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Office Sex पठन समय: 17 मिनट पढ़ा गया: 1,278 बार

मराठी मुलगी चुद गई होटल में- 3

राहुल श्रीवास्तव

11 Oct 2023 को प्रकाशित

मराठी मुलगी चुद गई होटल में- 3
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हॉट चूत चुदाई हिंदी कहानी में पढ़ें कि मैंने कैसे अपनी सहयोगी लड़की के साथ ओरल सेक्स का मजा लेने के बाद चूत की चुदाई का असली सुख प्रिया।

दोस्तो, मैं मुंबई से विकास श्रीवास्तव आपको अपनी ऑफिस सहकर्मी मंजुला की चुदाई की कहानी बता रहा था।कहानी के दूसरे भागमराठी लड़की के साथ मुखमैथुन का मजामें आपने देखा कि कैसे मैंने मंजुला की चूत चाट चाटकर उसको स्खलित करवाकर परम सुख का अनुभव करवाया।उसने भी मेरे लंड को चूसकर मुझे कामसुख प्रिया।

अब आगे हॉट चूत चुदाई हिंदी कहानी:

मेरे स्खलन से लगा वीर्य हमने बाथरूम में शावर लेकर साफ किया।

शावर के गर्म पानी से हमारी खोई ऊर्जा वापस आ चुकी थी।मैंने बाहर आकर मंजुला को नंगी ही बेड पर धकेल प्रिया और खुद भी ऊपर कूद गया।

मंजुला- सर, ऐसे आपके सामने अच्छा नहीं लग रहा है, लाइट बंद कर दीजिए!मैं- अब कैसी शर्म! हम दोनों इतनी देर से लाइट में ही थे।मंजुला- सर प्लीज!

मैं- क्या सर सर लगा रखा है। कोई ऑफिस है क्या ये? सिर्फ विकास बुलाओ मुझे!मंजुला- विकास प्लीज, लाइट बंद कर दो।मैंने भी उसकी बात मान ली।

मैंने लाइट ऑफ करके डिम लाइट जलने दी। पूरा कमरा हल्की पीली रोशनी में डूब गया।उसका गोरा बदन पीले रंग में दमकने लगा।

मंजुला को मैंने बांहों में भर लिया और उसकी पीठ सहलाने लगा।

पीठ सहलाते सहलाते उसके चूतड़ों तक हाथ पहुंच गए। गोल गोल चूतड़ … एकदम पूरे मांस से भरे हुए।

मैंने उनको जोर से भींच प्रिया।मंजुला- आह्ह … विकास … आह्ह।

गांड की दरार में मैं उंगली डाल कर गांड के छेद तक पहुंच गया।

जैसे ही गांड के छेद को कुरेदा तो मंजुला उचक गई- उईईई … विकास … वहां नहीं।

इस पर मैंने उसके होंठों को आपने होंठों में कैद कर लिया।वो अब केवल गूं … गूं … की आवाज के साथ ही प्रतिक्रिया कर पा रही थी।

जब उसे लगा कि मैं उसके रोकने से नहीं रुकूंगा तो वो हथियार डालकर मेरा साथ देते हुए जोर से मेरे होंठों का रस खींचने लगी।

उसकी सांसों की गर्म हवा ने मेरे अंदर की वासना को हवा दी।मंजुला को मैंने खींचकर अपने ऊपर लिटा लिया।

अब स्थिति ये थी कि उसकी चूचियां मेरे सीने से दबी हुई थीं।उसके दोनों हाथ मेरे सिर के नीचे थे और हमारे होंठ आपस में जुड़े हुए थे।मेरे हाथ उसकी पीठ, चूतड़ों और गांड का मज़ा ले रहे थे।लण्ड सीधे चूत के द्वार पर था।

थोड़ी देर में मैंने मंजुला को वैसे ही उल्टा घुमा प्रिया।अब उसकी चूत मेरे होंठों के करीब थी, उसके होंठ मेरे लण्ड के पास थे।

मैंने उसके पैर को थोड़ा सा फैलाया और उसको थोड़ा अपने पास खींचा जिससे उसकी चूत बिल्कुल मेरे होंठों से चिपक गई।मैंने जीभ निकाली और चूत को नीचे से ऊपर तक चाट लिया।

चूत के लसलसे रस का कसैला स्वाद मेरे मुँह में घुल सा गया।

मंजुला ने जोर से सिसकारी ली- आह्हह … स्स्स्स … उफ्फ … विकास … हां … आह्ह … ऐसे ही … स्स्स … अच्छा लग रहा है।अभी तक मंजुला को समझ में नहीं आया था कि उसको लण्ड भी चूसना है।

तो मैंने ही एक पैर को फ्री करके उसके सिर को लण्ड पर दबा प्रिया।शायद उसने भी इशारा समझा और लण्ड को पकड़ लिया।

उसने उत्तेजनावश इतनी जोर से दबाया कि मैं चीख सा पड़ा- आई ईईईई … आअह्ह मंजू … आराम से!

मंजुला ने लण्ड का टोपा खोला और मेरे गुलाबी सुपारे को अपनी जीभ से गीला करने लगी।मैं सिसकार उठा- आह्ह … स्स्स … पूरा चूस लो यार … पूरा मुंह में ले लो।

इस वक्त मैं वासना के समंदर में गोते लगा रहा था।मैं उसके चूतड़ों को और फैलाकर उसकी गांड के छेद के आसपास जीभ को घुमाने लगा।

उसकी गांड का छेद उत्तेज़ना में खुल-बंद हो रहा था।चूत से निकलता रस मेरी ठोड़ी से होता हुआ गर्दन तक जा रहा था।बीच-बीच में मंजुला लण्ड मुंह से निकाल कर सिसकारने लगती थी।

कुछ ही देर में उसका जिस्म थरथराने लगा, अकड़ने लगा।मुझे समझ में आने लगा कि ये अब झड़ जाएगी, जो मैं नहीं चाहता था। इसलिए मैंने उसे अपने नीचे ले लिया और उसकी चूत पर बैठ कर उसकी चूचियां मसलने लगा।

उसकी चूत रस से भीगी होने के कारण अब मेरे लण्ड को भी चिकना कर रही थी।वो लगातार सिसकारते हुए कसमसा रही थी, उसकी चूचियां लाल होने लगी थीं।

फिर मैंने झुक कर उसकी चूचियों को मुंह में भर लिया और निप्पलों पर अंदर ही अंदर जीभ फिराने लगा।मैं जितनी जोर से उसकी चूचियां चूस रहा था, उतनी ही तेज़ वो सिसकारी भर रही थी- आह्ह … आईईई … आराम से विकास … दर्द हो रहा है … आह्ह … स्स्स!

मैंने देखा कि उसके हाथ अब मेरे लंड को टटोलने लगे।वो सिसकारते हुए बोली- आह्ह … बस करो … विकास अब ये गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही है।

उसके हाथ में जैसे ही मेरा लंड आया, वो उसको अपनी चूत पर रगड़ने लगी।वो नीचे से गांड उठाकर लंड का पूरा अहसास चूत पर ले रही थी।

अब तक हमारी काम क्रीड़ा में वो शायद ही कभी इतनी गर्म हुई थी।

मेरे लिए यह सबसे अच्छा मौका था।मैं उसकी टांगों के बीच में आ गया।

वैसे तो मंजुला की सील टूटी हुई थी, फिर भी मैंने सेफ्टी के लिए एक हैंड टावल उसकी गांड के नीचे बिछा प्रिया।

सफेद चादर पर पहले से ही बड़ा सा गीला धब्बा उसकी चूत के रस के कारण बन चुका था।

वो पगला गई थी, बार-बार लंड को पकड़ कर चूत पर रगड़ने की कोशिश कर रही थी और लगातार सिसकारते हुए कह रही थी- प्लीज जल्दी करो … आह्ह … प्लीज जल्दी!

अब मैंने भी सही पोजीशन ले ली।इतना तो तय था कि उसकी चीख निकलेगी।

चूत पूरी तरह से गीली थी और मैं चूत में लण्ड को रगड़ने लगा जिससे पूरा लण्ड भी चिकना सा हो गया।

मैंने लंड को मंजुला की चूत पर घिसना शुरू किया तो मंजुला ने चूतड़ उठा कर लंड का स्वागत किया।उसकी जांघों को मैंने मजबूती से पकड़ा।

मुझे मालूम था कि मंजुला चुदा हुआ माल है लेकिन उसके यार उसे ठीक से चोद नहीं पाए थे। उन्होंने बस अपना माल गिरा कर इसे प्यासा छोड़ प्रिया था।इसलिए मैंने उसको अच्छे से अपने नीचे दबा लिया।

मैंने एक हाथ से कन्धा पकड़ा और दूसरे से लण्ड को चूत में सेट किया और लंड के सुपारे का थोड़ा दबाव बनाया।सुपारा जैसे जैसे अन्दर घुसने लगा, उसकी चूत फ़ैलने लगी; साथ में मंजुला की आँखें भी दर्द से फ़ैलने लगीं।

हवस मेरे ऊपर भी सवार थी।मैंने लंड को थोड़ा सा बाहर की तरफ खींचा और फिर दोबारा से एक धक्का लगाया।अब पूरा सुपारा चूत को खोलता हुआ अंदर घुस गया।

उसके मुंह से चीख निकल गई- ऊई ईईई मम्मी … मर गई … ईईई … आआआ … विकास … आईई!मेरा लौड़ा चूत के छेद को चौड़ा करता हुआ अंदर घुस चुका था।

मैं यहां पर ढील नहीं दे सकता था इसलिए मैंने लंड को फिर से थोड़ा पीछे किया और एक धक्का और पेल प्रिया।

मंजुला और जोर से चीखी और बेड पर ऊपर होते हुए छूटने की कोशिश करने लगी।उसकी आंखों से दर्द के मारे पानी आने लगा।

मैंने उसे चुप रहने का इशारा किया तो वो जबड़े दबाकर किसी तरह दर्द को सह गई।

लण्ड को ऐसा लग रहा था कि चूत ने जकड़ रखा है।मैं कुछ पल के लिए रुक गया क्योंकि लंड अब चूत में अच्छी तरह समा चुका था।

फिर मैंने उसे चोदना शुरू किया तो वो फिर से छटपटाने लगी।

मैंने उसे नॉर्मल करने के लिए उसके होंठों को चूसना शुरू कर प्रिया।मैं साथ ही उसकी चूचियों को भी मसल रहा था।

कुछ ही देर में वो मेरा साथ देने लगी और उसकी गांड भी थिरकने लगी।अब वो मेरी पीठ को सहलाते हुए मेरे होंठों को चूसने में लगी थी।

मैंने एक दो बार लंड को पूरी तरह से बाहर निकाला और फिर पूरा अंदर ठोक प्रिया।इतने में ही उसकी चूत ने पानी छोड़ प्रिया।

चुदाई के लिए अब और ज्यादा चिकनाहट पैदा हो गई; अब लंड आराम से अंदर बाहर होने लगा।

वो अब मस्ती में अपनी गांड हिलाते हुए चुदने लगी जैसे हिरणी मस्त होकर जंगल में दौड़ती है।

मैंने देखा है कि लड़की जब दिल से चुदती है और उसको आनंद भर चुदाई मिलती है तो वो अपनी भाषा में बड़बड़ाती है।मैं मराठी इतनी तो नहीं समझता, लेकिन जितना कुछ याद है वो लिख रहा हूँ और सभी मराठी पाठकों से भाषा में हुई किसी गलती के लिए पहले ही क्षमा मांगता हूँ।

वो अपनी भाषा में बड़बड़ा रही थी- उई ई ई ई मा … मेला मला खूप छान वाटत आहे (उई ई ई ई ई ई मा … मर गई मैं, बहुत अच्छा लग रहा है)तू आधी का नाही भेटलास (आप पहले क्यों नहीं मिले)अरे विकास तू खूप एन्जॉय करतोस (अरे विकास तुम बहुत एन्जॉय करवाते हो)आता मी तुझा आहे आई ई ई ई ई ई ई ई उफ्फ्फ ये ये ये यस यस यस (अब मैं तुम्हारी हूँ)फक्त माझ्या समाधानासाठी ते जोरात करा (मेरी संतुष्टि के लिए और ज़ोर से करो)आपल्या आत खूप लठ्ठ वाटत आहे (आपका लण्ड बहुत मोटा है)आणि आत या, जोरात, जलद करा (और अंदर आओ, जोर जोर से करो तेज करो)

मैं- अब मैं तुझे नहीं जाने दूंगा मंजू, ऐसी चूत बहुत दिनों के बाद मिली है। आह्ह … आह्ह … चोद चोदकर आज मैं तेरी मां-बहन एक कर दूंगा। अब तू रोज मेरे साथ सोया करेगी। रोज तुझे लंड चुसवाऊंगा।

मंजुला- हाँ विकास, मैं रोज़ आपके बिस्तर पर रहूंगी। जब चाहना, जैसे चाहना वैसे चोदना। मैं लंड भी चूसूंगी। आह्ह … और चोदो … आह्ह … और चोदो मुझे!

ये आवाज़ें मेरे जोश को और ज्यादा बढ़ा रही थीं।

लंड उसकी चूत में जाता तो मेरी जांघें उसकी जांघों से टकराकर पट-पट की आवाज करतीं।भरी सर्दी में हम दोनों वासना की गर्मी में पसीने से तरबतर थे।

लंड पिस्टन की तरह चूत में चल रहा था और दिल कह रहा था इस चुदाई का अंत ना हो।

लंड जब चूत से बाहर आता तो चूत की मलाई लंड में चिपक कर बाहर आती।मैं कभी झुक कर उसकी चूचियां चूसता तो कभी निप्पलों को मसल देता था।

अब मैंने उसके दोनों पैर अपने कंधों पर रख कर और अपने हाथों को चूचियों पर रख कर लंड को चूत में अंदर बाहर करना शुरू किया।वो फिर से बौखला गई- आईईई … आह्ह … आहह्ह … ऊईईई … उम्म्म … मर गई … आह्ह … फट गई … बस विकास … बस … आह्ह … बस.अब मेरे लंड में भी उबाल आने लगा।

मैंने सारा रस उसकी चूत में डालने का मन बना लिया।मेरे धक्कों में तेज़ी आ गई।

मैं- मंजुला मेरी जान … आज मैंने तुमको अपना बना लिया।मंजुला- हां विकास, मैं तुम्हारी हूं। आह्ह … मेरी जान … आह्ह … विकास … मेरे अंदर से कुछ निकलने वाला है। आह्ह … आह्ह।

ये कहते हुए उसने अपने नाख़ून मेरी कमर में गड़ा दिए और हर झटके का जवाब वो अपने चूतड़ उठा कर देने लगी।लंड पिस्टन की तरह चूत में चल रहा था।

अब मैं सिसकारते हुए चोद रहा था- आह्ह … मंजू … आह्ह … चोद दूं तुझे … आह्ह पेल दूं … आह्ह आ आ रहा है … आया बस … आह्ह आह्ह!

इतने में लंड ने उसकी चूत में अपने रस की बारिश शुरू कर दी।मंजुला ने मुझे बाँहों में भर लिया और पैर कैंची की भांति मेरी कमर पर कस लिए।

हम दोनों बुरी तरह हांफ रहे थे।काफी देर तक मैं मंजुला के ऊपर ही पड़ा रहा।जब सांसें नॉर्मल हुईं तो मैं एक तरफ होकर लेट गया।

मंजुला ने अपना सिर मेरी बाँहों में रख लिया।

फिर हम एक सुकून भरी नींद के आगोश में चले गए।

सुबह पांच बजे मेरी आंख खुली, वो भी हल्की ठण्ड से।

मैंने सिर उठाकर देखा तो रजाई और सारे कपड़े जमीन पर पड़े थे और मंजुला निपट नंगी मेरे से लिपट कर सोई हुई थी।उसकी गर्दन, चूचियों और कंधों पर काफी लव बाइट्स दिख रही थीं; उसके बाल बिखरे हुए थे और होंठ सूखे थे।

रात को मैंने उसको बेदर्दी से रौंद प्रिया था।

फिर मैं थोड़ा सा हिला तो वो कसमसाकर और जोर से मुझसे लिपट गई।मैंने भी उसको कसकर बांहों में भर लिया।

लंड का तनकर बुरा हाल था, उसको चूत चाहिए थी।

मैंने मंजुला की गर्दन पर होंठ रख दिए और उस हरकत ने मंजुला का भी मूड बना प्रिया।मंजुला- उफ्फ … तुम बहुत गर्म हो विकास!

मैं उसको नीचे लेकर चूमने लगा और जैसे ही मेरे होंठ चूमते हुए उसकी चूत पर लगे तो उसके चूतड़ उछल गए।वो एकदम से सिसकारी- आह्ह … चूस लो मेरी जान … ये तुम्हारे होंठों की दीवानी हो गई है।

मैंने जीभ को नुकीला किया और सूजी हुई चूत को पूरा खोल कर गुलाबी छेद के अंदर डाल प्रिया और जीभ चुदाई चालू कर दी।मंजुला सिसकारने लगी- आह्ह … आह्ह … येस।

उसकी सिसकारियों ने मेरे जोश को और बढ़ा प्रिया।

कुछ ही देर में वो लंड अंदर डलवाने के लिए मिन्नत करने लगी।

मैंने भी उसकी टाँगों को फैलाया और चूत पर लंड का सुपारा रगड़ने लगा।फिर एकदम से ही मैंने उसकी चूत में धक्का दे प्रिया.

और वो चीख पड़ी- आईईई … मार डाला … एक बार में ही पेल प्रिया … ऊईईई … विकास … साले कमीने … आईईई मर गई मा!

चूत बहुत गीली हो गई थी और लंड पच-पच करते हुए चूत को चोदने लगा।

कुछ देर बाद मंजुला भी चूतड़ उचका उचका कर खूब मज़े लेकर चुदवाने लगी।अब लंड पिस्टन की तरह चूत में तेजी से अंदर बाहर हो रहा था।

काफी देर तक उसी पोजीशन में चोदने के बाद लंड ने सारा रस मंजुला की चूत में भर प्रिया और मैं हांफता हुआ उसके पेट पर लेट गया।

थोड़ी देर में हम उठे, फिर बाथरूम जाकर दोनों ही शावर के नीचे खड़े हो गए।

गर्म पानी की धार ने दोनों में एक ऊर्जा सी भर दी।

बाहर आकर मंजुला जमीन से अपने कपड़े समेटने लगी और मैं उसको एक एक करके कपड़े पहनते देखता रहा।

फिर मशीन से हमने कॉफी बना कर पी और इस बीच हम दोनों में कोई बात नहीं हुई।

मंजुला इस दौरान नजरें मिलाने से बचती सी रही।मैं जानता था कि चुदने के बाद भी लड़की को थोड़ा अजीब सा लगता है, एक शर्म सी रहती है।वैसे भी मैं तो उसका बॉस था इसलिए उसका हिचकना बहुत नॉर्मल था।

फिर मैंने खुद ही बात करने की पहल की- मंजुला, तुम रूम जाकर फ्रेश होकर चेंज कर लो, मैं भी तैयार हो जाता हूँ।मंजुला हम्म … कह कर अपने रूम में चली गई।

मैं सारे घटनाक्रम को सोचता रहा, साथ ही तैयार होता रहा।

कुछ देर बाद मैं रेडी होकर उसके रूम में गया तो मंजुला भी नार्मल हो गई थी।ब्रेकफास्ट करके हम दोनों अपने अपने काम में लग गए।

बीच में मेडिकल स्टोर से प्रग्नेंसी रोकने वाली पिल्स भी लेकर मैंने उसको दी।

उसने एक बार मुझे देखा, फिर चुपचाप दवा खा ली।

रात को सिंगल माल्ट व्हिस्की के कई राउंड चले।साथ ही मंजुला के साथ चुदाई के भी दौर चले।चुदाई के कई आसन हमने ट्राई किये।

बाकी के बचे हुए दिनों में हम दोनों ने खूब चुदाई की और मंजुला भी अब मेरी पार्ट टाइम वाइफ बन चुकी थी।उसकी शादी होने तक उसको मैंने खूब चोदा।

मंजुला अब बैंगलोर में है और मैं मुंबई में! आज भी कभी भी बैंगलोर जाता हूँ तो उसके घर भी जाता हूँ।लेकिन सेक्स का रिश्ता लगभग खत्म सा हो चुका है।

वो अपनी शादीशुदा जिंदगी में खुश है और मैं अपनी में!

आशा है आपको मेरे जीवन का ये पन्ना पढ़ कर आनंद आया होगा।इस चूत चुदाई हिंदी के बारे में आप मुझे बेझिझक मेल कर सकते हैं।

मेरे अनुभव को पढ़ने के बाद आपके दिल में जो भी ख्याल आए हों वो मुझे ईमेल के जरिये बता सकते हैं।हॉट चूत चुदाई हिंदी कहानी पर कमेंट करना भी न भूलें।support@mohakkisse.com

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श्रृंखला

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मराठी मुलगी चुद गई होटल में

कुल भाग: 3
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पाठकों की राय

1 टिप्पणी

दीप पाटिल

1 month ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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