होम पर वापस जाएं
गुरु घण्टाल पठन समय: 5 मिनट पढ़ा गया: 1,199 बार

मस्त गोरे गोरे टमाटर

अंश गर्ग

07 Apr 2012 को प्रकाशित

मस्त गोरे गोरे टमाटर
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

प्रेषक : अंश गर्ग

मैं आप लोगों को मेरी ज़िन्दगी में हुई असली और सच्ची सेक्स कथा लिखने जा रहा हूँ। मेरे उसका आकार दस इन्च है। मैं आपको अपनी एक ट्यूशन पर मुझसे पढ़ने आने वाली लड़की की चुदाई की कहानी सुनाने जा रहा हूं।

जब मैं बाईस साल का था। मैं पार्ट-टाइम के ट्यूशन पढ़ाता था। पाँच साल पहले की बात है उस समय मेरी एक छात्रा थी स्वाति। वह बहुत सेक्सी थी, कहने को ११वीं में थी मगर स्तनों का आकार देख कर लगता था कि पूरी जवान है, चलती थी तो कयामत ढा देती थी, पर मैने कभी भी अपनी किसी छात्रा को इस नज़र से नहीं देखा। पर मुझे मेरे कई अन्य विद्यार्थियों से पता लगा कि स्वाति एक चुद्दकड़ किस्म की लड़की है। मुझे उन की बात पर विश्वास नहीं हुआ।

जब भी मैं उसके उभरे संतरे जैसे चुचियों को देखता था तो मेरे मन में एक ही ख्याल आता था कि अभी जाकर उनका सारा रस निकालकर पी जाऊं। स्कर्ट पहने हुए उसकी कमर एवं जांघों को देखकर मुंह में पानी आ जाता था। वह कभी भी अपने होंठों पर लिपस्टिक नहीं लगाती थी फिर भी उसके होंठ गुलाबी थे, हर वक्त उसके होंठों को चूसने का दिल करता था।

एक दिन के बात है, मैं पढ़ा रहा था तभी मुझे अपने पैरों पर कुछ अजीब सा महसूस हुआ। जब मैंने देखा तो स्वाति अपने पैर से मेरे पैर को सहला रही थी और उसकी आँखों में एक अलग ही नशा था। उस दिन के बाद लगभग एक महीना बीत गया।

फिर एक दिन जब मैं पढ़ा रहा था तो मुझे जाँघ पर किसी के पैर महसूस हुये। मुझे सिगनल मिल चुका था। मैंने उसे बहाने से रविवार को बुलाया। वो दोपहर के समय आई। उसने जीन्स ओर टॉप पहना हुआ था। मैंने दरवाजा खोला जब वो अन्दर आई तो मैंने दरवाजा बन्द कर प्रिया, उसे उठा कर अपने बेडरूम में ले गया और उसे चूमने लग़ा। उसके बाद मैंने उसके एक स्तन को पकड़ कर दबाया, इतना मजा आया कि क्या बोलूं, उसके बाद मैं अपना हाथ जींस के ऊपर ही उसकी चूत पर फेरने लगा।

अब वो गरम होने लगी, मैंने सबसे पहले उसका टॉप उतारा, अन्दर ब्रा थी, उसके बाद जींस उतारी, फिर उठा कर बिस्तर पर ले गया। वहां अपनी जींस और शर्ट उतार दी। उसके बाद मैंने उसकी ब्रा उतारी और उसके मस्त गोरे गोरे टमाटर जैसे स्तनों को आजाद कर प्रिया।

उसके बाद मैं उसे दबाने लगा, वोह सिसकियाँ ले रही थी अह ह्ह्ह्ह्ह्छ …ऊओअया अआः … श बहुत मजा आ रहा है जान !

फिर मैंने उसकी पैंटी उतारी और अपना अंडरवियर भी, वो मेरा लंड देख कर खुश हो गई। उसके बाद मैंने एक ऊँगली उसकी बूर में डाल दी।

यह भी पढ़ें (Recommended)

छप्पर फाड़ कर-1

वो बोली- हाई…….मै मर गई !

उसके बाद मैं ऊँगली करने लगा, एक हाथ से ऊँगली कर रहा था और एक से उसके बूब्स दबा रहा था।

अब वो पूरी तरह गरम हो गई थी। मैंने उसके बूर से ऊँगली निकाली और खड़ा हो गया। वो भी घुटनों के बल बैठ गई, मैंने अपना लंड उसके मुंह में डाल प्रिया फिर उसने थोड़ी देर तक मेरा लंड चूसा। फिर मैंने उसे बिस्तर पर लेटा प्रिया और उसकी चूत चाटने लगा। फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और एक धक्का मारा। मेरा आधा लंड उसकी चूत में चला गया।

वोह चिल्लाई आआआआअह ह्ह्ह्ह्ह्छ ह्ह्ह . .. …….धीरे !

उसके बाद मैंने धीरे धीरे पूरा लंड उसकी चूत में पेल प्रिया फिर धीरे धीरे धक्के मारने लगा अब हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था। उसके बाद मैं लेट गया और वो अपनी चूत मेरे लंड पर सेट करके बैठ गई। अब मैं उसे जोर जोर से चोदने लगा, जब मैं झड़ने वाला था तो रुक गया और उसके बाद गोद में बिठा के फिर से मारने लगा। करीब १ घंटे तक हमने चोदा-चोदी का खेल खेला। मेरी चूत की प्यास उस दिन ठंडी हो गई। उसके बाद हम दोनों झड़ गए।

उसके बाद जब कभी भी हमे मौका मिला तो हमने हनीमून मनाया, मेरे पढ़ाने के कारण उसे ११वी में ९०% मार्क्स मिले और जब भी छुट्टी में आती है तो हम पूरा एन्जॉय करते हैं।

आपको मेरी कहानी कैसी लगी

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

छप्पर फाड़ कर-1
गुरु घण्टाल

छप्पर फाड़ कर-1

सुगंधा को वापस उसके छात्रावास छोड़ने के बाद मैं सभी देवों से इस बार बचा लेने की प्रार्थना करते हुए अपने कमरे पर लौटा (पढ़िए कहानी का पिछला भागछुपाए नहीं छुपते)।

11 मिनट 951
कॉलेज टीचर ने मुझसे अपनी चूत की प्यास बुझवायी
गुरु घण्टाल

कॉलेज टीचर ने मुझसे अपनी चूत की प्यास बुझवायी

दोस्तो, मेरा नाम अमित है. यह कहानी तीन साल पुरानी है. यह घटना मेरे और मेरी मैम के बीच की है. मैम का नाम बदला हुआ नाम कंचन है, उनकी उम्र तीस साल के आस पास है. मैम दिखने में बड़ी मस्त हैं. उनका 34-32-36 का फिगर भी एकदम मस्त है.

14 मिनट 492
हेड गर्ल बनने के लिए-4
गुरु घण्टाल

हेड गर्ल बनने के लिए-4

प्रिंसिपल सर बोले- बेटी, सलवार का नाड़ा लटक रहा है।शायद जल्दी में लटका ही रह गया है। शर्म से मेरी गालें लाल हो गई।‘क्या हुआ? चेहरा झुक क्यूँ गया? सुखदेव सिंह जी, बच्ची है, जरा ध्यान रखा करो।’

8 मिनट 372

पाठकों की राय

1 टिप्पणी

डी जे जिंदल

1 month ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।