Hindi Chudai Kahani

मामी और उनकी बेटी की चूत मारी-7(Mami aur unki beti ki chut maari-7)

लेखक: writer1 दिनांक: 29-10-2014 पठन समय: 9 मिनट

पिछला भाग पढ़े:-मामी और उनकी बेटी की चूत मारी-6

हिंदी चुदाई कहानी अब आगे-

अब मैं और माला ऊपर कमरे में चले गए, माला ने मुझे गले लगा लिया और बोली, “आई लव यू।” वो बहुत खुश थी तो बोली कि, “मुझे पता नहीं था कि एक ही रात में मेरी जिंदगी बदल जाएगी। मैं तुम्हें बचपन से प्यार करती हूं। पर कभी कह नहीं पाई। पर उस दिन तुमने जो मम्मी के साथ किया, तो मैंने भी हिम्मत की। लोग पहले प्यार करते हैं और फिर बिस्तर पर आते हैं। पर मुझे तुम्हारा प्यार पाने के लिए पहले बिस्तर पर आना पड़ा। पर मैं खुश हूं कि तुम अब मेरे जीवन साथी हो।”

माला: मुझसे कुछ बात करनी है आपसे।

मैं: बोलो माला?

माला: पहले गेट लॉक करो।

मैं: ठीक है।

और मैं गेट लॉक करने लगा और सोचने लगा कि अभी कुछ मिनट पहले ही मामी को चोदा और अब माला चुदेगी। मैं माला के पास गया और बोला, “बताओ क्या बात है?”

माला (मेरा हाथ पकते हुए): देखो अब हम एक रिश्ते में बंधने जा रहे हैं। हम दोनों को पता है कि ये रिश्ता कैसे शुरू हुआ। मैं जानती हूं मम्मी भी आपको पसंद करती हैं। और अभी ये भी पक्का है कि ऊपर आप लोगो ने सेक्स किया होगा। मुझे कोई समस्या नहीं है क्योंकि मम्मी ने जो शर्त रखी थी, वो तो मननी ही पड़ेगी पर…

मैं: पर क्या माला?

माला: कहीं ऐसा तो नहीं होगा कि शादी के बाद आप सिर्फ मम्मी को ही प्यार करोगे और मुझे नहीं?

इतना कहते हुए उसकी आंख गीली हो गई।

मैं: पागल है क्या? तुम कभी ऐसा सोच सकते हो। तुम मेरी पत्नी हो और वो अधिकार तुम्हारा ही है और हमेशा रहेगा।

माला: पर सुहागरात तो मम्मी मनाएगी।

मैं: तो क्या हुआ? वो कौन सा हर रात हमारे साथ होगी।

माला: लेकिन…

मैं: लेकिन क्या माला?

माला: मेरे भी अरमान हैं कि सुहागरात में मम्मी नहीं मैं आपके साथ होऊं। आप मुझे दुल्हन के लिबास में देखो और मुझे अपनी पत्नी के रूप में प्यार करो।

बात तो माला की एक-दम सही थी पर मामी ने शर्त भी रखी थी। मैं सोच में पड़ गया क्योंकि मामी के साथ अब माला भी मेरी थी और कहीं ना कहीं माला का हक बनता है सुहागरात का। क्योंकि मामी तो अपना मान ही चुकी है।

मैं: ठीक है, मैं कुछ करता हूं। थोड़ा समय दो ताकि मैं कुछ सोच सकूं।

माला: क्या सच्ची, आप ये करोगे?

उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई।

मैं: हां माला… आई लव यू!

माला ने मुझे कस के पकड़ लिया और पता ही नहीं लगा कि कब हमारे होंठ एक-दूसरे को किस्स करने लगे। आज ये किस्स में हवस या भूख नहीं थी बल्कि सिर्फ प्यार ही प्यार था। हम एक-दूसरे को महसूस कर रहे थे। मेरे हाथ माला की गांड दबा रहे थे और माला के हाथ मेरी कमर सहला रहे थे।

मैंने एक हाथ से माला की गांड को दबाया और दूसरा हाथ उसकी टी-शर्ट के अंदर डाल कर उसकी कमर को महसूस करने लगा। माला भी अब पागल होती जा रही थी और उसने अपनी जीभ मेरे मुंह के अंदर डाल दी, जिसका मेरे मुंह ने बहुत प्यार से स्वागत किया।

अब मैं और माला एक-दूसरे को चूमने लगे। माला मुझसे बिल्कुल चिपक गई और फिर धीरे से उसने अपना हाथ मेरे लंड पर रखा और उसको सहलाने लगी।

माला: ये अभी तक शांत कैसे है, लगता है अपनी सास को खुश किया है तो क्या अब अपनी पत्नी को खुश नहीं करेगा?

मैं: इसपे सबसे पहला हक तुम्हारा है माला।

माला एक-दम से नीचे बैठ गई और मेरा लंड निकाल कर मुंह में लेने लगी। उसने चूस-चूस कर मेरा लंड खड़ा कर दिया। मेरे हाथ उसके बालों को सहला रहे थे और फिर मैंने उसे ऊपर खींचा और उसको बिस्तर पर बिठाया। ये बिस्तर वही था जहाँ कुछ मिनट पहले माला की माँ की चुदाई हुई थी। बिस्तर पर बैठ कर मैंने उसको नीचे से नंगी किया तो देखा चूत एक-दम साफ जैसा अभी-अभी शेव करी थी और पैंटी भी नहीं पहनी थी।

मैं: माला ये एक-दम चिकनी है। और पैंटी क्यों नहीं पहनी?

माला: जब तुम मम्मी के साथ उपर थे, तभी मैंने साफ करी और पैंटी इसलिए नहीं पहनी, क्योंकि पैंटी उतारनी ही थी।

मैंने माला की चूत चटनी शुरू की और उसमें मेरे बालो में हाथ फेरना शुरू किया।

माला: आह बाबू, खा जाओ अपनी माला की चूत को। कब से अपने बाबू का इंतज़ार कर रही थी। देखो कितनी भूखी है, और सुनो जी, शादी के बाद मेरी सुबह की शुरुआत मेरी चूत चाट कर ही करना। मैं आपको बहुत खुश रखूंगी। आप जो कहोगे, जैसा कहोगे करूंगी।

मैं: सोच लो एक बार बोलने से पहले।

और इतना कह कर मैं फिर से माला की चूत चाटने लगा।

माला: आह आअह उउउ माँ, हांजी जो कहोगे कसम से।

मैं माला से अलग हुआ और उसे बिस्तर पर लिटाया। मैंने उसकी गांड दबाई और बोला कि मुझे ये चाहिए।

माला: अच्छा जी, बस इतनी सी बात? सुहाग रात पर आपको ये भी मिल जाएगी।अब खुश?

मैं: पक्की गांड, डॉगी?

माला: क्यूं, कोई शक?

मैंने इतने में माला को नंगी किया और अपना लंड उसकी चूत पे लगाया और फिर उसकी चूची को पकड़ कर मैंने उसको चोदना शुरू किया। माला ने अपनी दोनों टांगों से मेरी कमर जकड़ ली और ऊपर होकर मुझे किस्स करने लगी।

माला: आह पतिदेव, अपनी पत्नी को चोदो मेरे स्वामी। आह मजा आ रहा है आपकी बीवी बन कर। मैं आपकी दासी हूं आपकी गुलाम हूं। जान छोड़ो, आह मेरा होने वाला है।

शायद मामी समझ गई थी कि चुदाई हो रही थी, और उसने मुझे मैसेज किया।

मामी: जल्दी आ जाओ अगर बात हो गई हो तो।

मैं: अभी ख़तम नहीं हुई हमारी बात।

मामी: जानती हूं क्या बात हो रही है। जल्दी आओ मुझे कुछ बताना है।

उधार माला चुदाई की चरम सीमा पे थी।

मैंने माला से कहा: कुतिया बनोगी?

माला: अपने कुत्ते के लिए बिल्कुल बनूंगी।

इतना कह कर माला कुतिया बन गई और अपनी गांड पर खुद अपना हाथ मारते हुए बोली: आजो आपकी कुतिया तैयार है अपने कुत्ते के लिए। आज कुतिया की तरह चुदवाऊंगी और जैसे वो लंड भींच लेती है चूत में वैसे ही अपने कुत्ते के साथ करुंगी।

मैंने माला की चूत पर लंड डाला और उसकी गांड पकड़ कर चुदाई करने लगा।

उधर मामी का फिर से मैसेज आया: प्लीज यार जल्दी आओ, कुछ गंभीर बात करनी है।

पर मैंने कोई रिप्लाई नहीं किया,बार-बार मैसेज से मैं परेशान हूं और बोला: अपनी चूत शांत करवा ली और अपनी बेटी की चुदाई से जलन हो रही है?

अब मैं माला को तेज से चोदने लगा। उसको बहुत दर्द हो रहा था, तो उसने अपना मुंह पे हाथ रख लिया ताकि आवाज बाहर ना जाए। थोड़ी देर में उसने पानी छोड़ दिया और बोली: मेरी जान निकाल दी आपने आह।

मेरा भी होने वाला था तो मैंने लंड बाहर निकाला और सारा माल माला की गांड पे निकल दिया।

माला: आह कितना गरम है आपका माल, मेरे मुँह में निकाल देता अब कैसे साफ करूंगी? पैंटी भी नहीं है।

मैंने अपने अंडरवियर से उसकी गांड साफ करी तो माला ने अंडरवियर मेरे से खींचा और मेरे माल को चाटने लगी।

मैं: इतना पसंद है तुम्हें मेरा माल?

माला: आपके लिए पागल हूं। और सुनो जी, ये सिर्फ मैं ही पियूंगी, संजना नहीं।

हम साथ में लेटे हुए थे कि मामी का मैसेज आया: हां जलन हो रही है। पर एक पंगा हो गया जान।

मैं: क्या?

मामी ने जो रिप्लाई किया उसको पढ़ने के बाद मेरी गांड फट गई और मैंने माला को आगे बढ़ने के लिए बोला।

क्या था वो मैसेज? वो मुझे अगले पार्ट में पता लग जाएगा। फिर मैं और माला चल दिए। अगले की कहानी अगले पार्ट में बताऊंगा, कृपया अपनी प्रतिक्रिया यहां साझा करें- support@mohakkisse.com