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चाची की चुदाई पठन समय: 5 मिनट पढ़ा गया: 921 बार

चाची ने चुदाई का तजुर्बा दिला प्रिया-1

साहिल

30 Jun 2012 को प्रकाशित

चाची ने चुदाई का तजुर्बा दिला प्रिया-1
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साहिलदोस्तो, आज मैं आप लोगों को अपनी कहानी सुना रहा हूँ।मेरी यह कहानी बिल्कुल खरे सोने की तरह सही है।बात उस वक्त की है जब मैं 19 साल का था। मेरे चाचा का इन्दौर में काम चलता था और उनको कई दिनों तक बाहर रहना पड़ता था।उनकी शादी हुए 15 साल हो गए थे और उनके एक बच्चा था मेरी चाची सायमा की उम्र करीब 35 साल की होगी।देखने में वो बस ठीक-ठाक ही थीं।मैं जवान हो रहा था, मेरे दिल में अक्सर चाची को देख कर पता नहीं क्यों हलचल सी होती थी।यह हलचल क्या थी..! यह उस वक्त पता नहीं था।मैं जब भी रात को अकेला लेटता था, तो चाची का ख्याल अक्सर मेरे दिमाग में आ जाता था।वो बारिश की रात मुझ को आज भी याद है जिसने मेरी ज़िन्दगी को बदल कर रख प्रिया।उस दिन सुबह से ही पानी गिर रहा था, चाचा बाहर थे, घर में मैं और चाची थीं और छोटा बच्चा था।मैंने खाना चाची के साथ ही खाया और सोने को जाने की सोच रहा था, तभी चाची ने मुझको रोक लिया और कहा कि आज मैं उनके कमरे में ही सो जाऊँ।मैं कभी चाची के कमरे में नहीं सोया था तो मुझको सुन कर अजीब सा भी लगा, मगर अच्छा भी लगा।मैं ऊपर जाकर अपना बिस्तर उठा लाया और ज़मीन पर ही बिछा लिया।चाची अभी रसोई में ही थीं, जब तक वो अपना काम निपटा कर आईं, मैं सो चुका था।रात में करीब एक बजे मेरी नीन्द खुली, किसी की दर्द भरी सिसकारियां सुन कर मैंने ध्यान लगा कर सुना, वो चाची की आवाज़ थी।कमरे में अंधेरा था, मैंने गौर से देखा चाची बिस्तर पर लेटी थीं और उनकी टाँगों के बीच तकिया दबा था। वो तकिये को अपनी दोनों टाँगों के बीच दबा कर उस को ज़ोर-ज़ोर से हिला रही थीं।मैं घबरा कर उठ बैठा और चाची से मुखातिब हुआ।मैं- चाची क्या बात है.. क्या तबियत खराब है?वो अचानक घबरा गईं और उन्होंने तकिया दूर फेंक प्रिया।मैंने अन्दाज़ा लगाया कि चाची ने चड्डी नहीं पहनी है।वो बोलीं- नहीं रे.. अचानक नीचे ज़ोर का दर्द उठ आया है सो तकिया लगा कर दबा रही थी, पर दर्द जाता नहीं है। तू मेरा एक काम करेगा..?मैंने कहा- हाँ… आप बोलिए क्या करना है..!चाची- देख वहाँ कपड़ों पर प्रेस करने वाली प्रेस रखी है.. उसको उठा ला ज़रा।मैंने कहा- लाईट जला दूँ क्या?वो- नहीं रे.. बन्द रहने दे..मैं जाकर प्रेस उठा लाया।‘देख… तुझको मेरे पेट की सिकाई करना होगी।’मैंने कहा- ठीक है।उन्होंने चादर ओढ़ ली। मैंने एक कपड़ा गर्म किया और चाची को प्रिया तो वो बोलीं- नहीं रे.. तू ही सिकाई कर।और मेरा हाथ पकड़ कर चादर के अन्दर कर लिया और अपनी दोनों टाँगों के बीच कपड़े को मेरे हाथ समेत दबा लिया और सिसकारी लेने लगीं।मैंने कहा- दर्द शायद ज्यादा है?‘हाँ.. रे.. दर्द तो बहुत ज्यादा है। एक काम और करेगा मेरा..?’‘हाँ.. कहिए क्या करना है?’‘मैं हिल नहीं पाऊँगी ज़रा मेरी मालिश कर देगा.. तो दर्द कम हो जाएगा !“हाँ.. क्यों नहीं..!”मैं जाकर तेल ले आया, तब तक चाची उल्टी लेट गई थीं। मैंने उनकी दोनों टाँगों की मालिश की मगर उनके कूल्हों के नीचे तक चाची के आधे कूल्हे नंगे दिख रहे थे। पर सच कहूँ उस वक्त तक भी मेरे दिल में ऐसा कुछ नहीं आया कि चाची के दिल में क्या है।फिर चाची पलट गईं और अब उनका सीना सामने की तरफ़ था और मैंने महसूस किया कि वो ज़ोर से हिल रहा था।उन्होंने कहा- सँभालो साहिल, मुझको कुछ हो रहा है… प्लीज़ कुछ करो..!मैं घबरा गया।मैंने कहा- चाची डाक्टर के यहाँ चलते हैं।तो वो बोलीं- नहीं रे.. अभी नहीं.. तू तो बस मालिश करता रह.. मैं ठीक हो जाऊँगी।ऐसा कह कर उन्होंने अपना गाउन ऊपर सरका लिया और वो पहला मौका था जब मैंने चाची की चूत देखी। अंधेरे में एक काला सा कुछ दिख रहा था और मैंने पहली बार अपने लन्ड में हरकत महसूस की।मेरे कानों में हजारों झींगरों की सी आवाज़ होने लगी थी और हाथ-पैर हल्के से कांपने लगे थे और जुबान लड़खड़ाने लगी थी।फिर मैंने हिम्मत कर के अपने हाथों में तेल लिया और चाची के पेट पर मलने लगा।चाची ने अपना गाउन और ऊपर सरका लिया और दोनों टाँगें मोड़ कर फैला लीं और मुझको सामने की तरफ़ कर लिया।अब चाची की चूत बिल्कुल मेरे सामने थी, पर साफ़ नहीं दिख रही थी। मेरा लन्ड मेरी पैन्ट में रगड़ने लगा था। पता नहीं मुझको चक्कर से आने लगे थे।अब चाची ने अपना गाउन पूरा ऊपर की तरफ़ करके उतार प्रिया। अब वो अधेड़ जवानी मेरे सामने बिल्कुल नंगी पड़ी थी और मैं अपने होश खोता जा रहा था।

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चाची ने चुदाई का तजुर्बा दिला प्रिया

कुल भाग: 2
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पाठकों की राय

1 टिप्पणी

आनन्द कुमार कोटा

4 months ago

चाची की चूत का वर्णन बहुत ही कमाल का किया है।

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