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जवान लड़की • पठन समय: 4 मिनट • पढ़ा गया: 976 बार

दिया की नथ-3

राजा गर्ग

05 Jul 2020 को प्रकाशित

दिया की नथ-3
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प्रिय पाठको, यह मेरी कहानी दिया की नथ का तीसरा भाग है, मैंने दिया के साथ जब से सम्बन्ध बनाये तो मेरी तो चांदी हो गई थी, जब भी मेरा मन करता मैं उसे क्लास में रोक कर चूसता रहता, उसके मुलायम मम्मे मैं अपने हाथ में लेकर दबाता ही रहता। रोज़ मैं उसके मम्मे चूसने के लिए स्टाफ रूम में ले जाता और बहुत देर तक उसके मम्मे चूसता रहता। और वो जिस भी दिन स्कर्ट पहन कर आ जाती, उसी दिन उसकी चूत में अपना लिंग घुसा ही देता।

मैंने दिया के साथ वो सब काम किये जो मैंने कभी किसी ब्लू फिल्म में देखे थे। मैं उसके होंठों को एक दिन अपने होंठों से मिलाया और इस तरह रगड़ा कि उसके होंठ एकदम लाल हो गए और ऐसा लगा कि उनसे अभी खून निकल जाएगा।

और मैं उसे अक्सर दरवाज़े का सहारा लगा कर, उसकी मम्मे अपने हाथ में पकड़ कर उससे गन्दी बातें करता, मैं अक्सर उससे कहता- तू मेरी रखैल है! तेरी तो मैं रोज़ फुद्दी लूँगा!

और वो हंस-हंस कर मेरी सारी बातें सुनती रहती और मुझे मज़े देती रहती।

हमारे कॉलेज के पास एक पिक्चर हॉल था जहाँ मैं और वो अक्सर जाते और सबसे फ्लॉप पिक्चर के टिकट लेकर कोने में बैठ जाते और हमेशा वहाँ भी उसकी टी-शर्ट ऊपर करके उसके मम्मे चूसता रहता।

मुझे उसके नर्म, मुलायम मम्मों को चूसने में बड़ा मज़ा आता।

और फिर अपना लंड निकाल कर उसके हाथ में देकर उसे चूसने को कहता। पूरी पिक्चर हम ऐसे ही देखते।

अक्सर हम लोग कहीं घूमने जाते और हम होटल में रहते तो मैं उसे कभी कपड़े नहीं पहनने देता था। उसकी गाण्ड मोटी होती जा रही थी और मुम्मे भी बड़े होते जा रहे थे, और वो एक औरत बनने की ओर अग्रसर होती जा रही थी। जिसका पूरा श्रेय मुझे ही जाता है।

मैं अक्सर अपने दोस्तों के सामने भी उसे चूम लेता था और जब मन में आता उसकी चूत में हाथ डाल के उसकी चूत की महक ले लेता था।

मैं उसे अपनी गाड़ी में बिठा कर घुमाने ले जाता और हर बार गाड़ी कही खड़ी करके उसकी चूत का सेवन ज़रूर करता, मेरा मन हमेशा करता था कि मैं उसकी एक बार खुले में और बारिश में लूँ!

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तो यह मौका मुझे जल्दी ही मिल गया।

मुंबई में मेरा एक दोस्त रहता था, उसका अपना फ्लैट था एक पॉश कालोनी में, जहाँ उसका अपना टैरेस-गार्डन था। मैं जब वहाँ गया तो दिया और मैं उसी दोस्त के फ्लैट में रुके। वहाँ मेरी उसे खुले में चोदने की तमन्ना भी पूरी हो गई। मेरा हाथ अक्सर दिया की चूत में ही रहता था, और जैसे ही मैं मम्मे सहलाना चालू करता तो उसके चुचूक एकदम सख्त हो जाते और मैं उनसे खेलता रहता। मुझे लड़कियों में उनके मम्मे बड़े पसंद थे, जब तक लड़की के मम्मे बड़े न हों तब तक मेरे लिए उस लड़की के साथ सेक्स करने का कोई मतलब ही नहीं था।

दिया ने मुझे एकदम हबशी बना प्रिया था, मेरा दिन और रात बस उसके जिस्म के साथ खेलने में ही चला जाता था।

मगर उसकी चूत की खुजली मिटाए नहीं मिटती नहीं थी।

एक रोज़ मैं अगर उसके साथ छेड़ छाड़ नहीं करता था उसे बुरा लग जाता था। मैं उसके साथ अक्सर ब्लू फिल्में देखा करता था और उसके साथ उसी स्टाइल में मज़े किया करता था, जैसे मैं कभी उसके चूचों पर चॉकलेट गिरा कर फिर उसे अपने होंठों से साफ़ करता और फिर उसी चॉकलेट को उसकी चूत के आसपास लगा कर वहाँ से भी साफ़ करता।

अब हम सेक्स ऐसे करने लगे थे जैसे लोग रात को सोते हैं, कि बस करना ही है।

खैर यह कहानी तो चलती ही रहेगी, अभी मुझे इतनी ही बातें याद है उस लड़की एक बारे में!

बाकी कोई और बात ध्यान आएगी तो आपको ज़रूर बताऊँगा। और कोई मुझसे उसका नंबर नहीं मांगना, क्योंकि वो मेरा माल है तुम्हारा नहीं! उसका जो करना है वो मैं ही करूँगा।support@mohakkisse.com

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श्रृंखला

कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

दिया की नथ

कुल भाग: 3
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां
ज

जस्सी सिंह

4 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

अ

अजय गुप्ता

5 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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