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भाभी की चुदाई पठन समय: 20 मिनट पढ़ा गया: 682 बार

वीणा की गुफा-1

veena3680

18 Jul 2023 को प्रकाशित

वीणा की गुफा-1
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लेखक : मनीष शर्मा

प्रेषिका : वीणा शर्मा

मनीष के शब्दों में घटना कुछ इस प्रकार है:

मेरा नाम मनीष है, मेरी उम्र 29 साल की है, मैं पिछले सात सालों से बंगलौर की एक आई टी कम्पनी में एक ऊँचे पद पर काम कर रहा हूँ। मेरी शादी अभी तक नहीं हुई है, इसलिए कुंआरा होने के नाते मैं एक बूढ़े पति पत्नी के यहाँ, पेइंग गेस्ट की तरह रहता हूँ !

मैं कम्पनी के काम से जब भी नोयडा आफिस आता हूँ तो अपने नोयडा वाले घर में ही रहता हूँ ! लगभग डेढ़ महीने पहले जब कम्पनी ने मुझे एक संगोष्ठी के आयोजन के सिलसिले में नोयडा के आफिस में पन्द्रह दिनों के लिए भेजा, तब भी मैं अपने नोयडा वाले घर में ही रहा। उन पन्द्रह दिनों के दौरान मेरे साथ एक ऐसी घटना घटी जिसे मैं भूल ही नहीं पा रहा हूँ और मैं आप सभी को उसी घटना के बारे में बताना चाहूँगा !

नोयडा में हमारा एक बहुत बड़ा घर है जिसमें मेरे माता व पिता जी और मेरा छोटा भाई अंकुर सह-परिवार रहता है। चार बेडरूम वाले इस घर में एक बेडरूम माता व पिताजी के पास है, एक बेडरूम को हमने गेस्ट रूम बना रखा है, एक बेडरूम छोटे भाई के पास है तथा एक बेडरूम मेरे लिए हैं !

मेरे छोटे भाई की शादी दो साल पहले ही वीणा नाम की लड़की से हुई थी, लेकिन अभी तक उनके यहाँ कोई संतान नहीं हुई है। मेरे भाई अंकुर की उम्र 25 साल है और वह एक मल्टी नेशनल कम्पनी में नौकरी करता है। वीणा की उम्र 23 साल है और वह बहुत ही सुन्दर है, उसके नैन नक्श बहुत तीखे हैं, उसकी आँखें बहुत आकर्षक तथा मतवाली हैं और रंग तो बहुत ही गोरा है !

उसके उरोज़ काफी बड़े और उठे हुए हैं, उसकी कमर बहुत पतली है और कूल्हे कुछ भारी हैं, उसके जिस्म का सही अंदाज़ा आप उसके पैमाने 36-26-38 से लगा सकते हैं ! वह कूल्हे मटकाती हुई हंसनी जैसी चाल में चलती है और अपने मनमोहक अंदाज़ में बात करके सब का दिल जीत लेती है ! घर के काम में बहुत निपुण है और सारा काम खुद ही करती है, माताजी को तो वह कुछ करने ही नहीं देती !

डेढ़ महीने पहले मैं जब नोयडा आया तो उस समय घर पर सिर्फ माताजी, पिताजी और वीणा ही थे ! उन्होंने बताया कि अंकुर पन्द्रह दिन पहले ही कम्पनी काम से एक साल के लिए फ़िनलैंड चला गया था। जब मैंने घर में कदम रखा तो कुछ उदासी देखी क्योंकि हमेशा खुश रहने वाली वीणा उस दिन बहुत गंभीर और चुपचाप थी। समय कम होने के कारण मैंने अपना सामान अपने कमरे में रख कर और फ्रेश होकर नाश्ता किया तथा आफिस चला गया।

शाम को 6 बजे के बाद जब मैं घर लौट कर आया तो माताजी व पिताजी से घर में छाई उदासी के बारे में बात की, उन्होंने कुछ भी नहीं बताया और मेरी बात को इधर उधर की बात कर के टाल दी।

रात को खाना खाने के बाद जब माताजी व पिताजी सोने चले गए तब मैंने वीणा से घर की उदासी का ज़िक्र किया और उसे सब सच सच बताने को कहा।

वीणा पहले तो चुप रही फिर मेरे बार बार पूछने पर उसके आँखों में आँसू आ गये और वह सुबक सुबक के रोते हुए बोली कि माताजी अंकुर के जाने के बाद से ही रोज ही बच्चा ना होने का ताना मारती हैं और मुझे बुरा भला भी कहती हैं !

मैंने उसे समझाया कि इसमें ऐसी कोई गंभीर बात नहीं है और बड़ों की बात का बुरा नहीं मानना चाहिए !

इस पर वह बोली- माताजी मुझे हर बार बाँझ कहती हैं जो मुझे बहुत बुरा लगता है लेकिन मैं चुप ही रहती हूँ ! जब अंकुर ही अभी बच्चा नहीं चाहता और इसलिए वह कोंडोम का प्रयोग करते हैं और मैं उनके आदेश पर ही माला-डी लेती हूँ तो बच्चा कहाँ से हो !

मैंने उसे पूछा कि क्या उसने यह बात माताजी को बताई तो उसने कहा कि माताजी तो कुछ सुनने तो तयार ही नहीं हैं, बस एक ही बात कहती रहती हैं कि बड़ा तो सांड जैसा हो गया है पर शादी नहीं कर रहा और छोटे को बाँझ मिल गई है !

वीणा की बातें सुन कर मुझे माताजी पर बहुत गुस्सा आया पर मैं उस गुस्से को पी गया और वीणा को सांत्वना दे कर चुप कराने के लिए मैंने उसे अपने कंधे का सहारा भी दे प्रिया। वह काफी देर तक मेरे कंधे पर सिर रख कर बैठी रही और मेरी कमीज के बटनों से खेलती रही !

वीणा के इस व्यवहार और बैठने के तरीके से मुझे बहुत झिझक महसूस हो रही थी, हमें उस अवस्था में बैठे देख कर कोई भी यह नहीं कह सकता था कि मैं उसका जेठ हूँ !

कुछ देर बाद वह उठ कर अलग हो गई और हम दोनों अपने अपने कमरों में जाकर सो गए।

सुबह जब मैं आफिस के लिए तैयार हुआ तो वीणा ने खुशी खुशी चेहरे पर मुकराहट के साथ मुझे नाश्ता कराया और आफिस के लिए विदा किया, उसके चेहरे पर रात जैसी उदासी नज़र नहीं आ रही थी तथा उसकी चाल में भी फुर्ती दिखाई दे रही थी !

शाम को जब मैं लौटा तो वीणा ने सब को पकोड़ों के साथ चाय पिलाई और फिर बताया कि रात के भोजन में उसने चिकन बनाया है। पिताजी को चिकन बहुत पसंद था इसलिए वे बहुत खुश हो गए लेकिन माताजी बड़बड़ाती रहीं।

जब मैंने वीणा से पूछा कि उसने माताजी के लिए क्या बनाया है तो उसने बताया कि माँ के लिए उनकी मनपसंद कढ़ी-चावल बनाये हैं।

इस पर माताजी की भी बांछें खिल उठी और प्यार से कहने लगीं- मेरी यह बेटी तो मेरी पसंद को बहुत अच्छी तरह जानती है !

जब मैंने कहा कि चिकन के साथ नान और तंदूरी रोटी तो जरूर होने चहिये तो पिताजी ने कहा कि मार्किट में पप्पू ढाबे से ले आओ !

रात को डिनर से पहले जब मैं नान और रोटी लेने को जाने लगा तो वीणा ने कहा कि वह भी साथ चलेगी क्योंकि उसे सब्जी और घर का अन्य सामन भी खरीदना है।

इसके लिए उसने माताजी से इज़ाज़त भी ले ली और हम मार्किट के लिए निकल पड़े।

रास्ते में वीणा ने बताया कि रात को उसे रात में नींद नहीं आ रही थी, तब वह समय बिताने और बातें करने के लिए मेरे कमरे में आई थी लेकिन मैं जल्दी सो गया था इसलिए उसने मेरी नींद में खलल नहीं डाला और वापिस अपने कमरे में चली गई थी।

मैंने कहा- शायद बैंगलोर से नोयडा के सफर और दिन की थकावट ही जल्दी नींद आने की वजह होगी।

तब उसने पूछा- क्या आज तो आप जागते रहेंगे? मुझको आप के साथ कुछ बातें करनी हैं!

तो मैंने कहा- ठीक है, जब काम खत्म कर लोगी तब बैठक में आ जाना, वहीं बैठेगें !

तब वीणा बोली- वहाँ नहीं, माताजी-पिताजी का कमरा बिल्कुल बैठक के साथ है और उनकी नींद में बाधा पड़ सकती है, या तो आप मेरे कमरे में आ जाना या फिर मैं आपके कमरे में आ जाऊँगी !

मैंने कह प्रिया- तुम दस बजे तक मेरे कमरे में आ जाना ताकि हम एक घंटे बातें कर के रात ग्यारह बजे तक सो जाएँ ! मुझे सुबह आफिस भी जल्दी जाना है !

उसने कहा- अच्छा !

और जल्दी जल्दी घर का सामान खरीदने लगी !

तब तक मैंने भी पप्पू के ढाबे से नान और रोटियां लीं और हम घर वापिस आ गए।

रात नौ बजे हम सब ने साथ बैठ कर डिनर किया और फिर वीणा मेज़ से बर्तन उठा कर रसोई में ले गई और बाकी काम समेटने लगी। पिताजी, माताजी और मैं बैठक में जाकर बैठ गए और टीवी देखने लगे, बातें करने लगे !

साढ़े नौ बजे वीणा भी आ गई और माताजी-पिताजी को बताया- आपका बिस्तर ठीक कर प्रिया है, दूध गर्म करके रख प्रिया है, दोनों की नींद की दवाई दूध के गिलास के पास रखी है और रात के लिए पानी भी रख प्रिया है, अब आप लोग सोने जा सकते हैं !

यह सुन कर पिताजी-माताजी उठ कर अपने कमरे में चले गए और दरवाज़ा बंद कर के अंदर से चिटकनी लगा ली।

फिर वीणा मेरी ओर मुड़ी और बोली- आप भी अब जाकर कपड़े बदल लें, मैंने निकाल कर बिस्तर पर रख दिए हैं, मैं भी थोड़ी देर में कपड़े बदल कर आपके कमरे में आती हूँ, फिर वहीं बैठ कर बातें करेंगे !

वीणा के निर्देश को मानते हुए मैंने अपने कमरे में जाकर रात को सोने वाली निकर और टी-शर्ट उठाई और बाथरूम में जा कर बदल लिए। जब मैं बाथरूम से बाहर आया तो वीणा मेरे कमरे का दरवाज़ा खोल कर अंदर आ रही थी।

मैं बेड पर बैठ गया, उसे भी बैठने को कहा, उसने अंदर आकर दरवाज़ा भिड़ा प्रिया, तथा वह मेरे पास आकर मेरे बिस्तर पर ही बैठ गई। इधर उधर की बातें करते करते वो बैंगलोर के और मेरे मकान मालिक के बारे में पूछने लगी, उसने मुझ से यह भी पूछा कि अगर मुझे बैंगलोर में कोई लड़की पसंद है तो उसे बता दूं, वह पिताजी माताजी से बात करके रिश्ता पक्का करा देगी !

इसके बाद उसने यह पूछा कि क्या बैंगलोर मेरी कोई स्त्री दोस्त है, जब मैंने उसे कहा कि कोई नहीं है, तो उसने अचानक वह सवाल पूछ लिया जिसके लिए मैं बिल्कुल ही तैयार नहीं था !

उसने पूछा- अगर आपकी कोई स्त्री दोस्त नहीं है तो अपने जिस्म का तनाव कैसे दूर करते हैं?

मैंने उससे सवाल किया- जिस्म का तनाव क्या होता है?

तब वीणा हंस पड़ी और बोली- आप भी बड़े बुद्धू हैं ! इतने बड़े हो गए लेकिन आपको जिस्म के तनाव के बारे में नहीं मालूम !

फिर वीणा ने अपने हाथ की एक उंगली मेरे सिर को लगा कर बोली- एक होती है मेंटल टेंशन और वह यहाँ होती है !

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और फ़िर अपनी उंगली को ऊपर नीचे की ओर हिलाते हुए मेरी निकर की ओर इशारा करते हुए बोली- दूसरी होती है फिजिकल टेंशन और वह वहाँ होती है !

इस पर वह फिर चहकी- आपने जवाब नहीं प्रिया, बताइए ना अपने जिस्म का तनाव कैसे दूर करते हैं?

मैं कुछ देर जवाब सोचता रहा और फिर बोला- मेंटल टेंशन तो सिर की मालिश करके और फिजिकल टेंशन को जिस्म की मालिश कर के !

वीणा के पास जैसे हर जवाब पर एक सवाल तैयार था, वह फट से बोली- कैसे करते हैं वह मालिश? मुझे करके दिखाइये, अगर मुझे भी फिजिकल टेंशन हो जाएगी तो मैं भी वैसी ही मालिश कर लूंगी !

मैं हंस पड़ा और बोला- मर्दों के लिए मालिश अलग होती है और स्त्रियों की अलग, अगर तुम स्त्रियों की मालिश के बारे में जानना चाहती हो तो मैं तुम्हें इन्टरनेट से डाउनलोड करके ला दूँगा !

वह बोली- अच्छा ! मर्द कैसे मालिश करते हैं, यह तो करके दिखा दीजिए !

मैं बिस्तर से उठ कर बदन को हाथ से मल मल कर मालिश करके दिखाने लगा, तब वह बोली- मैं बदन का तनाव नहीं, जिस्म का तनाव दूर करने की मालिश देखना चाहती हूँ !

मैंने कहा- मैं वही तो दिखा रहा हूँ !

तब वह बोली- यह तो बदन की मालिश है, जिस्म को तो आपने निकर में छुपा कर रखा है, उसे बाहर निकाल कर उसकी मालिश कैसे करते हैं, वह करके दिखाइए !

मैं उसकी बात सुन कर एकदम सन्न रह गया और अनजान बनते हुए कहा- मैं तुम्हारे कहने का मतलब नहीं समझा !

तब वह आगे बढ़ी और दोनों हाथों से पकड़ कर झटके से मेरी निकर नीचे कर दी और बोली- यह है आपका जिस्म…म… म… म… म…, हाय दैया, यह तो बड़ा लंबा और मोटा है ! मैंने तो ऐसा आज तक देखा ही नहीं !

मैंने एकदम निकर को ऊपर कर ली और कहा- तुम इसे जिस्म कह रही हो, मैं तो उसे लौड़ा कहता हूँ !

वह तुरंत बोली- इसका नाम लौड़ा है, यह तो मुझे पता है पर अगर एक औरत इसे बोले तो उस के मुँह से गंवारपन झलकता है ! इसलिए मैं तो इस जिस्म ही कहती हूँ और कहूँगी भी !

मैंने कहा- यह बताने के लिए तुमने मेरी निकर क्यों नीचे की?

तो वह कहने लगी- मुझ इसे देखना भी तो था, अच्छा बताओ तो आपका जिस्म कितना लम्बा और मोटा है?

मैंने कहा- खुद ही नाप लो !

वह बोली- मेरी मदद तो कर दीजिए !

मैंने कहा- लो मैं निकर उतार देता हूँ, अब तुम नाप लो !

उसने मेरे लौड़े को पकड़ लिया और हिलाने लगी और बोली- इसे टेंशन में लायेंगे, तभी तो नाप पायेंगे !

मुझे उसकी इस हरकत से उसके इरादे का अंदेशा समझ में आ गया और मैं बोला- टेंशन में नापने का तरीका तो बहुत मुश्किल है और उसमे मुझे तकलीफ तथा थकावट भी होती है !

वह मेरे कहने का भाव समझ गई और बोली- इतना तो मुझे भी मालूम है लेकिन इतने बड़े जिस्म को टेंशन में नापने से कितनी तकलीफ तथा थकावट होती है मैं यह भी जानना चाहती हूँ ! क्या इसमें आप मेरी मदद नहीं करेंगे?

मैंने कहा- मदद तो कर दूंगा पर इसके लिए पहले मुझे वह औज़ार ढूँढना पड़ेगा जिससे इसे नापेंगे !

वह बोली- तो जल्दी से ढूँढिये ना !

इससे पहले वह कुछ और बोले, मैंने झट से उसकी नाइटी सिर के ऊपर से उठा कर उतार दी, वह मेरे सामने बिल्कुल नग्न खड़ी थी क्योंकि उसने नीचे कुछ भी नहीं पहन रखा था !

वह एक अप्सरा की तरह लग रही थी, गोल गोल उठी हुई चूचियाँ, उन पर काली काली डोडियाँ बहुत ही सुन्दर लग रही थीं !

उसकी चूत पर लगे नर्म और छोटे छोटे सुनहरे भूरे रंग के बाल तो मुझे पागल बना रहे थे !

मैंने उसकी टांगें चौड़ी करके झाँका तो उसकी चूत मुझे दुनिया की सबसे सुंदर चूत लगी, मैंने उसे पकड़ कर बिस्तर पर लिटा प्रिया उसकी चूत को बड़े ध्यान से देखने लगा, उसकी चूत के बाहर के होंठ बहुत ही पतले थे, अंदर के होंट तो और भी पतले और रेशम जैसे चमक रहे थे ! उसका भग-शिश्न एकदम गुलाबी और एक छोटे से मटर के दाने जितना था ! चूत को थोड़ा खोलने पर उसके अंदर झाँका तो गुलाबी रंग की एक मखमली गुफा नज़र आई जिसमे मेरे लौड़े को भी काफी आराम मिलने वाला था और उसे कोई खरोंच तक नहीं आने वाली थी !

इसके बाद मैंने उसकी चूचियाँ और चूत का कुछ देर और निरीक्षण किया तथा उस के बाद मैं उठ खड़ा हुआ लेकिन वह वैसे ही बिना हिलेडुले लेटी रही !

जब मैं बोला कि ‘मैं दरवाज़े को चटकनी लगा कर आता हूँ !’ तब उसने कहा “चिंता की कोई बात नहीं, पिताजी-माताजी नींद की गोली खाकर सोते हैं और सुबह चार बजे से पहले हिलते भी नहीं, उनके अलावा हम दोनों ही तो हैं, फिर कैसा डर !

उसकी यह बात सुन कर मैंने चिटकनी लगाने का ख्याल छोड़ प्रिया और उसके पास लेट कर उसकी चूचियों और चूत को दबाने तथा मसलने लगा, वह सी सी करने लगी।

तब मैंने उसकी एक चूची को मुँह में डाल कर चूसने लगा तथा उसकी डोडी को दांतों से दबाने लगा, दूसरी चूची पर मैं हाथ रख कर उसकी डोडी को दो उँगलियों के बीच में घुमाने लगा। मेरी इस हरकत से वह बहुत गर्म होने लगी और खूब सी सी करने लगी तथा अपने हाथ को अपनी चूत के बालों पर घिसने लगी ! मैंने उसे ऐसा करने से रोकने के लिए उसके हाथ में अपना लौड़ा दे प्रिया !

वह लौड़े को मसलने तो लग गई लेकिन उसे उसके अंदर की आग उसे परेशान कर रही थी इसलिए उसने मेरे कान में कहा- मेरे नीचे उंगली भी तो करिये !

मैंने अच्छा कह कर अपने हाथ की बड़ी उंगली उसकी चूत में डाल दी और अंगूठे को छोले के ऊपर रख कर हिलाने लगा !

फिर क्या था वीणा के मुँह से उंह.. उंह.. उंहह्ह्ह…… और आंह.. आंह… आंहह्ह्ह्.. की आवाजें निकलने लगीं और वह उछलने लगी !

पांच मिनट के बाद उसका बदन अकड़ गया और उसके मुँह जोर के आवाज़ निकली- उंईईईई माँआ आआ आआहह…… उंईईई माँआआ आहह्ह… मरगईई… और उसकी चूत से पानी फव्वारा छूटा और मेरा पूरा हाथ तथा आधा बाजू तक गीला हो गया !

मैंने अपने तुरंत अपने एक हाथ को उसकी चूत पर से, दूसरे हाथ को उसकी चूची से और मुँह को उसकी दूसरी चूची से अलग करके उठ कर बैठ गया और उसका चेहरा पकड़ कर उस के होंटों को चूम लिया और उससे पूछा- कैसा लगा?

वह बोली- “बहुत बहुत अच्छा, मेरे पास इस अनुभव का विवरण करने के लिए शब्द नहीं हैं, मैं तो सातवें आसमान पर पहुँच गई थी, मैंने आज तक अपनी चूत में इतनी तेज खिंचावट महसूस नहीं की और इससे पहले मेरी चूत ने कभी इतना ज्यादा पानी भी नहीं फेंका ! देखिये तो आपके हाथ और बाजू भी गीले हो गए हैं, सारी चादर भी गीली हो गई है ! यह सब कैसे हुआ यह तो आप ही बता सकते हैं, लगता है आपके हाथों में कोई जादू है जो आपने मुझे इतना सुखद आनन्द प्रिया !

मैंने उसे उठा कर अपनी गोदी में बिठा प्रिया और मेरा लौड़ा उसकी गांड को छूने लगा, तब उसे याद आया कि वह तो मेरे लौड़े के नाप की बात कर रही थी, जो मालिश के कारण उत्तेजना और आनन्द में भूल गई थी।

वह तुरंत बोली- अब तो इसका नाप बता दीजिए, प्लीज़ !

मैंने कहा- पहले बताओ कि अंकुर का जिस्म कितना लम्बा और मोटा है, यह तो उसके जिस्म से छोटा ही होगा !

वह बोली- नहीं, यह तो उनके जिस्म से छोटा नहीं है, यह तो बहुत लम्बा और मोटा है ! उनका जिस्म तो सिर्फ छह इंच लम्बा और डेढ़ इंच मोटा है ! आप का तो मुझे सात इंच लम्बा और दो इंच मोटा लगता है !

मैंने कहा- तुम गलत हो, मेरा जिस्म तो आठ इंच लम्बा है और दो इंच मोटा है, और इसका सुपारा ढाई इंच मोटा है !

वह बोली- हाय राम, इतना बड़ा, यह जब अंदर जायेगा तो बहुत तकलीफ देगा !

कहानी जारी रहेगी !

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वीणा की गुफा

कुल भाग: 2
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