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गर्लफ्रेंड के बिना उसकी सहेलियों संग थ्री-सम –2

गर्लफ्रेंड के बिना उसकी सहेलियों संग थ्री-सम –2
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दीक्षा ने सुरभि को बताया- जब मुझसे उन दोनों की गरम चुदाई देख कर कंट्रोल नहीं हुआ.. तो इसी वीडियो को दिखाकर उनको ब्लैकमेल करके थ्री-सम कर लिया।सुरभि- क्या सच में.. तूने मजे ले लिए.. कमीनी.. एक बार भी बताना नहीं हुआ तुझसे? मैं उस दिन से वो नजारा याद करके रोज अपनी चूत में दो उंगली पेलती हूँ.. और तू यहाँ कमीनी.. उसको अपना जीजू बना कर चुद भी गई..

सुरभि दीक्षा के ऊपर चढ़ते हुए.. उसका गला दबाते हुए.. मम्मों को दबाने लगी।‘कमीनी कैसे चोदा तुझको उसने.. अपने लम्बे मोटे सीधे लण्ड से.. हम्म बता पूरी बात..’दीक्षा ने सारी वारदात अपनी मुँह जुबानी सुना प्रिया, दोनों की ही चूत गीली हो उठीं।

अब आगे..

सुरभि- यार मेरा भी कुछ करवा दे.. अपने जीजू से.. मैं भी तो उसकी साली लगूंगी न..

दीक्षा ने मुझको कॉल किया.. और कहा- जीजू चुदने का मन कर रहा है.. आ जाओ न चोदने?मैं बोला- यार मन तो मेरा भी उस दिन से तुमको चोदने का बहुत करता है।

दीक्षा- तो एक आईडिया है.. मैं मकान-मालकिन को बोलती हूँ.. कि आयशा का भाई सामान देने आ रहा है.. ट्रेन से.. मकान-मालकिन जानती है.. घर में मेरे अलावा और कोई नहीं है.. जो उससे सामान लेकर आयशा को दे दे।मैं- हाँ देखो.. शायद बात बन जाए और जरूरत पड़ी.. तो मैं उस औरत से फिर बात करवा दूँगा..

दीक्षा- ओके जीजू.. अपने लण्ड को तैयार रखो.. देर तक चुदाई करनी है.. रात भर.. तो मालिश-वालिश कर लो मेरे लण्ड की.. और मजबूत हथियार बना लो.. एकदम बढ़िया चोदने वाला केला..मैं- रात भर.. मतलब?दीक्षा- अरे जीजू आपको मालूम है न कि मेरे कमरे में अनामिका भी रहती है.. तो रात में इसलिए.. क्योंकि मैं कुछ जुगाड़ कर उसको दूसरे कमरे में भेज दूँगी.. आप यह सब छोड़ो.. और अगर बात बन जाए तो शाम को 7 बजे तक आना.. ताकि वो मकान-मालकिन खुद ही बोल दे कि बेटा अब कल सुबह चले जाना।मैं- ओके..

दीक्षा ने मकान-मालकिन से सारी बात की.. और इस बार उनको इतना विश्वास था कि.. वो बात करवाने को भी नहीं बोली।

तय प्लान के अनुसार मैं शाम को ढेर सारा सामान लेकर हॉस्टल पहुँच गया और मकान-मालकिन से मिल कर उन्हें नमस्ते आदि की.. और फिर दीक्षा के कमरे में पहुँच गया।

दीक्षा और सुरभि ने यह पहले ही प्लान तय किया था.. कि अनामिका को वो सुरभि मैम के कमरे में भेज देंगे.. तो अनामिका.. सुरभि मैम के कमरे में पहुँच गई.. और सुरभि मैम.. दीक्षा के बाथरूम में थी.. जो कि कमरे के अन्दर ही था।यह मुझको बाद में पता चला था।

दीक्षा के कमरे में एक ही दीवान था क्योंकि अनामिका अभी नई-नई रूम-मेट बनी थी.. तो मकान-मालकिन ने बोला था कि इस महीने एडजस्ट कर लो.. अगले महीने अनामिका का भी दीवान आ जाएगा.. और उनके कमरे में कूलर लगा हुआ था.. ठीक दीवान के ऊपर खिड़की पर..

मेरे कमरे में पहुँचते ही.. दीक्षा ने मेरे हाथ से बैग घसीट कर किनारे रख प्रिया और वहीं मुझसे लिपट कर खूब तेज-तेज स्मूच करने लगी।

दीक्षा (34c-28- 34) और सुरभि (36d- 30- 36).. दीक्षा ने स्कर्ट पहनी हुई थी.. जो घुटने से ऊपर तक थी.. और ऊपर एक टी-शर्ट डाली हुई थी। दीक्षा मुझको बेतहाशा चूमने-चूसने लगी.. और मेरे कार्गो पैन्ट के ऊपर से मेरे लण्ड को सहलाने लगी।मैं भी उसका साथ देते हुए.. उसकी स्कर्ट के नीचे से हाथ डालते हुए.. उसकी गाण्ड को सहलाते हुए.. उसको चुम्बन कर रहा था।

दीक्षा इस कदर पागल हो उठी.. जैसे सुरभि मैम को दिखाने के लिए जानबूझ कर ऐसा कर रही हो।

दीक्षा ने मेरी टी-शर्ट में हाथ डाल प्रिया.. और मेरे निप्पल्स को अपने दोनों अंगूठे से मींजने लगी.. उसकी इस हरकत से मैं पगला गया। मैं उसकी गाण्ड पर पीछे से चांटे मारने लगा।

दीक्षा- ओह्ह.. जीजू.. आराम से… मेरे चूतड़ लाल कर दोगे क्या?मैं- तो निप्पल्स भी तो तेरे ही हैं.. अब आराम से मसल न..

दीक्षा मेरी टी-शर्ट के अन्दर जबरदस्ती अपना मुँह घुसेड़ने लगी.. और मेरे निप्पल्स को चूसने और काटने लगी।

कुछ मिनट बाद मेरी घुंडियों को चूसते हुए.. मेरे कार्गो की ज़िप खोलने लगी.. और अपना हाथ डालकर मेरी चड्डी के बीच के छेद से मेरा लण्ड निकाल लिया.. जो खड़ा हो चुका था।

उसने मेरे खड़े लौड़े को गप्प से अपने मुँह में अन्दर डाल लिया और जानबूझ कर आवाज निकाल-निकाल कर ‘आहें..’ भरते हुए चूसने लगी।

दीक्षा- आह.. जीजू.. क्या मस्त गुलाबी टोपा है आपका.. सुर्ख गुलाबी.. कितना टाइट है आपका लण्ड.. कितना लम्बा और कितना मोटा लण्ड है आपका.. आह्ह..

मैं थोड़ा हैरान सा था कि इतनी तेज क्यों बोल रही है पर मुझे क्या.. मैंने कहा- हाँ.. चूस लो मेरी साली.. अब तो आपका भी इसमें हक़ बनता है.. आह्ह चूस साली..मैंने अपनी कार्गो का बटन खोल प्रिया.. जिससे कार्गो खुद खिसक कर.. नीचे हो गई।

अब दीक्षा अपने एक हाथ से मेरा लण्ड पकड़ कर चूस रही थी.. और दूसरे से मेरे पीछे अपने हाथ से मेरी गाण्ड को सहलाते हुए अपनी तरफ को आगे धकेलने लगी.. और मेरा लण्ड वो पूरा लेने की कोशिश करने लगी.. लेकिन ले नहीं पाती है.. बड़ा है न..

दीक्षा मेरा लौड़ा ऐसे चूस रही थी.. जैसे मानो.. कुल्फी चूस रही हो.. लपलप की आवाज के साथ..अन्दर बाथरूम में सुरभि भी अपनी चूत सहला रही थी उसकी चूत भी हम दोनों की चुसाई से गनगना उठी थी।

मैं अब दीक्षा के बाल पकड़ कर उसका मुँह अपने लण्ड पर जबरदस्ती ही घुसेड़ने लगा.. उसकी सांस अटक गई।मैंने उसके बाल पकड़ कर ऊपर उठाया.. और दीवान पर धकेल प्रिया.. और उसके ऊपर वैसे ही चढ़ गया। मैंने उसकी टी-शर्ट ऊपर उठाकर उसकी सफ़ेद ब्रा से उसके मम्मों निकाल लिया और चूचे दबाते हुए चूसने लगा..

दीक्षा ने अपने पैरों से मेरे पैर से मेरा कार्गो उतार प्रिया.. अब मैं नीचे से पूरा नंगा था और मैं उधर उसके 34c नाप के रसीले चूचे चूसते हुए दबाने लगा.. मसलने लगा।

मैंने कहा- साली.. आज तेरी जवानी निचोड़ दूँगा.. तेरी चुदास की तड़प खत्म कर दूँगा.. इतना पेलूँगा न.. कि तू सोचती रहेगी.. हाय जीजू ने क्या चुदाई की थी।

मैंने उसके निप्पल चूसते हुए एक हाथ उसकी स्कर्ट के नीचे डाल प्रिया और चूत में उंगली करने लगा। मैंने देखा कि साली दीक्षा की पैंटी में बीचों-बीच में एक छेद है.. तो उसी छेद से सीधे मेरी उंगली उसकी गीली चूत में सट से घुसती चली गई।

‘क्यों साली रंडी दीक्षा.. तू तो खुद पैंटी फाड़ कर बैठी है?’दीक्षा ने कहा- अरे जीजू.. जबसे मेरी मुनिया ने आपका लण्ड चखा है न.. तब से गीली ही रहती है.. तो उंगली करने के लिए छेद ही बन लिया… अब जब भी मन करता है.. तो तुरंत दो उंगली पेल लेती हूँ.. और आपके नाम का पानी निकाल लेती हूँ।

यह सुनते ही मैंने जोश में उसकी चूत में अपनी दूसरी उंगली घुसेड़ दी.. और तेजी से आगे-पीछे करने लगा।

वो मेरा नाम लेकर.. कभी हाय विवान.. कभी हाय जीजू.. करके ‘आहें..’ भरने लगी- आह जीजू.. उंगली नहीं.. अपना लण्ड पेल दो.. मेरी चूत की भूख मिटा दो आज.. आज रात भर इस नागोरी चूत में अपना मस्त लण्ड डाल कर रखो.. आह्ह…

मैं उंगली से उसकी चुदाई करते हुए.. उसकी पैंटी निकाल कर बाथरूम के पास अनजाने में फेंक बैठा। दीक्षा ने तुरंत मेरी टी-शर्ट ऊपर से उतार कर जानबूझ कर बाथरूम के पास फेंक प्रिया।बाथरूम जो थोड़ा खुला हुआ था और अन्दर अँधेरा था।

वहाँ सुरभि यह सब देख कर अपनी चूत में उंगली पेल रही थी।

मैंने भी उसकी टी-शर्ट को ब्रा के साथ उतार कर कर फेंक प्रिया.. और उसके चूचों पर झपट पड़ा। उसके दोनों चूचों को मिलाकर दोनों अंगूरों को एक साथ चूसने लगा.. काटने लगा।

उसके गोरे-गोरे चूचों के ऊपर ‘लव बाइट’ बनाने लगा, वो पगला गई और खुद ही अपनी स्कर्ट उतार कर बाथरूम की तरफ फेंक दी।अब हम दोनों पूरे नंगे हो चुके थे, एक-दूसरे को चूमने-चूसने लगे थे।उसी अवस्था में वो मेरे लण्ड को अपनी गीली चूत पर रगड़ने लगी.. और हल्का उठ कर खुद ही.. मेरे चूतड़ों को पकड़ कर पीछे से झटके मारने लगी.. जिससे मेरा लण्ड उसकी गीली चूत में आधा घुस गया।

वो तेजी से सिसयाई- आह.. आह.. जीजू.. पूरा घुसेड़ दो.. अब नहीं रहा जाता..मैंने भी उसको स्मूच करते हुए एक तेज झटके के साथ अपना पूरा लण्ड उसकी चूत में पेल प्रिया।

वो- आह जीजू.. चोद दो.. साली की चूत को.. खूब तंग किया ना.. चोदो आज जम कर.. मेरी चूत में अपना खड़ा लण्ड का झंडा गाड़ दो.. आह्ह..मैं उसको तेज-तेज चोदने लगा..

‘फच-फच..’ की आवाज गूंजने लगी.. इसी बीच हल्की सी आहट की आवाज हुई.. शायद सुरभि भी अपनी गीली चूत में उंगली तेज-तेज पेल रही थी.. जो मैंने अनसुना कर प्रिया।

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

करण शर्मा

1 month ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

अभि

2 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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