हॉट X इंडियन गर्ल स्टोरी में मेरे पड़ोस में 2 लडकियां रहती थी. एक का बॉयफ्रेंड था, दूसरी घर वालों से डरती थी और थोड़ी शर्मीली थी. मगर वह भी सेक्स का मजा लेना चाहती थी.
दोस्तो, मैं अभय एक बार फिर से हाजिर हूँ, अपनी दूसरी सच्ची घटना के साथ।मेरी पिछली कहानीस्कूल गर्ल को कमरे में लाकर चोदाको पाठकों और पाठिकाओं ने खूब पसंद किया। खूब सारे मेल और कमेंट मुझे मिले।
इसके लिए तहेदिल से धन्यवाद।मैं अपनी कहानी में वही लिखता हूँ, जो मेरे वास्तविक अनुभव होते हैं।
मेरी कहानी थोड़ी बड़ी हो सकती है।पर यकीन मानिए, हर एक लम्हे को बहुत ही बारीकी से लिखा है, जिससे पढ़ने वाले पाठक और पाठिकाएँ पूरी तरह वासनामय हो जाएँ।
मैं अपने बारे में फिर से बता देता हूँ। मेरा नाम अभय है।उम्र 32 साल है। हल्का साँवला रंग का हूँ।मेरा बड़ा लड़कियों और औरतों की बुर फाड़ने को तैयार रहता है।
दोस्तो, अब हॉट X इंडियन गर्ल स्टोरी पर आते हैं। बात आज से 4 महीने पहले की है।
मुझे अपनी कंपनी के काम से कुछ महीनों के लिए प्रयागराज जाना पड़ा।
वहाँ मैं एक अपार्टमेंट में एक फ्लैट किराए पर लेकर रहने लगा और वहीं से अपना काम देखने लगा।
कुछ दिन बाद मेरे फ्लैट के सामने वाले फ्लैट में दो लड़कियाँ रहने के लिए आईं जो वहीं पास के एक कॉलेज में पढ़ती थीं।उनकी उम्र यही कोई 23 या 24 रही होगी।
एक दिन ऐसे ही बातों-बातों में पता चला कि एक का नाम वंदना है, जो बनारस से थी, दूसरी का नाम माधुरी, जो आगरा से थी।
थोड़े ही दिनों में हमारी अच्छी बातें होने लगीं।दोनों थर्ड ईयर में थीं।
वंदना ने पूछा, आप क्या करते हैं? तो मैंने बताया कि मैं दिल्ली में एक कंपनी में काम करता हूँ और अभी कंपनी के काम से ही कुछ दिनों के लिए यहाँ आया हूँ।
तभी मुझे वंदना से पता चला कि माधुरी का कोई बॉयफ्रेंड है, जो उसे रोज लेने और छोड़ने आता था। इसलिए मेरी बात ज्यादातर वंदना से होती थी।
एक दिन वंदना से मेरी बात हो रही थी।तभी मैंने वंदना से पूछ लिया, “तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है, वंदना?”
पहले तो वो थोड़ा शरमाई, फिर “नहीं” बोलकर अपने रूम में चली गई।
वंदना के बारे में आप लोगों को थोड़ा बता देता हूँ।वह दिखने में मस्त सुंदर कन्या थी। गोरे बदन और भरे जिस्म की मालकिन थी।
मेरी आँखों ने जो उसके जिस्म का नाप लिया था, उसके हिसाब से उसकी चूचियाँ 34C की रही होंगी, उसकी कमर 30 और उसकी कसी हुई गांड 36 की लग रही थी।
लंबाई करीब 5 फीट 3 इंच के आसपास थी और बदन बिल्कुल भरा हुआ था।उसकी बातों से ऐसा लगा कि शायद अपने घर वालों के डर से उसने कोई बॉयफ्रेंड नहीं बनाया था।
चूँकि उनका लास्ट ईयर चल रहा था, इसलिए उनका कॉलेज जाना कम ही होता था।
माधुरी ज्यादातर बॉयफ्रेंड के साथ बाहर ही रहती थी।इसलिए वंदना रूम में अकेली ही होती थी।इस कारण मेरी बात वंदना से ज्यादा होने लगी।हम साथ में चाय भी पी लिया करते थे।
वंदना ज्यादातर सलवार और कमीज़ में ही रहती थी।
कमीज़ के ऊपर से उसकी चूचियों का उभार साफ-साफ दिखता था, जो काफी तने हुए और सख्त थे।
वंदना भी भाँप गई थी कि मैं उसकी उभरी हुई चूचियों को बहुत ध्यान से देखता हूँ।
एक दिन ऐसे ही दोपहर को दरवाजा खटखटाया तो माधुरी ने आकर दरवाजा खोला।मुझे देखते ही बोली, “आइए, अंदर चाय बनाती हूँ।”
मैं जैसे ही अंदर गया, मैंने देखा कि वंदना नहाकर बालकनी में अपने कपड़े फैला रही थी।वंदना ने शायद ध्यान नहीं प्रिया और कपड़े फैलाने लगी।
पूरे कपड़े फैलाने के बाद, अंत में उसने अपनी ब्रा को फैलाना शुरू किया, जो नीले रंग की थी और उस पर फूल बने हुए थे।
और सबसे अंत में उसने अपनी पैंटी फैलाना शुरू किया।
उसकी पैंटी देखते ही मेरे लंड में हलचल होने लगी।उसकी पैंटी का रंग लाल था, जिसके ऊपर फूल बने हुए थे।
जैसे ही उसने अपनी पैंटी फैलाई, उसकी बुर की साइड वाला भाग बिल्कुल मेरे सामने आ गया, जो थोड़ा सा सफेद हो गया था।जो मुझे ये बताने के लिए काफी था कि उसकी कामरस बुर से रोज रात को उसकी पैंटी गीली होती है।
वो अपनी पैंटी फैलाने के बाद जैसे ही अंदर आने के लिए मुड़ी, मुझे देखकर थोड़ी सहम गई।
मुझे देखते ही उसने अपनी नज़र अपनी ब्रा-पैंटी की तरफ घुमा ली।और वो समझ गई थी कि मैं उसकी ब्रा-पैंटी को बड़े ही ध्यान से देख रहा हूँ।वो बिना कुछ बोले तुरंत अंदर चली गई।
तभी थोड़ी देर में माधुरी चाय लेकर आ गई और मुझे चाय दी।
उसने वंदना को भी आवाज़ लगाई, “आओ, चाय पी लो।”शायद वो शर्म के मारे मेरे सामने नहीं आई।
मैं चाय पीकर जाने के लिए उठने लगा।तभी मेरी नज़र फिर से उसकी ब्रा-पैंटी के ऊपर चली गई, जो मुझे पागल बना रही थी।
शायद माधुरी भी भाँप गई कि मैं क्या देख रहा हूँ।वो भी शर्माकर कुछ नहीं बोली।
फिर मैं अपने रूम में आ गया।माधुरी ने भी दरवाजा बंद कर लिया।
यकीनन वो वंदना से जाकर बोली होगी, “अभय जी तुम्हारी ब्रा-पैंटी को बड़े ध्यान से देख रहे थे।”रूम में आने के बाद भी मुझे ऐसा लग रहा था मानो उसकी ब्रा-पैंटी मेरे सामने हों।और उसकी पैंटी की मादक खुशबू मुझे और उत्तेजित कर रही हो।
मेरा लंड भी पूरा खड़ा हो गया था।
दोस्तों, यहाँ आप लोगों को एक बात बताना चाहूँगा कि जब लड़की अपनी जवानी में कदम रख देती है, तब उनकी कामोत्तेजना चरम पर होती है।ऐसी कोई रात नहीं होती, जब वो अकेली हो और उसकी कामोत्तेजित बुर से उनकी पैंटी गीली न होती हो।
दोस्तो, जैसे हम मर्दों का लंड अपनी तरफ बुर को खींचने की कोशिश करता है, उससे कहीं ज्यादा एक जवान और कामोत्तेजित लड़की की बुर हमारे लंड को अपनी ओर खींचने की कोशिश करती है।जब मर्दों की वासनामय स्वर और कामोत्तेजित बातें उनकी कानों में गूँजती हैं, तो उनकी कामवासना कई गुना बढ़ जाती है। जो पाठिकाएँ फोन सेक्स की होंगी, वो मेरी बातें भलीभाँति समझ गई होंगी।
सेक्सी कहानी फ़ेसबुक फ्रेंड की चूत की चुदाई की
अगर किसी कामोत्तेजित लड़की या औरत को अपनी बाहों में लेकर उसके कान के लौ को चूसते हुए वासनामय स्वर में बोला जाए “लंड”, यकीन मानिए उनकी कामवासना 10 गुना बढ़ जाएगी।और उनकी चूत से कामरस की धार बहने लग जाएगी जो यकीनन उनकी पैंटी को गीली करने के लिए काफी होगी।
एक कामोत्तेजित लड़की की भी यही कामना होती है कि उसे भी कोई चुदाई में मंझा हुआ तजुर्बेदार मर्द मिले. जो उसके ही बिस्तर पर उसकी कामवासना को चरम पर ले जाए और पूरी रात उसकी बुर का भेदन अपने गरम लंड से करता रहे; अपनी गरम वीर्यधार से उसकी बुर भरता रहे, जिससे उसकी कामवासना चरमसुख की पराकाष्ठा को छू ले।
मुझे पूरा यकीन है कि पढ़ने वाली पाठिकाओं की पैंटी अब तक उनकी चूत रस से गीली हो चुकी होंगी।
दोस्तो, कहानी पर आते हैं। जैसे-तैसे मैंने अपने आप को कंट्रोल किया और अपने काम में बिजी हो गया।
शाम को अचानक मेरे रूम की बेल बजी।मैंने दरवाजा खोलकर देखा तो सामने वंदना खड़ी थी।
वो एक टी-शर्ट और सलवार में खड़ी थी।टी-शर्ट के ऊपर से उसकी चूचियों का उभार साफ-साफ दिख रहा था, जो काफी टाइट और तने हुए थे।और उसकी निप्पल का उभार भी टी-शर्ट के ऊपर से साफ-साफ नज़र आ रहा था।
जो मुझे ये समझने में बिल्कुल भी देर नहीं लगी कि वंदना अंदर से ब्रा नहीं पहनी है।मुझे देखकर वो थोड़ा शरमा रही थी।दोपहर में जो हुआ, शायद उसके कारण शरमा रही थी।
मैं भी खुद को संभालते हुए बोला, “बोलो वंदना, क्या हुआ?”वो बोली, “अभय जी, 2-3 प्याज़ चाहिए, क्या आपके पास हैं?”मैं बोला, “हाँ वंदना, हैं, अभी देता हूँ।”
मैंने वंदना को प्याज़ दिए.वंदना प्याज़ लेकर शरमाते हुए अपने रूम में चली गई।
मुझे पक्का यकीन था कि उसे माधुरी ने जानबूझकर मेरे पास भेजा था।क्योंकि दोपहर के वाकये को माधुरी भी भाँप गई थी।
खैर, ऐसे ही कुछ दिन बीते।
एक दिन मैंने वंदना से कहा, “मुझे अपना नंबर दे दो। कुछ काम रहा तो बोल प्रिया करेंगे एक-दूसरे को।”वंदना ने भी अपना नंबर दे प्रिया।
माधुरी ज्यादातर बाहर ही रहती थी, शाम को ही आती थी।इसलिए वंदना को मैसेज करके हाल-चाल ले लिया करता था।
अब मैं वंदना से थोड़ा पर्सनल भी कुछ पूछने लगा।जैसे, “वंदना, तुमने क्यों नहीं बनाया बॉयफ्रेंड?”वो बोली, “वो अपने घरवालों से बहुत डरती है। उसके पिताजी वीकेंड पर आते रहते हैं यहाँ। इसलिए वो थोड़ा डरती है कि कहीं कुछ प्रॉब्लम न हो जाए।”
मैं समझ गया कि वो अपने घर वालों से डरती है।
फिर वो मुझसे थोड़ा खुलकर बात करने लगी थी।
एक दिन वो बोली, “माधुरी के अब तक दो बॉयफ्रेंड हो चुके हैं। पूरी रात बिजी रहती है।”
वंदना भी 23 साल की जवान लड़की थी।उसके अंदर भी कामवासना फूट रही थी।वंदना की बातों से साफ-साफ पता चल रहा था।
अब हमारी बातें थोड़ी और निजी होने लगी थीं।वंदना को भी अब मज़ा आने लगा था।आखिर थी भी जवान कामुक कली।
वंदना घर में हमेशा सलवार के साथ-साथ टी-शर्ट या कमीज़ पहनती थी।जो उसके जिस्म पर काफी आकर्षक लगते थे।
अब मैं उसको मैसेज में सेक्सी बातें भी भेजने लगा था।एक दिन मैंने उसे मैसेज में एक शायरी भेजी, “हवा चलती है तो किवाड़ खुल जाता है, जवानी चढ़ती है तो सलवार खुल जाता है।”वंदना ये मैसेज पढ़कर गरम होने लगी थी क्योंकि वो समझ चुकी थी कि ये शायरी उसके ऊपर ही भेजी गई थी।
वो बोली, “अभय जी, प्लीज़ ऐसी शायरी मत भेजिए, बहुत अजीब-सी लगती है बदन में।”
मैंने उसकी वासना की आग और भड़काने के लिए अगले दिन फिर से भेजा, “जवानी के जोश में किवाड़ खोल के रखना, कपड़े फट जाएँगे सलवार खोल के रखना।”यकीनन ये शायरी उसकी वासना को और उत्तेजित करने लगी थी।
शायरी पढ़ने के बाद वंदना का मुझे कॉल आया, बोली, “प्लीज़ अभय जी, मत भेजिए, मुझे बहुत कुछ हो रहा है।”
वंदना पूरी तरह से वासनामय हो चुकी थी, जो उसकी वासना भरी आवाज़ से साफ-साफ पता चल रहा था।उसकी कामुकता भरी आवाज़ें मेरे अंदर भी उत्तेजना पैदा करने लगी थीं।
मैंने भी मौके का फायदा उठाया और वंदना से सेक्सी बातें करने लगा।वंदना न चाहते हुए भी मुझे जवाब दे रही थी।
अब मैं वंदना से उसके ही बारे में पूछने लगा, “वंदना, तुम्हें किस कलर की ब्रा-पैंटी पसंद हैं?”पहले तो वो हॉट X इंडियन गर्ल हिचकिचाई और मना करने लगी।
लेकिन मेरे ज़ोर देने पर बोली, “मुझे लाल और नीले कलर की ब्रा-पैंटी पसंद हैं।”ये सुनते ही मेरी उत्तेजना और बढ़ने लगी।
मैं वंदना को और उत्तेजित करने लगा।वो भी बिस्तर पर मचल रही थी, जो उसकी कामुक आवाज़ों से साफ-साफ पता चल रहा था।
और यकीनन उसकी बुर कामरस से उसकी पैंटी भींगाना शुरू कर प्रिया था।मैं वंदना को और उत्तेजित करते हुए वासनामय स्वर में पूछा, “वंदना, तुम्हारी चूची का साइज़ क्या है?”
मेरे मुँह से “चूची” स्वर सुनते ही वंदना के मुँह से “उफ अभय” निकल गया।
ये सुनते ही मैंने तुरंत पूछ लिया, “वंदना, तुम्हारी बुर से पानी आ रहा है क्या?”मेरा ये स्वर उसके कानों में इतनी उत्तेजना पैदा की कि उसके मुँह से एक जोर की “उफ्फ” निकली।
और वह झड़ने लगी, जो उसकी “आह आह्ह ह्ह आह” की आवाज़ें बता रही थीं।3 बार छुल्ल-छुल्ल करके उसकी बुर ने पानी छोड़ प्रिया था।
झड़ने के बाद वंदना रिलैक्स हो गई और बोली, “अभय, आज तुम्हारी बातों ने मुझे गीली होने पर मजबूर कर प्रिया।”
मैं बोला, “वंदना, सोचो बातों ने इतना असर दिखाया है, तो आगे क्या होने वाला है?”वंदना ये सुनते ही बोली, “ओह्ह्ह अभय, कुछ मत बोलो अभी प्लीज़।”मैं बोला, “वंदना, अब बता ही दो, क्या साइज़ हैं तुम्हारे उभारों का?”
वंदना के मुँह से “उफ अभय” के साथ निकला, “34C हैं।”जिसे सुनते ही मेरी कामोत्तेजना और बढ़ गई।
तभी माधुरी आ गई और दरवाजे की बेल बजा दी।वंदना कॉल काटकर चली गई।
कहानी 5 भागों में है.आप हॉट X इंडियन गर्ल स्टोरी पढ़कर हर भाग पर अपने विचार मुझे बताते रहेंsupport@mohakkisse.com
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