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Office Sex • पठन समय: 10 मिनट • पढ़ा गया: 670 बार

नई चूत का मज़ा लेने का नशा-2

चूतेश

21 Mar 2012 को प्रकाशित

नई चूत का मज़ा लेने का नशा-2
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नीलम रानी की चूत लेने का फितूर मेरे दिल-ओ-दिमाग पर छा गया था। हालांकि मुझे कोई चुदाई की तकलीफ नहीं थी, रोज़ अपनी खूबसूरत, सेक्सी पत्नी की चुदाई करता ही था लेकिन नई चूत का मज़ा लेने का ख्याल एक नशा बनकर मुझ पर चढ़ गया था।

चौथे दिन मेरा सब्र जवाब दे गया, मैंने नीलम रानी के मोबाइल पे काल किया और कहा कि वो स्कूल से छुट्टी ले आधे दिन की और होटल गेटवे में आ जाये।होटल में मैंने फोन किया और एक रूम बुक किया, अपनी बीवी को फोन किया और कहा कि मेरी होटल में एक मीटिंग है और मैं रात नौ बजे तक घर आऊँगा।

मैं होटल चला गया, रूम में चेक-इन करके नीलम रानी की बाट जोहने लगा। ठरक के मारे मेरा खून उबल रहा था और लण्ड था कि बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था।खैर बड़ी मुश्किल से वक्त गुज़रा। नीलम रानी डेढ घंटे के बाद पहुँची।

उसने जीन्स के ऊपर पीले रंग का टॉप पहना था, बड़ा गज़ब ढा रही थी नीलम रानी !कंधे पर एक खूबसूरत सा बैग था और पैरों में हाई हील की चप्पल जिसमें उसके सुन्दर पैर और भी ज्यादा सुन्दर लग रहे थे।

मैंने आव देखा ना ताव, लपक के उसे अपनी बाँहों में जकड़ कर बेतहाशा चूमना शुरू कर प्रिया।काफी देर तक उसकी जीभ चूसी और उसका मुखरस पिया, फिर मैंने उसकी टॉप उतार के एक तरफ को फेंक प्रिया।उसने अंदर ब्रा भी नहीं पहन रखी थी।

उसके तने हुए चूचुक मानो न्योता दे रहे थे कि आओ और हमें चूसो।माशाअल्लाह… क्या मम्मे थे ! भारी, लेकिन तने हुए।मैंने दोनों चूचियों को दबाया।

नीलम रानी चिहुँक उठी, बोली- सर इन में हमेशा अकड़न सी रहती है, और ये गर्म भी हो जाती हैं अपने आप। जब गर्म होती हैं तो अकड़न कई गुना बढ़ जाती है।‘चिन्ता ना कर रानी, अभी इनकी सारी गर्मी और अकड़न दूर कर दूँगा !’ मैं बोला और बड़े ज़ोर से दोनों चूचुक निचोड़े और निप्पलो को कस के उमेठा।

वो सी सी करने लगी तो मैंने लपक कर एक चूची मुँह में लेकर चूसनी शुरू कर दी और दूसरी चूची को पूरे ज़ोर से दबाता रहा। हाय राम, कितनी ज़ायकेदार चूचियाँ थी !मैं हचक हचक कर बारी बारी से दोनों चूचियाँ चूसता गया, एक चूची चूसता तो दूसरी को दबा दबा कर निचोड़ता।फिर पहली चूची दबाता और दूसरी को चूसता।

नीलम रानी मस्ती में चूर होकर आहें भर रही थी, उसकी कसमसाहट बढ़ती ही जा रही थी, उसके चूचुक और भी गर्म हो गए थे।मेरे लण्ड का तो हाल पूछो ही मत, गुस्साये सर्प की तरह फुनकार रहा था, मेरे टट्टों में दबाब बहुत बढ़ चुका था, लगता था कि बस फटने ही वाले हैं।जब मुझसे न रहा गया तो मैंने नीलम रानी की चूची छोड़कर जल्दी जल्दी अपने सारे कपड़े उतार फेंके। कोई इधर गिरा कोई उधर जाके पड़ा।

‘हाय…हाय…अम्मा री…कितना लंबा और मोटा है सर आपका लिंग…यह तो मुझे फाड़ देगा नीचे… सर प्लीज़ ज़रा धीमे धीमे करियेगा !’‘तेरी फाड़ूँगा बाद में, पहले इसे अच्छे से चूस… पूरा का पूरा अंदर जाना चाहिये !’ इतना कह कर मैं बिस्तर पर बैठ गया और नीलम रानी का सर पकड़ कर उसका मुँह एकदम लण्ड से सटा प्रिया।

नीलम रानी ने पहले तो पूरे लौड़े को नीचे से ऊपर तक चूमा, टट्टे सहलाये और फिर बड़े दुलार से खाल पीछे खींच के टोपे को नंगा किया।टोपे को नीचे ऊपर से पहले तो सूंघा और फिर प्यार से उसने जीभ इसके सब तरफ फिरानी शुरू कर दी, चाट चाट के सुपारी को टुन्न कर डाला।लण्ड फुदक फुदक के अपनी बेसबरी दिखा रहा था।

यह तो एक खूब खेली खाई चुदाई की खिलाड़ी थी। लण्ड का टोपा, जो फूल के कुप्पा हो गया था, नीलम रानी के मुँह के अन्दर गले से सटा हुआ था और वो मुखरस निकाल निकाल के दबादब चूसे जा रही थी।जब वो मुँह आगे पीछे करती तो उसके महा उत्तेजक मम्मे भी फ़ड़क फ़ड़क कर इधर उधर हिलते डुलते और मेरे मज़े को सैंकड़ों गुणा बढ़ा देते।यारो, मस्ती में मैं चूर हो गया था !

नीलम रानी लण्ड चूसने के साथ साथ मेरे अंडे भी बड़े हल्के हल्के हाथ से सहला रही थी।मेरे मुँह से अब आहें निकल रही थीं, सी सी करता हुआ मैं झड़ने के क़रीब जाने लगा, उसका सिर पकड़ कर जो मैंने चार तगड़े धक्के मारे हैं तो लण्ड झड़ा, ऐसा लगा कि लण्ड एक पटाखे की तरह फट गया हो।

झर झर करके लण्ड तुनके मरता और हर तुनके के साथ एक बड़ी सी वीर्य की बूंद नीलम रानी के मुँह में डाल देता।नीलम रानी ने अब लौड़ा थोड़ा बाहर कर लिया था, सिर्फ सुपारी मुँह में थी, वो सारा का सारा मक्खन पी गई।जब लण्ड उसके मुँह में ही बैठ गया तो उसने बाहर निकाल प्रिया।

एक छोटी बूंद लौड़े के छेद पर बैठी हुई थी, नीलम रानी ने उसे भी अपनी जीभ से चाट लिया।मैं भी लण्ड की तरह मुरझा के बिस्तर पर लेट गया। नीलम रानी मेरे बग़ल में लेट गई और बड़े प्यार से मेरे बालों में उंगलियाँ घुमाने लगी।‘सर इसे मुँह में तो ले लिया जैसे तैसे लेकिन नीचे का छेद तो बहुत छोटा है। कैसे जायेगा ये मूसली जैसा भीतर?’

मैं उसके निप्पल उमेठता हुआ बोला- अरे रानी… बड़े मज़े से घुसेगा.. औरत की चूत जो है हाथी का लण्ड भी लील सकती है… यह तो इंसान का है.. अच्छा यह तो बता, लण्ड चूसने में मज़ा आया?नीलम रानी ने करवट मेरी तरफ ली और बोली- हाँ सर.. मज़ा तो ख़ूब आया। आपकी क्रीम कितनी स्वाद है। पी कर आनन्द आ गया… यह तो मैं रोज़ पीना चाहूँगी।

‘हाँ हाँ रोज़ पीना… अब सुन… मुझे सर कहना बंद कर… सर सिर्फ दफ्तर में। मुझे चोदने वालियाँ मुझे राजा या राजे कह के पुकारती हैं… समझी !’ मैंने प्यार से उसकी चूचियाँ मसलीं।‘आह…हाय राजा, क्या करते हो? तुम बहुत सताते हो। जब तुम इन्हें दबाते हो तो पता नहीं क्यों मेरे बदन में बिजली दौड़ने लगती है मेरा दिल करता है कि तुम मुझे जकड़ कर मेरी चटनी पीस दो। पूरा बदन ऐंठ जाता है, जी में आता है कि कोई मेरे शरीर को कुचल के रख दे। ऐसा क्यों होता है… बताओ ना राजे?’

‘यह निशानी है कि तुझे वासना ने जकड़ लिया है… अब जब तक तेरी जम कर चुदाई नहीं होगी एक मोटे तगड़े लण्ड से, यह अकड़न और यह गर्मी यूँ ही तुझे दुखाती करती रहेगी !’और मैंने नीलम रानी को खींच कर अपने ऊपर लिटा प्रिया।

‘आ चल…आज तेरा कचूमर बना ही दूँ !’ उसका सुन्दर मुखड़ा अपने मुँह से चिपका कर मैंने उसके होंठ चूसने शुरू कर दिये और साथ ही साथ उसकी चूचियाँ दबोच कर उन्हें पूरी ताक़त से मसलने लगा।नीलम रानी ने भी बड़े मज़े ले ले के अपने होंठ चुसवाये।

फिर कुछ देर के बाद मैंने उसकी कमर पकड़ कर थोड़ा उसे ऊपर को घसीटा ताकि मम्मे मेरे मुँह के पास आ जाएँ। नीलम रानी के बड़े बड़े चुचुक जैसे ही मेरे मुँह के सामने आये, मेरे बदन में वासना की आग भड़क उठी, मैंने बड़े ज़ोर से एक चूची में दांत गाड़ दिये और दूसरी चूची को पूरी ताक़त से हाथों से ऐसे निचोड़ा जैसे धुलने के बाद तौलिये को निचोड़ते हैं। चूचुक वाकई मे बहुत सख्ताये हुए थे।

नीलम रानी गहरी गहरी साँसें लेने लगी। बदल बदल के मैंने चूचियों को चूसना, काटना और मसलना जारी रखा।नीलम रानी अब तड़पने लगी थी, उस पर कामावेश पूरा चढ़ गया था। मैंने एक उंगली उसकी चूत में डाली, चूत पूरी तरह रस से सराबोर थी।उंगली घुसते ही वो एकदम से कंपकंपा उठी और हाय हाय करने लगी, उसने मेरे बाल कस के जकड़ लिये थे और वहशियों की तरह वो मेरा मुँह अपने चूचुकों में ज़ोर ज़ोर से रगड़ रही थी जैसे कि मेरा मुँह चूचियों में घुसेड़ देना चाहती हो।

अब उसे एक तगड़े लण्ड से चुदवाने की गहरी इच्छा बावला बनाये जा रही थी।मैंने करवट लेकर नीलम रानी को बेड पर पटक प्रिया और खुद उसके ऊपर चढ़ गया, तुरंत उसने अपनी टांगें फैला लीं।एक तकिया मैंने उसके चूतड़ों के नीचे टिका प्रिया और पहले उसकी झांटों पे हाथ फेरा। उसकी झांटें गहरे काले रंग की और बहुत घनी घुँघराली थीं, हाथ फेरा तो लगा किसी बढिया ग़लीचे को छू लिया।

फिर उंगली दुबारा चूत में दी।जैसे ही उंगली थोड़ी सी अंदर घुसी, उसकी चूत का पर्दा रास्ते में आ गया, मैं भौंचक्क हो गया।यह नीलम रानी तो अभी तक कुमारी थी।

उसकी बातों से या उसके लण्ड चूसने के ज़बरदस्त स्टाइल से तो लगता था कि वो घाट घाट का पानी पी चुकी है।शायद वो मर्दों के साथ लण्ड चूसने के आगे न बढ़ती हो।अब मुझे शक सा भी होने लगा था कि पता नहीं चुदवाएगी या नहीं !

कहानी जारी रहेगी।

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नई चूत का मज़ा लेने का नशा

कुल भाग: 4
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पाठकों की राय

3 टिप्पणियां
ध

ध्रुव

4 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

व

विनी कुमार

4 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

र

राज गुरू

5 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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