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जवान लड़की पठन समय: 12 मिनट पढ़ा गया: 254 बार

एक दिल चार राहें -19

प्रेम गुरु

09 Oct 2024 को प्रकाशित

एक दिल चार राहें -19
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कॉलेज गर्ल हॉट ओरल सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मैंने अपने पड़ोस की एक कमसिन सेक्सी लड़की की पैंटी उतरवा कर उसकी चूत देखी. फिर चूत चाट कर उसे पूरा मजा प्रिया.

मैंने रूम के दरवाजे को बंद कर प्रिया और फिर उसके कीहोल से सुहाना को देखने लगा। सुहाना पेन ड्राइव की मदद से डाटा ट्रान्सफर करने लगी।

उसके बाद जैसे ही उसने आगे की फाइल खोली उसके चेहरे पर हवाइयां सी उड़ने लगी। उसने घबराकर इधर-उधर देखा और फिर अपना सिर पकड़ कर अपनी मुंडी नीचे करके बैठ गई।

थोड़ी देर बाद मैं किसी अनचाहे मेहमान की तरह हॉल में आ गया।“अरे बेबी … क्या हुआ?”“वो … वो …” सुहाना की तो जैसे घिग्गी ही बंध गई थी।“सर … इसमें मेरे फोटो …” कहते हुए उसका गला रुंध सा गया। उसकी तो आवाज ही नहीं निकल पा रही थी।

“कौन से फोटो … कहीं तुम टॉम फोल्डर की बात तो नहीं कर रही?” मैं उसके पास आ गया और उसके कंधे पर हाथ रखते हुए पूछा।“वो.. हाँ … वो.. ये फोटो आपके लैपटॉप में …”“यार मुझे उस दिन तुम्हारे मोबाइल में यह फोटो बहुत खूबसूरत लगे तो मैंने सोचा क्यों ना इन्हें स्क्रीनसेवर पर ही लगा लूं? सच में तुम्हारे फोटो बहुत ही खूबसूरत हैं।”

“सर … आई एम् सॉरी … प्लीज आप ये सब डिलीट कर दें.” सुहाना तो लगा अब रो पड़ेगी।“अच्छा ये टॉम कौन है?”“वो.. वो … मेरा एक फ्रेंड है.”“उसका पूरा नाम?”“टॉम … ता … तापस मुखर्जी.”

”क्या इन सब के बारे में तुम्हारे मम्मी पापा को पता है?”“नहीं सर … मेरे से बहुत बड़ी गलती हो गई आई एम् सॉरी.” उसने मुंडी झुकाए हुए ही उत्तर प्रिया।

“ज़रा सोचो! अगर तुम्हारे मम्मी-पापा को इन सब बातों का पता चल जाए तो?”“नहीं सर … प्लीज … मैं आपके पैर पकड़ लेती हूँ मुझे माफ़ कर दो मैं दुबारा ऐसी गलती नहीं करूंगी.”

सुहाना तो अब सुबकने लगी थी उसकी आँखों से झर-झर आंसू निकलने लगे थे।“देखो तुम इतनी होनहार स्टूडेंट हो … और अभी से इन चक्करों में पड़ गई हो तो तुम्हारी स्टडी और करियर का क्या होगा? तुम्हारे मा-बाप क्या सोचेंगे?”“सर … मेरे से गलती हो गई … मुझे माफ़ कर दें.”“हम्म … ठीक है मैं तुम्हें माफ़ तो कर सकता हूँ पर …”“पर क्या?”

“तुम्हें मेरी एक बात माननी पड़ेगी?”“क … क्या?”“पर … नहीं तुमसे नहीं हो सकेगा रहने दो.”“नहीं सर … आप जो बोलोगे मैं करने को तैयार हूँ.”

“आर यू श्योर?”“हम्म” उसने हाँ में अपने मुंडी हिलाई।“तो मुझे भी एक बार वह पैंटी वाला सीन दिखाना होगा.”“नहीं सर … मैं ऐसा नहीं कर सकती … प्लीज …”“तुम्हारी मर्जी … तुम्हारे मम्मी-पापा तो खुश हो जायेंगे तुम्हारी इन हरकतों को देख और सुनकर!”“ओह … नो …” सुहाना जोर-जोर से रोने लगी थी।

“देखो बेबी … जब तुम उस टॉमी मेरा मतलब तापस मुखर्जी को सब कुछ दिखा सकती हो और उसका देख सकती हो एक बार मुझे दिखाने में भला क्या क्या हर्ज़ है? एक बार सोच लो?”“ओह …” कबूतरी ने इधर-उधर देखते हुए कहा- वो … वो … मैं यहाँ नहीं दिखा सकती.”“कोई बात नहीं चलो बेड रूम में चलते हैं।”“वो आप मम्मी को तो नहीं बताएँगे ना?”“अगर तुम मेरा कहना मान लोगी तो बिल्कुल नहीं.”

“और वो फोटो?”“प्रॉमिस … मैं वो सब डिलीट कर दूंगा तुम्हारे सामने ही!”सुहाना ने मेरी ओर असमंजस और अविश्वास भरी नज़रों से देखा और फिर से अपनी गर्दन झुका ली।मुझे लगा उसने फाइनली मेरे प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है।

“तो रूम में चलें बेबी?”कहते हुए मैं खड़ा हो गया और उसको बाजू से पकड़ कर रूम में ले आया। सुहाना ने अब कोई ज्यादा ना नुकर नहीं की।कमरे में आने के बाद मैंने लाइट जला दी।“प्लीज … ये लाइट बंद कर दो?”“क्यों?”“मुझे शर्म आती है।”“चलो कोई बात नहीं, मैं लाइट बंद कर देता हूँ। कहते हुए मैंने ट्यूब लाइट बंद कर दी।कमरे में ज्यादा रोशनी तो नहीं थी पर जितनी भी थी पर्याप्त थी।

“सर … मुझे बहुत डर लग रहा है.” कहते हुए सुहाना ने फिर से मेरी ओर कातर नजरों से देखा।शायद वह सोच रही थी कि क्या पता आख़िरी समय में मैं अपना इरादा बदल लूं! पर अब जाल में फंसी इस चिड़िया को कैसे छोड़ा जा सकता था।

“बेबी अब ज्यादा नखरे मत करो … जल्दी करो … हमें तुम्हारा प्रोजेक्ट भी आज ही फाइनल करना है ना? और फिर मैं 2-3 दिन बाद बंगलुरु जाने वाला हूँ बाद में तुम्हें बहुत परेशानी होगी.”सुहाना ने पहले तो अपनी कुर्ती को थोड़ा ऊपर उठाया और फिर दोनों हाथों के अंगूठे कमर में बंधे पायजामे में फंसा कर नीचे करने लगी।

गोल गहरी नाभि ने नीचे उभरा हुआ सा पेडू और उसके नीचे गुलाबी रंग की पतली सी पैंटी (कच्छी)। उसके पपोटे और चीरा तो उस हरे रंग की किनारियों वाली गुलाबी कच्छी में साफ़ नज़र आने लगे थे। कोमल, रेशम सी मुलायम, गुलाबी स्निग्ध जांघें।“आइलाआआ … वाह … अप्रतीम … बहुत खूबसूरत …” मेरे मुंह से अचानक निकला।

सुहाना मेरी आवाज से थोड़ा चौंकी और उसने फिर से अपने पायजामे को ऊपर करना शुरू कर प्रिया।“अरे बेबी … इतनी क्या जल्दी है? थोड़ा तसल्ली से देखने तो दो?”“वो … आपने देख तो लिया.”

“अभी कहाँ देखी है ज़रा अपनी अँगुलियों से ये गुलाबी पर्दा तो थोड़ा सा हटाओ?” मैं खड़ा होकर उसके पास आ गया।

सुहाना तो अब किसी शिकंजे में फंसी चिड़िया की तरह फड़फड़ाने ही लगी थी। अब उसने अपनी अँगुलियों से उस गुलाबी कच्छी का किनारा पकड़कर एक तरफ कर प्रिया।

हे भगवान् … गुलाबी रंग के पपोटे और उनके बीच का रक्तिम चीरा तो मात्र 3 इंच का रहा होगा। दोनों फांकें आपस में चिपकी हुयी थी और बीच में गुलाबी रंग की कलिकाएँ तो ऐसे लग रही थी जैसे अभी बाहर आ जायेंगी।

गोरी चिट्टी बेदाग़ रोमविहीन गंजी बुर … मैं तो धड़कते दिल से अपने होंठों पर जीभ ही फिराता रह गया।एक बार तो मुझे धोखा सा होने लगा कि शायद अभी इसकी बुर पर रेशमी बाल आये ही नहीं होंगे। हाँ मुझे याद आया उस फोटो में तो इसके छोटे छोटे बाल ट्रिम किए हुए दिखाई दे रहे थे मुझे लगता है इसने 1-2 दिन पहले ही वैक्सिंग करके अपनी मुनिया के बाल साफ़ किए होंगे।

अब मैं नीचे बैठ गया और उसके नितम्बों को पकड़कर उसे थोड़ा अपनी ओर खींचा और उसकी बुर पर एक चुम्बन ले लिया। कमसिन बुर की मादक खुशबू मेरे नथुनों में भर गई।

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“ओह … नो … सर क्या कर रहे हो … प्लीज … छोड़ो मुझे … मुझे घर जाने दो.” उसने मेरे सिर को हटाने की कोशिश की।“बस … थोड़ी देर ओर देख लेने दो … मैं बस एक बार इस पर किस कर लूं फिर तुम्हें कुछ नहीं कहूंगा.”सुहाना ने अविश्वास भरी नज़रों से मेरी ओर देखा।

“मेरा विश्वास करो बेबी!”“ओह …” एक लम्बी साँस लेते हुए सुहाना ने फिर से अपनी आँखें बंद कर ली।

अब मैंने धीरे से उसकी कच्छी को नीचे कर प्रिया। हे भगवान्! रेशम सी कोमल और गुलाबी फांकों वाली बुर की खूबसूरती को शब्दों में तो बयान किया ही नहीं जा सकता।

अब मैंने अपने होंठ उसके चीरे पर लगा दिए। पहले तो उसे सूंघा और फिर उसपर अपनी जीभ फिराने लगा।

सुहाना ने मेरे सिर के बालों को अपने हाथों में जोर से भींच लिया। अब मैंने अपनी जीभ को नुकीला किया और फिर से उसके चीरे के ऊपर फिराने लगा। कभी-कभी मेरी जीभ उसके दाने से भी टकरा रही थी।

हे भगवान्! उसकी मदनमणि तो अभी से फूलकर किशमिश के दाने जैसी हो चली थी। मैंने 2-3 बार अपनी जीभ को ऊपर नीचे फिराया तो मुझे लगा कुछ नमकीन और खट्टा-मीठा सा रस मेरी जीभ पर महसूस होने लगा है।

“आआईईई … बस सर … अब मुझे छोड़ दो … प्लीज … आह …” सुहाना ने मेरे सर के बालों को कस कर अपनी मुट्ठी में भर लिया था और आँखें बंद किए मिमियाती जा रही थी।

मैंने उसकी बुर को चूमना और चाटना चालू रखा और फिर चुपके से अपने कुरते की जेब से पड़ा मोबाइल निकाल लिया और फिर उसके कैमरे को चालू कर के विडियो ऑन कर प्रिया।मैंने उसके चीरे और फांकों पर अपनी जीभ की पकड़ बनाए रखी और फिर उसकी पूरी बुर को अपने मुंह में भर लिया।

सुहाना तो ‘आईई … आह … ’ करती ही रह गई।

“सर … मुझे पता नहीं क्या हो रहा है … मुझे चक्कर से आने लगे हैं … सर … प्लीज मुझे घर जाने दो … आह … ईईईई.” सुहाना बड़बड़ाने सी लगी थी।उसका शरीर थोड़ा अकड़ने सा लगा और उसने 2-3 झटके से खाए और फिर तो मेरा मुंह जैसे किसी मीठे और ताजा शहद से भर गया।

मैं तो इस रस की अंतिम बूँद तक पी जाना चाहता था. पर इससे पहले कि मैं कुछ और करता सुहाना ने मेरा सिर पीछे धकेल प्रिया।और वो जोर-जोर की साँसें लेने लगी। उसे इस हॉट ओरल सेक्स का पूरा मजा मिला था.

अब उस ध्यान मेरे मोबाइल पर गया।“ओह … सर … ये क्या कर रहे हो … ओह … नो.. सर ऐसा मत करो … प्लीज!” सुहाना नीचे बैठ गई और उसने अपनी जांघें भींच ली और शर्म के मारे अपने हाथ अपनी आँखों पर रख लिए।सुहाना की आँखों में आंसू आने लगे थे। एक बार तो मुझे भी लगा कि मैं इस बेचारी इस कमसिन कबूतरी पर ज्यादती ही कर रहा हूँ पर अब मेरे लंड को यह सब कैसे बर्दाश्त हो सकता था।

“अरे बस एक झलक तुम्हारे इस हुस्न की इसमें कैद हुई है। तुम भी देखना … तुम्हें भी बहुत अच्छी लगेगी।““सर … आपने मेरे साथ चीटिंग की है.”“ओके … चलो मैं मोबाइल कैमरा बंद कर देता हूँ … चलो अब खुश?” कहते हुए मैंने उसे बाजू पकड़कर उठाया तो सुहाना ने उठते समय अपनी पैंटी और पायजामे को भी ऊपर कर लिया था।

अब मैंने उसे बेड पर अपने पास बैठा लिया- अच्छा सुहाना एक बात और बताओ?“क … क्या?”“वो टॉम के साथ कभी तुमने फिजिकल रिलेशन भी बनाए या नहीं?”

सुहाना कुछ नहीं बोली वह तो बस अपना सर नीचा किए बैठी रही।

मुझे थोड़ा संदेह तो पहले से ही था पर जिस प्रकार सुहाना अपना सिर नीचे किये कुछ नहीं बोल रही थी इसका मतलब बात केवल चूमा-चाटी तक ही सीमित नहीं रही होगी।

“मैंने उस फोल्डर में तुम्हारे और भी फोटो देखे थे.”“वो … उसने मेरी जानकारी के बिना ये फोटो ले लिए थे।”“पर वह इन फोटोज और वीडियोज के साथ तुम्हें ब्लैकमेल भी कर सकता है?”सुहाना किमकर्त्तव्यविमूढ़ बनी मेरी ओर देखती रही।

“चलो कोई बात नहीं जवानी में अक्सर ऐसी भूल हो जाती है। तुम चिंता मत करो … मैं तुम्हारी इस परेशानी को भी दूर कर सकता हूँ.”“कैसे?” अब तो सुहाना की आँखों में एक नई चमक सी आ गई थी।“मैं उस छोकरे के फादर को जानता हूँ.”“आप कैसे जानते हैं?”

“तुम यह सब छोड़ो!”“ओह … सर … प्लीज बताओ ना?”“अरे बेबी उसका फादर हमारी कंपनी का बहुत बड़ा डीलर है. और एक दो बार वह उस लौंडे को भी अपने साथ लाया था। मैं बहाने से उसे ऑफिस में बुला लूंगा और उसका मोबाइल अपने पास रख लूंगा और फिर सारे फोटो और विडियो डिलीट कर दूंगा।”

“आप सच बोल रहे हैं?”“हंड्रेड परसेंट!”“ओह … थैंक यू वैरी मच सर!” सुहाना के चहरे पर अब सुकून सा नज़र आने लगा था।

हॉट ओरल सेक्स स्टोरी का मजा लेते रहेंsupport@mohakkisse.com

हॉट ओरल सेक्स स्टोरी जारी रहेगी.

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एक दिल चार राहें

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पाठकों की राय

3 टिप्पणियां

राजन देसाई

3 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

माया देवी

3 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

होलकर राजा

4 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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