Hum to Aapka Dudh Piyenge-1हैलो दोस्तो, मेरा नाम आर के सिंह है, मैं मुंबई से एक एक कॉल-बॉय हूँ और बहुत ही कामुक हूँ। मेरे लंड का आकार 7′ है।
अगर कोई लड़की या महिला चुदाई के लिए मुझे मुंबई के आस-पास या मुंबई से दूर अन्य शहरों में बुलाती है, तो भी मैं जाता हूँ।
मुझे सेक्स बहुत पसंद है इसलिए मैं बहुत ही हॉट हूँ, चुदाई में लड़कियों को पूरी संतुष्टि देने में मुझे महारत हासिल है।
ज्यादातर महिलायें मुझे घर से बाहर घूमने के बहाने बुलाती हैं और मैं उनको चोद कर पूरा मजा देता भी हूँ और खुद भी मजा लेता हूँ।
अब कहानी चालू करता हूँ।
मुझे एक महिला का ईमेल आया उसमें उसका नाम दिया लिखा था। उसकी उम्र 28 वर्ष की थी और वो अमदाबाद से थी।
उसने मुझसे मेरा मोबाइल नम्बर माँगा था, मैंने उसे अपना मोबाइल नम्बर दे प्रिया और उसने मुझे मैसेज किया।
दिया– आर यू आरके सिंह ?
तब मैंने उत्तर प्रिया- हाँ.. बोलिए दिया जी!
दिया– मुझे आपके साथ सेक्स करने की इच्छा है क्या आप मेरे साथ करना पसंद करेंगे?
मैं– हाँ, ज़रूर करूँगा दिया जी।
दिया– थैंक्स यार.. अब बताओ.. आप कब मुझसे मिल सकते हो और आप कहाँ से हो?
मैं– मैं मुंबई से हूँ और जब आप बुलाना चाहें मैं आ सकता हूँ।
दिया– क्या आप मुझे अपने लंड का फोटो ईमेल कर सकते हो?
मैं– हाँ हाँ.. ज़रूर ईमेल कर दूँगा, पर दिया जी फिर आपको भी अपना फोटो ईमेल करना होगा!
दिया– हाँ.. अभी ईमेल कर देती हूँ।
मैं– ओके जी.. तो मैं भी अभी ईमेल कर देता हूँ।
और मैंने अपने लंड के कुछ फोटो ईमेल कर दिए।
कुछ देर मैसेज फिर आया।
अबकी बार के मैसेज में वो बहुत खुल गई थी।
दिया– आरके सिंह.. मुझे आपका ईमेल मिल गया, बहुत ही मस्त लंड है.. आहह.. मज़ा आ जाएगा, वास्तव में आरके क्या मस्त लंड है.. मेरी चूत ने तो अभी से पानी छोड़ना चालू कर प्रिया है, जब घुसेगा तब तो क्या मज़ा आएगा, वॉऊ…
मैं– थैंक्स, आपने अपना फोटो ईमेल नहीं किया?दिया– आर के, मैंने अपना फोटो ईमेल कर प्रिया है, आप चैक करो।
मैं पुनः देखा.. उसका ईमेल आ गया था।
मैं– हाँ.. दिया जी आपका ईमेल मिल गया है, वॉऊ.. यार आप तो बहुत ही सुंदर हो.. आपकी चुदाई में तो बहुत मज़ा आएगा… सच में कहूँ तो मुझे 22 से 30 साल की महिला के साथ चुदाई करने में बहुत मज़ा आता है।
दिया– आरके सिंह.. अब बोलो अमदाबाद कब आओगे?
मैं- जब आप बुलाओ।
दिया- क्या आप शुक्रवार को आ सकते हैं?
मैं- हाँ हाँ, आ सकता हूँ पर कितने दिनों के लिए?
दिया- शुक्रवार से मंगलवार तक के लिए आना है और आपका चार्ज कितना है?
मैं- दिया जी मेरी फीस बहुत ही कम है, आप बस टिकट भेज दीजिए और 1500 रूपए दे देना।
दिया- बस 1500 रूपए और टिकेट..! मैं राजी हूँ और मैं आपको फ्लाइट के टिकट भेजती हूँ।
मैं- ओके जी.. तो मैं शुक्रवार को आ जाऊँगा, फ्लाइट से बहुत कम वक्त लगता है।
दिया- डन।
मैं- डन.. टिकट कब भेजोगी?
दिया- कल सुबह में.. सुबह दस बजे तुम मुझे फैक्स नम्बर देना। अब मुझे नींद आ रही है कल बात करेंगे, गुड-नाइट।
कालगर्ल को चोदा भोपाल के होटल में
मैं- गुड-नाइट दिया जी।
सुबह 9 बजे दिया जी का मैसेज आया।
दिया- गुड-मॉर्निंग, आरके.. मैंने टिकट का इंतजाम कर प्रिया है, फैक्स नम्बर दो।
मैं- बस पांच मिनट में देता हूँ।
फिर मैंने फैक्स नम्बर दे प्रिया।
दिया- मैंने फैक्स कर प्रिया है.. फैक्स मिला?
मैं- हाँ.. मिल गया दिया जी।
दिया- आरके डार्लिंग.. पक्का रहा.. शुक्रवार को आना है.. भूलना मत।
मैं- हाँ दिया जी मैं पक्का आऊँगा.. और वक्त पर आ जाऊँगा, पर अमदाबाद में आप कहाँ मिलोगी?
दिया- मैं अपना पता मैसेज करती हूँ.. वहाँ आ जाना, पास में ही है ज्यादा दूर नहीं है डियर।
मैं- ओके जी।
कुछ ही पलों में मुझे उनका पता मिल गया। फिर हमने रात को भी फोन से बात की और फिर मैंने शुक्रवार को 9 बजे को फ्लाइट पकड़ ली और अमदाबाद एक घंटे में ही पहुँच गया।
मैंने दिया को मैसेज किया- मैं अमदाबाद आ गया हूँ।
तो उन्होंने कहा- मैं घर पर इन्तजार कर रही हूँ, आप आ जाओ।
फिर मैंने बताए हुए पते पर पहुँच गया, वो एक फ्लैट था और मैं घर पर पहुँचते घन्टी बजा दी, एक मीनूर सी आवाज़ आई- रूको, मैं आ रही हूँ आरके डार्लिंग..
जैसे उन्हें पता था कि दरवाजे पर मैं ही हूँ।
फिर उन्होंने घर का दरवाजा खोला और कहा- आप आरके सिंह हैं ना?
मैंने कहा- हाँ दिया जी।
‘यात्रा कैसी रही?’
मैं- मस्त रही.. मैं ठीक वक्त पर आ गया… क्या घर में कोई नहीं है?
दिया- नहीं है, सब आउट ऑफ इंडिया रहते हैं मैं अकेली ही रहती हूँ जी।
मैं- ओह.. मुझे पता नहीं था, चलो अब आपका अकेलापन दूर हो जाएगा।
दिया- हा हा हा, आप जो आ गए हो।
दिया उस वक्त साड़ी पहने हुई थी.. हल्के नारंगी रंग की साड़ी में वो बहुत ही कामुक लग रही थी।
तब मैंने कहा- आप बहुत हॉट लग रही हो जी।
तब उन्होंने कहा- थैंक्स.. पर उस गर्मी को दूर करने के लिए ही तो आपको बुलाया है जी।
मैंने कहा- ओह हाँ..यह तो है।
फिर दिया ने कहा- आप थक चुके होंगे, मैं ज़रा पानी लेकर आती हूँ..
वो अन्दर जाने लगी और मैं दिया के पीछे चला गया, रसोई में पीछे से उसके मम्मों को पकड़ लिया और कहने लगा- पानी नहीं.. हम तो आपका दूध पिएँगे..
फिर मैं उसके मस्त मम्मों को दबाने लगा और ज़ोर-ज़ोर से मसलने लगा।
‘आआहह.. आरके आआह्ह्ह..’
फिर मैं उसके मम्मों को मसलता गया मसलता गया, करीबन 5 मिनट तक मसलने के बात पता चला कि वह बहुत गर्म हो गई थी और उसके कंठ से सिसकारी की आवाज़ निकल रही थी।
मैं अब भी उसके मम्मों को दबाता रहा, तभी उसने मेरे लंड पर हाथ रखा। मैंने जीन्स पहना था तो वो ऊपर से ही लंड को सहलाने लगी।कहानी अगले बाग़ में समाप्य।मुझे ईमेल करने के लिए लिखें।