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जवान लड़की पठन समय: 10 मिनट पढ़ा गया: 759 बार

चेतना की चुदाई उसी के घर में -3

सुशान्त चन्दन

11 Sep 2020 को प्रकाशित

चेतना की चुदाई उसी के घर में -3
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अब तक आपने पढ़ा..मैंने कहा- जान.. अगर तो इसको खा जाएगी.. तो मैं तुझे कैसे चोदूँगा?वो मुस्कुराने लगी.. बोली- खा तो लूँगी पर मुँह से नहीं..मैं हँस पड़ा।फिर धीरे-धीरे उसने लण्ड के टोपे को मुँह में ले ही लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी।फिर हम 69 के पोज में आ गए और मैं उसकी चूत चाटने लगा.. वो मेरा लण्ड चूसने लगी। काफी देर तक हम ऐसे ही करते रहे।अब आगे..

तब हम दोनों काफी गर्म हो गए थे.. मेरा लण्ड भी चूत में जाने को बेक़रार हो रहा था.. तो मैंने उसे सीधा लिटाया और उसके पैर अपने कंधों पर रखे.. इससे उसकी चूत थोड़ी ऊपर आ गई।उसकी चूत बहुत कसी हुई लग रही थी। फिर मैंने उसकी दोनों टांगों को उठाया.. और उसके बीच में बैठ गया। मैंने उसकी चूत को पहले हल्के से उंगली से सहलाया और फिर उसके अन्दर अपनी एक उंगली डाली।वो भी मेरी उंगली का मजा लेने लगी, फिर मैंने अपनी दो उंगलियाँ डालीं और लौड़े के लिए चूत का मुँह खोल प्रिया।

फिर मैंने धीरे-धीरे जोर बढ़ाया.. साथ ही उसके मुँह पर अपना मुँह रख प्रिया और एक जोर का धक्का मार प्रिया.. जिससे उसकी चीख निकल गई.. पर मुँह में दबी रह गई, उसकी आँखों में आंसू आ गए.. वो रोने लगी।मेरा लण्ड तब तक पूरा अन्दर तक जा चुका था और चेतना की चूत से खून निकल रहा था। कुछ देर फिर मैं उसे चूमता रहा और उसके मम्मे चूसता रहा।

कुछ देर बाद उसका दर्द कम हुआ तो वो अपनी कमर हिलाने लगी तो मैंने अपनी गति बढ़ाई और उसकी चूत चोदने लगा। उसके पैर मेरे कन्धों पर थे और मैं उसकी गाण्ड पकड़ कर उसकी चूत चोद रहा था।

कुछ देर इसी तरह चोदने के बाद मैं नीचे आ गया और लेट गया और उसको ऊपर आने को कहा। मैंने नीचे लेट कर अपना लण्ड हाथ से पकड़ कर सीधा खड़ा किया और उसने मेरे ऊपर से आकर अपनी चूत को मेरे लण्ड के ऊपर रखा और धीरे-धीरे मेरे लण्ड पर बैठने लगी।

जब मेरा लण्ड उसकी चूत में पूरी तरह अन्दर चला गया.. तो वो ऊपर से खुद चुदाई करने लगी। इस दौरान मैं कभी उसके चूतड़ मसलता तो कभी उसकी चूचियाँ मसकता रहा।कुछ देर वो ऊपर से चुदाई करती रही.. फिर मैं उसकी गाण्ड पकड़ कर नीचे से धक्के मारने लगा। थोड़ी देर तक मैं उसकी चूत नीचे से चोदता रहा।अब वह मेरे हर धक्के पर ‘आह्ह.. ऊह्ह्ह ओह्ह… अऽऽर्र.. आआह्ह्ह्ह्ह..’ कर रही थी, उसके हाथ मेरी पीठ पर थे और वह अपने नाखून मेरी पीठ में गड़ा रही थी, उसने अपनी टांगों को मेरी टांगों से ऐसे लिपटा लिया था.. जैसे सांप पेड़ से लिपट जाता है।मुझे बहुत आनन्द आ रहा था, उसके ऐसा करने से मेरा लण्ड उसकी चूत की पूरी गहराई नाप रहा था और हर शॉट के साथ वह पूरा आनन्द ले रही थी।

वो चुदासी सी होकर मचलते हुए बोल रही थी- आह्ह.. सुशान्त.. प्लीज़ कम ऑन..न.. फक मी हार्ड..!

उसकी साँसें तेज हो गई थीं और पूरे कमरे में ‘आ..आ… आह… उह…’ की आवाजें गूंजने लगीं और फिर ‘आह्ह.. आह्ह.. उफ्फ फ्फ्.. श्ह्ह्ह्ह्ह्..’ की आवाजें करते-करते वो फिर से झड़ गई।

अब उसकी चूत और चिकनी हो गई थी और मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी, मैं उसकी रस भरी चूत में कभी तेज शॉट और छोटे शॉट.. तो कभी तेज शॉट और लॉन्ग शॉट लगाता रहा।

जब मैं छोटे शॉट लगाता तो उसको लगता कि उसकी जान निकल रही है.. जब लॉन्ग शॉट लगाता.. तो उसको दर्द होता था।मुझको इस वक्त जन्नत का सुख मिल रहा था। थोड़ी देर में उसका शरीर फिर से ऐंठने लगा और मुझको भी लगा कि मेरा माल भी निकलने वाला है। मैंने अपना लण्ड उसकी चूत से जैसे ही निकाला.. उसकी पिचकारी भी छूट गई.. वो झड़ चुकी थी।

मैंने अपना लण्ड उसके मुँह में डाल प्रिया.. फिर दो-तीन झटकों के बाद मेरा सारा माल उसके मुँह में निकल गया। वो मेरा सारा पानी चाट गई और अपनी जीभ से मेरा लण्ड भी साफ़ कर प्रिया।

फिर हम दोनों उठे.. बाथरूम में जाकर एक-दूसरे को साफ़ किया और वापिस बेडरूम में आकर चेतना मेरी ओर अपनी गाण्ड करके कपड़े पहनने लगी। मैं तो नशीली आँखों से उसकी गाण्ड देखता रह गया। एकदम दूध जैसी गोरी और मुलायम भीगी हुई गाण्ड के ऊपर पानी की बूँदें मस्त लग रही थीं.. जिसको देख कर मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया।

मैं फिर से उसके पास गया और उसके बालों को हटा कर उसकी गर्दन पर किस किया।तो चेतना ने मुस्कुराते हुए कहा- क्या इरादा है?मैंने कहा- मैं तुम्हारी गाण्ड मारना चाहता हूँ।चेतना ने कहा- नहीं.. वहाँ बहुत दर्द होगा!

तो मैंने कहा- नहीं जानू.. मैं दर्द नहीं होने दूँगा और तुमको बहुत मजा भी आएगा..उसने कहा- नहीं यार.. अभी रहने दो..!

लेकिन थोड़ी नानुकर के बाद चेतना गाण्ड मराने को तैयार हो गई। मैं काफी खुश हुआ.. क्योंकि मेरे मन की तमन्ना पूरी होने जा रही थी।फिर उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने नंगे बदन पर खींच लिया। ऐसा करने से मैं उसकी चूचियों पर जा गिरा और उसकी चूचियाँ मेरे होंठों से सट गईं, एक बार फ़िर मेरे लन्ड में कसाव आने लगा।

मैंने अपना हाथ जैसे ही उसके बुर की तरफ़ रखना चाहा.. वो एकदम से पलट गई.. जिससे मेरा हाथ उसके मखमली चूतड़ों पर चला गया। अब मैं उसके चूतड़ों को सहला रहा था।फिर मैं उठा और उसके कूल्हों पर चुम्मियाँ करने लगा, मैंने अपनी जीभ चेतना गाण्ड में घुसा दी.. चेतना को बड़ा अजीब सा लगा।

चेतना बोली- मेरी गाण्ड से अपनी जीभ निकाल.. यह गन्दी जगह है।फिर मैं बोला- रानी.. हम जिससे प्यार करते हैं.. उसकी कोई चीज भी हमें गन्दी नहीं लगती।अब तक मैं उसकी गाण्ड को अच्छी तरह से चाट चुका था.. उसके बाद चूतड़ों को चूसने लगा।

फिर चेतना ने मुझे क्रीम लाकर दी और कहा- लो मेरी गाण्ड पर लगा लो.. नहीं तो तुम मेरी गाण्ड का भुरता ही बना दोगे।मैंने चेतना की गुलाबी गाण्ड में क्रीम को अच्छी तरह लगा प्रिया तथा अपने लन्ड पर भी लगा लिया।

चेतना की गाण्ड काफ़ी सुन्दर लग रही थी। चेतना की गाण्ड में मैंने जब उंगली डाली.. तो उसे काफ़ी अच्छा लगा।कुछ देर तक चेतना की गाण्ड में अपनी उंगली अन्दर-बाहर करने के बाद चेतना की गाण्ड को अपने हाथों से खोला और अपना लण्ड चेतना की गाण्ड के छेद पर रगड़ने लगा।

अब मेरा खड़ा लण्ड चेतना के चूतड़ों पर फ़िसलने लगा।फिर मैंने अपने लण्ड को उसकी गाण्ड पर रखा और धीरे से धक्का मारा तो मेरे लण्ड का अगला हिस्सा उसकी गाण्ड में चला गया और वो जोर से कहने लगी- उई…ईए माँआ.. मर गई.. सीई..ईई अए.. उफ्फ्फफ्फ्फ़..!

कुछ देर तक दर्द का आलम रहा.. मैं धीरे-धीरे उसकी चूची को मसलता रहा था और फिर जब उसका दर्द कम हुआ तो.. मैंने फिर एक जोर का धक्का मारा।इस बार मेरा पूरा लण्ड उसकी गाण्ड में उतर गया था और वो आगे की तरफ झुकने लगी।

मैंने उसके कंधों को जोर से पकड़ लिया और उसको झुकने नहीं प्रिया। फिर मैंने अपने लण्ड को थोड़ा निकाल प्रिया और तुरन्त एक और करारा झटका दे डाला।

इस बार मैंने देखा कि चेतना की आँखों से पानी की कुछ बूंदें निकलने लगीं.. पर चेतना मुझसे रुकने के लिए तक नहीं बोली.. शायद वो गाण्ड का भरपूर मजा लेना चाहती थी।क्रीम के लग जाने से चेतना की गाण्ड काफ़ी चिकनी हो गई थी, अब चेतना को काफ़ी मजा आने लगा।

फिर मैं अपने लण्ड को धीरे-धीरे अन्दर-बाहर करने लगा। करीब 5 मिनट तक धीरे-धीरे करने के बाद उसकी गाण्ड थोड़ी ढीली हुई और मेरा लण्ड अब आराम से जाने लगा तो मैंने अपनी गति बढ़ा दी।

अब उसे भी मजा आने लगा था और वो अपनी गाण्ड उठा-उठा कर मेरे धक्कों का जवाब दे रही थी।मैं भी पूरे जोश के साथ धक्के पे धक्के मार रहा था। पूरा कमरा उसकी सिसकारियों से गूंज रहा था और वो बस मजा ले रही थी।करीब 15 मिनट तक चेतना की गाण्ड चोदने के बाद मैंने उसकी गाण्ड में अपना गर्म वीर्य छोड़ प्रिया।

हम दोनों पूरी तरह थक चुके थे। उसमें इतनी हिम्मत नहीं थी कि वो अपने कपड़े पहन सके। मैंने उसको जल्दी जल्दी-जल्दी कपड़े पहनाए.. क्योंकि डर था कि कहीं कोई आ ना जाए।फिर मैंने उसकी चूचियों पर फिर किस किया, बदले में उसने मेरे लण्ड को चूमा।मैंने बोला- अगले सप्ताह मेरे घर पर कोई नहीं रहेगा.. सब एक शादी में जाने वाले हैं.. सिर्फ़ मैं नहीं जा रहा हूँ। तुम आ जाना।

यह बात सुन कर वो खुशी से मुझसे लिपट गई, फिर मैंने उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए.. जिन्हें वह चूसने लगी।

अगले सप्ताह मेरे घर पर जो हुआ जानने के लिए इंतजार कीजिएगा.. मेरी अगली कहानी का..दोस्तो.. आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी.. मुझे मेल करके जरूर बतायें.. इस पर भी आप अपने सुझाव भेजें।मुझे आपके मेल का इन्तज़ार रहेगा।support@mohakkisse.com link is https://www.facebook.com/profile.php?id=100010396984039

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चेतना की चुदाई उसी के घर में

कुल भाग: 3
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पाठकों की राय

3 टिप्पणियां
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nt0596

2 months ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

बिभूति आनन्द

2 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

सुरभि सेक्स

2 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

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