होम पर वापस जाएं
Group Sex Story पठन समय: 12 मिनट पढ़ा गया: 1,269 बार

पड़ोसन बनी दुल्हन-37

iloveall ?️

03 Apr 2026 को प्रकाशित

पड़ोसन बनी दुल्हन-37
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

सुषमा शरारत भरी हंसी दे कर बोली, “कर देना मेरा वही हाल। मैं भी देखूं की मेरे दो मर्दों में कितना दम है। मैं फिर मेरे पति को कह तो सकती हूँ ना की देखो तुम्हारी बीबी का दो मर्दों ने मिल कर चोद चोद कर क्या हाल कर दिया है।

पर राज एक बात कहूं? मेरी तगड़ी चुदाई तो सेठी साहब करते ही रहते हैं। उनसे हलकी फुलकी चुदाई नहीं होती। मेरी तगड़ी चुदाई तो तुम करना ही, पर मुझे सच्चा एम.एम.एफ. का आनंद देने के लिए क्या करोगे? मुझे इतने बढ़िया प्यार करने वाले साथीदार मिले हैं तो क्यों ना हम आज वास्तव में जिसे एम.एम.एफ. कहते हैं वह एन्जॉय करें?”

मैं कुछ देर सुषमा की तरफ देखता ही रहा। मेरी समझ में नहीं आ रहा था की सुषमा क्या कह रही थी। मैंने कुछ आश्चर्य से सुषमा की और देखा और पूछा, “वास्तव में एम.एम.एफ. से तुम्हारा क्या मतलब है? कहीं तुम वही तो नहीं सोच रही हो जो मैं सोच रहा हूँ?”

सुषमा ने मेरी और शरारत भरी नज़रों से दखा और पूछा, “तुम क्या सोच रहे हो?”

मैंने कहा, “ठीक है, जो मैं सोच रहा हूँ वह हम करेंगे, अगर तुम्हारी वही इच्छा है तो।”

सुषमा ने कहा, “तुम ठीक समझे हो। ओके।”

फिर मेरा और साले साहब का हाथ थाम कर सुषमा बोली, “पर देखो मैं एक बात और कहना चाहती हूँ। मेरे माताजी और पिताजी संगीत के बड़े शौक़ीन थे। वह बड़े ही इमोशनल भी थे। मैंने बचपन से ही देखा था की कई बार संगीत सुनते, बजाते या गाते दोनों बड़े ही भावावेश में आ जाते और उनकी आँखों में से आंसूं बहने लगते।

वह दोनों एक दूसरे को गले लगाते हुए संगीत की लय में डूब जाते और मैं अगर साथ में बैठी होती थी तो मुझे अपनी बाँहों में ले कर कहते, संगीत में डूब जाने में जो आनंद है वह अद्भुत है। संगीत, प्रेम और भक्ति यह हमें इस दुनिया से किसी और दुनिया में ले जाते हैं। मेरे पिताजी मेरी माँ से बहुत प्यार करते थे।

मैंने बचपन में मेरी माँ को मेरे पिताजी से संगीत सुनते हुए चुदवाते हुए देखा था। शादी से पहले मेरी माताजी को जिन्होंने पहली बार संगीत की शिक्षा दी थी उस शिक्षक से माताजी प्यार करने लगी थी और कुछ ऐसा हुआ की उनके साथ माँ के शारीरिक सम्बन्ध हो गए। शायद शादी से पहले माँ ने कई बार उनसे चुदवाया भी था।“

सुषमा की इस तरह अपनी माँ के बारे में बात सुन कर हम दोनों हतप्रभ रह गए। सुषमा ने हमारी और देखा। वह समझ गयी की हम इस बात को हजम नहीं कर पा रहे थे। सुषमा ने हमें दिलासा देते हुए कहा, “माँ उनसे शादी करना चाहती थी। पर उस शिक्षक की माली हालत और उनका सामजिक स्तर भी हमारे से निचा था इस कारण मेरे नाना और नानी उस शादी के लिए बिलकुल तैयार नहीं थे।

माँ की शादी मेरे पिताजी से हो गयी। बाद में पिताजी को माँ से ही सारी बात का पता चला और यह भी पता चला की वह शिक्षक का तबादला संजोग से मेरे पिता के गाँव में ही हुआ था। जब पिताजी को यह सब पता चला तो नाराज होने की बजाय पिताजी ने उस शिक्षक को हमारे घर बुलाया।

उस समय मैं छोटी थी पर मैंने उन को देखा है। पिताजी ने उनके साथ अपने रिश्तेदार की तरह सम्बन्ध रखे, उनको बड़े सम्मान पूर्वक हमारे घर बुलाया और माँ को आग्रह कर कहा की माँ उनसे शारीरिक सम्बन्ध तोड़े नहीं बल्कि जारी रखे। पहले माँ ने साफ मना किया पर पिताजी के आग्रह के आगे माँ को झुकना पड़ा।

मैंने कई बार उन शिक्षक को प्यार से माँ की चुदाई करते हुए छिप कर देखा था। पिता जी ने मुझसे भी उन शिक्षक से अपने पिता की तरह ही प्यार भरा व्यवहार करने का आग्रह किया था जो मैंने किया भी। अफ़सोस वह शिक्षक का कम उम्र में ही देहांत हो गया।” यह कहते हुए सुषमा की आँखें नम हो गयीं।

मैंने सुषमा को बाँहों में भर लिया और कहा, “सुषमा यह जिंदगी बड़ी ही विचित्र है। जिंदगी कई बार कहानियों से भी ज्यादा रोमांचक और अजीब मोड़ लेती हैं। जीवन में कई अजीबोगरीब मोड़ और घुमाव आते हैं।

हमें चाहिए की उन मोड़ों से हम बड़ी ही संवेदनशीलता से और समझदारी से गुजरें और गुजरते हुए हमें या किसी और को किसी तरह की चोट या वेदना ना पहुंचे और कोई हमारे वर्तन के कारण आहत ना हो। हो सके तो हम हमारे और दूसरों के जीवन में मिठास और खुशियां बांटने की कोशिश करें। यही आपके पिताजी ने किया। यह आपके लिए गर्व का विषय है।”

मेरी बात सुन कर सुषमा और भी भावुक हो गयी और बोली, “राजजी, आप सच कह रहे हैं। इसका परिणाम यह हुआ की मेरी माँ की नजर में मेरे पिताजी के लिए इतना सम्मान बढ़ गया की माँ पिताजी को अनहद प्यार करने लगी और दोनों आज भी एक दूसरे के बगैर पल भर रह नहीं सकते।

यह भी पढ़ें (Recommended)

The fuck boy (Badhte rishte)-15

हालांकि मैंने देखा नहीं पर मुझे पूरा यकीन है की पिताजी और उस शिक्षकजी ने मिल कर माँ को कई बार साथ में चोदा होगा। मुझे लगता है मेरे पिताजी ने उस जमाने में भी उन शिक्षकजी से मिल कर माँ की एम.एम.एफ. चुदाई की होगी।”

मैंने गंभीर माहौल को हल्का करने की कोशिश करते हुए मुस्कुराते हुए कहा, “ओह… अच्छा। इसी लिए आज मोहतरमा का एम.एम.एफ. चुदाई करने का मूड हुआ है!”

सुषमा ने मुझे कोहनी से धक्का मारते हुए कहा, “अरे छोडो, अब वह ज़माना गुजर गया। अब मेरी बारी है। मुझे यकीन है की उन्होंने एम.एम.एफ. चुदाई जरूर की होगी क्यूंकि हालांकि मैंने उसे अपनी नज़रों से नहीं देखा पर जल्दी सुबह कई बार शिक्षक अंकल को पिताजी और माँ के बैडरूम से कपडे पहनते हुए निकलते मैंने देखा था जब पिता जी भी उसी बैडरूम में सोये हुए थे।

मेरे पिताजी माँ को इतना चाहते थे, और मैं जानती हूँ की वह जब भी मौक़ा मिले माँ को चोदने के लिए इतने पागल रहते थे और उनकी चुदाई करने में हमेशा तैयार रहते थे की अगर शिक्षक अंकल माँ को पिताजी के सामने चोद रहे हों तो मेरे पापा के लिए यह नामुमकिन था की वह भी माँ को चोदे बगैर रह सकें।”

मैंने कभी सोचा नहीं था की कोई हिंदुस्तानी महिला चुदाई के बारे में इस तरह खुल कर बिंदास बात कर सकती है। ख़ास कर सुषमा को तो कतई नहीं। सुषमा मुझसे इतनी बेबाकी से बात करती देख मुझे बहुत अच्छा लगा। अक्सर दो तरह के मर्द होते हैं। एक टाइप के मर्दों को शर्मीली, अपने कपडे उतार ने में हिचकिचाती हुई, चुदवाते हुए भी नजरें नीची रखे, जो चुदवाते हुए कुछ ना बोलें ऐसी औरतें पसंद होतीं हैं।

पर दूसरी टाइप के मर्दों को वह औरतें पसंद हैं जो नंगी होकर बड़े प्यार से अपनी चूत चुसवाएं, बेझिझक मर्दों का लण्ड चूसें, मर्दों के साथ खुल्लम खुल्ला लण्ड, चूत, चुदाई ऐसे शब्द बोलें ऐसी औरतें पसंद होतीं हैं जो शर्माती नहीं और सामने चल कर मर्दों को चोदने के लिए उकसातीं हैं।

मुझे दोनों की मिक्स टाइप की औरतें पसंद हैं। ऐसी औरतें जो शर्मीली हैं, पर एक बार शर्म का पर्दा हट जाए फिर एक मर्द दोस्त की तरह खुल्लमखुल्ला बात करे। फिर चुदाई के बारे में बोलने में परहेज ना करे। और जो फिर बड़े प्यार से अपनी चूत चूसवाये लण्ड चूसे, और चुदाई में जो कुछ भी होता है वह खुले दिल से करे और करने दे।

सुषमा बिलकुल जैसी मेरी पसंद थी वैसी ही थी। जब तक एक औपचारिक सम्बन्ध होता है तब तक वह बड़ी ही शालीनता, गंभीरता और मर्यादा का परिचय देती है। पर जैसे उसके ऊपर से मर्यादा और लज्जा का पर्दा हट गया फिर वह बेबाक बिंदास चुदासी हो जाती है और बड़े प्यार से चुदवाती भी है और चोदने वाले मर्द को पूरा सपोर्ट करती है।

मैंने सुषमा के होँठों से अपने होंठ हटाते हुए साले साहब की और देखा। साले साहब ने सुषमा के सर को चूमना शुरू किया। उन्होंने मुझे इशारा किया की मैं सुषमा के पाँव से शुरुआत करूँ। सुषमा ने जीन्स की पतलून पहन रखी थी जिसमें उसके कूल्हे बड़े ही आकर्षक दिख रहे थे।

पर वह सुषमा के पाँव को पूरा ढके हुए थी। मैंने सुषमा के पतलून के बेल्ट के हूकों को खोला। सुषमा की पतलून कमर से ढीली हो गयी। सुषमा ने पाँव मार कर उसे टांगों से निचे की और खिसका कर निकाल दिया। अब सुषमा निचे सिर्फ पैंटी पहने हुए थी। सुषमा की करारी जांघें बड़ी ही आकर्षक लग रहीं थीं।

साले साहब ने पहली बार सुषमा की नंगी जाँघों का दर्शन किया था। वह तो उन्हें दखते ही रह गए। साले साहब ने जरूर कई लड़कियों की नंगी जांघें देखीं होंगीं। मुझे यकीन था की अंजू भाभी की जांघें भी बड़ी ही आकर्षक होंगीं, पर सुषमा की जांघें ऐसी लगतीं थीं जैसे कोई सोलह साल की कँवारी एकदम फिट लड़की की पतली सुआकार नंगी जांघें जैसे उन्हें कोई इंजीनियर ने या कलाकार ने फुट रूल से खींच कर सीधी बनायीं हो।

उनमें कहीं भी कोई बल या दाग नहीं था। सीधी जाँघों के मिलन स्थान से निकली हुई जाँघे जैसे कोई एथलीट या दौड़ने वाले की होतीं हैं। पर अक्सर एथलीट की जाँघों में उनके स्नायु बाहर सख्त निकले हुए दीखते हैं। सुषमा की जाँघों में एकदम सीधा चिकना आकार था जो मर्दों के दिल को छुरी से काटने की क्षमता रखता था। भला साले साहब का क्या दोष की वह सुषमा के पतलून निकाल फेंकने पर सुषमा को चूमना भूल कर सुषमा की पैंटी के निचे छिपी हुई चूत की मात्र कल्पना करते हुए उसकी जाँघों को देखते ही रह गए।

उन्हें तब अपने काम का ध्यान आया जब मैंने सुषमा के तलवों से शुरुआत कर सुषमा की टांगों की पिण्डियों को बारी बारी चूमना और चाटना शुरू किया। सुषमा की टांगों पर एक भी बाल का निशान तक नहीं था।

जैसे ही मैं सुषमा की जाँघों को चूमता गया वैसे वैसे साले साहब भी सुषमा के सर, उसकी गर्दन, उसके कंधे, फिर घुमा कर वह सुषमा के होँठों के पास पहुंचे। सुषमा ने अपने होँठ साले साहब की गर्दन पकड़ कर उनको अपने ऊपर खिंच कर उनके होँठों से अपने होंठ मिलाकर प्रस्तुत किये।

इस बार सुषमा के रसीले होँठों को चूमने, चूसने और काटने की साले साहब की बारी थी। मुझे लगा की मेरे साले साहब इस कला में काफी निपुण लग रहे थे। सुषमा के होँठों उन्होंने अलग अलग कोनों से अपने होंठों को घुमाते हुए और अपनी जीभ से सुषमा के होँठ, जीभ और मुंह को अंदर बाहर से चाटते हुए वह ऐसे व्यस्त हो गए की उन्हें बाहर की दुनिया का जैसे ध्यान ही नहीं रहा। इस बिच उनका एक हाथ और मेरा एक हाथ सुषमा के दोनों अल्लड़ स्तनोँ को उसके टॉप के ऊपर से ही बारी बारी से मसलने में व्यस्त हो गए।

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

श्रृंखला

कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

पड़ोसन बनी दुल्हन

कुल भाग: 58
भाग 2
भाग 2: पढ़ें
भाग 3
भाग 3: पढ़ें
भाग 4
भाग 4: पढ़ें
भाग 5
भाग 5: पढ़ें
भाग 6
भाग 6: पढ़ें
भाग 7
भाग 7: पढ़ें
भाग 8
भाग 8: पढ़ें
भाग 9
भाग 9: पढ़ें
भाग 10
भाग 10: पढ़ें
भाग 11
भाग 11: पढ़ें
भाग 12
भाग 12: पढ़ें
भाग 13
भाग 13: पढ़ें
भाग 14
भाग 14: पढ़ें
भाग 15
भाग 15: पढ़ें
भाग 16
भाग 16: पढ़ें
भाग 17
भाग 17: पढ़ें
भाग 18
भाग 18: पढ़ें
भाग 19
भाग 19: पढ़ें
भाग 20
भाग 20: पढ़ें
भाग 21
भाग 21: पढ़ें
भाग 22
भाग 22: पढ़ें
भाग 23
भाग 23: पढ़ें
भाग 24
भाग 24: पढ़ें
भाग 25
भाग 25: पढ़ें
भाग 26
भाग 26: पढ़ें
भाग 27
भाग 27: पढ़ें
भाग 28
भाग 28: पढ़ें
भाग 29
भाग 29: पढ़ें
भाग 30
भाग 30: पढ़ें
भाग 31
भाग 31: पढ़ें
भाग 32
भाग 32: पढ़ें
भाग 33
भाग 33: पढ़ें
भाग 34
भाग 34: पढ़ें
भाग 35
भाग 35: पढ़ें
भाग 36
भाग 36: पढ़ें
भाग 37
भाग 37: पढ़ें
भाग 38
भाग 38: पढ़ें
भाग 39
भाग 39: पढ़ें
भाग 40
भाग 40: पढ़ें
भाग 41
भाग 41: पढ़ें
भाग 42
भाग 42: पढ़ें
भाग 43
भाग 43: पढ़ें
भाग 44
भाग 44: पढ़ें
भाग 45
भाग 45: पढ़ें
भाग 46
भाग 46: पढ़ें
भाग 47
भाग 47: पढ़ें
भाग 48
भाग 48: पढ़ें
भाग 49
भाग 49: पढ़ें
भाग 50
भाग 50: पढ़ें
भाग 51
भाग 51: पढ़ें
भाग 52
भाग 52: पढ़ें
भाग 53
भाग 53: पढ़ें
भाग 54
भाग 54: पढ़ें
भाग 55
भाग 55: पढ़ें
भाग 56
भाग 56: पढ़ें
भाग 57
भाग 57: पढ़ें
भाग 58
भाग 58: पढ़ें
भाग 59
भाग 59: पढ़ें
यह एक बहु-भाग कहानी है। अपनी पसंदीदा कड़ी पर जाने के लिए ऊपर क्लिक करें।

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

The fuck boy (Badhte rishte)-15
Group Sex Story

The fuck boy (Badhte rishte)-15

Dosto agar aapko kahani pasand aa rahi ho, to support@mohakkisse.com pe mail kare. Meri hangout ID bhi isi mail pe hai. Aap log batana na bhoole, ki kahani kaisi hai. Kisi ko kisi prakaar ka help chahiye, to mujhe bejijhak pooch sakte hai.

11 मिनट 894
Boss Ke Sath Wife Swapping – Part 3
Group Sex Story

Boss Ke Sath Wife Swapping – Part 3

Dosto, aaj main aap ko is kahani ka agla hisaa batane ja rha hoon. Mujhe umeed hai aap ko isme aur bhi maja aayega.

11 मिनट 1,067
Desi Videshi Sangam – Episode 7
Group Sex Story

Desi Videshi Sangam – Episode 7

Group sex ke liye aaye chaaro couples ek dusre ke partner ke saath alag alag room me chudai ke liye partner bane the. Mera partner Sid bana tha aur hum dono ne ek dusre ke ango ko chus maje dila diye the.

13 मिनट 344

पाठकों की राय

0 टिप्पणियां
इस कहानी पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!
🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।