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Group Sex Story पठन समय: 17 मिनट पढ़ा गया: 975 बार

बुढ़ापे में चुदाई की चाहत

वरिन्द्र सिंह

07 Sep 2022 को प्रकाशित

बुढ़ापे में चुदाई की चाहत
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दोस्तो, आज मैं आपको एक नई बात बताने जा रहा हूँ। जब य बात मैंने सुनी तो मुझे भी बड़ी हैरानी हुई, मगर जिसने ये बात मुझेबताई, उसकी अपनी इच्छा थी कि यह बात सब को पता चले ताकि सब जान सकें कि सेक्स की कोई उम्र नहीं होती, हर उम्र के मर्द औरत को सेक्स की चाहत होती है। यह बात अलग है कि वो अपनी उम्र के साथ साथ अपनी इस इच्छा को दबा लेते हैं, या फिर मार लेते हैं। पर चूत और लंड की चाहत सभी को हर उम्र में होती है।

लीजिये आप भी पढ़िये इन खूबसूरत हसीनाओ की ख्वाहिशें।

मेरा नाम प्रभा मल्होत्रा है, मैं मुंबई में रहती हूँ। इस वक़्त मेरी उम्र 63 साल है और मेरी पति 67 साल के हैं। घर परिवार से काफीअमीर हूँ। बच्चों ने बिज़नस संभाल लिया है, दो बेटे और एक बेटी हैं मेरे… सभी शादीशुदा, बाल बच्चेदार हैं।खाली टाइम बिताने के लिए 2-3 किट्टी पार्टीज़ जॉइन कर रखी हैं। बल्कि एक किट्टी पार्टी में तो हम सब सीनियर्ज ही हैं।सीनियर्ज ठीक है, बुड्ढी शब्द मुझे अच्छा नहीं लगता।

पति के साथ भी कभी कभार कुछ थोड़ा बहुत कर लेती हूँ। मगर अब पतिदेव में कोई दम नहीं रहा, वो सच में बुड्ढे हो चुके हैं। न तो अकड़ रही, न ताकत रही, न जोश कुछ भी नहीं। हाँ चाट लेते हैं, और चाट चाट कर ही मुझे स्खलित कर देते हैं। मैं भी चूस चूस कर उनका पानी निकाल देती हूँ। मगर वो मज़ा नहीं आता, पहले जैसा। कई बार हाथ से भी कर लेती हूँ।

ऐसे में ही एक दिन मैं किट्टी पार्टी में अपनी एक हमउम्र दोस्त सुधा से बात की, वो बोली- यार अपनी भी यही प्रोब्लम है, दिल तो कई बार करता है, मगर पति अब सिर्फ नाम का ही रह गया है। क्या करूँ, कुछ समझ में नहीं आता।

हम दोनों एक ही कश्ती की सवार निकली।मैंने उससे कहा- यार हम मुंबई में रहती हैं, इतनी दुनिया है यहाँ पे, क्यों न कोई मर्द हायर कर के देखें?वो बोली- किसी को पता न चले बस, अगर कोई बात बनी तो मुझे भी बुला लेना।मैंने कहा- क्यों न दोनों मिल कर ही ये काम करें?

तो एक दिन हमने एक वेबसाइट के जरिये, एक लड़के को बुलाया। उस दिन सुधा के घर पे कोई नहीं था।वो लड़का आया, पर जब उसने हमें देखा तो मना कर प्रिया, बोला- आंटी मैं एक काल बॉय हूँ, मगर मेरे भी कुछ उसूल हैं, मैं इतनी उम्र की औरतों के साथ नहीं करता।हमने कहा- कोई ऐसा बता दो जिसका कोई उसूल न हो!तो वो बोला- पता कर दूँगा, अगर कोई मिल गया तो आपको बता दूँगा।

चलो हमारी सारी तैयारी कुएँ में गिर गई। दोनों उदास सी होकर बैठ गई।फिर मैंने उसे कहा- क्यों न कहीं बाहर घूमने चलें, और कुछ नहीं तो थोड़ा मन ही बहल जाएगा।तो हमने खंडाला जाने का प्रोग्राम बनाया।

इसी दौरान सुधा को एक और सहेली मिल गई, वो भी हमारी तरह कुछ फन करना चाहती थी, मगर उसका भी कोई जुगाड़ नहीं बैठ पा रहा था।मैं जानती थी उसे… किरण हमारी एक किट्टी मेम्बर ही थी।

एक दिन हम तीनों सीनियर्ज अपनी गाड़ी लेकर खंडाला को चल पड़ी। गाड़ी के लिए बाहर से ड्राइवर रोज़ के भाड़े पर लिया, और उसको समझा प्रिया कि वो जो कुछ देखे, जो कुछ सुने बस अपने तक ही रखे, आगे किसी को न पता चले।

मुंबई से निकलते ही पहले हमने बीयर्स ली, नमकीन ली, खाने पीने का और भी समान था। तीनों हम पीछे ही बैठी, एक साथ एक दूसरेके साथ मगज मारते जा रही थी। रास्ते में यह भी सोचा कि अगर इस ड्राइवर से ही बात कर ली जाये कि क्या वो हम तीनों को एक रात के लिए संभाल सकता है, देखने तो तो हट्टा कट्टा है।मगर फिर सोचा, रहने दो छोड़ो इस बात को।

चलते चलते हम लोग खंडाला पहुँच गए, वहाँ पर हमारा रेस्ट हाउस पहले से ही बुक था, तीनों अपने रूम में गई। पहले तो जाकर बेड पे लेट गई… मन में बहुत ही आज़ादी का भाव सा आ रहा था। तभी मुझे रति अग्निहोत्री और अशोक कुमार वाली फ़िल्म ‘शौकीन’ याद आ गई। उसमें भी तीन बुड्ढे हमारी तरह अपना बुढ़ापा रंगीन करने निकले थे।

फिर मैं नहाने के लिए बाथरूम में घुसी, मगर यह क्या, सुधा और किरण भी अंदर आ गई।मैंने कहा- अरे पहले मुझे तो नहाने दो!किरण बोली- अगर कोई प्रोग्राम बन गया तब भी तो एक दूसरी के आगे नंगी होंगी, तो फिर अभी क्या दिक्कत है, तीनों एक साथ नहाती हैं।अब सब लेडीज थी तो मुझे भी क्या ऐतराज था। तीनों ने अपने कपड़े उतारे और एक दूसरी के सामने ही अल्फ नंगी होकर नहाई और नहाते नहाते एक दूसरे के बदन पर साबुन भी लगाया।

नहा धो कर फ्रेश होकर बाज़ार को चली गई, घूम फिर कर, रात का खाना खा कर ही अपने रेस्ट हाउस में वापिस आई।वापिस आकर पहले कपड़े बदले फिर बेड पे लेट गईं मगर नींद नहीं आ रही थी। तीनों सोच रही थी कि क्या किया जाये!

मेरे मन की पूछी जाती तो मैं तो लेस्बो के लिए भी तैयार थी, मगर मैंने खुद यह बात आगे नहीं बढ़ाई। हम लेटी हुई टीवी देख रही थी, मगर साथ वाले रूम से बड़ा शोर सा आ रहा था।मैं उठ कर देखने गई।

साथ वाले रूम में नौजवान लड़के थे जो दारू पीकर, टीवी की फुल वॉल्यूम करके डांस कर रहे थे।मैंने उनसे जाकर कहा कि आवाज़ थोड़ी धीमी कर लें, हमें परेशानी हो रही है।उन्होंने आवाज़ धीमी कर ली।

वापिस आकर मैंने अपनी सहेलियों को कहा- अरे यहाँ कुत्तियों की तरह लेटी हो, साथ वाले कमरे में 3 नौजवान लड़के हैं, दारू पी के मस्त!मेरी बात सुन कर सबकी आँखों में चमक आ गई… हम भी तीन, वो भी तीन… हर एक के लिए एक, और सब के सब मुश्टंडे…सुधा बोली- तू तो उनके पास जाकर आई है, तू दोबारा जा और कोई सेटिंग करके देख, अगर बात बन जाए तो?

मैंने अपने दिमाग में एक स्कीम लगाई और वापिस उन लड़कों का दरवाजा खटखटाया, एक लड़का बाहर निकला- जी आंटी?मैंने कहा- देखो बात ऐसी है कि मैं और मेरी 2 फ़्रेंड्स भी साथ वाले कमरे में हैं, और हम भी एंजॉय करने ही आई थी, मगर प्रोब्लम यह हो गई कि हमारी बीयर खत्म हो गई है, क्या तुम्हारे पास थोड़ी एक्सट्रा बीयर है, तो हमें दे दो, मैं पैसे दे दूँगी।

वो मुझे रुकने को कह कर अंदर गया, अंदर कुछ खुसुर फुसुर करने के बाद बाहर आया और बोला- आंटी, हमारे पास बीयर तो नहीं है, हाँ, व्हिस्की है, और वोड्का है, अगर आप लेना चाहो तो?मैंने जाकर अपनी फ़्रेंड्स से पूछा, वो भी मान गई कि चलो वोड्का ही चलने दो।

मैंने फिर उस लड़के से कहा, तो वो बोला- आप लोग आकर हमें ही जॉइन क्यों नहीं करती, सब साथ में ही खा पी लेते हैं, जो सामान आपके पास है आप यहीं उठा लाइये।हम तीनों सहेलियों ने खाने का सामान उठाया और उन लड़कों के कमरे में चली गई।

उन्होंने तो अपना सामान फर्श तक बिखेरा पड़ा था। हमने तीनों लड़को के साथ हाथ मिलाया और बैठ गईं।फिर एक लड़के ने 6 गिलासों में वोड्का के पेग बनाए और हम सबने उठाए, सबने चियर्ज़ कह कर अपना अपना पेग गटक लिया।लड़के तो पीने के आदी थे सो आराम से गटक गए, हम तीनों के तो वो पेग कलेजे तक जला गया, बहुत तेज़ था।

खैर खाते पीते बातें होने लगी, तो हमने उन लड़कों को सच सच बता प्रिया कि हम यहाँ क्या करने आई थी।एक लड़का बोला- आंटी आए तो हम भी यहाँ कुछ ऐसा ही एंजॉय करने थे, मगर हमको कोई ऐसी प्रॉफेश्नल गर्ल्स नहीं मिली, जो हमारेकाम आ सकती।

तो सुधा तपाक से बोली- और हमें ऐसा कोई मर्द नहीं मिला।एक क्षण के लिए रूम में सन्नाटा सा छा गया, सबने एक दूसरे के चेहरे की तरफ देखा, ये तो सारी बात ही खुल गई थी, लड़कों ने

एक दूसरे की और देखा, फिर एक लड़का बोला- देखोजी, अब आपको आंटी तो नहीं कह सकते, हम सब ज़रूरतमन्द हैं। अगर हम आपकी ज़रूरत पूरी कर सकते हैं, तो आप हमारी ज़रूरत पूरी कर सकती हो, मगर दिक्कत यह है कि आपकी उम्र बहुत जायदा है, आप तो हमारी दादी नानी की उम्र की हो, सो आपके साथ ये सब करना बड़ा अजीब सा लगेगा है।

किरण बोली- मगर ये तजुरबा भी तो नया होगा, अपनी हमउम्र के साथ बहुत किया होगा तुम लोगों, अपने से बड़ी के साथ भी किया होगा, आज अपनी माँ से भी बड़ी के साथ करके देखो, हमने भी कभी तुम जैसे नौजवान लौंडों के साथ कभी नहीं किया, हम तीनों को तुम्हारे साथ कोई ऐतराज नहीं, तुम अपना मन बना लो।

उसके बाद एक लड़का बोला- ठीक है, हमें भी कोई ऐतराज नहीं, आज कोई और नहीं तो आप ही सही, करना तो है, जवान चूत न सही बुड्ढी चूत ही सही, यही पेल देते हैं।सुधा ने झट से उसे टोका- बुड्ढी होगी तेरी माँ, मैं तो आज भी जवान हूँ।सब हंस पड़े, उसके बाद सबने एक-एक पार्टनर चुन लिया। तय यह हुआ कि सब एक ही कमरे में एक दूसरे के सामने ही करेंगे, कोई बंधन नहीं होगा, जिसका जिसके साथ दिल चाहे अपना पार्टनर बदल के कर सकता है।

फिर एक एक पेग वोड्का और और खींचा सबने।जो मेरा पार्टनर था, उसने मुझे अपनी गोद में बैठा लिया, एक हाथ से मेरा बूब पकड़ा और मेरी गर्दन पे किसिंग करने लगा।मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

मेरी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा कर उसने पहले मेरे बूब्स को देखा, मेरे दिख रहे क्लीवेज पे किस किया और फिर मेरे दोनों बूब्स को बारी बारी दबा कर देखा।मैंने अपने ब्लाउज़ के हुक खोले और अपना ब्लाउज़ उतार प्रिया, नीचे डिजाइनर ब्रा पहने थी, उसने ब्रा के ऊपर से ही मेरे बूब्स को खूब दबाया और चूमा।

मैंने महसूस किया कि बरमूडा में उसका लंड अपना आकार ले रहा है। मैंने अपने ब्रा की हुक भी खोल दी तो उसने मेरा ब्रा उतार प्रिया, और मेरे दोनों बूब्स को अपने हाथों में पकड़ कर चूसने लगा।

किरण बिल्कुल नंगी हो चुकी थी और अपने पार्टनर का लंड चूस रही थी, सुधा के बदन पे भी कोई कपड़ा नहीं था और उसका पार्टनर उसकी चूत में उंगली कर कर रहा था, जबकि सुधा उसका लंड मुँह में लेकर चूस रही थी।

मैंने कहा- मुझे तुम्हारा लिंग चूसना है।वो बोला- सब्र करो, सब कुछ करेंगे, पहले मुझे पूरी नंगी होकर दिखाओ।मैं उठ खड़ी हुई और मैंने अपने साड़ी और पेटीकोट भी उतार प्रिया, चड्डी मैंने पहनी ही नहीं थी।

जब पूरी नंगी हो गई तो उसने भी अपनी ती शर्ट और बरमूडा उतार प्रिया।कोई 6-7 इंच का मोटा काला लंड बिल्कुल मेरी तरफ सीधा तन कर खड़ा था। मैं उसके पाँव के पास जा कर घुटनों के बल बैठ गई, मैंने उसके लंड को अपने हाथों में पकड़ा।

‘ले अब चूस अपने यार का लौड़ा!’ वो थोड़ा बदतमीजी से बोला, मगर मुझे बुरा नहीं लगा।मैंने उसके लंड का टोपा बाहर निकाला और अपने मुँह में ले लिया।‘आह…’ कितने सालों बाद एक सख्त तना हुआ लंड मैंने अपने मुँह में लिया। नमकीन स्वाद, मैं तो उसके लंड को अपने मुँह में लेकर अपनी जीभ से चाट गई।वो भी अपनी कमर धीरे धीरे हिला कर मेरा मुँह चोदने लगा।

‘एक बात बताओ आंटी, सॉरी, हाहाहा, आपका नाम क्या है?’ उसने कहा।मैंने बताया- प्रभा!वो बोला- ओके प्रभा, कोई आइडिया है अब तक कितनी बार चुदाई कारवाई होगी तुमने?मैंने उसका लंड चूसते चूसते सोचा, मगर कोई गिनती नहीं गिन पाई, अंदाजे से ही कह प्रिया- सैकड़ों बार, 40 साल हो गए शादी को, कोई हिसाब ही नहीं!‘और शादी के बाहर?’ उसने पूछा।मैंने उसकी तरफ देख कर आँख मारी और कहा- कोई हिसाब नहीं!

वो मेरी तरफ हंस कर देखता हुआ बोला- फिर तो बड़ी कुत्ती चीज़ हो आप!मैंने कहा- हाँ, हूँ, मुझे सब सेक्स चाहिए तो चाहिए ही, चाहे कोई भी हो!उसने फिर अपना लंड मेरे मुँह में ठूंस प्रिया, थोड़ी और चुसाई के बाद वो बोला- कैसे चुदना चाहोगी?मैंने कहा- अब तूने मुझे कुत्ती कहा है, तो कुत्ती बना कर ही शुरुआत कर बाद में देखेंगे।

उसने तभी मुझे नीचे कालीन पर ही डोगी पोसिशन में किया और पीछे से अपना मेरी प्यासी चूत पे रखा और अंदर डाल प्रिया।मैं तो पहले से पानी पानी हुई पड़ी थीऔर उम्र के हिसाब से चूत भी अब ढीली पड़ चुकी थी, सो उसका लंड तो घुप्प से घुस गया, और वो लगा चोदने।जवानी का पूरा जोश उसने दिखाया।

मैंने उसे कहा, इतनी जल्दी जल्दी मत करो जल्दी झड़ जाओगे, आराम से करो, देर तक लगे रहो, पूरी रात अपनी है, जितना मज़ा ले सकते हो ले लो, जितना मज़ा दे सकते हो दे दो।बात उसकी समझ में आ गई, वो बड़े आराम से करने लगा, अब पूरा लंड मेरे अंदर आ जा रहा था और ऊपर से मैं कब की प्यासी थी, सो ज़्यादा देर टिक नहीं पाई और सिर्फ 4-5 मिनट की चुदाई में ही झड़ गई।झड़ते ही मैंने नीचे गिर गई मगर अभी भी मेरी तसल्ली नहीं हुई थी।

सुधा और किरण भी घपाघप्प चुदवा रही थी, मेरे वाला हाल ही उनका था, 2-4 मिनट में वो भी फारिग हो कर मेरे पास आ गई, मगर लड़के तो सच में मुश्टंडे थे, वो अभी भी अपने अपने लंड अकड़ाये खड़े थे।

एक बोला- यार ये तो मज़ा नहीं आया, ये बुड्ढियाँ तो बहुत जल्दी झड़ गई, अपना तो कुछ हुआ नहीं, ये तो कोई मज़ा नहीं आया!सुधा बोली- एक एक वोड्का और हो जाए, फिर उसके बाद देखना!

सबने एक एक वोड्का का पेग और मारा और उसके बाद पार्टनर बदल कर सब फिर शुरू हो गए।इस बार वोड्का ने अपना पूरा सुरूर दिखाया, हम तीनों लेडीज के होश फाख्ता हो गए और लड़कों ने वो जोश से हम सबकी बदल बदल के चुदाई की, कब कौन किस पे चढ़ रहा है, किसी को कोई पता नहीं था।

नशे में धुत्त हम तीनों को कुछ पता नहीं चला, सारी रात उन तीनों ने हमे खूब बजाया।सुबह करीब 10 बजे मेरी नींद खुली, देखा, कोई कहीं कोई कहीं, सब नंग धड़ंग सो रहे हैं।सुबह होने की वजह से तीनों लड़कों के लंड पूरे अकड़े पड़े थे।

मैंने सुधा और किरण को जगाया, हम तीनों ने अपने अपने कपड़े पहने और चुपचाप अपने रूम में चली गई।वहाँ जाकर फिर से सो गई।करीब 12 बजे के बाद फिर से नींद खुली, मैंने चाय ऑर्डर की।

जब उठ कर चलने लगी, तब पता चला कि चूत तो दुख ही रही है, गांड भी दुख रही थी।और सिर्फ मेरी नहीं, हम तीनों की।तो मतलब ये कि लड़कों ने हमारा शराबी होने का फायदा उठाते हुये, हमारी गांड भी मारी थी।

अभी चाय पी ही रही थी कि वो लड़के भी हमारे रूम में आ गए- हैलो गर्ल्स!एक लड़का बोला- कैसी रही रात?मैंने कहा- रात तो बहुत शानदार रही मगर यह काम तुमने गलत किया।दूसरा लड़का बोला- अब क्या करें आंटी, आप लोगों की चूतें इतनी ढीली थी कि मज़ा ही नहीं आ रहा था, सो हमने सोचा क्यों न गांड में ट्राई किया जाए, और सच में आंटी, आप लोगों की गांड मार के मज़ा आ गया। सबने अंदर छुड़वाया।कह कर वो तीनों हंसने लगे।अब जो होने था सो हो गया, सो हम भी हंस पड़ी।

फिर एक लड़का बोला- हम आज भी यही रुकेंगे, आपका क्या प्रोग्राम है?हम तीनों ने एक दूसरे की ओर देखा और किरण बोली- अभी तो हमारा भी जाने का कोई इरादा नहीं है, दिन में घूमने चलते हैं, रात में फिर से वही!कह कर वो हंसी और हम सब भी हंस पड़े।support@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

3 टिप्पणियां

रोहन सोनी

1 month ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

राहुल राइटर

1 month ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

संचित गुप्त

1 month ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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