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भाभी की चुदाई पठन समय: 31 मिनट पढ़ा गया: 448 बार

पत्नी की भतीजी रीना रानी ने अपनी माँ की चुदाई करवाई-2

चूतेश

06 Nov 2025 को प्रकाशित

पत्नी की भतीजी रीना रानी ने अपनी माँ की चुदाई करवाई-2
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पत्नी की भतीजी रीना रानी ने अपनी माँ की चुदाई करवाई-1

तभी रीना रानी ने फिर पूछा- मैंने पूछा मम्मी ये सब क्या है?सुलेखा की आँखों से आंसू टपकने लगे. चेहरा पीला पड़ गया. स्वाभाविक भी था. अपनी बेटी के सामने वह मेरा यानि रीना रानी के फूफा का लंड चूसते हुए रंगे हाथों पकड़ी गई थी.बोलती क्या?बोलने को था ही क्या?मेरा दावा है कि उस टाइम उसके दिल में यही ख्याल चल रहा होगा कि अब सिवाय आत्महत्या के कोई इज़्ज़त बचाने की राह नहीं है.

मुझे बेचारी सुलेखा की दशा पर तरस आ गया. रीना रानी हरामज़ादी बदमाशी कर रही थी. मैंने उसकी दोनों चुची पकड़ के उसको घसीट के अपने सामने कर प्रिया. तब सुलेखा की नज़र उसके नंगे जिस्म पर पड़ी, और वो बोली- रीना तू यहाँ क्या कर रही है… तेरे कपड़े कहाँ हैं?

मैंने गुर्राते हुए कहा- सुन कमीनी रांड, ये तेरी बेटी माँ की लौड़ी डेढ़ साल से मुझसे चुद रही है… इसलिए परेशान होने की कोई ज़रूरत नहीं है… अब दोनों माँ बेटी आराम से चुदो और एक दूसरी की चुदाई का दृश्य देख के मज़ा लो… सच तो ये है तेरी चूत लेने के लिए तेरी ये बदमाश बेटी ने ही मुझ पर दबाव डाल रखा था.

सुलेखा इस घटनाक्रम से बहुत भ्रमित सी हो गई थी. उसको जब कुछ समझ नहीं आया तो उसने चुपचाप से लंड फिर से मुंह में घुसा लिया और लगी चूसने…रीना रानी कूल्हों पर दोनों हाथ टिका के बोली- हाँ हाँ आराम से चूस लौड़ा… पहले इसका लावा खा ले कुतिया फिर अपनी चूत के मज़े लगवाइयो… साली चुदक्कड़ रांड!सुलेखा ने कोई उत्तर दिए बिना लंड चूसने पर अपना ध्यान केंद्रित कर लिया और मज़े से जीभ मार मार के चूसने लगी.

उधर रीना रानी उसकी छाती के नीचे घुस गई और लगी अपनी माँ की मोटी, गोल चूचियों को चूसने. साली हुमक हुमक के अपनी माँ के चूचे चूस रही थी और एक हाथ से दबा रही थी. चूचुक पर प्रहार से सुलेखा और भी उत्तेजित हो गई. अब वो तेज़ तेज़ मुंह को आगे पीछे कर रही थी.मेरे मुंह से सीत्कार निकलने लगी, मैं आहें भरता हुआ चुसाई के आनन्द में डूब रहा था. सुलेखा के मुंह में तेज़ी से बहती हुई लार के कारण जब भी मादरचोद मुंह को आगे पीछे करती तो सुड़प्प सुड़प्प सुड़प्प की ध्वनि आती.

ऐसी आवाज़ों की वजह से पूरा कमरा एक कामोत्तेजक वातावरण से सराबोर हो गया था. रीना रानी भी कामविहल होकर हाय… हाय… हाय करती हुई सुलेखा के चूचों पे पिली पड़ी थी.सुलेखा हरामज़ादी के चूचुक रीना रानी की चुसाई से गीले हो गए थे.

हम तीनों की बेतहाशा बढ़ती हुई चुदास को देखते हुए मैंने सुलेखा को चोद देने का निर्णय लिया, मैं बोला- सुन सुल्लू रानी चल अब तुझे चोद देता हूँ… अब कर ले अपनी बरसों की मुराद पूरी… बहुत लंड चूस लिया… अब चुदने की तैयारी कर माँ की लौड़ी!

तभी रीना रानी बीच में कूदी. अपनी माँ का चूचा मुंह से निकाल के बोली- ये सुल्लू रानी का क्या चक्कर है कमीने… मेरी माँ सुल्लू रानी कैसे हो गई?मैंने कहा- यार रीना रानी… सुलेखा रानी बोलने में कुछ मज़ा सा नहीं आता… बहुत लम्बा सा है… इसलिए इस हरामज़ादी को मैं शार्ट में सुल्लू रानी बोला करूँगा… क्यों सुल्लू रानी सही है न? तुझे पुकारा करूँ न सुल्लू रानी?सुल्लू रानी ने बड़े बेमन से लंड को मुंह से निकाल के कहा- राजा बाबू मैं तो तुम्हारी जागीर हूँ… तुम्हे जो अच्छा लगे वो बोलो… और हाँ मैं पहले इस तगड़े हथियार का पूरा पूरा आनन्द लेना चाहती हूँ… फिर बनूँगी तुम्हारी रखैल… इसके अमृत का स्वाद चखा दो फिर जो तुम चाहो वो करना अपनी सुल्लू रानी के साथ!इतना बोल के रानी ने पट से लौड़ा फिर से मुंह में घुसा लिया.

मैंने सुल्लू रानी के केश जकड़ लिए और भींच के साली का मुंह अपने लौड़े की जड़ तक सटा प्रिया. मैंने इतना कस के उसके बल जकड़ रखे थे कि उसका मुंह हिल भी न सकता था. कुतिया के पास बस एक ही रास्ता था कि लप्प लप्प करते हुए केवल मुंह को बंद खोल करके लंड चूसे जाये.सुल्लू रानी के गर्म और लार से तर मुंह में मैं लंड को तुनके पे तुनका देने लगा.

रीना रानी ने अपनी माँ को बोला कि मेरे अंडे हौले हौले सहलाती जाए और स्वयं फिर से माँ की चूचियों को मचल मचल के यूँ चूसने लगी जैसे कोई शिशु माँ की चूची से दूध चूसता है.चुसाई में खूब आनन्द आ रहा था, मेरा बदन तपने लगा था. पसीने की बूंदें माथे और सीने पर छलक आई थीं.

मैंने सुल्लू रानी से कहा- आजा रानी तू भी ऊपर बिस्तर पे आजा… अपन दोनों एक दूसरे को चूसेंगे… मेरा मन हो रहा कि रानी की चूत के रस का स्वाद चखूँ… लेकिन लौड़ा मुंह से निकलना नहीं चाहिए.. समझी कुतिया?सुल्लू रानी ने पहले तो रीना रानी को धक्का देकर हटाया, फिर धीरे से आधी उठी. कुछ मैंने हरामज़ादी के कंधे थाम के सहारा प्रिया तो सुल्लू रानी लंड मुंह से निकाले बिना बिस्तर पे चढ़ने में कामयाब हो गई. फिर बड़े आराम से इस बात का ध्यान रखते हुए कि लंड मुंह में ही घुसा रहे, मैंने अपने आप को सुल्लू रानी के प्रति 69 की अवस्था में जमा लिया. बद्ज़ात के चूतड़ जकड़ लिए और उसकी तेज़ी से रिसरिसाती हुई चूत से होंठ सटा दिए.

सुल्लू रानी ने एक ज़ोर की झुरझुरी ली और ढेर सा चूतरस मेरे मुंह में आ गया. उसे इतना अधिक आनन्द आया कि बहनचोद मुंह लगाते ही स्खलित हो गई. चूत में जीभ घुमा घुमा के मैंने सारा जूस पी लिया.रानी का दारू से भी ज़्यादा नशीला और ज़ायकेदार चूतरस पीकर मेरी हवस यूँ भड़क उठी जैसे सुलगती आग में कोई तेल झोंक दे.

झट से तर्जनी खूब लार से गीली करके मैंने पूरी उंगली सुल्लू रानी की गांड में घुसेड़ दी. रानी ने चिहुँक के ज़ोर ज़ोर से नितम्ब इधर उधर डुलाये और लंड से भरे मुंह से घूंघूंघूंघूंघूंघूं की आवाज़ निकाली. चूत ने फिर से ढेर सा जूस छोड़ प्रिया.मेरा मुंह रानी के चूतरस से भीग चुका था. मैंने एक हुंकारा भरते हुए जीभ की नोक बनाकर सुल्लू रानी की चूत और मूत्रद्वार के बीच की नाज़ुक जगह पर स्थित भगनासा यानि क्लाइटोरिस पर टुकुर टुकुर करनी शुरू कर दी, और साथ साथ उसके मुंह में धक् धक् धक् धक् धक्के लगाते हुए मुख चुदाई करने लगा.

मैं लौड़े से सुल्लू रानी का मुंह, जीभ से उसकी चूत और उंगली से उसकी गांड को एक साथ चोद रहा था. उधर रीना रानी सुल्लू रानी की पीठ की तरफ आ बैठी थी और उसके चूचे दबा रही थी.शरीर के हर छेद में चलती चुदाई और चूचुक निचोड़े जाने से सुल्लू रानी बौरा गई. उसकी सांसें धौंकनी की तरह चलने लगीं, लंड से भरे हुए मुंह से अजीब अजीब सी आवाज़ें आने लगीं. कुछ ही पल के बाद सुल्लू रानी के बदन में मुझे एक तेज़ कंपकंपी सी दौड़ती हुई महसूस हुई. रानी ने स्वतः ही टाँगें कस के मेरे मुंह से चिपका लीं. इतने ज़ोर से जकड़ा कि मुझे साँस लेने में भी तकलीफ होने लगी.तभी उसने अपने मुंह से लंड निकाल के एक ज़ोरदार सीत्कार मारी और चरम रीमा के पार उतर गई. रस की एक तेज़ फुहार उसकी चूत से छूटी जिसने मेरा मुंह तो भर ही प्रिया, होंठ, दाढ़ी और मूंछें सब भिगो कर रख दीं.झड़ते ही रानी की टाँगें ढीली पड़ गईं, तो मुझे साँस भी ठीक से आने लगी.

रानी ने फिर से लौड़ा चूसना शुरू कर प्रिया लेकिन बाकी का सारा शरीर निढाल हो गया था. तब तक मेरी उत्तेजना भी शिखर पर पहुँच चुकी थी. मैं झड़ने के बहुत करीब था. रानी का चूत रस भोगते भोगते मेरा बदन अचानक यूँ कौंधा जैसे कि बिजली का करंट लग गया हो. धम्म धम्म धम्म !!! झड़ते हुए लंड ने लावा के भारी भारी लौंदे सुल्लू रानी के मुंह में उगल दिए. लौड़ा बार बार तुनक तुनक के वीर्य झाड़ रहा था.20-25 शॉट के बाद लंड का मसाला समाप्त हो गया.

झड़ने के बाद मैं भी निढाल हो गया और बिस्तर पर पसर गया… न जाने कब नींद लग गई.

अपने लौड़े की अकड़न से नींद टूटी तो पाया कि रीना रानी मेरे टट्टे सहला रही थी. सुल्लू रानी भी जग चुकी थी और जम्हाईयाँ ले रही थी.रीना रानी ने झिड़कने वाले अंदाज़ में कहा- दोनों प्रेमी अब जग जाओ… आधा घंटा सो लिए… ज़्यादा सोते रहे तो सोते ही रह जाओगे और पापा घर आ जायँगे… .फिर टापते रहना कमीनो!

सुल्लू रानी हूँ हूँ करते हुए उठी और बाथरूम की ओर चल दी. रीना रानी ने आवाज़ दी- कहाँ जा रही है रंडी? वापिस आ फ़ौरन!सुल्लू रानी बोली- क्या बाथरूम भी न जाऊँ रीना? बड़े ज़ोर की सुस्सू लगी है.रीना रानी ने कहा- हाँ हाँ कमीनी… मैं जानती हूँ… ये कुत्ता पियेगा न सुस्सू… यह उसको स्वर्ण रस या स्वर्ण अमृत कहता है… तू भी यही बोला कर… चल आजा फटाफट वापिस!

सुल्लू रानी भौंचक्क सी कभी मुझे देखती कभी अपनी बेटी रीना को… सेक्स का यह अध्याय उसने शायद न तो पहले कभी सुना था, करना तो दूर की बात थी.रीना रानी ने चिढ़ के कहा- राजे सुन… जब तक ये देखेगी नहीं इसकी समझदानी में कुछ न आने वाला… तू बैठ नीचे, मैं इसे दिखाती हूँ तू कैसे स्वर्ण अमृत पीता है… वैसे मुझे आ नहीं रही है फिर भी 4-5 बूंदें तो निकल ही आएंगी.

मैं रीना के कहे अनुसार फर्श पर घुटनों के बल बैठ गया और रीना रानी बेड पर ठीक मेरे सामने आकर उकड़ूँ बैठ गई. मैंने अपना मुंह रानी की चूत के पास लगा प्रिया. रीना रानी ने ज़ोर लगाया तो एक बारीक सी धारा मेरे मुंह में आ गई. थोड़ी सी बूंदें निकाल के रानी का मेदा खाली हो गया परन्तु सुल्लू रानी को दर्शाने के लिए इतना काफी था.

स्वादिष्ट अमृत पीकर मैंने कुत्ते की तरह जीभ निकाल के होंठ चाटे और उत्सुकता से सुल्लू रानी के अमृत ख़ज़ाने का इंतज़ार करने लगा.

सुल्लू रानी भी जैसे रीना रानी उकड़ूँ बैठी थी वैसे ही आकर बैठ गई. मैंने फिर से अपना मुंह उसकी चूत के सामने जमा प्रिया. चूत से कोई एक या दो इंच दूर. सुल्लू रानी पहली बार किसी को अमृत पिला रही थी इसलिए वो ज़्यादा कण्ट्रोल नहीं कर पाई. शुरुआत से ही उसने तेज़ धारा शूऊऊऊऊऊऊऊ… करते हुए छोड़ दी. निशाना भी अनाड़ी रंडी का चूक गया और पहला शॉट से मेरा पूरा चेहरा भीग गया.मैंने कुतिया की कमर पकड़ के खुद ही धारा के रास्ते में मुंह को सेट करके खोल प्रिया. पूरी रफ़्तार से सुल्लू रानी का गरम गरम अति स्वादिष्ट स्वर्ण अमृत मेरे मुंह में आने लगा. जितना मैं निगल सकता था धारा का वेग उससे काफी ज़्यादा था इसलिए काफी सारा अमृत इधर उधर गिर भी गया.खैर मैंने तो सुल्लू रानी के स्वर्ण रस का स्वाद ले ही लिया. लुत्फ़ आ गया !!!

जब रानी का खज़ाना खाली हो गया तो मैंने कुत्ते की तरह जीभ निकाल के फर्श पर बिखरा हुआ अमृत चाट डाला. सुल्लू रानी बड़ी उत्सुकता से यह सब देख रही थी और आश्चर्य चकित हो रही थी. बहनचोद लौड़ा अकड़ अकड़ के उछल कूद मचाने लगा.

मैंने हाथ बढ़ा के सुल्लू रानी को अपनी तरफ खींच लिया. चोदने से पहले मैं उसे सिर से पैर तक चूसना और चाटना चाहता था. मैं उसकी चूत का रस तो पी ही चुका था. अमृत का आनन्द भी ले चुका था. अब सुल्लू रानी के पूरे बदन को चाट के स्वाद भी चखना चाहता था. सबसे पहले मैंने उसके मुलायम पैरों को चाटा. दोनों अंगूठे और आठों उंगलियाँ मुंह में ले कर चूसीं. इतना मज़ा आ रहा था जिसका कोई हिसाब नहीं…उसने भी आनन्द लेते हुए हल्की हल्की सीत्कार भरनी शुरू कर दी. उन मांसल, दिलकश टांगों को चाटता, चूमता, हाथ फेरता हुआ मैं उसकी चूत तक जा पहुंचा. टांगें चौड़ी कर पहले तो मैंने उसके यौन प्रदेश को बड़े प्यार से निहारा. उसकी लप लप लप करती हुई रस बहाती हुई चूत मानो लौड़े को न्योता दे रहे थी.

मैंने अपनी नाक सुल्लू रानी की झांटों में रगड़ी, झांटों को अच्छे से सूंघ के सुगंध का आनन्द लिया. सुल्लू रानी ने मज़े में एक गहरी सिसकी ली. साफ दिख रहा था कि उसकी उत्तेजना बढ़े जा रही थी. उसके बदन ने धीरे धीरे मचलना भी शुरू कर प्रिया था. गोरी, गुलाबी और बेहद दिलकश, रस से तर चूत के होंठ चौड़े कर के मैंने अपनी जीभ इधर उधर घुमाई. उसके बदन में एकदम से हलचल सी मच गई- हाय… राजे… हाय… अब और न तड़पाओ…

उसने मुंह भींच के बड़ी मुश्किल से आवाज़ निकाली और फिर एक गहरी सीत्कार भरी.मैंने जल्दी से जीभ उसकी चूत में घुसाई. चूत लबालब रस से भरी हुई थी.

जीभ घुसाते ही ढेर सारा चूत रस मेरे मुंह में आ गया. उसकी चूत जैसे चू रही थी, रानी की जाँघें भी भीग गई थीं उसके रस के बहाव से… साफ था कि रानी बेहद उत्तेजित हो चुकी थी और चुदने चूदाने को बिल्कुल तैयार थी.मैंने हुमक हुमक के उस सुहानी चूत को पीना शुरू कर प्रिया.रानी अब तड़पने लगी थी. उसेक गले से भिंची भिंची सी सीत्कार निकल रही थी, वह अपनी टांगें कभी इधर कभी उधर कर रही थी. चूत बराबर लप लप कर रही थी और रस उगले जा रही थी.रानी भी बेकाबू हो गई थी- बस राजे बाबू… बस… अब नहीं सहन होता… राजे बाबू, तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ… अब और न तरसाओ… बस आ जाओ फ़ौरन… हाय अम्मा मैं मर जाऊँ… हाँ..हाँ… हाँ… इसके साथ ही वह झड़ गई और बहुत ज़ोर से झड़ी. उसने आठ दस बार अपनी टांगें भींचीं और खोलीं. रस की फुहार चूत से बह चली. मैं सब का सब पीता गया. क्या गज़ब का स्वाद था उस चिकने चूतामृत का!

मैंने उठ के सुल्लू रानी को घसीट के बिस्तर पे डाल प्रिया और उसकी टांगें चौड़ी कर दीं. मैं अब धधकता हुआ लौड़ा घुसेड़ने को तैयार था. तभी सुल्लू रानी ने मुझे रुकने का इशारा किया, उसने उठ कर मेरी छाती पर दोनों हाथ रख के मुझे लिटा प्रिया और ख़ुद मेरे उपर चढ़ गई. अपने घुटने मेरी जाँघों के दोनों साइड में टिकाकर उसने चूत को ऐन लौड़े के उपर सेट किया और धीरे धीरे नीचे होना शुरू किया.लंड अंदर घुसता चला गया.अभी आधा लंड ही घुसा था कि रानी ने वापस चूत को ऊपर उठाकर लंड को बाहर किया, सिर्फ सुपारी अंदर रहने दी.

‘राजे… ए… ए… ए… ‘ चीत्कार लगाते हुए वह धड़ाक से लौड़े पर बैठ गई. लंड बड़ी तेज़ी से चूत में घुसता चला गया और धम्म से जाकर उसकी बच्चेदानी के निचले भाग से टकराया. एक बार तो उसकी चीत्कार सुनके मैं डरा कि कहीं बच्चेदानी फट न गई हो. लेकिन वो तो दर्द की नहीं बल्कि मज़े की चीत्कार थी.

उसकी चूत चवालीस साल की आयु में भी काफी टाइट थी और मेरे लंड को ठीक ठाक ही जकड़े हुए थी. भड़की हुई कामोत्तेजना में चूत खूब गर्म हुई पड़ी थी और अच्छे से रस से लबालब भरी हुई भी थी.रानी ने कमर आगे की तरफ झुकाते हुए खुद को मेरे से चिपका लिया, उसका सिर मेरी ठुड्डी पर टिका था और चुची मेरी छाती को दबा रही थी. लंड चूत के अन्दर चूत के ऊपरी भाग को कस के दबा रहा था जिससे भगनासा अच्छे से दब दब के उसे बेइंतिहा मज़ा दे रही थी.

सुल्लू रानी ने अपने को थोड़ा और आगे सरकाया, उसका मुंह बिल्कुल मेरे मुंह पर आ गया. चूत भी थोड़ी सी आगे सरकी तो लंड और भी कस के चूत में फंस गया. अब भगनासा पे लंड का पूरा दबाव था. मेरे होंठ चूसते चूसते सुल्लू रानी मेरे कानों में फुसफसाई- राजे बाबू देखो मैं जन्नत की सैर कराऊँगी तुमको!

इतना कह कर रानी ने मेरे मुंह में जीभ घुसा के बहुत देर तक प्यार प्रिया. उसका मुखरस पी पी के मैं तृप्त हुआ जा रहा था. वो अपने चूतड़ धीरे धीरे घुमा रही थी. कभी वो कमर आगे करती, तो कभी पीछे, कभी कमर उछालती और कभी अचानक बड़े ज़ोर का धक्का मारती. कभी वो पूरा का पूरा लंड बाहर निकाल कर दुबारा चूत में धड़ाम से घुसाती और कभी वो सिर्फ चूत को लप लप करते हुए लंड को ज़बरदस्त मज़ा देती.जब वो तेज़ तेज़ धक्के मारती तो फचक… फचक… फच… फच… फच..फच की आवाज़ कमरे में गूंज उठती.

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अगर कोई बाहर खड़ा सुन रहा होता तो फौरन जान जाता कि यहां ज़ोरदार चुदाई चल रही है.

तभी रीना रानी पीछे से आती दिखी. उसके हाथ में एक मोटा सा लम्बा सा खीरा था. अपनी मां के पीछे जाकर उसने बिना किसी चेतावनी के खीरा सुल्लू रानी की गांड में घुसेड़ प्रिया. इतने मोटे खीरे के भीतर घुसते ही गांड जो फैली तो चूत ने तंग होकर लौड़े को बड़ा कस के जकड़ लिया.

सुल्लू रानी दर्द से चिल्लाई मगर तब तक उसकी बदमाश बेटी खीरा पूरा का पूरा ठूंस चुकी थी.

उधर रीना रानी लगी पड़ी थी अपनी माँ की खीरे से गांड मारने में. तेज़ तेज़ हाथ चला कर खीरा आगे पीछे किये जा रही थी.मज़े में सुल्लू रानी सिसकारियाँ ले रही थी. सुल्लू रानी ने आठ दस धक्के मारे, फिर बोली- सुमन रंडी कौन है? रीना कैसे जानती उसको?मैंने रानी के होंठ चूसते हुए कहा- सुमन रंडी है न तेरी ननद… रितेश और आरती की बहन… वो तेरी बेटी के साथ लेस्बियन सेक्स करती है.

सुल्लू रानी हैरानी से कुछ बोलना ही भूल गई. कुछ समय तक धक्के पे धक्का ठोके गई.मैं बोला- मादरचोद, चुपचाप चुदे जा. तेरे सवालों के जवाब चुदाई के बाद दूंगा!

इसी तरह हम बहुत समय तक चोदते रहे. तेज़… बहुत तेज़… धीरे… बहुत धीरे… उसके नितम्ब कभी गोल गोल घुमाते हुए तो कभी दायें बायें हिलाते हुए…चुदाई और गांड मरवाई धकाधक हुए जा रही थी.

सुल्लू रानी का बदन बहुत गर्म हो गया था. ठरक से सराबोर उसका चेहरा लाल हो गया था और पसीने की छोटी छोटी बूँदे उसके माथे पे छलक आई थी.मैंने अपना मुंह पूरा पूरा खोल प्रिया और रानी की एक चूची मुंह में घुसा ली. दूसरी चूची की निप्पल उमेठने लगा. मेरे मुंह में घुसी निप्पल उसकी चरम रीमा तक बढ़ी कामवासना के कारण बहुत सख्त हो चली थी.

मैंने जैसे ही उसकी अकड़ी निपल पर जीभ घुमाई, एक हल्की सी चीख उसके गले से निकली, कराहते हुए बोली- कचूमर निकल दो… इस कम्बख्त चूची का… आज तो चटनी बना ही डालो इसकी… हरमज़ादी ने जान खींच रखी है मेरी… हाँ राजा हाँ… .पीस डालो…

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मैंने तुरन्त निप्पल को कस के काटा और फिर अपने दाँत चूची में गाड़ दिये. रानी ने चिहुंक के सीत्कार भरी लेकिन मैंने दांत गाड़े रखे. रानी ठरक से पागल होकर अब बहुत तेज़ तेज़ धक्के मार रही थी.मैंने पहली चूची छोड़ के दूसरी चूची में कस के दांत गाड़े.काम वासना के आवेश मे भरी हुई रानी अब हुमक हुमक के धक्के लगा रही थी. वो स्खलन से ज़्यादा दूर न थी. चूचुक चूसता और ज़बरदस्त चुदाई का मज़ा लूटता यह चूतेश भी तेज़ी से झड़ने की ओर बढ़ रहा था.फच फच फच फच की आवाज़ से कमर भर उठा.

रानी अब बिजली की तेज़ी से अपनी कमर कुदा कुदा के धक्के मार रही थी. उसकी सांस फूल गई थी और गले से भिंची भिंची सीत्कार निकल रही थी. उसका पूरा बदन तप गया था, जैसे 104 का बुखार हो. सारा शरीर पसीने से भीग गया था. मैं भी पसीने में लथपथ था.

रानी ने, सिर्फ सुपारी चूत में छोड़कर, पूरा लंड बाहर निकाला और एक बहुत ही ताकतवर धक्का मारा, जिससे मेरा 8 इन्च का मोटा लौड़ा दनदनाता हुआ बुर में जा घुसा. उसने अपने नाखून मेरे कंधों में गड़ा दिये और झर झर झर झर झड़ने लगी. हाय हाय करते हुए फिर से आठ दस तगड़े धक्के मारे और हर धक्के में झड़े चली गई. उसके मुंह से सीत्कार पर सीत्कार निकल रहे थे. रस की फुहार चूत में बरस उठी.रानी बेहोश सी मेरे ऊपर ढेर हो गई.

शायद इतनी देर से गांड मारते हुए रीना रानी भी थक गई थी. जैसे ही उसकी माँ स्खलित हुई उसने खीरा छोड़ प्रिया और तेज़ तेज़ अपनी चूत को उंगली से रगड़ने लगी. सुल्लू रानी के गरम गरम चूत रस में डूबकर मेरे लंड का भी सबर टूट गया, सुल्लू रानी की कमर जकड़कर मैंने भी दन दन दन अपने चूतड़ उछाल उछाल के कई ज़बरदस्त धक्के लगाये और बड़े ज़ोर से मैं भी स्खलित हो गया.बार बार तुनके मारते लंड ने खूब ढेर सारा लावा सुल्लू रानी की चूत में उगल प्रिया. गहरी गहरी साँसें लेता हुआ मैं भी बिल्कुल मुरझाया सा पड़ा था और सुल्लू रानी मेरे ऊपर पड़ी थी. तब तक रीना रानी भी झड़ गई थी और बगल में पड़ी हांफ रही थी.खीरा अभी भी सुल्लू रानी की गांड में था हालाँकि रीना के छोड़ देने के कारण अपने आप ही गांड से फिसल के आधा बाहर निकल गया था.

कुछ देर हम तीनों यूँ ही पड़े हुए अपनी सांसों को काबू करने के लिए आराम करते रहे. फिर रीना रानी उठी और बड़े प्यार से मुझे चूमा. फिर उसने चाट चाट के मेरा लंड, अंडे, झांटें वगैरा की सफाई की और उसके पश्चात् उसने सुल्लू रानी की चूत, झांटें और जांघों का ऊपरी भाग जहाँ जहाँ मेरा वीर्य और उसका चूत रस बह बह के आ गया था, वहां वहां चाट के साफ किया.फिर अपनी बाहें पूरी ऊपर उठा के ज़ोर से चिल्लाई- सुनो सुनो सुनो सब लोग सुनो… आज मेरी माँ चुद गई… आओ कमीनों सब के सब आकर देखो कैसे मेरी माँ चुदी पड़ी है… हा हा हा मम्मी कुतिया बधाई हो बधाई, आज तेरी बेटी कीमाँ की चुदाईहो गई… हा हा हा… राजे, बहन के लौड़े… दे मुझे लाख लाख बधाईयाँ… तेरी रीना रानी की माँ चुद गई…

ये सब बोलते हुए रीना रानी सुल्लू रानी के मुंह पे चढ़ के बैठ गई- ले मेरी बदचलन माँ. अब चूस अपनी बदचलनबेटी की चूतसाली… तू भी क्या याद रखेगी छिनाल. अपनी ही बेटी का चूत रस बड़ी किस्मत वालियों को नसीब होता है.यह कहते कहते रीना रानी ने चूत को ज़ोर ज़ोर से अपनी माँ के मुंह से रगड़ना शुरू किया.

मैंने रीना रानी के मस्त निप्पल्स को ज़ोर से भींचा और निप्पल्स से ही घसीटते हुए इतनी ज़ोर से अपनी तरफ खींचा की फूल सी कोमल रांड खींचती हुई मेरे कंधे से टकराई. उसका मुंह चूम कर मैंने कहा- तुम दोनों माँ बेटी को हार्दिक बधाईयाँ… .तू माँ चुदी बन गई आज… और सुल्लू रानी आज से तू मेरी रानी बन गई बद्ज़ात कुलटा… अब तू जीवन भर मेरी रखैल बन के रहेगी अपनी इस चुदक्कड़ बेटी की तरह.

‘ठीक कहती है तू रीना… .मैं हो गई धर्म भ्रष्ट… बन गई राजे बाबू की रखैल… पर कितना आनन्द मिला इस बदचलनी में! राजे बाबू ने बहुत मज़ा प्रिया… तू बहुत बढ़िया चोदू है… जल्दी खलास भी नहीं होता… तेरे वीर्य का स्वाद कितना मदमस्त है… आज तो राजे तूने मुझे खुश कर प्रिया… कब से प्यासी मरी जा रही थी… मेरी बरसों की तपस्या आज सफल हुई.’ सुल्लू रानी ने इतराते हुए कहा- रीना मेरी बच्ची, तेरी योनिरस का स्वाद भी मादक है… मज़ा आ गया.

रीना रानी ने सुल्लू रानी की चूची पर च्यूंटी काटके कहा- मम्मी तेरी चूत का जूस भी बड़ा ज़्याकेदार है… पक्की रंडी है तू कमीनी!

‘अब पहले ये बता कि सुमन बीवी से तेरा सेक्स कैसे हुआ?’ सुल्लू रानी बोली.रीना रानी ने मेरे द्वारा अपनी चूत की सील तोड़े जाने का पूरा विवरण सुल्लू रानी को विस्तार से बताया. उसको सब पता चल गया कि रिश्तेदारी में कौन कौन मेरी रानियाँ हैं. सुल्लू रानी का अचम्भे से मुंह खुला का खुला रह जाता था. कई बार रंडी ने मुंह पर हाथ रखकर ‘हौऔऔऔ…’ किया.

मैं बोला- अगर तुम दोनों वेश्याओं की बातचीत ख़त्म हो गई हो तो मैं कुछ कहूं? रात का क्या प्लान है? सुल्लू रानी तो सोयेगी रितेश के साथ. ठीक है न? तो मैं रीना रानी को चोद चोद के साली का मलीदा बना दूंगा.रीना रानी ने चहक कर कहा- रात को भी मेरी माँ ही चुदेगी मादरचोद… पापा को रात को सोने से पहले मैं कहूँगी कि दो तीन दिन से मुझको रात में बड़े डरावने सपने आते हैं. मुझे बहुत डर लगता है. कुछ दिन मम्मी मेरे कमरे में सोयेंगी.

उसकी इस चालाकी पर खुश होकर मैंने रीना रानी के चूतड़ों पर एक ज़ोर की चपत लगाई तो रीना रानी ने मस्ती में किलकारी मारी.

मैंने रीना रानी को कॉफ़ी बनाने भेज प्रिया और सुल्लू रानी से कहा कि डिनर में खीर बनाये. उसको बताया कि चुदाई में खीर का मज़ा लेंगे इसलिए खूब सारी खीर होनी चाहिए. उस बेचारी को कुछ ज़्यादा समझ नहीं आया लेकिन बिना बहस किये मान गई. उसकी आँखों में चमक भी आ गई कि रात को होने वाली चुदाई में कुछ खास होगा जिसके लिए खीर की ज़रूरत पड़ेगी.

कॉफ़ी पीकर हम लोगों ने कपड़े पहन लिए क्यूंकि कामवाली बबिता के आने का टाइम हो चला था.

फिर शाम यूँ ही रितेश के साथ गप शप में गुज़र गई. सुल्लू रानी रसोई में बबिता को डिनर की हिदायतें देने में व्यस्त हो गई थी. रात को वैसा ही हुआ जैसा रीना रानी ने योजना बनाई थी. सुल्लू रानी सोने के लिए रीना रानी के कमरे में आ गई.मैंने एक या डेढ़ घंटा सब के सो जाने का इंतज़ार किया, फिर मैं भी रीना रानी के रूम में जा पहुंचा. चादर ओढ़े माँ बेटी नंगी पड़ी थीं. मैंने चादर उतार के दूर फेंक दी. फिर शुरू हुआ खीर का कार्यक्रम. मैंने खीर के डोंगे में लौड़ा पूरा डुबा प्रिया और फिर खीर से खूब लिबड़े लंड को बाहर निकाल के दोनों रंडियों को खीर चाटने को बोला.

रीना रानी तो यह खेल कई बार खेल चुकी थी तो झपट के लौड़े को बिल्ली की तरह चाट चाट के खीर खाने लगी. लंड अकड़ के फुंकारें मारने लगा. जब लंड पर लगी सारी खीर ख़त्म हो गई और लंड साफ हो गया तो फिर से लंड खीर में डुबा के निकाला और इस बार सुल्लू रानी को मौका प्रिया.हरामज़ादी ने मचल मचल के लौड़े पर से खीर चाटी. इसके बाद सुल्लू रानी को बिस्तर पर सीधा लिटा के खीर उसकी चुची, नाभि, झाटों और चूत प्रदेश में अच्छे से लगा दी. फिर मैंने और रीना रानी ने उसे चाटते हुए खाया.

खीर पूरी चाटने से पहले ही सुल्लू रानी बेहद चुदासी हो चुकी थी, हवस में पागल सी होकर उसके मुंह से कभी सिसकारियाँ, कभी आहें निकलने लगीं. जब मैंने चूत के आस पास का भाग पर जीभ फिराई तो बदज़ात चुदाई की भीख मांगने लगी, गुहार लगाने लगी कि राजे अब नहीं सहन होता, प्लीज़ जल्दी से चोद दो!मैं बोला- थोड़ी तसल्ली रख, तेरी बेटी की बॉडी को भी तो खीर लगा के चाटने दे!

लेकिन वो तो इतनी बेतहाशा गर्म हो गई थी कि फंसे फंसे गले से बोली- रीना को बाद में चाट लियो मादरचोद राजे, पहले मेरी खुजली मिटा!उसकी बेकरारी देखते हुए मैंने उसकी टाँगें चौड़ी कीं और धम्म से उबलता हुआ लौड़ा सुल्लू रानी की रसरसाती चूत में दे ठोका. बहुत देर चुदाई चली और रीना रानी उसके मुंह पर चढ़ बैठी और चूत चुसवा के अपनी लंडखोर माँ को अपना चूत रस पिलाती रही.

उस रात सुल्लू रानी को मैंने दो बार चोदा और एक बार गांड मारी. तब तक रीना रानी चुदास के मारे बेहोश होने वाली हो गई थी तो आखिर में उसकी भी चुदाई की.

मैं कानपुर दो दिन रुका. अगले दिन भी दिन में और रात में सुल्लू रानी को मुंह, चूत और गांड में अच्छे से चोदा.

कानपुर से लौटने के बाद मैंने महारानी अंजलि, अपनी बेगम जान को रिपोर्ट दी- मल्लिका ऐ आलिया, आपका हुकम गुलाम ने बजा प्रिया.

इसके बाद में तो सुल्लू रानी की अनेक बार चुदाई हुई. वो अक्सर फरीदाबाद रीना रानी से मिलने के बहाने आ जाती थी और खूब दिल भर के चुदाई करती थी.

आपने देखा कि रीना रानी कितनी बदमाश लौंडिया है. शायद दुनिया कि पहली रांड होगी जिसने खुद अपनी माँ चुदवाई.

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श्रृंखला

कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

पत्नी की भतीजी रीना रानी ने अपनी माँ की चुदाई करवाई

कुल भाग: 2
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Hello i m regular reader of iss. To me ne socha ki mai bhi apni story sub ko share karu. Landwalo apna land haath me le lo and chutwaliyo apni chut mai ungli karna chalu kardo kyuki mai asha rakhta hu ki aap ko meri story sun kar bahot majaa aayeg...

7 मिनट 607

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