीती-4
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मुकेश जी ने कहा- मैं तुम्हारे लिए दवाई ला दूँगा, तुम खा लेना!मैंने पूछा- दवाई क्यों?मुकेश जी ने बताया- मेरे वीर्य से तुम गर्भ धारण कर सकती हो, इससे बचाव के लिए!मैं बोली- तो क्या? ठहर जाने दीजिए!

‘नहीं हम दोनों की उम्र में बहुत बड़ा फासला है और तुम्हारे सामने बहुत बड़ी जिंदगी है, मैं नहीं चाहता कि तुमको आगे की ज़िन्दगी में कोई परेशानी हो।’

मैं कुछ न बोल पाई..

पर वो कुछ दिन हम दोनों की ज़िन्दगी के अनमोल दिन थे…पिंकू को कुछ दिन की छुट्टी दे दी थी कि वो गांव हो आए।

मुकेश जी ने इन दिनों में सुबह शाम जब भी मौका मिला, मेरे साथ कई तरह से सम्बन्ध बनाये, कभी उल्टा कभी खड़ा करके तो कभी गोदी में तो कभी घोड़ी बना के हर तरह से शारीरिक सुख मुझे प्रिया।

मैं भी रोज़ उनकी बाँहों में अपना सब कुछ दे देती।घर में घुसते ही मैं उनसे लिपट जाती, उनके लंड को दबा देती, उनके सारे वस्त्र उतार देती, उनका लंड मुह में लेती।

एक बार तो उनका रस मुँह में भी ले लिया पर मुझे अच्छा नहीं लगा।

जब वो मेरी चूत चाटते तो मैं पागलों की तरह अपनी गर्दन इधर उधर करती, चादर को कस के पकड़ लेती, उनके बाल नोच लेती।फिर भी वो मेरी चूत को चाटते रहते!

कुल मिला कर मेरी चूत अब उनके लंड के बिना नहीं रह सकती थी।

अगर मुकेश जी तैयार होते तो मैं शादी भी कर लेती।

मुकेश जी में इस उम्र में भी वही जोश था जो आज मेरी उम्र के लोगों का होता है।

अगर इतनी साल बाद मैं देखूं तो सोचती हूँ कि हर लड़की को अपनी से दुगने उम्र के मर्द के साथ अपना पहला यौन सम्बन्ध बनाना चाहिए क्योंकि उसमें अनुभव होता है और स्टैमिना भी होता है..

लड़की के कौन सा अंग से कब और कैसे तड़पना है, उनको पता होता है।

इस बीच उनका बेटा राजेश किसी काम से भारत आया, वो 22 साल का बहुत हैंडसम लड़का था, बिल्कुल मुकेश जी के जैसा लम्बा, गोरा मस्सल वाला… गांव की भाषा में गबरू जवान!

पर शायद उसको देख कर मुकेश जी को अपनी भूल का अंदाज़ा हो गया कि मेरे साथ सम्बन्ध बना कर बहुत बड़ी गलती कर दी।वो उम्र में बड़े थे और मुझे समझ सकते थे, उन्होंने भी अपनी गलती सुधारने पहल की।

पहली कि मेरे से दूरी बना कर मुझे मेरे गाँव वापस भेज प्रिया।दूसरी… एक दिन वो और उनका बेटा मेरी नामौजूदगी में मेरे गाँव आये और मेरे पिता जी और मेरी माँ से काफी देर बात की।

रात जब मैं ऑफिस से घर आई तो माँ ने बताया कि मुकेश जी मेरा रिश्ता अपने बेटे के साथ करना चाह रहे हैं।

मैं तो सन्न रह गईं… बहुत गुस्सा आया पर मैंने माँ को कुछ नहीं बोला।

अगले दिन मैं उनसे मिली, तब उन्होंने मुझे बहुत समझाया और कहा कि आगे से वो मुझे उस नज़र से कभी नहीं देखेंगे…वो अपनी उस भूल के कारण मेरा भविष्य सुधारना चाहते हैं।

मुझे कुछ समझ में नहीं आया कि क्या करूँ पर मुकेश जी के बहुत समझाने और दुनिया के रीतिरिवाज़ समाज की बात समझने पर मैं मान गई।

करीब 6 महीने बाद राजेश की पढ़ाई के बाद उसकी वहीं जॉब लग गई…और मेरी शादी उसकी साथ हो गई…मैं अमेरिका आ गई..

मुकेश जी ने मेरे गांव के सारा कुछ बेच कर मेरे माता पिता को अपने साथ रख लिया।वे तीनों भारत में खुश हैं और मैं अमेरिका में खुश हूँ।

आशीष ने मुझे खूब प्यार प्रिया और सेक्स मे भी भरपूर मज़ा प्रिया और अभी भी दे रहे हैं।

मुकेश जी ने शादी के बाद सच में मुझे एक पिता सा प्यार प्रिया, कभी भी मुझे वैसी नज़र से देखा और न कभी मुझे यह महसूस होने प्रिया कि शादी से पहले क्या हुआ था।

एक बात और… मेरे दिलो दिमाग में कभी उस तरह के विचार मुकेश जी के लिए नहीं आए जैसे बीते दिनों में आए थे।

आज मेरा अपना परिवार है, दो प्यारे प्यारे बच्चे हैं.. हम साल में एक बार वे सब भारत से आते हैं और छुट्टियों में हम सब भारत जाते हैं।हम सब साथ में खूब एन्जॉय करते हैं।

पर कहीं न कहीं मेरे दिल में एक बोझ था जिसे मैंने विकास जी के माध्यम से आप से शेयर कर लिया।काफी सकून महसूस करती हूँ मैं आज!

अब आप सब बताओ कि मुकेश जी ने जो किया वो सही था या जो मैंने किया वो सही था, या सब कुछ गलत था?क्या यह मुकेश जी ने अपने बेटे के साथ दगा नहीं किया?

मैं अपनी पहचान आप सब को नहीं बता सकती तो आप अपने विचार और राय, कमेंट्स के द्वारा या फिर विकास जी के ईमेल पर भेज सकते है जो उनके द्वारा मुझे प्राप्त हो जाएंगे।

दोस्तो, यह थी कुसुम, अमेरिका से, की आप बीती!आपको कैसी लगी मुझे बताना न भूलें, आपकी इमेल्स का इंतज़ार रहेगा।support@mohakkisse.com

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श्रृंखला

कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

गाँव की कुसुम और उसकी आपबीती

कुल भाग: 4
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