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Hindi Sex Story पठन समय: 13 मिनट पढ़ा गया: 231 बार

बिजनेस के बहाने चुदाई का मजा- 6

सनी वर्मा

09 Oct 2023 को प्रकाशित

बिजनेस के बहाने चुदाई का मजा- 6
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‘हैव सेक्स विथ अदर मैन’ स्पष्ट रूप से जब पति ने ऐसा बोल प्रिया तो पत्नी क्यों पीछे रहती, उसने भी आर्थिक लाभ के लिए पति के दोस्त के सामने कपड़े उतार दिए.

कहानी के पांचवें भागबीवी को गैर मर्द से सेक्स के लिए उकसायामें आपने पढ़ा कि बिजनेस में आदमी ने अपने फायदे के लिए किसी गैर औरत को चोदा तो उसे लगा कि उसकी बीवी भी चूत देकर फायदा उठा सकती है.

अब आगे :

कोठी में सुलोचना ने मुस्कुराते हुए उसका स्वागत किया।संजय ने मजबूरी बताते हुए जल्दी जाने को कहा।

सुलोचना बोली, “कोई बात नहीं। तुम अभी चले जाओ, लौटकर आओ, तब आ जाना।”संजय ने सकुचाते हुए कहा, “वो एग्रीमेंट?”

सुलोचना ने हंसते हुए कहा, “वो तो मैंने सुबह ही तैयार कर प्रिया था।”

संजय की सांस में सांस आई।उसने सुलोचना को गले लगा लिया।

सुलोचना ने उसे होंठों पर चूमते हुए कहा, “मैं तुमसे प्यार करती हूँ! तुम्हारा सेक्स का अंदाज बिल्कुल अलग था।”वो बोली, “हालांकि ये टेंडर किसी और को जा रहा था, पर मैंने पापा से कहकर तुम्हें फाइनल करवाया।”कहकर सुलोचना फिर संजय से लिपट गई।

संजय ने महसूस किया कि उसने फ्रॉक के नीचे कुछ नहीं पहना था।सुलोचना के जिस्म में एक कशिश थी।संजय भी उससे अछूता नहीं था।

जब संजय अलग नहीं हुआ, तो सुलोचना ने हाथ नीचे करके उसकी जींस के ऊपर से लंड मसला और जिप खोलकर लंड बाहर निकाल लिया।सुलोचना नीचे बैठ गई और उसे चूमने लगी।

उसे अंदाज था कि संजय को जाने की टेंशन है।

वो खड़ी हुई और एक टांग संजय की कमर पर लपेटते हुए उसका लंड अपनी चूत में ले लिया।संजय ने काम जल्दी निपटाने की सोच से उसे कुर्सी की मदद से घोड़ी बनाया और धकापेल शुरू कर दी।

सुलोचना ने फ्रॉक उतार फेंकी।संजय के हाथ में उसके मम्मे थे।

खैर, ये फटाफट सेक्स सेशन पूरा करके संजय जाने को हुआ।सुलोचना ने उसे एग्रीमेंट दे प्रिया।

संजय ने देखा, उस पर सुलोचना के हस्ताक्षर नहीं थे।उसने सुलोचना से पूछा, तो वो हंसते हुए बोली, “मैं सोचती थी तुम साइन करोगे, तो तुम्हारे साथ ही साइन कर दूँगी। पर अभी राजेश ने बताया कि साइन तो तुम्हारी बीवी करेगी, तो अब पहले वो साइन कर दे, फिर मेरे साइन होंगे।”

वो बोली, “निश्चिंत रहो, मैं कर दूँगी। पर हाँ, आज मजा नहीं आया। ये कसर घर से आकर निकाल देना!”संजय बस मुस्कुरा प्रिया।

सुलोचना बोली, “खुश होकर जाओ, क्योंकि एक और बहुत बड़ी खुशखबरी तुम्हारा इंतजार कर रही है!”

संजय चौंका।उसने पूछा, “क्या?”सुलोचना बोली, “ऐसे तो नहीं बताऊँगी! पहले एक फ्रेंच किस दो!”

संजय आगे बढ़ा और उसका चेहरा पकड़कर होंठ से होंठ मिला दिए।सुलोचना ने उसके मुंह में जीभ घुसा दी।

लंबे फ्रेंच किस के बाद दोनों अलग हुए।सुलोचना ने उसे बाहों में भरते हुए कहा, “पापा आज सुबह बता रहे थे कि एक नया प्रोजेक्ट आ रहा है, यहाँ से 200 किमी दूर। अगर तुम चाहो, तो मैं वहाँ की सप्लाई भी तुम्हें दिला सकती हूँ, पर उसमें मैं पार्टनर होऊँगी!”

संजय ने खुश होकर उसे लिपटा लिया और चूम लिया।इस बार उसके चुम्बन की गर्मी को सुलोचना ने महसूस किया।

संजय एग्रीमेंट लेकर घर पर चिंकी को देता हुआ अपने घर के लिए निकल गया।

आज उसे चिंकी कुछ ज्यादा ही खूबसूरत और मेहनत से तैयार हुई नजर आ रही थी।उसने चिंकी को चूमते हुए सुलोचना से नए काम की बात बताई और धीरे से कहा, “अमन मेरे लिए बहुत भाग्यशाली साबित हुआ है और मेरी बहुत मदद करेगा।”

वो बोला, “प्लीज, मेरी बात को गलत मत समझना, पर ये सच है कि अमन सिर्फ तुम्हारी वजह से मेरी मदद कर रहा है। तो बस उसे बांधे रखना!”चिंकी का मूड बहुत बढ़िया था।

उसने मुस्कुराते हुए पूछा, “तो कह दूँ उससे आज रात को आने को?”

स्पष्ट रूप से ‘हैव सेक्स विथ अदर मैन’ कहते हुए संजय हंसते हुए बोला, “मैंने तो मना नहीं किया! तू अपना मन बना ले, मुझे कोई दिक्कत नहीं है!”सच तो ये था कि सुलोचना से सेक्स के बाद संजय भी चाहता था कि चिंकी को भी चुदाई का मौका मिलना चाहिए।

संजय के जाने के थोड़ी देर बाद अमन चिंकी को लेकर कंपनी के ऑफिस जाकर एग्रीमेंट साइन कर आया।दोनों ने लौटते में संजय को फोन करके बता प्रिया।

संजय रास्ते में ही था।चिंकी जल्दी घर जाना चाहती थी।

पर अमन उसे एक महंगे होटल में ले गया लंच कराने।चिंकी ने बहुत कहा, “संजय के आने पर रात को डिनर करेंगे।”पर अमन बोला, “ब्रेकफास्ट न मैंने किया, न तुमने। अब मुझे तो लंच बाहर करना ही होगा!”

चिंकी बोली, “घर चलो, फटाफट बना दूँगी!”पर अमन बोला, “जितना टाइम लंच बनाने में लगाओगी, उतनी देर मैं तुम्हारे साथ बैठ लूँगा। अभी लंच बाहर ही करते हैं!”चिंकी बोली, “फिर संजय को बता देते हैं।”

अमन ने प्यार से झिड़का, “तुम बच्ची नहीं हो, जो हर बात संजय को बताओगी!”चिंकी चुप रही।

अमन ने उसे लिपटाते हुए होटल में एंटर किया।इतने महंगे होटल में चिंकी पहली बार आई थी।

चिंकी अपने को बहुत खुशकिस्मत मान रही थी।वो अमन से चिपटकर लंच ले रही थी।

बार-बार वेटर्स और शेफ उसकी जी-हुजूरी कर रहे थे।

बिल पेमेंट के बाद अमन ने चिंकी के हाथ से पांच सौ रुपये टिप दिलवाए।

चिंकी का दिल बैठ गया।संजय ने तो कभी पांच रुपये भी टिप नहीं दिए थे।

चिंकी को अपने ऊपर गुमान सा हो गया।उसे लगने लगा कि वो तो इसी के लायक है।

लंच के बाद दोनों हाथ में हाथ डाले बाहर निकले।

इतनी देर में अमन ने न जाने क्या जादू किया कि चिंकी के दिमाग से संजय उतर चुका था।घर पहुंचकर अमन नीचे से जाना चाहता था, तो चिंकी बोली, “चलो, ऊपर कॉफी पीकर जाना!”

तभी संजय का फोन आ गया।उसने पूछा, “कहाँ हो?” चिंकी बोली, “घर पर हूँ, और कहाँ होती!”

अमन ने उसे इशारे से मना किया कि उसके बारे में कुछ न कहे।चिंकी मुस्कुरा दी।

संजय ने पूछा, “तुम्हें अमन ने ही घर छोड़ा होगा?”चिंकी ने कटाक्ष में कहा, “नहीं, उसने तो फ्लाइट बुक कर दी थी मेरे लिए!”संजय बोला, “ऐसे क्यों बोल रही हो?”चिंकी बोली, “थोड़ी देर पहले ही नीचे से छोड़कर गया है। अभी मेरे सिर में दर्द हो रहा है। मैं फोन बंद करके सोने जा रही हूँ। उठकर फोन करूँगी!”कहकर फोन काट प्रिया।

दोनों चहकते हुए घर में घुसे।चिंकी बोली, “क्या पियोगे? कॉफी या चाय?”अमन ने उसकी कमर का घेरा बनाते हुए कहा, “मन तो कुछ और पीने का है, अगर तुम पिलाओ तो!”चिंकी चुप रही।

उसे अब होश आ रहा था कि अमन को बुलाकर उसने अपने को किस परेशानी में डाल लिया।पर वो अपने दिल के आगे बेबस थी।उसका दिल जोरों से धड़क रहा था।

अमन ने उसकी ठुड्डी ऊपर उठाई और बोला, “तुम बहुत खूबसूरत और दिल से साफ हो। घबराओ नहीं। जो तुम नहीं चाहती, वो कुछ नहीं होगा। तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो, बस इतनी सी बात है!”

चिंकी एक पल सोचती रही, फिर जोरों से अमन से लिपट गई।दोनों के होंठ मिल गए। दोनों एक-दूसरे को ताबड़तोड़ चूमते रहे।

दो जिस्म एक हो जाने को बेताब थे।अमन ने चिंकी को बाहों में उठा लिया और बेडरूम में ले चला।

चिंकी का दिल सुबह से उसके काबू में नहीं था।

बेडरूम महक रहा था। बेड शीट नई बिछी थी, मानो बेड को भी आशिकों के मिलन का इंतजार था।अमन ने आहिस्ता से चिंकी को लिटाया और बगल में लेट गया।

चिंकी उसे अपलक देखती रही।अमन ने कोमलता से उसके गाल सहलाए और आँखों पर चूम लिया।फिर दोनों आपस में लिपट गए।अमन ने चिंकी का टॉप उठाना चाहा, तो चिंकी ने उसका हाथ रोक प्रिया।

वो कसमसाते हुए बोली, “नहीं, अमन! अब तुम जाओ!”अमन ने दोबारा उसे चूमते हुए पकड़ मजबूत की।

चिंकी तो उसके अंदर समाने को बेताब थी।

अबकी बार अमन ने उसका टॉप उतार ही प्रिया।पर चिंकी उठ खड़ी हुई और रुआंसी होकर बोली, “अमन, मेरा दिल मेरे काबू में नहीं है। तुम भी मुझे बहुत अच्छे लगते हो। संजय भी तैयार है। पर ये सब संजय के सामने ही!”

अमन उठ खड़ा हुआ और धीरे से बोला, “संजय के सामने मैं तुम्हें प्यार नहीं कर पाऊँगा। मैं चलता हूँ। और हाँ, इस बात से संजय से किए व्यापार के वादे पर कोई फर्क नहीं आएगा। मेरा वादा है। पर मैं अब घर नहीं आया करूँगा।”

वो गेट तक पहुंचा ही था कि पीछे से चिंकी भागते हुए आई और उससे लिपट गई।अमन ने समझाते हुए कहा, “शायद तुम सही हो। मेरा कोई हक नहीं है तुम पर। अब मुझे जाने दो।”

चिंकी ने उसे होंठों पर चूमते हुए बोली, “मुझ पर तुम्हारा दोस्ती का पूरा हक है। मेरा दिल भी तुम्हारे लिए तड़प रहा है। आओ, अब दो जिस्मों को एक हो जाने दो!”‘हैव सेक्स विथ मी’ कहकर चिंकी अमन को बेड पर खींच ले गई।

बेड पर पहुंचकर चिंकी ने पहल की।पहले अपने कपड़े उतारे, फिर अमन के सारे कपड़े उतार दिए।

दोनों एकदम नंगे हो गए।

चिंकी अमन से चिपट गई।दोनों चादर के अंदर हो गए।

अमन चिंकी के गोरे जिस्म का दीवाना था; आज हुस्न के इस दीदार ने उसके होश उड़ा दिए।

वो उसके मांसल मम्मों को चूमते हुए उसकी चूत सहला रहा था।चिंकी के हाथ में उसका तना हुआ लंड आ गया था।

चिंकी नीच हुई और उसका लंड मुंह में ले लिया, लपर-लपर चूसने लगी।

चिंकी के जिस्म की गर्मी से भभका सा उठ रहा था।अमन को लग रहा था कि वो कहीं चिंकी के मुंह में ही न छूट जाए।

उसने चिंकी को रोका और 69 हो गया।अपनी जीभ उसकी गुलाबी रेशमी चूत में डाल दी।

अब दोनों की जीभें कमाल कर रही थीं।जल्दी कुछ थी नहीं।

चिंकी की जिस्मानी तैयारियां पूरी थीं।उसका जिस्म महक रहा था।

अमन ने अब उसे अलग किया।चिंकी कसमसाते हुए बोली, “अंदर आ जाओ! मैं तुम्हें अपने अंदर महसूस करना चाहती हूँ!”

अमन ने उसकी टांगें चौड़ाईं और धीरे से अपना लंड उसकी चूत के मुहाने पर रखा और सरका प्रिया अंदर।

कुछ जल्दबाजी में पूरा लंड घुस गया।चिंकी की आह निकल गई।

एक तो लंड पराया, और दूसरा, अमन का लंड संजय के मुकाबले मोटा था।अब अमन ने पेलम-पेल शुरू कर दी।

चिंकी भी नीचे से उछल-उछलकर साथ दे रही थी। चिंकी की चुदास अमन से ज्यादा भड़की हुई थी।

अमन को शायद सुबह अंदाज नहीं था कि आज उसे चिंकी की चूत मिलेगी।पर चिंकी को अंदाज था कि आज निश्चित रूप से अमन का लंड उसकी चुदाई करेगा।

चिंकी ने अपने को अमन से छुड़ाया और उसके ऊपर चढ़कर अपने हाथों से उसका लंड अपनी चूत में सेट किया।फिर घुड़सवारी शुरू कर दी।

अमन नीचे से धक्के दे रहा था।उसने उसके मम्मे लपक लिए और मसलने लगा।

चिंकी बदहवास-सी उछल रही थी।उसके मुंह से लार निकल रही थी।उसकी आँखें मतवाली हो गई थीं।उसके नेल पेंट लगे नाखूनों से अमन की छाती पर कितनी धारियाँ बन गई थीं।

अब अमन का भी होने वाला था।उसने झटके से चिंकी को नीचे पलटा और चोदते हुए कहा, “मेरा होने वाला है! कहाँ निकालूँ?”

चिंकी ने उसे कसकर भींच लिया और बोली, “एक-एक कतरा मेरे अंदर ही डाल दो!”हांफते हुए अमन उसके ऊपर निढाल हो गया और बगल में लुढ़क गया।

अमन का दिल कह रहा था कि सेक्स का ऐसा मजा तो मिताषा से आज तक नहीं आया।

चिंकी बोली, “मेरा मन था कि एक बार तुम्हारी बाहों में आकर सेक्स करूँ। वो पूरा हो गया। हमारी दोस्ती कायम रहेगी, पर सेक्स अब और नहीं।”वो बोली, “और हाँ, तुम दोनों व्यापार में मिलकर खूब बढ़ना!”

अमन बोला, “मैं व्यापार के लिए संजय से नहीं जुड़ा। मुझे तो तुम्हें पाना था। वो मैंने पा लिया!”थोड़ी देर बाद अमन चला गया।

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बिजनेस के बहाने चुदाई का मजा

कुल भाग: 7
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