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Hindi Chudai Kahani पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 923 बार

दिसंबर की बारिश में रैपिडो बाइकर ने चूत मारी(December ki barish mein rapido biker ne chut maari)

bond

02 Aug 2017 को प्रकाशित

दिसंबर की बारिश में रैपिडो बाइकर ने चूत मारी(December ki barish mein rapido biker ne chut maari)
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मेरा नाम दीपा है और मैं 45 साल की हूं। मैं शादी-शुदा हूँ और मेरे 2 बच्चे हैं। मैं और मेरे पति हम दोनों नौकरी करते हैं। क्यूंकि मेरा ऑफिस ज्यादा दूर नहीं है, तो मैं मेट्रो से या कभी रपिडो बाइक से घर आ जाती हूं। मैं और मेरे पति हफ्ते में 2 या 3 बार सेक्स कर लेते हैं, और हमारी सेक्स लाइफ भी अच्छी है।

मेरे पति मुझे हमेशा सेक्सी नेट की ब्रा-पैंटी में ही देखना चाहते हैं, तो मेरे पास ज्यादातर ब्रा-पैंटी नेट की ही है। मैं खुद भी सेक्स स्टोरीज पढ़ती रहती हूँ ऑफिस में कभी-कभी, और जब ज्यादा गरम हो जाती हूँ तो अपनी चूत में ऊँगली करके अपनी प्यास बुझा लेती हूँ।

एक दिन ऑफिस में ज्यादा काम नहीं था तो मैंने 2 -3 सेक्स स्टोरीज पढ़ ली। और उस दिन मुझे अपनी चूत का पानी निकलने का टाइम ना मिला तो ऑफिस का काम ख़तम करके मैं जल्दी से रपिडो बाइक बुक की, और अपने घर जाने को तैयार हो गयी। दिसंबर का महीना था, और ठंड बहुत ज्यादा थी। उस पर आज बारिश होने के भी आसार थे।

मैंने अपने रपिडो ऐप में देखा तो राजन नाम का ड्राइवर नीचे आ गया था। मैंने अपना बैग उठाया और टाइम 6:30 बज रहे थे। मैं ऑफिस के गेट पर आ गयी। राजन बाहर बाइक पर खड़ा था। उसकी हाइट अच्छी थी और बिल्ट भी ठीक-ठाक थी। बाहर का मौसम बहुत ही अच्छा हो रहा था। काफी ठंडी हवा चल रही थी और बारिश आने को तैयार थी।

मैंने राजन को बोला कि, “अगर मैं हेलमेट ना पहनूं तो कोई प्रॉब्लम तो नहीं होगी?” उसने कहा कि, “कोई बात नहीं, वैसे भी अभी कोई होगा नहीं।” फिर मैं उसकी बाइक के पीछे बैठ गयी और उसने बाइक चलनी शुरू की। मैंने उसे बोला कि, “थोड़ी बाइक धीरे ही चलाना, मुझे डर लगता है।” उसने कहा, “ठीक है, वैसे आप मुझे पकड़ सकते हो।”

फिर मैंने हाथ उसके कन्धों पर रख दिया। अभी हम थोड़ी ही दूर गए होंगे कि अचानक बहुत ज़ोर से बारिश शुरू हो गयी, और उसके साथ ओले भी गिरने लगे। राजन क्यूंकि बाइक चला रहा था तो वह कुछ ज्यादा ही भीग गया था। उसने कहा कि, “अगर आप तैयार हो तो हम लोग रास्ते में कहीं रुक जाएँ?” क्यूंकि उसको अभी और ड्यूटी भी करनी थी और उसे ठंड भी लग रही थी। तो मैंने बोला, “ठीक है कोई बात नहीं। कहीं कोई जगह देखो तो रुक जायेंगे।”

थोड़ी दूर जाते ही उसे एक पुराना सुनसान खंडहर दिखा। वह शायद कोई पुराना ऑफिस रहा होगा, जो जंगल के आगे बना था। उसने बाइक वहां ले जाकर रोक दी।‌उस मकान के पीछे शेड था तो वहां बाइक खड़ी करके मुझे बोला कि, “हम थोड़ी देर यहाँ वेट करते हैं।” और यह कहते ही उस मकान के अंदर जाने लगा।

मैंने उसे बोला कि, “एक बार अंदर से देख लो कोई है तो नहीं। कोई जानवर या कोई और।” तो उसने मोबाइल की टोर्च से देखा और मुझे बोला कि, “आ जाओ अंदर।” मैं भी उसके पीछे अंदर चली गयी। उसमें 2 कमरे थे एक आगे और एक पीछे। उसने दरवाजे की कुंडी लगाई, क्यूंकि बारिश का पानी अंदर आ रहा था और हम दोनों अंदर वाले कमरे में चले गए।

वहां ज़मीन पर कुछ बोरियां पड़ी थी। मैं उस पर जा कर बैठ गयी। अँधेरा बहुत था तो राजन ने मोबाइल की लाइट जला कर देखा कि वहां पर आग लगाई जा सकती थी। उसने उस खड्ढे में कुछ लकड़ियां डाली और आग लगा कर कुछ ईंटें उस पर रख दी। मैंने पूछा यह क्यों तो बोला कि इन पर कपडे सूखा लूंगा।

थोड़ी देर में वह कमरा गरम होने लगा था। उसने मुझे बोला कि, “मुझे अपने कपड़े सुखाने हैं। तो क्या मैं उतार कर सुखा लूं?” बाहर बारिश बहुत ही तेज़ हो गयी थी। मैंने बोला ठीक है और उसने अपनी पैंट शर्ट उतार दी, और उन ईंटों पर सूखने रख कर मेरे पास आ कर बैठ गया। मेरी सलवार भी गीली हो रही थी तो उसने बोला कि मैं उसे उतार कर सूखा लूं। पहले मुझे थोड़ा अजीब लगा। फिर क्यूंकि मुझे गीले कपड़ों में ठंड लग रही थी, तो मैंने उसे अपनी सलवार उतार कर दे दी।

अब मैं और वह दोनों ऐसे ही बैठे थे। तब उसने अपना अंडरवियर उतारा और उसे भी सूखने रख दिया। मैं ठंड से कांप रही थी तो उसने बोला कि मैं उसके पास जा कर बैठ जाऊं तो ठंड काम लगेगी। मैं उसकी नंगी टांगों से सट्ट कर बैठ गयी। थोड़ी देर बाद मुझे लगा कि जैसे कुछ मेरी टांगों पर चल रहा था। ध्यान से देखा तो राजन अपना हाथ मेरी नंगी टांगों पर फेर रहा था। मैं कुछ ना बोली और धीरे-धीरे राजन का हाथ मेरी पैंटी के पास पहुँच गया और मेरी वाइट नेट की पैंटी के ऊपर से मेरी चूत को सहलाने लगा।

मैंने उसकी और देखा और बोला कि, “क्या कर रहे हो? कोई आ जायेगा यहाँ तो?” उसने कहा कि, “इतनी बारिश में यहाँ कौन आएगा?” और वह मेरी पैंटी के ऊपर से मेरी चूत पर ऊँगली फिराने लगा। उसके बाद उसने झट से मेरे चेहरे को पकड़ा और मेरे होंठों को चूसने लग। पहले तो मैं हड़बड़ायी, क्यूंकि अचानक से ऐसा हुआ। मैंने उसे दूर हटाया और बोली कि, “ना करो, कोई आ जायेगा।”

उसने कहा कि, “दरवाज़ा बंद है और जगह सुनसान। कोई नहीं आएगा इतनी बारिश में।” और वह फिर से मेरे होंठों को चूसने लगा और नीचे मेरी पैंटी में ऊँगली डाल कर मेरी गीली चूत को गरम करने लगा। उसके बाद उसने मुझे कमीज़ उतारने को बोला। मैंने कहा, “कोई देख लेगा हमें तो?” उसने कहा कि, “यहाँ कोई नहीं देख सकता, क्यूंकि कोई खिड़की नहीं है।”

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और यह कह कर वो मेरी कमीज उतारने में मदद करने लगा। मैंने नीचे सफ़ेद रंग की नेट की ब्रा पहनी हुई थी, और मैं उसके सामने अब ब्रा-पैंटी में बैठी थी। उसने मुझे बोरी पर लिटाया और मेरी पैंटी के ऊपर से मेरी चूत को चाटने लगा। धीरे-धीरे उसने मेरी सफ़ेद रंग की पैंटी को उतारा और मेरी टांगों को खोल कर उसे चाटने लगा।

मेरी चूत में से पानी आने लगा था। फिर उसने मुझे बिठा कर मेरी सफ़ेद ब्रा का हुक खोला और उसे भी उतार दिया और मेरी दोनों निप्पल को मुँह में रख कर चूसने लग। मैं भी अब गरम हो रही थी तो मैंने उसके सर पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। उसके बाद उसने मुझे लिटाया और अपना लंड मेरे होठों पर रखा।‌ फिर चूसने को बोल कर मेरी चूत को चाटने लगा।

मेरी चूत को खोल कर मेरे दाने को अपनी जीभ से चाटने लगा, और मैंने उसके लंड को मुंह में डाल कर चूसना शुरू कर दिया। मेरी चूत में से पानी निकल कर बोरियों पर गिर रहा था। उसके बाद वह सीधा हुआ और उसने अपना लंड मेरी चूत के ऊपर रख दिया। इतना गरम लंड जैसे ही चूत पर रखा, मेरी सिसकियां निकलने लगी।

फिर उसने एक झटके से अपना बड़ा लंड मेरी चूत में पूरा डाल दिया। हम दोनों आग में जल रहे थे। तो उसके बाद उसने अपने लंड को मेरी चूत के अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया, और मेरे मुँह से आह आह ऊफ्फ आह आह जोर से राजन की आवाज़ें आने लगी। पूरे कमरे में फच फच की आवाज़ जो मेरी गीली रसीली चूत में से निकल रही थी।

थोड़ी देर के बाद मैंने उसे बोला कि, “आह आह आह राजन, मेरे जानू, बहुत मज़ा आ रहा है। मेरी चूत को फाड़ दो।” उसके बाद मैं ज़ोर से बोली कि, “आह आह राजन, मैं झड़ने वाली हूँ।” और यह बोलते ही मैं झड़ गयी। मेरी चूत के पानी से उसका लंड चिकना हो गया था।

फिर राजन ने ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने शुरू किये। मेरे मुँह से आह आह की आवाज़ें आने लगी थी। मैं दुबारा झड़ गयी थी और फिर राजन ने कहा कि वह भी झड़ने वाला था, और क्या वह मेरी चूत में अपना पानी झाड़ दे। मैं भी बहुत गरम थी, तो मैंने बोला कि, “झाड़ दे मेरी चूत में अपना पानी।”

इतना बोलते ही उसने अपने लंड से पानी की धार से मेरी चूत भर दी और मेरे ऊपर लेट कर मेरा निप्पल अपने मुँह में लेकर चूसने लगा। मेरी चूत में उसका पानी अंदर तक जा रहा था, जो मुझे महसूस हो रहा था। मैं भी उसकी पीठ पर अपना हाथ फेर रही थी। थोड़ी देर के बाद उसने अपना लंड मेरी चूत में से निकाला, और निकलते ही उसका वीर्य मेरी चूत से निकल कर बोरी पर गिरने लगा।

मैंने उसके टॉवल से अपनी चूत साफ़ की और उसके होठों पर किस्स की। फिर अपनी ब्रा और पैंटी उठा कर पहनने लगी। राजन ने मुझे ब्रा पहनने में मदद की और मेरी ब्रा के हुक लगाए। बाहर बारिश अब बंद हो गयी थी, और कमरे के अंदर भी लंड और चूत का मिलन ख़तम हो गया था।

हम दोनों ने अपने कपड़े पहने और उसके बाद राजन मुझे बाइक पर बिठा कर मेरे घर छोड़ने को चलने लगा। अब जाते हुए मैं उसकी कमर में हाथ डाल कर बैठ गयी और जैसे ही मेरा घर आया, मैं थोड़ी पीछे हो कर बैठ गयी। राजन ने मुझे उतारा और जैसे ही मैं उसे पैसे देने लगी, उसने मुझे मना कर दिया कि आज की शाम वह याद रखेगा और उसे पैसे नहीं चाहिए। मैंने हंस कर उसकी और देखा तो उसकी आँखों में ख़ुशी थी, मेरी चूत मारने की।

मैं भी उसका लंड लेकर काफी खुश थी, और उसे बाय बोल कर अपने घर की ओर जाने लगी।

तो यह थी कैसे रपिडो बाइकर ने बारिश में मेरी चूत मारी।

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