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भाभी की चुदाई पठन समय: 17 मिनट पढ़ा गया: 1,112 बार

दोस्त ने अपनी बीवी को चोदने को कहा- 1

रत्न दत्त

06 Sep 2025 को प्रकाशित

दोस्त ने अपनी बीवी को चोदने को कहा- 1
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हॉट वाइफ नो सेक्स कहानी में मेरे दोस्त की बीवी बहुत अच्छी थी. पर उसकी बीमारी के कारण वह बीवी को सेक्स नहीं दे पा रहा था. इसमें उसने मेरी मदद मांगी.

मेरा दोस्त मोहन असिटेंट के कारण अपनी बीवी के साथ सेक्स करने को असमर्थ हो गया था.उसने अपनी बीवी को संतुष्ट करने का प्रस्ताव मुझे प्रिया.

यह सेक्स कहानी मेरे एक पाठक अजय की है और यह उसके जीवन कहानी पर आधारित एक सच्ची घटना है.

आप अजय की इस हॉट वाइफ नो सेक्स कहानी को उसी की जुबानी सुनें.

मैं अजय, एक फैक्ट्री में काम करता था.उस फैक्ट्री में मेरी दोस्ती मोहन से हुई, हम दोनों इंजीनियर थे.

मोहन और मैं एक ही विभाग में थे, काम के सिलसिले में हमें फैक्ट्री में काफी चलना पड़ता था, हम दोनों शरीर से फिट थे.

उस समय हमारी उम्र 24 साल की थी.उसी दरमियान मोहन की शादी हुई, शादी के बाद मोहन बहुत खुश था.

उसकी बीवी अंजली छरहरे बदन की, गेंहुए रंगत की हंसमुख स्वभाव की महिला थी.हालांकि उसे बहुत खूबसूरत तो नहीं कहा जा सकता, पर वह काफी अच्छी दिखती थी.

मोहन मुझसे अक्सर कहता था कि अजय शादी कर ले, जिंदगी का असली मजा आएगा.

मुझे बार बार सर्दी खांसी होती थी, मैं एक होमियोपैथिक डॉक्टर बबिता से अपना इलाज करा रहा था.बबिता मुझे अच्छी लगने लगी, पर मैं उससे कहने में संकोच कर रहा था.

मैंने मोहन और अंजली भाभी को बबिता से मिलवाया, उन्हें भी बबिता अच्छी लगी.भाभी ने बबिता को मेरे मन की बात बताई, बबिता राजी हो गयी.

घर वालों की सम्मति से हमारी शादी हो गयी.बबिता के पिताजी साधारण नौकरी करते थे, उन पर काफी जिम्मेदारी थी.

मैंने और बबिता ने विवाह के पूर्व कभी संभोग नहीं किया था इसलिए शादी के बाद करीब एक साल हम यौन क्रीड़ा और संभोग का आनन्द लेते रहे.हम दोनों ही काफी खुश थे.

मेरा दो बेडरूम का फ्लैट था.हम अक्सर मोहन और अंजली भाभी के साथ हमारे घर में पार्टी करते.पार्टी में शराब पी जाती, सेक्स संबंधी चुटकुले भी चलते, हम सब साथ में बैठकर सेक्स वीडियो भी देखते.

फिर जब जोश आ जाता, तो हम दोनों अपनी अपनी बीवियों के साथ बेडरूम में चले जाते.मैं अंजली भाभी को अंजली कहने लगा. मोहन बबिता को उसके नाम से बुलाता.हम चारों दोस्त हो गए थे.

मोहन ने मुझे बताया कि वह और अंजली हर रोज सम्भोग करते हैं. छुट्टी के दिन तो सुबह ही शुरू हो जाते हैं. एक दूसरे की मालिश करते हैं, साथ नहाते हैं, बाथरूम में सेक्स करते हैं. जब अंजली उसके लंड की सवारी करती है और मोहन को चूचे चुसवाती है, तब चुदाई में बड़ा मजा आता है.

मोहन ने मुझे सेक्स के नए नए आसन बताये.मुख मैथुन के बारे में और गांड मारने के मजे के बारे में बताया कि वह अंजली की गांड भी मारता था, अंजली ख़ुशी से उसका साथ देती थी.

मैं इतना खुशकिस्मत नहीं था.

बबिता को सेक्स में मजा तो आता था पर वह सिर्फ मिसनरी पोजीशन में सेक्स करने देती थी.वह मुख मैथुन, लंड की सवारी, घोड़ी बनना, लंड की सवारी, गांड मरवाने को राजी नहीं थी.

एक साल बाद बबिता मुझसे कहने लगी कि मुझे अपनी आमदनी बढ़ानी चाहिए.उसने शादी के समय सोचा था कि इंजीनियर को मोटी तनख्वाह मिलती है.

मैं बबिता को समझाता, समय के साथ तनख्वाह बढ़ेगी.पर बबिता गरीबी में बड़ी हुई थी, उसे जल्दी अमीर बनना था.मैं दूसरी नौकरी ढूंढ़ने लगा, जिसमें तनख्वाह ज्यादा हो.

शादी के डेढ़ साल बाद मुझे दूसरे शहर में नौकरी मिली, तनख्वाह ज्यादा थी.हम दूसरे शहर चले गए.

बबिता ने वहां अपना होमियोपैथिक क्लिनिक शुरू किया.हमारी आमदनी बढ़ी, बबिता कुछ समय खुश रही, बाद में वह फिर से कम आमदनी की शिकायत करने लगी.

हमारे बीच झगड़े होने लगे.बबिता अक्सर देर रात क्लिनिक से वापस आती.

वह अलग सोने लगी और मुझे अपना बदन छूने नहीं देती.

एक दिन मैंने गुस्से में कह प्रिया कि कम समय में अमीर बनने के लिए रिश्वत लेनी पड़ेगी, चोरी करनी पड़ेगी. मैं यह सब नहीं करूँगा, इससे अच्छा है कि हम लोग तलाक ले लें, तुम कोई अमीर पति ढूंढ लो.

ऐसा मैंने इसलिए कहा क्योंकि मैंने देखा था कि रात को बबिता क्लिनिक से एक अधेड़ आदमी की कार में आती थी.

बबिता शायद इसी बात का ही इंतजार कर रही थी.उस ने कहा- हां तलाक ही ठीक रहेगा, मैंने अमीर पति ढूंढ लिया है.

हमने आपसी सहमति से तलाक की अर्जी की.हमें एक साल अलग रहना था.

बबिता अपने प्रेमी के साथ रहने चली गयी.एक साल बाद हमारा तलाक हो गया.

अब मेरा अपने दोस्त मोहन से भी संपर्क नहीं था और पत्नी से भी अलग हो गया था.

तलाक के बाद मेरा मन इस शहर में नहीं लग रहा था.मैंने अपनी पुरानी फैक्ट्री में अप्लाई किया, जहां मैं पहले काम करता था.मुझे नौकरी मिल गयी.

फैक्ट्री ज्वाइन करने के बाद मोहन मुझे नहीं दिखा.मैंने एक सहकर्मी से मोहन के बारे में पूछा.

सहकर्मी ने बताया कि मोहन को बस दुर्घटना में कमर में चोट लगी थी, वह वॉकर के सहारे चलता है.

वह एक साल बिस्तर पर था, थोड़ा ठीक हुआ तो कंपनी ने उसे काम पर ले लिया, पर छोटी पोस्ट पर पेपर वर्क के काम में लिया है.वह ज्यादा देर काम नहीं कर सकता.

वह मुझे मोहन के पास ले गया.

मोहन कमजोर और बीमार दिख रहा था.उसने फीकी मुस्कान के साथ मेरा स्वागत किया.उसने कहा- अंजली से मिलना हो तो तुमको मेरे घर आना होगा.

मैं शाम को उनके घर गया.अंजली ने मुस्कुरा कर मेरा स्वागत किया, पर लगा उसकी मुस्कराहट नकली हो.

वह दुबली हो गयी थी, परिस्थिति और गरीबी ने उसकी सुंदरता छीन ली थी.घर में सिलाई मशीन और कपड़े का अम्बार लगा था.

मोहन- मेरे एक्सीटेंट के बाद अंजली ने सिलाई करके घर चलाया, इलाज में जमा पैसे खत्म हो गए, अब उसका इलाज सरकारी अस्पताल में हो रहा है. कंपनी ने दया कर उसे नौकरी तो दी, पर कम तनख्वाह पर. तुम सुनाओ कैसे हो और भाभी किधर हैं?

मैंने बताया कि उससे मेरा तलाक हो गया है, मैं कंपनी के गेस्ट हाउस में रह रहा हूँ. पर 10 दिन में मुझे फ्लैट ढूढ़ना है.

अंजली चाय बनाने किचन में गयी, मोहन ने किचन में अंजली से कुछ बात की.उसने वापस आकर मेरी तरफ देखा.

मोहन- अजय तुम चाहो तो हमारे साथ रह सकते हो. हमारे घर में एक बेडरूम खाली है, घर का खाना मिलेगा. लगता है तलाक के बाद तुम दुखी हो गए हो.

मैंने सोचा कि मोहन के साथ रहूंगा तो मोहन को आर्थिक मदद भी दे सकता हूँ, मुझे अकेलापन भी नहीं लगेगा.

मैं- मुझे तुम्हारे साथ रहना अच्छा लगेगा, पर मैं फ्लैट का आधा भाड़ा और हम तीनों के खाने का खर्चा दूंगा, तब भी वह मेरे होटल के खाने से सस्ता होगा और मेरी तबियत भी ठीक रहेगी.

मेरे समझाने से मोहन अंजली राजी हो गए.मैं उसी शाम उनके घर रहने आ गया.

अंजली के बनाए खाने की मैं तारीफ करता और उसे व मोहन को खुश रखने की कोशिश करता.अंजली भी कोशिश करती कि मैं अपने तलाक को भूलकर खुश रहूं.

कुछ दिनों तक अंजली बुझी बुझी रही, पर धीरे धीरे खुश रहने लगी.

घर की आर्थिक अवस्था सुधरी पर मोहन उदास ही रहा.वह कहता- मैं अंजली के ऊपर बोझ बन गया हूँ, उसे खुश नहीं रख पा रहा हूँ.

छुट्टी के दिन मैं अंजली के साथ बाजार जाता, तो मुझे लगता मैं अपनी पत्नी के साथ बाजार गया हूँ.कोई परिचित मिलता तो अंजली कहती- ये मेरा देवर है.

मैं और अंजली मोहन को लेकर बड़े डॉक्टर के पास गए.उन्होंने कुछ कसरतें बताईं, पर यह भी कहा कि ठीक होने में काफी समय लगेगा.

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मैं अंजली के साथ मोहन को कसरत करवाता, कसरत कराते समय मेरा बदन अंजली के बदन को छूता, तो मुझे अच्छा लगता.

अंजली भी दूर हटने की कोशिश नहीं करती.

मोहन- अजय, अंजली को सिनेमा देखना बहुत अच्छा लगता है, मैं ज्यादा देर बैठ नहीं सकता. तुम अंजली को सिनेमा ले जाना.मैं राजी हो गया, अंजली भी ख़ुशी से राजी हो गयी.

मैं और अंजली सिनेमा देखने गए, मैंने सबसे पीछे वाली सीट बुक की थी.सिनेमा वयस्कों की थी और उसमें काफी रोमांटिक सीन थे.

हमारे बीच के चेयर के हैंड रेस्ट पर मेरा हाथ अंजली के हाथ को छू रहा था.अंजली ने हाथ नहीं हटाया.

मैंने हिम्मत कर अंजली का हाथ पकड़ लिया, उसने विरोध नहीं किया.

जब कोई सेक्स से भरा सीन आता, अंजली मेरा हाथ दबा देती, उसकी सांसें तेज हो जातीं.

हम जब वापस घर आए तो अंजली खुशी से चहक रही थी.मोहन ने उसे खुश देखकर मुझे धन्यवाद कहा.

मैं अंजली के प्रति यौन आकर्षण महसूस कर रहा था.मैं दुविधा में था कि यदि मैंने अंजली से शारीरिक संबंध बनाए, तो वह मोहन के साथ धोखा होगा.

मैं यह भी महसूस कर रहा था कि अंजली को भी यौन आनन्द की जरूरत है.उसी हफ्ते दशहरा निकला था और 15 दिन बाद दीवाली आने वाली थी.

मैं- हम तीनों इस बार दीवाली धूमधाम से मनाएंगे.अंजली तुरंत राजी हो गयी, मोहन ने हामी भरी.

मैं और अंजली दीवाली के लिए कपड़े आदि खरीदने गए, अंजली ने साड़ी खरीदते समय मेरी सलाह ली.हमने दीवाली मजे से मनाई.

अंजली पुराने दिनों की तरह खुश दिख रही थी.नयी लाल साड़ी में अंजली बहुत खूबसरत लग रही थी, मेरी नज़र उससे नहीं हट रही थी.

अंजली ने मेरा हाथ पकड़ कर फुलझड़ी जलाई.

दूसरे दिन मोहन बोला- अजय पुराने दिनों की तरह आज रात शराब पार्टी हो जाए?

दीवाली की छुट्टी खत्म होने में चार दिन बाकी थे.मैं व्हिस्की ले आया.

शाम को अंजली ने टेबल सजा दी और कहा- तुम दोनों पियो, मैं बाद में ज्वाइन करती हूँ … मुझे किचन में काम है.मोहन ने लार्ज पैग बनाए, हमने पहला पैग ख़त्म किया, एक ही पैग में अच्छा खासा नशा हो गया था.

मोहन- अंजली, पार्टी के बाद आइसक्रीम हो जाती तो और मजा आ जाता.अंजली- मैं लेकर आती हूँ, बस 15 मिनट लगेंगे.

अंजली के जाते ही मोहन ने अपने दिल की बात कहना शुरू कर दी.

मोहन- अजय मैंने अंजली को जानबूझ कर बाहर भेज प्रिया है. मुझे तुमसे जरूरी बात करनी है.मैं बोला- बिना संकोच कहो.

मोहन- तुम्हारे आने से अंजली 3 साल बाद खुश दिख रही है, तुमने उसे ख़ुशी दी. तुम्हें तो मालूम है कि मैं और अंजली कितना सेक्स एन्जॉय करते थे, पर मैं अब कमर के दर्द के कारण सेक्स करने में असमर्थ हूँ. अंजली सेक्स के लिए तरसती है.

यह कहकर मोहन मुझे अपने बेडरूम में ले गया.ड्रावर खोलकर उसने एक मोटी मोमबत्ती निकाली.

उसे मेरे हाथ में देकर उसने कहा कि जब अंजली को लगता है कि मैं सो गया हूँ, तब वह इससे अपनी कामवासना पूरी करने की कोशिश करती है.मैंने देखा कि मोमबत्ती में तेल लगा था.

मोहन- मेरा प्रस्ताव है कि तुम अंजली की सेक्स की जरूरत पूरी करो, अपनी पत्नी मानकर उसे शारीरिक सुख दो. जल्दी से हां कहो, अंजली आने ही वाली है.मैं- मोहन तुम क्या कह रहे हो, अंजली तुम्हारी पत्नी है?

मोहन- मेरा कर्तव्य है अंजली को खुश रखना. मैं उसे खुश नहीं रख पा रहा हूँ इसलिए निराश हूँ. तुम राजी हो जाओ तो मुझे निराशा से मुक्ति मिलेगी. डॉक्टर ने कहा है यदि मैं खुश और आशावादी रहूं, तो मेरी ठीक होने की संभावना ज्यादा है.

मैं- मैं राजी भी हो जाऊं, तो क्या अंजली राजी होगी? जब तुम ठीक हो जाओगे तब क्या होगा?

मोहन- मैं अंजली को समझाऊंगा. यदि मैं ठीक हो भी गया, तो अंजली हम दोनों की पत्नी होगी.मैंने हां कह प्रिया.

मोहन- अंजली आने के बाद हमारे साथ पीने बैठेगी. अंजली को झूठ बोलना नहीं आता, पीने के बाद वह अपने दिल की बात बता देती है. तुम एक पैग के बाद कहना तुम सोने जा रहे हो, ज्यादा चढ़ गयी है. खाना खाकर सोने चले जाना. मैं अंजली को और शराब पिलाकर उससे सेक्स की बात करूँगा.

मैं राजी हो गया और मैंने वैसा ही किया.

मैं अपने बेडरूम में अंधेरा करके लेटा था.अंजली बेडरूम में आयी, मैंने आंख बंद कर ली.

अंजली ने पास आकर देखा कि मैं सो गया हूँ … वह मुझे देख कर चली गयी.मुझे मोहन अंजली की बातें करने की आवाज़ आ रही थी, पर सारा मसला ठीक से सुनाई नहीं दे रहा था.मुझे नींद आ गयी.

दूसरे दिन मोहन ने बताया बहुत समझाने के बाद अंजली राजी हो गयी है.

चाय नाश्ते के समय मोहन ने मुझसे और अंजली से कहा- आज से तुम दोनों की नयी जिंदगी शुरू हो रही है, पति पत्नी की तरह एक बेडरूम में सोना.

शाम को मैंने अच्छे से शेविंग की झांट और कांख में बाल साफ़ किए.डिनर के बाद मोहन बोला- मैं सोने जा रहा हूँ, तुम दोनों को आल द बेस्ट.

अंजली ने मेरे बेडरूम में जाकर दरवाज़ा बंद कर प्रिया, थोड़ी देर बाद उसने दरवाज़ा खोला और मुझे अन्दर आने का इशारा किया.अंजली ने लाल साड़ी पहनी थी, जो मैंने दीवाली के लिए उसके लिए पसन्द की थी.मैंने अन्दर जाकर दरवाज़ा बंद कर लिया.

अंजली- मोहन ने तुम्हें मेरा दूसरा पति बना प्रिया, पर पत्नी वाली फीलिंग नहीं आ रही. तुम मेरी मांग में सिंदूर भरो तो मुझे लगेगा मैं तुम्हारी पत्नी हूँ.यह कहकर उसने सिंदूर की डिब्बी मुझे दे दी.

मेरा भी प्लान था कि अंजली से माला बदलकर शादी करूँगा, फिर सुहागरात मनाऊंगा.मैंने फूलों की दो माला और गुलाब की पखुड़ियां बेडरूम में लाकर रखी थीं.

हम दोनों ने माला बदली, मैंने अंजली की मांग में सिंदूर भरकर कहा- पलंग पर दुल्हन बनकर बैठो, हम दोनों सुहागरात मनाएंगे.मैंने गुलाब की पखुड़िया पलंग पर फैला दीं.

अंजली उत्साह के साथ पलंग पर घूँघट निकाल कर बैठ गई.मैंने उसका घूँघट उठाया, सोने की चेन भेंट की.

मैंने अंजली के मस्तक, आंख को चूमकर कहा कि मेरी दुल्हन बहुत सुंदर है.मैंने अंजली के होंठ चूमे, अंजली ने चुम्बन का जवाब चुम्बन से प्रिया.

मैंने अंजली को प्यार से लिटा प्रिया, उसकी गर्दन चूमते ब्लाउज के ऊपर से चूचे दबाने लगा.अंजली हल्की हल्की सिसकारी ले रही थी.

मैंने उसके ब्लाउज के बटन खोले, लाल ब्रा के बाहर निकले अंजली के चूचों की घाटी चूमने लगा.जब मैं ब्रा उतार रहा था, अंजली ने खुद ही ब्रा को उतार प्रिया.

अंजली के भरे गेहुंए चूचों पर भूरे रंग के निप्पल शानदार लग रहे थे.मैं एक चूचे को दबा रहा था, दूसरे को चूस रहा था.

अंजली शरारत से बोली- मेरे आधे कपड़े उतार दिए और खुद पूरे कपड़े पहने हो … यह नाइंसाफी है.मैं तुरंत अपने कपड़े उतार कर पूरा नंगा हो गया.

अंजली के बाकी कपड़े भी उतार कर उसे नंगी कर प्रिया.मैंने अंजली की जांघ पर हाथ फेरते उसकी चूत पर हाथ फेरा.

उसकी चूत एकदम चिकनी थी, लगा उसने आज ही चूत के बाल साफ किए हैं … चूत गीली थी.अंजली मेरे लंड को सहलाने लगी.

हम दोनों बैचैन थे, अंजली को 3 साल बाद सेक्स का मौका मिला था.मैंने भी 3 साल मुठ मारकर काम चलाया था.

दोस्तो, इस हॉट वाइफ नो सेक्स कहानी में अभी आगे बहुत रस बाकी है. प्लीज मेरे साथ बने रहें और अपने विचार मुझे मेरी मेल पर जरूर भेजें.मेल लिखते समय कृपया सेक्स कहानी के शीर्षक कर जिक्र अवश्य करें ताकि जबाव देने में सुविधा होsupport@mohakkisse.com

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दोस्त ने अपनी बीवी को चोदने को कहा

कुल भाग: 3
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Ye us samay ki baat hai, jab recently Bhaiya ki shaadi hui thi aur Bhabhi bhut sundar thi. Mai aa sabko batana chaahta hu , ki mere mann me aisa kuch bhi nahi tha, Bhabhi ke prati.

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Hi friends, this is the second part of my devar bhabhi sexy story. Humne saath me bath liya aur fir mene use kaha ki bhabhi khana bana lo. Fir ghadi me time dekha to raat ke 11:30 baj rahe the.

9 मिनट 817

पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

राजा गौतम

3 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

निखिल दहिया

3 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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