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Hindi Chudai Kahani पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 1,008 बार

दोस्तों की दीदी की चूत चोदने की चाहत पूरी हुई(Doston ki didi ki chut chodne ki chaahat poori hui)

ass_fucker1875

05 Aug 2021 को प्रकाशित

दोस्तों की दीदी की चूत चोदने की चाहत पूरी हुई(Doston ki didi ki chut chodne ki chaahat poori hui)
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सबसे पहले सभी पाठकों से क्षमा चाहता हूं, ज्यादा देरी से कहानी लाने के लिए, आशा है आप प्यार देंगे।

जैसा कि आप पिछली कहानी श्रृंखला “सविता दीदी की जवानी के दीवाने” में पढ़ चुके हैं, कि कैसे रोहन और विजय दोनों मिल कर बाथरूम में दीदी को आहें भरवा देते हैं। पर अचानक से दीदी की आंख खुलती है, तो दोनों की मेहनत पर पानी फिर जाता है, आगे क्या हुआ पढ़िए…

दोनों ने दीदी के चूत का दर्शन कर लिया था, जिसकी वजह से दीदी शरमा रही थी। पर उनके मन में बस यही चल रहा था कि आज तो अभी वो चुद ही जाती, और ये सोचते-सोचते उनका भी मन करने लगा था। पर वो डर रही थी और करीब बीस मिनट वो शान्ति से बाथरूम में बैठी रही।

वो अपने आप पर हंस भी रही थी कि सविता आज तू तो बच गयी, वरना आज तेरे भाई के दोस्त तुम्हारी चूत चोद देते।करीब 20 मिनट बाद जब सब कुछ शान्त लगा, तो सविता दीदी बाथरूम से तौलिया लपेटे ये सोच कर बाहर निकली, कि रोहन और विजय जा चुके थे। पर उन्हें क्या पता था कि वो दोनों पहले से ही उनके बेडरूम में छुप कर उनके आने का इंतजार कर रहे थे।

बाहर आते ही सबसे पहले वो मेन दरवाजा अन्दर से बन्द की और सुकून की सांस ली। पर रोहन और विजय उनके हुस्न को देख पागल हो रहे थे। पर जल्दबाजी करना सही नहीं समझ रहे थे। क्यूंकि उन दोनों को पता था कि जो आग रोहन ने सविता दीदी की चूत में लंड डाल कर लगाई थी, वो भड़केगी जरूर, और इसी पल का वो दोनों बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।

दरवाजा बन्द करके सविता दीदी वापस आ ही रही थी, कि तभी उनका तौलिया अचानक से खुल जाता है और उनकी बड़ी-बड़ी चूचियां झट से आजाद हो जाती हैं। तो अचानक से सविता दीदी की निगाह अपनी चूचियों पर जाती है जो कुछ देर पहले रोहन मसल रहा था, और मसलने की वजह से लाल हो गए थे।

ये सब देखते ही रहती हैं। तभी उन्हें अपनी चूत से एक दो बूंद लार टपकते हुए दिखता है, तो वो झट से नीचे बैठती हैं और वो उंगलियों से उठा कर सूंघने का प्रयास करती हैं। तो हल्की गंध होने की वजह से वो नाक के पास नहीं ले जाती, क्यूंकि वो शायद रोहन के लंड के चूत में जाने की वजह से झाग की तरह बना था।

ये सब चीजें देख अचानक से उनके शरीर में ऐसा लगता है कि करंट दौड़ जाता है, और सविता दीदी के अन्दर की आग भड़क जाती है, जो अब शान्त होने का नाम नहीं ले रही थी। तो वो अपने तौलिए को निकाल कर बगल में कर दी, और खुद की उंगली से चूत में उंगली करने लगी।‌ पहले एक उंगली डाल रही थी। फिर धीरे-धीरे उत्तेजना बढ़ती गयी और कामवासना की ज्वाला बढ़ती गयी। फिर वो दो उंगली चूत में अंदर-बाहर करने लगी। फिर जल्दी जल्दी उंगली चूत में डालने लगी तो उनके मुंह से उहहहहहहहहहह अअअअअअआहहहहहह की आवाज भी निकलने लगी। ये सब दृश्य रोहन और विजय छुप कर देख रहे थे।

देखते ही देखते अचानक सविता दीदी उठी और किचन की ओर चल दी। ये सब देख रोहन विजय अब भी शांति से छुप कर बैठे थे। तभी किचन से सविता दीदी एक पतला सा खीरा लेकर आई और सोफे पर बैठ कर दोनों टांगे फैला ली। इससे रोहन और विजय ने पहली बार सही से सविता दीदी की गुलाबी चूत का दर्शन किए।

फिर सविता दीदी अपनी चूत में खीरा डालने से पहले वो चूत को सहलाती हैं और जैसे वो अपने चूत को दानों को स्पर्श करती हैं, उनका मुंह खुल जाता है। ऐसे ही कुछ देर चूत सहलाते-सहलाते वो अपनी चूचियों को भी मसलने लगती हैं, और फिर खुद ही अपनी चूचियों को पीने का प्रयास करती है। ये सब देख रोहन और विजय उन पर झपटना चाहते थे। उन्हें यूं तड़पता देख वो उन्हे पटक कर धक्कम-पेल चोदना चाहते थे। पर फिर उन्हे याद आ जाता था कि जल्दबाजी नहीं करनी थी। वरना जैसे बाथरूम में लंड को धोखा मिल गया था, वैसे फिर से ना हो जाए।

इसलिए रोहन और विजय सही मौके का इन्तजार कर रहे थे। कुछ ही देर में उनका इन्तजार करना सफल होता दिख रहा था। क्यूंकि वो चाहते थे कि सविता दीदी गर्म हो जाएं पूरी तरह, तो फिर हमला किया जाए। कुछ मिनटों बाद सविता दीदी बेडरूम की तरफ आती हैं। तो ये सब रूम से बाहर पीछे के दरवाजे से निकल जाते हैं।

जैसे ही सविता दीदी आकर बेडरूम में लेटती हैं, तो रोहन और विजय रूम के दूसरे दरवाजे से बालकनी की तरफ छुप जाते है। इससे सविता दीदी उन दोनों को देख नहीं पाती। फिर सविता दीदी आती है और बिना कपड़ों के ही बेड पर लेट जाती हैं और अपने उंगलियों से चूत को सहलाती है। वो दूसरे हाथ से अपनी चूचियों को मसलती हैं और ऐसा करते-करते 10-15 मिनट में सविता दीदी की आंखे बन्द होने लगती है।

भले ही उन्होने अन्दर के वासना की आग को अपने हाथों से बुझाने का प्रयास किया था। पर शायद अब भी उनके अन्दर की वासना खत्म नहीं हुई थी, और वो किसी को बुला रही थी। पर आवाज इतनी धीमी थी कि बिना दीवार के पास कान लगाए सुनाई नहीं देती। जब रोहन ने अपना कान लगा कर सुनना चाहा तो वो “वीरू मेरे राजा। आ जाओ ना मेरी आग बुझा दो ना राजा,‌ आ जाओ” कह कर किसी को याद कर रही थी।

वो दोनों पहली बार वीरू का नाम सुने थे तो उन्हें पता चल गया कि दीदी का कोई ब्वायफ्रेंड था, जिससे वो चुदती थी। तभी उसे इतनी देर से याद कर रही हैं। और इस तरह रोहन और विजय को एक मौका मिल जाता है दीदी को चोदने का। वो दोनों तुरन्त फोन निकालते हैं और अपने-अपने फोन में दीदी का वीडियो बनाना शुरू करते हैं।

इधर दीदी चूत में उंगली करते हुए, एक हाथ से चूची मसलते हुए, वीरू को याद कर रही थी। उधर रोहन और विजय दीदी का एमएमएस बनाने में लगे थे। करीब 2-3 मिनट का वीडियो बनाने के बाद उन दोनों में हिम्मत हो गई दीदी के सामने आने की। तो दोनों बिना देर किए दरवाजा धकेलते हैं। दरवाजे के खुलने की आवाज से दीदी दरवाजे के तरफ देखती हैं तो वो पाती हैं कि रोहन और विजय दोनों बिना कपड़ों के उनके सामने खड़े थे।

दीदी चौंकते हुए अपने आप को बेड पर रखे चादर से ढकते हुए: अभी तुम दोनों गए नहीं?

रोहन और विजय एक साथ मुस्कुराते हुए: दीदी आपको देख कर किसको आपसे दूर जाने का मन करेगा?

दीदी‌(अपने आप को चादर के अन्दर समेटते हुए): मैं राजू को बता दूंगी कि तुम सब कितने बद्तमीज हो।

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रोहन (चादर पकड़ कर खींचते हुए): अरे नहीं दीदी मत बताना, हम कुछ नहीं करेंगे।

दीदी: चादर छोड़ो मेरा।

विजय: दीदी बस एक बार दिखा दो, चखा दो दीदी, आप बहुत हाॅट हो, आपको जब से देखा है आपके नाम का पता नहीं कितनी बार मुट्ठी लगा चुका हूं। दीदी बस एक बार आप इजाज़त दे दो।

रोहन: हां दीदी हमें आपसे प्यार हो गया है दीदी। जब से मैंने आपको पहली बार स्टेशन पर देखा, तब से मैं आपको पसन्द करता हूं दीदी। आपकी जवानी चखना चाहता हूं। आपके गठीले बदन को छूना चाहता हूं। रसीले होठ को चूमना चाहता हूं। पपीते जैसे चूची को पीना चाहता हूं। पाव-रोटी जैसी चूत को चोदना चाहता हूं। दीदी बस एक बार दीदी। प्यार से हम दोनों आपसे प्यार करेंगे। दीदी प्लीज दीदी प्लीज दीदी।

ये कहते हुए रोहन ने दीदी के चादर को फिर से खींचना शुरू किया।

दीदी: प्लीज यार तुम मेरे भाई के दोस्त हो। मेरे भाई जैसे हो, मैं तुमसे कैसे चुद सकती हूं?

विजय: वैसे ही साली रंडी जैसे वीरू से चुदती थी।

वीरू का नाम सुनते ही एकाएक शान्त सी हो गयी‌। उनके चेहरे की हवाईयां उड़ गयी, चेहरा तमतमा कर लाल हो गया। दीदी फिर कुछ बोलती तब तक विजय फिर बोलता है, “देखो दीदी, हम नहीं चाहते कि आपकी बदनामी हो। हम दोनों राजू भाई को भी कुछ नहीं बताएंगे। बस हमें वो करने दीजिए जो हम चाहते है।”

दीदी: यार वीरू के बारे में तुम्हे कैसे पता? प्लीज ये सब बात मत बताना राजू को।

रोहन: दीदी अब तो ये आपके हाथ में है कि आपको ये बात छुपवाना है या फिर उजागर करना है।

विजय: देखिए दीदी हम भी नहीं चाहते कि आपको कोई परेशानी हो। थोड़ी ही देर की बात है नाटक मत करो। नहीं तो मेरे पास आपकी वीडियो भी है। राजू भाई को दिखा दिए तो तुम्हारी कोई इज्जत नहीं रह जाएगी।

ये कहते हुए विजय ने दीदी के ऊपर से पूरा चादर खींच लिया, और झट से बेड पर चढ़ गया। जैसे ही विजय ने दीदी के ऊपर से चादर खींचा, दीदी की गदराई मदमस्त जवानी देख, विजय और रोहन के आंखो में फिर से चमक आ गयी। दीदी अपने स्तनों को एक हाथ से छुपाने की नाकाम कोशिश कर रही थी, और दूसरे हाथ से अपनी चिकनी चुपड़ी चूत को ढकने लगी।

दीदी की बिना झांटो वाली चिकनी चूत को देख दोनों पागल हो रहे थे, और दोनों के लंड चूत को देख सलामी देने लगे। दीदी बेड पर पीछे हटते जा रही थी और रोहन और विजय बेड पर आगे बढ़ते जा रहे थे और उन दोनों के लंड ऊपर नीचे होते हुए सलामी दे रहे थे। पीछे हटते-हटते सविता दीदी दीवार के पास पहुंच गयी और दीवार के बल बैठी रह गयी, जहां से वो अब पीछे नहीं हो सकती थी।

वो दोनों बोले: दीदी हम कुछ नहीं करेंगे। आप हमें समझने का प्रयास करिए। प्लीज दीदी, प्लीज दीदी करने लगे।

और तभी दोनों दीदी के गोरे-गोरे चूचे और उस पर भूरे रंग के निप्पल देख और उतावले हो गए। जब तक दीदी समझती कि ये दोनों फिर उन्हे रंडी की नज़र से देख रहे, तब तक रोहन बेड पर झुक गया और झुकते ही उसने अपना मुंह दीदी की चूत के द्वार पर रख दिया। फिर झट से अपनी जीभ दीदी की चूत पर रख चाटना शुरू कर दिया। और विजय ने बिना देर किए दीदी के चूचों को मसलना शुरू कर दिया। अब दीदी उनके जाल में फंसने लगी थी।

आगे क्या होगा जानने के लिए हमसे जुड़े रहें। कमेन्ट करके अपनी राय जरूर दें।

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