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भाभी की चुदाई पठन समय: 14 मिनट पढ़ा गया: 548 बार

सरकारी अफसर महिला के साथ वासना का रिश्ता- 3

राहुल श्रीवास्तव

11 May 2026 को प्रकाशित

सरकारी अफसर महिला के साथ वासना का रिश्ता- 3
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हॉट भाभी सेक्स प्ले स्टोरी में मैंने एक भाभी से दोस्ती की, उसे गर्म करके सेट किया और अभी उसके जिस्म को मसला कर उसकी वासना को चरम तक पहुंचाया.

अब आगे हॉट भाभी सेक्स प्ले स्टोरी:

मेरे हाथ लगातार उसके जिस्म को सहला रहे थे.वह भी शायद मेरी मंशा समझ रही थी.दिमाग से सोच रही थी कि गलत है, पर जिस्म साथ नहीं दे रहा था.

शायद इतनी अनुभवी तो वह थी कि समझ न सके कि यह मतवाली रात का मौसम और नशीला माहौल उन दोनों को कहां ले जाएगा और इसका अंत क्या होगा!

हल्का सॉफ्ट टच धीरे धीरे कविता को बेसुध करने के लिए काफी था.

उसका जिस्म कुछ अलग चाह रहा था … दिमाग और दिल कुछ और …

कविता धीरे धीरे समर्पण की ओर अग्रसर थी … और मैं उसमें कोई कसर नहीं छोड़ रहा था.वाइन भी मेरा साथ दे रही थी.

उसका जिस्म हल्का होता जा रहा था और उसके जिस्म का बोझ मुझे मेरे जिस्म पर महसूस होने लगा था.

एक तरह से वह पूरे समर्पण के मूड में आ चुकी थी.अब आलम ये था कि कविता का सर मेरी बांहों में मुँह मेरे सीने से लगा था.

अधलेटी सी कविता मेरी तरफ देख रही थी.

मेरे हाथों की उंगलियां उसकी बांहों को पकड़ने के बहाने, उसकी विशाल चूचियों को स्पर्श करती हुई उसे साधे हुई थीं.

उसके आधे पैर जमीन पर, आधा जिस्म काउच पर था और हम दोनों की एक रोमांस से भरी मुद्रा थी.

अब उसका जिस्म लगभग मेरी बांहों में आ गया था.

काफी देर हम दोनों ऐसे ही रहे, पर मेरा दूसरा हाथ लगातार उसके जिस्म को सहला रहा था ताकि उसकी काम वासना हल्की हल्की सी सुलगती रहे.

अचानक से उसका एक हाथ मेरी गर्दन पर गया और वह मेरे सर को झुका कर मेरे होंठों को चूमने लगी.

उसके कंठ से आवाज निकली- अब मत तरसाओ प्लीज!

आखिरकार जिस्म की प्यास की जीत हो ही गई.

ये तो उसको भी पता था कि जो कुछ हम दोनों के बीच हो रहा था. वह गलत है, पर जिस्म की प्यास से मजबूर थी.

कविता मेरे होंठों को चूमती चली गई.

हवन कुंड में अग्नि जागृत हो गई थी.

मैंने भी साथ देना शुरू किया तो एक लम्बा चुम्बन हम दोनों की झुलसाने लगा.धीरे से मेरा हाथ उसकी विशाल चूचियों पर आ गया और उसके एक दूध को सहलाने लगा.

उसके जिस्म में हल्की सी कसमसाहट होने सी लगी.चुम्बन और साथ में चूची को सहलाना, हम दोनों की उतेज़ना बढ़ाने के लिए काफी थी.तभी उसने एक कदम और आगे बढ़ा प्रिया. मेरी शर्ट के बटन खोल कर वह मेरे सीने पर हाथ फिराने लगी.

ये तो अब पता ही थी कि दोनों कामातुर हैं.एक दूसरे के साथ जिस्मानी सम्बन्ध बनाने को बेक़रार हैं.

हल्की सिसकारियां कविता के मुँह से निकलने लगी थीं- आआहह्ह उफ्फ़!उसकी ये मादक आवाजें मेरे लौड़े को उत्तेजित करने के लिए काफी थीं.

मैं उसकी कुर्ती के ऊपर से चूचियों पर हाथ का दबाव बढ़ाने लगा.कुर्ती पर सिलवटें बढ़ने लगीं.

मैंने दूसरे हाथ से कुर्ती के हुक खोलना शुरू कर प्रिया.कुछ ही पलों में उसकी कुर्ती बदन पर ढीली सी हो गई और मेरे हाथों को खुल कर अन्दर जाने का रास्ता मिल गया.

बांहों से कुर्ती को हल्का सा हटा कर मैं अपने होंठ उसके एक कंधे पर रख कर उसको चूसने लगा.

‘ईष श श श आअह्ह.’

कंधों पर दांत को दबा कर हौले से काट सा ही लिया तो उसकी ‘आउच च च च ओफ्फ़ अह.’उसी के साथ जब मेरे हाथ उसकी ब्रा के अन्दर जाने की कोशिश कर रहे थे तो उसने खुद ही ब्रा का हुक खोल प्रिया.

उसकी ब्रा खुद ही एकदम से ढीली हो गई.मेरे हाथ बड़ी आसानी से उसकी चूचियों तक पहुंच गए.

‘उफ़ निकल गया …’

मेरे हाथ उसकी चूचियों को जोर से मसल प्रिया.‘ओह आह्ह आह्ह ओह उफ्फ्फ़.’

उसकी मादक आवाज़ आई तो मैं और कामुक हो गया.मैं झुका और उसकी ढीली हो गई कुर्ती को बांहों से सरका प्रिया, जिससे मैंने आराम से उसकी चूचियों को बाहर निकल लिया और एक चूची को मुँह में भर लिया.

मैं उसके एक दूध को चूसने लगा तो दूसरे का निप्पल मसलने लगा.उसका एक हाथ मेरे सर पर आ गया और बालों में कंघी सी करने लगी. साथ ही अपने हाथ से मेरे सर को अपनी चूची पर दबाने लगी.

उसकी मादक सिसकारियां तेज होने लगीं.

‘ओह आह्ह ओह आहः आहा सस्स आह्ह …’

मैं तबियत से इतने दिनों की प्यास बुझा रहा था. कभी उसकी एक चूची को तो कभी दूसरी चूची का रस पी रहा था.

धीरे धीरे मैं उसके ऊपर छाता गया, वह किसी प्यासी शै की तरह काउच पर फैलती गई और मैं उसके ऊपर छाता चला गया.

मैंने कुर्ती को निकालने की कोशिश की तो उसने भी साथ प्रिया.साथ ही साथ उसने मेरी शर्ट भी उतार दी.

अनुभवी महिला की खासियत ये होती है कि वह मर्द के कहे बिना साथ देती है और सहयोग भी करती है.

उसकी टाइट कुर्ती उसके बदन से हट चुकी थी, ब्रा के हुक खुल गए थे तो वह उसके मम्मों से हट कर लटक चुकी थी.मेरे हाथ में उसकी बड़ी बड़ी चूचियां थीं, तो कभी मैं मसलने लगता तो उसकी एक चूची को अपने मुँह में लेकर चुसकने लगता.

वह अपनी वासना में ‘उम्म म्म अह उह्ह्ह विकास प्लीज अह्ह्ह श्श्श्श.’ की जोरों से सिसकारियां भर रही थी.

हम दोनों का उन्माद बढ़ने लगा था.मेरे हाथ उसके प्लाज़ो की तरफ चल पड़े.

मैं जल्द से जल्द उसको नग्न कर देना चाहता थाक्योंकि मैं चाहता था कि जिस्म की आग इतनी भड़क जाए, जहां से वापस लौटना मुमकिन न हो.

मैं पहली बार अपनी हम उम्र महिला के साथ हम बिस्तर हो रहा था … अपनी पत्नी के अलावा, क्योंकि अब तक दूसरी लड़की जो भी सम्भोग साथी बनी, वे सब टीनएज या मेरे से आधी उम्र की थीं.

कविता के साथ अभी तक का सफर रोमांचक और कामुक था.

मेरे हाथ आसानी से प्लाज़ो में चले गए क्योंकि इस धींगामुश्ती में उसका प्लाज़ो ढीला हो गया था या उसने खुद कर प्रिया था, पता नहीं … पर मेरे हाथ आसानी से प्लाज़ो के अन्दर चले गए थे.

सबसे पहले मेरे हाथ का सामना उसकी मखमली सी पैंटी से हुआ, पैंटी जहां से हाथ गुजर कर चूत के मुहाने पर पहुंच गया. उधर काम रस से भीगी चूत में मेरा हाथ फिसलता चला गया.उसने उतेज़ना में मेरा हाथ पकड़ लिया, पर उसकी पकड़ में कोई जोर नहीं था.

वह मात्र एक स्त्री सुलभ शर्म थी कि कोई गैर मर्द का हाथ उसकी चूत तक पहुंच गया.

मैंने उसकी चूत को सहलाना चालू रखा.

मजा बढ़ा तो उसकी जांघें फैलती गईं और मेरे हाथ आसानी से उसकी चूत पर अपना कमाल दिखाने लगे थे.

अब मेरी दो उंगलियां उसकी नम चूत की दरार को रगड़ रही थीं, कभी दाने को रगड़तीं … तो कभी मसलने लगतीं.

उसके हाथ अभी भी मेरे हाथों पर थे और वह उनको बाहर खींचने का असफल प्रयास कर रही थी.अंततः मैंने हाथ निकाला और प्लाज़ो को नीचे करना शुरू कर प्रिया.

प्लाज़ो के साथ में पैंटी भी उतरने लगी.उसका सहयोग मिला, उसने अपने चूतड़ उठाए और कुछ ही पलों में प्लाज़ो ज़मीन पर आ गया था.

उसकी पैंटी अलग पड़ी थी, ब्रा अलग पड़ी थी और ऊपर की ड्रेस कहीं और थी.मैंने उसकी तरफ देखा तो उफ्फ्फ मेरा मुँह खुला का खुला रह गया.

सच में क्या हुस्न था … लगता था कामदेव ने फुरसत मे बनाया हो कविता को … इस उम्र में भी उसका हुस्न किसी भी कन्या को मात दे सकता था.

उसके बिखरे बाल, काम से भरी बोझिल सी आंखें, रस से बारे कंपकंपाते होंठ, लम्बी सी गर्दन, उसके नीचे बेदाग चूचियां, जो अभी भी ढलकी नहीं थीं … किसी रसभरे आम की तरह उन्नत थीं.चूचियों पर काले रंग के बड़े वाले अंगूरों के से कड़क निप्पल … और निप्पल के चारों तरफ बड़ा सा काला घेरा (एरोला) … देख कर ही मेरे कलेजे से उफ्फ्फ्फ उफ्फ़ की आह निकल रही थी.

नीचे सपाट पेट, उसमें एक गहरी से नाभि … उसके नीचे बड़े से कूल्हे या ये कहो भरे हुए उभरे हुए चूतड़ … और जांघों के दरमियान झांकती हुई उसकी कचौड़ी सी उभरी हुई चूत .. एकदम चिकनी … ऐसा लग रहा था मानो कविता चुदने की तैयारी पहले से ही करके आई थी.

चुत के नीचे मखमली सफ़ेद सिल्क सी भरी हुई जांघें … केले के तने सी कदली … आह.ये सब एक मर्द के लिए एक अकल्पनीय कामुक दृश्य होता है.

एक पल को मेरी हरकतें रुक गईं. मैं अपलक उसके मादक जिस्म को अपनी आंखों से चोदने लगा.

मुझे इस तरफ अपने नग्न जिस्म को एकटक देखता देख कर कविता के सफ़ेद गाल गुलाबी हो गए.

उसकी आंखों में एक शर्म की लाली आने लगी.वह मुझसे आंखें चुराने लगी और हाथ मोड़ कर अपनी आंखों में रख लिया.

एक बात तो है दोस्तो … स्त्री चाहे 18 की हो या 40 की, किसी भी मर्द के सामने नग्न होने पर जो भाव आते हैं, वह एक जैसे ही होते हैं. उसने शर्म से अपनी आंखों को बांहों से ढक लिया था.

अब सब्र नहीं हो रहा था तो मैं भी निवस्त्र हो गया और उसके ऊपर आ गया.कविता ने भी मुझको अपनी बांहों में समेट लिया. हम दोनों के होंठ मिल गए और एक लम्बा स्मूच होने लगा.मुझे उसका साथ मिला और उसकी गर्म सांसें महसूस होने लगीं.

मैं उसके ऊपर को लिप्स को अपने होंठों में दबा चूसने लगा.उसकी पकड़ मेरी कमर पर सख्त होती गई.

कभी मैं उसके ऊपर के होंठ को, तो कभी नीचे के होंठ को चूसता गया.

कविता की उतेज़ना भी चरम पर थी.वह कामोत्तेजना में अपने नाख़ूनों को मेरी पीठ पर गड़ा दे रही थी.

मैं कुछ पल के लिए रुका, तो उसने जोर से सांस ली.इधर उसके होंठ खुले और मेरी जीभ ने उसके मुँह में प्रवेश किया.

हमारी जीभ आपस में टकराईं और उनको चूसने की लड़ाई जारी हो गई.

एक दूसरे की मुँह के लार को पीते हुए काफी देर तक आनन्द के दरिया में गोते लगते गए.

फिर जब जब रुके तो तेज़ गर्म सांसें जोर से धड़कती धड़कन … पर मैं रुकने के मूड में नहीं था.उसकी गर्दन पर चुंबन करता हुआ उसकी दूध घाटी में आ गया.

उसकी रसभरी एक चूची के ऊपर के हिस्से को मुँह में दबा कर चूसने लगा तो दूसरी चूची को मसलने लगा.

‘स्स्सीईई आईईईई आआह …’ की अस्फुट सी आवाजें तेज़ होने लगीं.

अब पागलपन मेरे ऊपर मानो सवार हो गया था.इतना लम्बा वक़्त करीब आठ महीने से इस पल का इंतज़ार था.

मेरे हाथों का दबाव कविता की चूचियों पर बढ़ता ही जा रहा था. मैं बड़ी ही बेहरमी से उसकी चूचियों को बदल बदल कर मसल रहा था.कभी निप्पल को निचोड़ता, तो कभी खींचता.

हर बार कविता चिल्लाती या सिसकारी भरती.

‘अआआ … ह्ह्हह इईई … श्श्श्शश … अआआ … मम्मीईई हह… अ..आउच रुको अह … धीरे करो आअह दर्द हो रहा है … निशान पड़ेगा रुको न प्लीजःज़!’

उसकी चूची को चूसते मसलते मेरे होंठ नीचे आने लगे.

जैसे ही मेरे होंठ उसके सपाट पेट पर चिपके, कविता ने गांड ऊपर कर के सिर को पीछे फैंक प्रिया और गांड पीठ हवा में उठ गई. उसकी इस हरकत से मेरे होंठ उसके पेट में और जोर से चिपक गए.इधर एक हाथ चूची पर तो दूसरा हाथ चूत पर जम गया था.

उसकी चुत पर उसकी उम्र के हिसाब से अच्छा खासा लिसलिसा सा चूत रस जमा था, जो मेरे हाथों को आराम से चूत पर फिसलने दे रहा था.कमरे में एक कामुक महक तैर रही थी.

उसकी सिसकारियों का शोर एक मीनूर संगीत जैसा निकल कर माहौल को और कामुक बना रहा था.

‘उह्ह्ह … ईह्ह्ह … आह्ह्ह … आराम से डार्लिंग आह मजा आ रहा है … आह्ग्ग्ग …’

तभी अचानक से मेरी उंगली चूत में सरक गई और मैं बड़े आराम से अपनी उंगली से उसकी चुत को चोदने लगा.

चुत में उंगली के घुसते ही कविता के मुँह से आह एआईई निकल उठा और उसके चूतड़ और पीठ हवा में उठ गई.

दोस्तो, मुझे इस वक्त पुनः कविता की चुत याद आ गई.मैं अपना लंड हिला कर वापस चुदाई की दास्तान को लिखता हूँ.आप तब तक मेरी इस हॉट भाभी सेक्स प्ले स्टोरी को अपने कमेंट्स व मेल से नवाजें.धन्यवादsupport@mohakkisse.com

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Hi main raj kaise hai aap log umeed hai mast honge main bhi mast hoon aaj aapko ek new story sunane ja raha hoon story ka naam hai “Thand Me Nange Sone Ka Maja ” ji haan thand me nange pura nude bina kapdo ke rajai me sone ka maza hi kuch aur hai ...

8 मिनट 420

पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

सीमा शाह

1 month ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

माया त्रिवेदी

2 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

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