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भाभी की चुदाई पठन समय: 10 मिनट पढ़ा गया: 674 बार

देवर भाभी की चुदाई-4

जूजाजी

09 Feb 2025 को प्रकाशित

देवर भाभी की चुदाई-4
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प्रेषक : नामालूमसम्पादक : जूजा जीमैं साँस थामे इंतज़ार कर रहा था कि कब भाभी पैन्टी उतारें और मैं उनकी चूत के दर्शन करूँ।

भाभी शीशे के सामने खड़ी हो कर अपने को निहार रही थीं, उनकी पीठ मेरी तरफ थी।अचानक भाभी ने अपनी ब्रा और फिर पैन्टी उतार कर वहीं ज़मीन पर फेंक दी।

अब तो उनके नंगे चौड़े और गोल-गोल चूतड़ देख कर मेरा लंड बिल्कुल झड़ने वाला हो गया।

मैंने मन में सोचा कि भैया ज़रूर भाभी की चूत पीछे से भी लेते होंगे और क्या कभी भैया ने भाभी की गाण्ड मारी होगी?

मुझे ऐसी लाजवाब औरत की गाण्ड मिल जाए तो मैं स्वर्ग जाने से भी इन्कार कर दूँ।

लेकिन मेरी आज की योजना पर तब पानी फिर गया, जब भाभी बिना मेरी तरफ़ घूमे गुसलखाने में नहाने चली गईं।उनकी ब्रा और पैन्टी वहीं ज़मीन पर पड़ी थी।

मैं जल्दी से भाभी के कमरे में गया और उनकी पैन्टी उठा लाया।मैंने उनकी पैन्टी को सूँघा।भाभी की चूत की महक इतनी मादक थी कि मेरा लंड और ना सहन कर सका और झड़ गया।

मैंने उस पैन्टी को अपने पास ही रख लिया और भाभी के बाथरूम से बाहर निकलने का इंतज़ार करने लगा।सोचा जब भाभी नहा कर नंगी बाहर निकलेगीं तो उनकी चूत के दर्शन हो ही जाएँगे।

लेकिन किस्मत ने फिर साथ नहीं प्रिया, भाभी जब नहा कर बाहर निकलीं तो उन्होंने काले रंग की पैन्टी और ब्रा पहन रखी थी।

भाभी कमरे में अपनी पैन्टी गायब पाकर सोच में पड़ गईं।

अचानक उन्होंने जल्दी से नाइटी पहन ली और मेरे कमरे की तरफ आईं, शायद उन्हें शक हो गया कि यह काम मेरे अलावा और कोई नहीं कर सकता।

मैं झट से अपने बिस्तर पर ऐसे लेट गया जैसे नींद में हूँ।

भाभी मुझे कमरे में देखकर सकपका गईं।

मुझे हिलाते हुए बोलीं- राजू उठ… तू अन्दर कैसे आया?

मैंने आँखें मलते हुए उठने का नाटक करते हुए कहा- क्या करूँ भाभी आज कॉलेज जल्दी बन्द हो गया, घर का दरवाज़ा बन्द था बहुत खटखटाने पर जब आपने नहीं खोला तो मैं अपनी खिड़की के रास्ते अन्दर आ गया।

‘तू कितनी देर से अन्दर है?’

‘यही कोई एक घंटे से।’

अब तो भाभी को शक हो गया कि शायद मैंने उन्हें नंगी देख लिया था और फिर उनकी पैन्टी भी तो गायब थी।

भाभी ने शरमाते हुए पूछा- कहीं तूने मेरे कमरे से कोई चीज़ तो नहीं उठाई?

‘अरे हाँ भाभी.. जब मैं आया तो मैंने देखा कि कुछ कपड़े ज़मीन पर पड़े हैं। मैंने उन्हें उठा लिया।’

भाभी का चेहरा सुर्ख हो गया, हिचकिचाते हुए बोलीं- वापस कर मेरे कपड़े।

मैं तकिये के नीचे से भाभी की पैन्टी निकालते हुए बोला- भाभी, यह तो अब मैं वापस नहीं दूँगा।

‘क्यों अब तू औरतों की पैन्टी पहनना चाहता है?’

‘नहीं भाभी…’ मैं पैन्टी को सूंघता हुआ बोला- इसकी मादक खुश्बू ने तो मुझे दीवाना बना प्रिया है।

‘अरे पगला है? यह तो मैंने कल से पहनी हुई थी… धोने तो दे।’

‘नहीं भाभी धोने से तो इसमें से आपकी महक निकल जाएगी… मैं इसे ऐसे ही रखना चाहता हूँ।’

‘धत्त पागल… अच्छा तू कब से घर में है?’ भाभी शायद जानना चाहती थीं कि कहीं मैंने उनको नंगी तो नहीं देख लिया।

मैंने कहा- भाभी मैं जानता हूँ कि आप क्या जानना चाहती हैं… मेरी ग़लती क्या है, जब मैं घर आया तो आप बिल्कुल नंगी शीशे के सामने खड़ी थीं लेकिन आपको सामने से नहीं देख सका। सच कहूँ भाभी, आप बिल्कुल नंगी होकर बहुत ही सुन्दर लग रही थीं। पतली कमर, भारी और गोल-गोल मस्त चूतड़ और गदराई हुई जांघें देख कर तो बड़े से बड़े ब्रह्मचारी की नियत भी खराब हो जाए।

भाभी शर्म से लाल हो उठीं।

‘हाय राम तुझे शर्म नहीं आती… कहीं तेरी भी नियत तो नहीं खराब हो गई है?’

‘आपको नंगी देख कर किसकी नियत खराब नहीं होगी?’

‘हे भगवान, आज तेरे भैया से तेरी शादी की बात करनी ही पड़ेगी।’इससे पहले मैं कुछ और कहता वो अपने कमरे में भाग गईं।

भैया को 6 महीने के लिए किसी ट्रेनिंग के लिए मुंबई जाना था, आज उनका आखिरी दिन था, आज रात को तो भाभी की चुदाई निश्चित ही होनी थी।

रात को भाभी नींद आने का बहाना बना कर जल्दी ही अपने कमरे में चली गईं।

उनके कमरे में जाते ही लाइट बंद हो गई, मैं समझ गया कि चुदाई शुरू होने में अब देर नहीं।मैं एक बार फिर चुपके से भाभी के दरवाज़े पर कान लगा कर खड़ा हो गया, अन्दर से मुझे भैया-भाभी की बातें साफ सुनाई दे रही थीं।

भैया कह रहे थे- सुम्मी… 6 महीने का समय तो बहुत होता है। इतने दिन मैं तुम्हारे बिना कैसे जी सकूँगा। जरा सोचो 6 महीने तक तुम्हें नहीं चोद सकूँगा।

‘आप तो ऐसे बोल रहे हैं जैसे यहाँ रोज…!’

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‘क्या मेरी जान बोलो ना.. शरमाती क्यों हो..? कल तो मैं जा ही रहा हूँ, आज रात तो खुल कर बात करो। तुम्हारे मुँह से ऐसी बातें सुन कर दिल खुश हो जाता है।’

‘मैं तो आपको खुश देखने के लिए कुछ भी कर सकती हूँ। मैं तो यह कह रही थी, यहाँ आप कौन सा मुझे रोज चोदते हैं।’ भाभी के मुँह से चुदाई की बात सुन मेरा लंड फनफनाने लगा।

‘सुम्मी यहाँ तो बहुत काम रहता है इसलिए थक जाता था। वापस आने के बाद मेरा प्रमोशन हो जाएगा और उतना काम नहीं होगा। फिर तो मैं तुम्हें रोज चोदूँगा… बोलो मेरी जान रोज चुदवाओगी ना..।’

‘मेरे राजा.. सच बताऊँ मेरा दिल तो रोज ही चुदवाने को करता है, पर आपको तो चोदने की फ़ुर्सत ही नहीं… क्या कोई अपनी जवान बीवी को महीने में सिर्फ़ दो-तीन बार ही चोद कर रह जाता है?’

‘तो तुम मुझसे कह नहीं सकती थी?’

‘कैसी बातें करते हैं? औरत जात हूँ.. चोदने में पहल करना तो मर्द का काम होता है। मैं आपसे क्या कहती? चोदो मुझे? रोज रात को आपके लंड के लिए तरसती रहती हूँ।’

‘सुम्मी तुम जानती हो मैं ऐसा नहीं हूँ। याद है अपना हनीमून… जब दस दिन तक लगातार दिन में तीन-चार बार तुम्हें चोदता था? बल्कि उस वक़्त तो तुम मेरे लंड से घबरा कर भागती फिरती थीं।’

‘याद है मेरे राजा… लेकिन उस वक़्त तक सुहागरात की चुदाई के कारण मेरी चूत का दर्द दूर नहीं हुआ था। आपने भी तो सुहागरात को मुझे बड़ी बेरहमी से चोदा था।’

‘उस वक़्त मैं अनाड़ी था मेरी जान…’

‘अनाड़ी की क्या बात थी… किसी लड़की की कुंवारी चूत को इतने मोटे, लम्बे लंड से इतनी ज़ोर से चोदा जाता है क्या? कितना खून निकाल प्रिया था आपने मेरी चूत में से, पूरी चादर खराब हो गई थी। अब जब मेरी चूत आपके लंड को झेलने के लायक हो गई है तो आपने चोदना ही कम कर प्रिया है।’

‘अब चोदने भी दोगी या सारी रात बातों में ही गुजार दोगी?’ यह कह कर भैया भाभी के कपड़े उतार कर नंगी करने लगे।

‘सुम्मी, मैं तुम्हारी यह कच्छी साथ ले जाऊँगा।’

‘क्यों? आप इसका क्या करेंगे?’

‘जब भी चोदने का दिल करेगा तो इसे अपने लंड से लगा लूँगा।’

कच्छी उतार कर शायद भैया ने लंड भाभी की चूत में पेल प्रिया, क्योंकि भाभी के मुँह से आवाजें आने लगीं- अया… ऊवू… अघ.. आह.. आह.. आह.. आह !

‘सुम्मी आज तो सारी रात फ़ुद्दी लूँगा तुम्हारी…’

‘लीजिए ना.. आआहह… कौन… आ रोक रहा है? आपकी चीज है.. जी भर के चोदिए… उई माआ…’

‘थोड़ी टाँगें और चौड़ी करो.. हाँ अब ठीक है.. आह.. पूरा लंड जड़ तक घुस गया है..’

‘आआआ…ह.. ऊ…’

‘सुम्मी, चुदाई में मज़ा आ रहा है मेरी जान?’

‘हूँ…आआआह..’

‘सुम्मी..’

‘जी..’

‘अब 6 महीने तक इस खूबसूरत चूत की प्यास कैसे बुझाओगी?’

‘आपके इस मोटे लंड के सपने ले कर ही रातें गुजारूँगी।’

‘मेरी जान, तुम्हें चुदवाने में सचमुच बहुत मज़ा आता है?’

‘हाँ.. मेरे राजा बहुत मज़ा आता है क्योंकि आपका ये मोटा लम्बा लंड मेरी चूत को तृप्त कर देता है।’

‘सुम्मी मैं वादा करता हूँ, वापस आकर तुम्हारी इस टाइट चूत को चोद-चोद कर फाड़ डालूँगा।’

‘फाड़ डालिए ना, उई…ह मैं भी तो यही चाहती हूँ।’

‘सच.. अगर फट गई तो फिर क्या चुदवाओगी?’

‘हटिए भी आप तो, आपको सचमुच ये इतनी अच्छी लगती है?’

‘तुम्हारी कसम मेरी जान… इतनी फूली हुई चूत को छोड़ कर तो मैं धन्य हो गया हूँ और फिर इसकी मालकिन चुदवाती भी तो कितने प्यार से है।’

‘जब चोदने वाले का लंड इतना मोटा तगड़ा हो तो चुदवाने वाली तो प्यार से चुदवाएगी ही.. मैं तो आपके लंड के लिए उई…ह.. ऊ.. बहुत तड़फूंगी.. आख़िर मेरी प्यास तो…आआ… यही बुझाता है।’

भैया ने सारी रात जम कर भाभी की चुदाई की… सवेरे भाभी की आँखें सारी रात ना सोने के कारण लाल थीं।

भैया सुबह 6 महीने के लिए मुंबई चले गए। मैं बहुत खुश था, मुझे पूरा विश्वास था कि इन 6 महीनों में तो मैं भाभी को अवश्य ही चोद पाऊँगा।कहानी जारी रहेगी।मुझे आप अपने विचार यहाँ मेल करें।support@mohakkisse.com://www.facebook.com/profile.php?id=100006959715292

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Helloo friends, ye meri pehli story hain, jo main yaha aapko batane vala hu, main himmat nahi hoti thi likh neki par mene bahoot sari kahani padhi iss site pe to mai bhi likhne jaa raha hoo, ye meri sachi story hain jo meri life main hui hain.

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