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Hindi Sex Story पठन समय: 9 मिनट पढ़ा गया: 744 बार

काम की चाह-1

आनन्द किशन

07 Mar 2013 को प्रकाशित

काम की चाह-1
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मैं आज आपको अपनी सच्ची बात बताने जा रही हूँ। मेरा नाम श्रद्धा है, मेरी उमर 35 साल है फिगर 35-28-36 है, रंग गोरा है, कद तकरीबन 5 फीट है। मैं शादीशुदा हूँ, मेरे 3 बच्चे हैं।

मेरे पति अक्सर टूर पर रहते हैं हमारी सेक्स लाइफ बड़ी अच्छी है, वो बड़े खुले दिमाग़ के इंसान हैं और चुदाई में तो उनका जवाब नहीं, अगर आधे घंटे से कम में डिस्चार्ज हो जाते हैं तो मुझको लगता है कि उनकी तबीयत सही नहीं है क्योंकि एक घंटे तक करना उन के लिए बड़ी बात नहीं है।

अब मैं अपनी कहानी पर आती हूँ। इस बात को पाँच साल हो रहे हैं।

मेरे पति के दोस्त का नाम आनन्द है, उनकी शादी हुए तकरीबन 8 साल हो गए थे। उनके 2 बच्चे हैं, बीवी भी खूबसूरत है, वो मुंबई में हमारे सामने वाली बिल्डिंग में रहते थे, इनके इतने अच्छे दोस्त हैं कि कोई भी इन दोनों की दोस्ती पर जले, काफ़ी रात तक दोनों बातें करते, शॉपिंग साथ करते।आनन्द की कपड़े की चोयस अच्छी होने की वजह से अक्सर अपनी पत्नी के लिए नाईटी और ब्रा वगैरा खरीदते तो मेरे लिए भी वैसी ही लेते। उससे आनन्द को मेरी फिगर का सही सही अंदाज़ा था।

आनन्द एक जीप कंपनी में हैं और काफ़ी मेहनत का काम करने की वजह से हैल्दी और काफ़ी मज़बूत हैं, ऊँचाई इतनी है कि मैं उनके बराबर खड़ी होती हूँ तो उनके सीने तक होती हूँ। जब भी मेरे पति टूर पर जाते तो वो ही मेरा ख्याल रखते हैं। आनन्द के घर वाले भी मेरा बहुत ख्याल रखते थे, कुल मिला कर सब लोग हमें एक ही खानदान के समझते थे।

मैं घर पर बहुत बोर हो जाया करती थी इसलिए जब मेरे पति टूर पर से आए तो मैंने कहा- मैं आपकी गैर मौजूदगी में बोर हो जाती हूँ तो उन्होंने आनन्द से कहा- श्रद्धा को ड्राइविंग सीखा दो ताकि जब भी बोर हो, घूमने चली जाया करे।

आनन्द ने कहा- ठीक है, कल से चलते हैं।

उनके पास ज़ायलो थी, अगले दिन हम लोग आर टी ओ जाकर लर्निंग लाइसेन्स ले आये और शाम को वरली सी फेस पर जाकर ड्राइविंग सीखना शुरू किया।

पहली पहली बार गाड़ी चलाने जा रही थी इसलिए मेरे पति बच्चों के साथ समंदर के किनारे ही बैठ गये और कहा- तुम लोग जाओ। पहले दिन कार चलाना बड़ा अच्छा लगा, आनन्द भी दिल से सिखा रहे थे। हमारे बीच ऐसी कभी कोई बात नहीं हुई थी जिसका ग़लत मतलब निकले। वो मुझे भाभी कहते थे जबकि उमर में वो मेरे पति से दो साल बड़े थे।

अब रोज़ हम लोग रात 10 बजे खाना खाने के बाद कार चलाने क लिए वरली चले जाते, कार चलाते हुए कभी मैं ग़लत करती तो वो मेरे हाथ को स्टियरिंग पर पकड़ के सही सही बताते कि ऐसा घुमाओ, ऐसा करो, मुझे सीट बेल्ट बाँधने नहीं आती थी तो आनन्द ने कहा- मैं लगा देता हूँ!

वो मेरे आगे से झुक के बेल्ट लगाने लगे तो उनका कन्धा मेरे वक्ष से टकरा गया, पहली मर्तबा किसी गैर का जिस्म मेरे बदन से टकराया था, सारे बदन में अजीब सी हलचल हो गई थी।

खैर उस दिन कोई और बात नहीं हुई, आनन्द सामान्य ही लगे। उस दिन के बाद कार चलाते हुए गियर बदलने के लिए वो मेरे हाथ पर हाथ रख कर बताते रहते कि ऐसे गियर चेंज करते हैं, मुझे भी उनका यह स्पर्श अच्छा लगने लगा था।

मेरे पति हफ़्ता भर रहने के बाद फिर एक महीने के लिए टूअर पर चले गए तो मैंने अपने पड़ोस में रहने वाली आंटी से कहा- मैं ब्यूटीशियन का कोर्स करने जा रही हूँ, इसलिए आप मेरे बच्चों का ख्याल रखिएगा।

यह सुझाव मेरे पति ने ही प्रिया था कि किसी को बताना मत कि तुम ड्राइविंग सीख रही हो, वरना लोग कुछ भी बातें करेंगे, हमारे पड़ोसी भी बच्चों को बहुत चाहते थे इसलिए कोई परेशानी नहीं हुई, बच्चे भी वहाँ खुश रहते थे।

रात को आनन्द कार लेकर आ गए और हम लोग फिर वरली सी फेस चले गये। उस दिन वहाँ पर कुछ ज्यादा भीड़ थी इसलिए बार बार कार में ब्रेक लगाना पड़ रहा था, मैं इतनी एक्सपर्ट तो थी नहीं इसलिए आनन्द ने मेरे पैर पे पैर रख प्रिया और जब ज़रूर पड़ती, ब्रेक लगा देते। उनका एक हाथ मेरी जांघ पर रखा हुआ था।

मैंने उनकी तरफ देखा तो बोले- कोई ऐतराज तो नहीं?मैंने कहा- नहीं!क्योंकि मुझ को उनका स्पर्श अच्छा लगता था।

एक दो दिन उसी तरह रहा, तीसरे दिन मेरी जांघ पर हाथ रखे रखे आहिस्ता आहिस्ता सहलाने लगे तो मेरे तन बदन में एक आग सी लग गई। उनका हाथ मेरी चूत के करीब आता और वापस चला जाता, मेरी चूत गीली हो रही थी। कार एसी होने पर भी मुझको गर्मी लगने लगी, दिल और दिमाग़ में हलचल होने लगी।

आनन्द ने मेरी तरफ देख कर पूछा- कैसा लग रहा है?मैंने उनकी तरफ देखा लेकिन कुछ बोल नहीं पाई सिर्फ़ मुस्करा दी।

बस फिर क्या था उन्होंने कार एक तरफ़ रोकी और मेरी कमर में हाथ डाल कर अपनी तरफ खींच लिया और मेरे चेहरे पर, गर्दन पर हर जगह पागलों की तरह चूमने लगे। मैंने भी उनको कस के पकड़ लिया।

जब आनन्द ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रखे तो मैं भी आनन्द को चूमने लगी। आनन्द ने अपनी जिव्हा मेरे मुँह में डाल दी जिसको मैं चूसने लगी।

आहिस्ता आहिस्ता उनका एक हाथ मेरे उरोजों पर फिरने लगा और मैं सब कुछ भूल कर उनका साथ दे रही थी, मैं भूल गई थी कि वो मेरे पति का दोस्त हैं।

आनन्द ने मेरे जंपर में अपना एक हाथ डाल प्रिया और मेरी ब्रा पर अपना हाथ फिराने लगे। मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था पहली बार किसी गैर से ऐसा करवाने में!

इतने में हमारी कार के सामने दूसरी कार आ कर रुकी तो हम लोग जल्दी से हट गए।

ना आनन्द ने कुछ कहा और ना मैंने! मैंने अपने आप को सही किया और घर वापस आ गये।

मैं रात भर सो नहीं पाई, जब भी आँख लगती, आनन्द का चेहरा और कार वाली बात याद आ जाती। बर्दाश्त नहीं हो रहा था, पति भी घर पर नहीं थे, मैं अपने पूरे कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो गई और शावर लेने लगी।

इतने में आनन्द का कॉल आया, मैंने मोबाइल उठाया तो उन्होंने पूछा- तुमको बुरा तो नहीं लगा?मैं क्या कहूँ, कुछ समझ में नहीं आ रहा था, फिर भी मेरे मुँह से निकल गया- नहीं!

आनन्द ने कहा- सन्नी को मत बताना!मैंने सिर्फ़ ‘ठीक है’ कहा।

आनन्द ने पूछा- क्या कर रही हो?मैंने कहा- नहा रही हूँ!

तो वो बोले- सन्नी ने बताया था कि तुम्हारी काया बहुत गोरी है! मैं तुम्हें नंगी देखना चाहता हूँ, मैं तुम्हारे साथ अन्तरंग पल बिताना चाहता हूँ।

उनके मुँह से यह सुन कर मुझको क्या लगा, मैं बतला नहीं सकती, एक नया मर्द मेरी जिन्दगी में आनेकी चेष्टा कर रहा था, खुले नग्न शब्दों में कहूँ तो एक गैर लण्ड मेरी चूत में घुसने के लिए बेताब है और वो भी ऐसे आदमी का जो मेरे पति का बचपन का साथी है या यों कह लो कि उनका भाई है।तो क्या मैं उनके सामने नंगी हो जाऊँगी?वो मुझे नंगी देखेंगे तो मुझे कैसा लगेगा?

अब तक मैं सिर्फ़ अपने पति के सामने नंगी हुई थी लेकिन ये तो गैर हैं! क्या मैं ऐसा कर सकती हूँ?उनका लंड कैसा होगा?मेरे दिमाग़ में ये बातें आ रही थी। इतने में उन्होंने कहा- जवाब क्यूँ नहीं देती?मैं फ़ैसला नहीं कर पा रही थी कि क्या जवाब दूँ।

इस पर उन्होंने फोन पर कहा- अगर तुम कॉल करोगी तो मैं समझ जाऊँगा कि तुम्हारा जवाब हाँ है।यह कह कर उन्होंने फोन काट प्रिया।

मैं नहा कर निकली और आईने के सामने खड़े होकर अपने नंगे बदन को निहारने लगी। मेरे उठे हुए स्तन बतला रहे थे कि इन पर किसी गैर का हाथ लगने वाला है, मेरी योनि भी दूसरे लिंग की ख़ुशी में नीर बहा रही थी।

लेकिन मैं इसी तरह लेट गई और सोचते हुए कब सो गई पता नहीं चला।

कहानी जारी रहेगी।

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